बेटियों की सुरक्षा को लेकर कांग्रेस ने योगी सरकार को घेरा, कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल

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लखनऊ: कांग्रेस की नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने एक तीखा बयान जारी करते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार ने पूरे प्रदेश को देश में बेटियों के लिए सर्वाधिक असुरक्षित राज्य बना दिया है। आज स्थिति यह है कि घर से स्कूल के लिए निकली बेटियां सही सलामत वापस अपने घर नहीं लौट पाती हैं, वेशीदरिंदगी का शिकार हो जाती हैं, और फिर मौत के घाट उतार दी जाती हैं। यदि वे किसी तरह बच भी जाती हैं, तो वे गर्भवती हो जाती हैं और उसके बाद प्रसव पीड़ा के चलते उस नाबालिग और उसके नवजात बच्चे दोनों की मौत हो जाती है। बीते दस वर्षों में प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली के नकारेपन ने ऐसी तमाम दर्दनाक और रक्तरंजित सुर्खियों से पूरे यूपी के चप्पे-चप्पे को पाट कर रख दिया है। अब प्रदेश की आम जनता भी मुखर होकर यह कह रही है—जिसने यूपी का किया यह हाल, उसे और क्यों दें पाँच साल।

विभिन्न जिलों की हालिया घटनाओं और अपराध के बढ़ते आंकड़ों पर चिंता

हाल ही में बीते एक सप्ताह के भीतर बुलंदशहर, बस्ती, बांदा, सोनभद्र, कौशाम्बी, ललितपुर, मुजफ्फरनगर, गोरखपुर, मेरठ, प्रयागराज, और लखनऊ जैसे प्रमुख जिलों में सामने आई दिल दहला देने वाली घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह सवाल केवल कुछ चुनिंदा घटनाओं का नहीं है, बल्कि यह पूरी व्यवस्था की विफलता का प्रतीक है।

राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि:

  • उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के एक वर्ष के भीतर कुल 66,381 मामले दर्ज किए गए हैं—यानी औसतन प्रतिदिन लगभग 182 मामले सामने आ रहे हैं।

  • इसी अवधि के दौरान उत्तर प्रदेश में दुष्कर्म के 3,516 मामले दर्ज हुए—जो औसतन प्रतिदिन लगभग 9.6 मामले बनते हैं।

  • इसके अलावा हत्या के 3,206 मामले दर्ज किए गए—यानी औसतन प्रतिदिन लगभग 8.8 हत्याएं हो रही हैं।

  • एसिड अटैक के 31 मामले दर्ज हुए—यानी औसतन लगभग हर 12 दिन में एक तेजाब हमला हुआ है, साथ ही एसिड अटैक के प्रयास के मामले भी लगातार सामने आए हैं।

सर्वोच्च न्यायालय की सख्त टिप्पणियों का भी किया गया जिक्र

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी गत 30 सितंबर 2026 को जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ के माध्यम से एक आपराधिक मामले की गहन जांच के दौरान यूपी पुलिस की लचर कार्यशैली पर बेहद कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने यहाँ तक टिप्पणी की कि क्यों न “यूपी पुलिस को ही भंग कर दें।” देश की शीर्ष अदालतों द्वारा प्रदेश सरकार को बार-बार फटकार लगाई जा रही है, किंतु इसके बावजूद व्यवस्था पर इसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है।

प्रदेश अध्यक्ष के सरकार से तीखे सवाल

सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि जब स्कूल से घर लौटने वाली मासूम बच्चियां तक सुरक्षित नहीं हैं, जब पाँच साल और दस साल की छोटी बच्चियां महफूज नहीं हैं, और जब नाबालिग छात्राओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, तब आखिर सरकार हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठी हुई है? जो सत्ता प्रदेश की बेटियों को सुरक्षित स्कूल, सुरक्षित सड़कें और सुरक्षित घर देने में असमर्थ है, उसे आने वाले समय में जनता पूरी तरह से उखाड़ फेंकेगी। आज की बेटियां भय के साये में नहीं, बल्कि पूरे सम्मान और मुकम्मल सुरक्षा के साथ जीना चाहती हैं।