“वन विहार की आवाजें कार्यक्रम में दिव्यांग बच्चों ने की सहभागिता

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भोपाल : वन्य-जीव सप्ताह-2026 की थीम "जुड़े आवास, वन्य-जीवन का विकास" के अनुरूप 3 अक्टूबर 2026 को वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में वन्य-जीव संरक्षण, जैव-विविधता एवं पर्यावरण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने तथा विद्यार्थियों, युवाओं एवं आमजन की सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए प्रातः 8 से 9:30 बजे तक वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में "वन विहार की आवाजें" कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 81 दिव्यांग विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। विषय विशेषज्ञ के रूप में सुनील सिन्हा, सेवानिवृत उप वन संरक्षक, डॉ. संगीता राजगीर, मो. खालिक एवं संकल्प किसनानी द्वारा विद्यार्थियों को वन विहार राष्ट्रीय उद्यान के प्राकृतिक परिवेश एवं वन्य-जीवों से परिचित कराने के उद्देश्य से प्रकृति भ्रमण कराया गया। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को वन क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधों, पक्षियों तथा वन्य-जीवों के प्राकृतिक आवास के संबंध में जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को प्रकृति को नजदीक से देखने, वन्य-जीवों की गतिविधियों को समझने तथा प्राकृतिक वातावरण का अनुभव करने का अवसर प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम की विशेषता अनुभवात्मक एवं समावेशी सहभागिता रही। विद्यार्थियों को वन क्षेत्र में दिखाई देने वाले पक्षियों की आवाजों, प्राकृतिक ध्वनियों एवं आसपास के जैव-विविधतापूर्ण वातावरण से परिचित कराया गया तथा भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को वन्य-जीवों के प्रति संवेदनशील व्यवहार, प्रकृति के संरक्षण तथा वन क्षेत्रों को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक सावधानियों के बारे में भी अवगत कराया गया। कार्यक्रम का संचालन सहायक संचालक वन विहार राष्ट्रीय उद्यान डॉ. रूही हक द्वारा किया गया।

अन्य प्रतियोगिता के रूप में विद्यालयीन एवं महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए प्रातः 10:30 से दोपहर 1:30 बजे तक "जुड़े आवास, वन्य-जीवन का विकास' विषय पर "युवा संसद" का आयोजन किया गया। इसमें 90 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनके 6 ग्रुप बनाये गये। युवा संसद के माध्यम से विद्यार्थियों को वन्य-जीव संरक्षण, उनके प्राकृतिक आवासों तथा जैव-विविधता के संरक्षण से जुड़े विषयों पर अपने विचार व्यक्त करने का अवसर प्राप्त हुआ।

इस अवसर पर प्रातः 9:30 से 11:30 बजे तक 'स्टैण्ड फॉर वाइल्ड लाइफ' (खुला वर्ग) प्रतियोगिता का आयोजन विश्व प्रकृति निधि भारत के सहयोग से किया गया। प्रतियोगिता को लेकर प्रतिभागियों एवं वन्य-जीव प्रेमियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। प्रतियोगिता में 150 से अधिक वन्य-जीव प्रेमियों ने प्रत्यक्ष रूप से सहभागिता कर कार्यक्रम को सफल बनाया। इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्य-जीव अभिरक्षक डॉ. समीता राजोरा, संचालक वन विहार विजय कुमार, संचालक विश्व प्रकृति निधि भारत डॉ. स्वाती मोघे, सहायक संचालक वन विहार डॉ. रूही हक एवं वन विहार के अन्य अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहे।

प्रतियोगिता का उद्देश्य आमजन, विशेषकर युवाओं एवं वन्य-जीव प्रेमियों में वन्य-जीवों, प्राकृतिक संसाधनों तथा जैव-विविधता के संरक्षण के प्रति जागरूकता एवं संवेदनशीलता विकसित करना था। प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक अपनी भागीदारी दर्ज कराई तथा वन्य-जीव संरक्षण के प्रति अपनी रुचि एवं प्रतिबद्धता प्रदर्शित की। कार्यक्रम के माध्यम से वन्य-जीवों के महत्व और उनके संरक्षण में जन-भागीदारी की आवश्यकता का संदेश भी प्रभावी रूप से प्रसारित किया गया।

वन्य-जीव सप्ताह-2026 के 'तृतीय दिन इस पहल को उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली, जब कुल 243 आगंतुकों ने वन्य-जीव पासपोर्ट गतिविधि के लिए पंजीकरण' कराया। इनमें से 16 'वन्य-जीव संरक्षण राजदूत' बने, जबकि 17 को 'वन्य-जीव चैंपियन' के रूप में मान्यता दी गई।

4 अक्टूबर 2026 को आयोजित होने वाले कार्यक्रम

वन्य-जीव सप्ताह 2026 के अंतर्गत दिनांक 04 अक्टूबर 2026 को वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में विभिन्न जागरूकता एवं सहभागिता आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वनकर्मियों एवं उनके परिवारों के लिए प्रातः 10:00 बजे से 12:00 बजे तक "फैमिली वाइल्डलाइफ डे" का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम के माध्यम से वनकर्मियों एवं उनके परिवारों को वन्य-जीव एवं प्रकृति संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों में सहभागी बनाया जाएगा। इसी क्रम में "मध्यप्रदेश के वन्य-जीव' विषय पर विद्यालयीन एवं महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए "मेहंदी प्रतियोगिता" एवं "पाम पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन प्रातः 10:00 बजे से 11:00 बजे तक वन विहार स्थित विहार वीथिका में किया जाएगा।

इन प्रतियोगिताओं एवं गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा एवं अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ मध्यप्रदेश की समृद्ध वन्य-जीव संपदा एवं जैव-विविधता के महत्व को समझने तथा वन्य-जीव एवं प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक, संवेदनशील एवं उत्तरदायी बनने का अवसर प्राप्त होगा।