नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने अपना हमला और तेज कर दिया है। पार्टी के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने सोमवार को कड़े शब्दों में मांग की है कि ज्ञानेश कुमार को अपने पद से तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए। कांग्रेस का आरोप है कि 'जी-2' के गैर-कानूनी आदेशों को लागू करने की उनकी कार्यशैली ने उन्हें अब 'देश के लिए एक बोझ' बना दिया है।
न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की टिप्पणी को बनाया आधार
कांग्रेस ने यह तीखा हमला सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की उस हालिया टिप्पणी के एक दिन बाद बोला है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ऐसी कोई भी प्रक्रिया, जिसके कारण लाखों नागरिकों को उनके वोट देने के अधिकार से वंचित होना पड़े, वह 'पूरी तरह मनमानी' और असंवैधानिक होगी। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर न्यायमूर्ति भुइयां की टिप्पणी का वीडियो साझा करते हुए कहा कि यदि सीईसी में थोड़ी भी शर्म बची है, तो उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। गौरतलब है कि कांग्रेस नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर अक्सर 'जी-2' शब्द का इस्तेमाल करते हैं।
संविधान की मूल भावना के उल्लंघन का आरोप
कांग्रेस ने दावा किया है कि शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के इन बयानों से यह साफ साबित होता है कि सीईसी ने संविधान के अक्षर और उसकी मूल भावना दोनों का गंभीर उल्लंघन किया है। पार्टी का कहना है कि मतदान का अधिकार महज कोई साधारण कानूनी अधिकार नहीं है, बल्कि यह देश के संविधान के 'मूल ढांचे' का एक अनिवार्य हिस्सा है। ऐसे में ज्ञानेश कुमार अब इस संवैधानिक पद पर बने रहने का अपना सारा नैतिक अधिकार खो चुके हैं।
चुनाव आयोग के भीतर आंतरिक मतभेद
यह पूरा विवाद हाल ही में सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स के बाद और गहरा गया है, जिनमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान 'विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया' (SIR) से जुड़े कई फैसलों पर कम से कम 14 बार आधिकारिक तौर पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। आयोग के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, इन आयुक्तों का कहना था कि कई अहम फैसले उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना लिए गए हैं। हालांकि, इन सवालों के जवाब में चुनाव आयोग का यह साफ कहना है कि किसी भी बड़ी संस्था में अलग-अलग राय होना और विचार-विमर्श होना एक सामान्य प्रक्रिया है और आयोग के सभी आदेश पूरी तरह कानूनी व स्थापित नियमों के तहत ही जारी किए गए हैं।









