बिलासपुर में बर्खास्त आरक्षक पर शिकंजा, 16.19 लाख की संपत्ति का मामला सामने आया

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बिलासपुर: बिलासपुर जिले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश के न्यायालय में भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (ACB) की तरफ से गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (GRP) के बर्खास्त कांस्टेबल संतोष कुमार राठौर के खिलाफ बेनामी और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में औपचारिक रूप से अभियोग पत्र प्रस्तुत कर दिया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, सेवाकाल के दौरान आरोपी आरक्षक की वैध आय कुल 46 लाख, 8 हजार, 341 रुपये थी, जबकि गहन जांच के दौरान उसके पास 62 लाख, 28 हजार, 137 रुपये की चल-अचल परिसंपत्तियां और कुल व्यय का हिसाब मिला है। इस प्रकार आरोपी पूर्व आरक्षक ने अपनी ज्ञात और वैध आय से 16 लाख, 19 हजार, 796 रुपये अधिक की अवैध संपत्ति अर्जित की है।

छापेमारी और तकनीकी जांच के दौरान हुआ खुलासा

भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो द्वारा आय से अधिक संपत्ति का मामला संज्ञान में आने पर वर्ष 2024 में बिलासपुर जीआरपी में पदस्थ रहे इस आरोपी के खिलाफ आधिकारिक रूप से मामला पंजीकृत किया गया था। इसके पश्चात जांच टीम ने गत 1 दिसंबर 2024 को बिलासपुर स्थित उसके निवास स्थान और अन्य ठिकानों पर एक साथ छापामार कार्रवाई की थी। इस दौरान मौके से जब्त किए गए तमाम दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन के विवरण तथा संपत्ति से जुड़े साक्ष्यों की बेहद बारीकी से जांच की गई। जब उसकी कुल आय और व्यय का मिलान किया गया, तो यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि आरक्षक ने अपने पद का घोर दुरुपयोग करते हुए भारी अवैध कमाई की है, जिसके आधार पर अब माननीय न्यायालय में चालान पेश किया गया है।

गांजा तस्करी से जुड़ा गंभीर मामला और पुलिस सेवा से बर्खास्तगी

इस बर्खास्त आरक्षक संतोष राठौर पर ट्रेनों के माध्यम से अवैध मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले एक बड़े गिरोह के साथ सीधी सांठगांठ रखने का बेहद गंभीर आरोप है। जीआरपी में अपनी तैनाती के दौरान उसने तीन अन्य आरक्षकों के साथ मिलकर एक ट्रेन में गांजा तस्करों को पकड़ा था, लेकिन उन अपराधियों पर एनडीपीएस (NDPS) कानून के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई करने के बजाय उसने सारा जब्तशुदा गांजा अपने पास रख लिया था। इसके एवज में तस्करों से भारी-भरकम रकम वसूल की गई और उसे आपस में बांट लिया गया।

इस भ्रष्टाचार और आपराधिक कृत्य के संबंध में बिलासपुर जीआरपी में मुकदमा दर्ज होने के बाद संपूर्ण जांच 'एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट' को सौंप दी गई थी। छत्तीसगढ़ रेल पुलिस अधीक्षक ने आरोपी के इस गंभीर और आपराधिक आचरण को देखते हुए 19 नवंबर 2024 को उसे शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया था। वर्तमान समय में आरोपी न्यायिक हिरासत के तहत बिलासपुर जेल में बंद है।

करोड़ों रुपये की संदिग्ध संपत्ति और बैंक खातों से लेन-देन का मामला

इस पूरे प्रकरण के तार एक बहुत बड़े और संगठित नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) की टीम ने लगभग 250 से अधिक ट्रेनों में निरंतर निगरानी रखने के बाद इस बड़े फर्जीवाड़े और रैकेट का पर्दाफाश किया था। पुलिस की वित्तीय जांच के दौरान इन बर्खास्त आरक्षकों से जुड़े कुल 45 बैंक खातों में 15 करोड़ रुपये के भारी-भरकम और संदिग्ध लेन-देन का सनसनीखेज पता चला था। वित्तीय और संपत्तियों की गहन जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपियों की लगभग 1.50 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को कुर्क/जब्त कर लिया है और पूरे मामले से जुड़ा दस्तावेज मुंबई स्थित विशेष 'सफेमा' (SAFEM_A) अदालत को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेज दिया है।