‘हर नागरिक को वोट देने का अधिकार’, SIR विवाद के बीच जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की टिप्पणी

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नई दिल्ली: देश भर में चल रही स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सियासत गरमाई हुई है। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्ल भुइयां का एक बड़ा बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि भारतीय नागरिकता और वोट देने का अधिकार एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।

'वोटिंग से वंचित करना शरीर से आत्मा निकालने जैसा है'

NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के मूट कोर्ट प्रतियोगिता के समापन समारोह को संबोधित करते हुए जस्टिस उज्ज्ल भुइयां ने स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिक होना और वोटर लिस्ट में नाम होना अलग-अलग बातें नहीं हैं। यदि इन्हें अलग किया जाता है, तो यह शरीर से आत्मा निकालने जैसा होगा। उन्होंने कहा कि संविधान नागरिकों के दो वर्ग (एक जिनके पास वोट का अधिकार हो और दूसरा जिसके पास न हो) तैयार नहीं करता। किसी भी भारतीय नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 326 और 14 का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने ऐसी किसी भी प्रक्रिया को मनमाना करार दिया जो लाखों नागरिकों को उनके अधिकार से महरूम कर उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक बनाती है।

दिल्ली-मुंबई में प्रदर्शन का सिलसिला जारी

SIR प्रक्रिया और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में विरोध मार्च निकाला गया, जिसके दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुईं। इसके अलावा मुंबई में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के नेतृत्व में संयुक्त मार्च निकाला गया, जिसमें कांग्रेस और एनसीपी (शरदचंद्र गुट) के नेता भी शामिल हुए। वहीं, इंडिया गठबंधन ने दिल्ली में 7 अक्तूबर को बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया है।

सुप्रीम कोर्ट में आज होगी अहम सुनवाई

इस विवाद के बीच, मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की बेंच सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने और उनके कथित फैसलों को रद्द करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना सॉफ्टवेयर और फॉर्म-6 में बदलाव किए गए थे।