सरकार के नए कर्ज पर जीतू पटवारी का सवाल, पूंजीगत कामों का हवाला देकर दिया जवाब

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भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार आज एक बार फिर बाजार से 3 हजार करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने जा रही है। इस आर्थिक कदम को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार लगातार अंधाधुंध कर्ज ले रही है और हर बार इसे केवल पूंजीगत खर्च (कैपिटल एक्सपेंचर) के नाम पर लिया जाना बताया जाता है। उन्होंने सवाल किया कि यदि कर्ज का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है, तो आखिरकार विकास की वास्तविक रफ्तार और युवाओं के लिए रोजगार की बहार कहां गुम हो गई है।

कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को गिरवी रखकर भलाई का झूठा भरोसा दिया जा रहा है और इस पूरी प्रक्रिया की आड़ में कमीशन व भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है। दूसरी ओर, राज्य सरकार ने इन तमाम आरोपों पर अपना आधिकारिक पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के माध्यम से लिया जा रहा यह ऋण सड़कों, एक्सप्रेस-वे, सिंचाई प्रणालियों, बांधों, बिजली परियोजनाओं, मेडिकल कॉलेजों और अन्य प्रमुख अधोसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) विकास कार्यों पर ही खर्च किया जा रहा है।

लगातार बढ़ती जा रही है राज्य सरकार की वित्तीय उधारी और बकाया देनदारियां

मध्य प्रदेश की मौजूदा वित्तीय स्थिति पर नजर डालें तो मार्च 2026 के अंत तक राज्य सरकार की कुल बकाया देनदारी लगभग 5.31 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच चुकी थी। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भी सरकार ने विभिन्न चरणों में बाजार से भारी-भरकम ऋण लिया था। मई 2025 से लेकर मार्च 2026 के बीच कुल 21 बार की गई उधारी को मिलाकर लगभग 91,500 करोड़ रुपये का कर्ज जुटाया गया था।

कांग्रेस पार्टी लगातार इस बढ़ती हुई उधारी को लेकर सरकार से तीखे जवाब मांग रही है। जीतू पटवारी का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में कर्ज लेकर प्रदेश का विकास कर रही है, तो उसका सकारात्मक असर रोजगार के नए अवसरों, निवेश और आम जनता की आर्थिक स्थिति में भी साफ दिखाई देना चाहिए। सरकार को पारदर्शी तरीके से यह स्पष्ट करना चाहिए कि लगातार बढ़ते इस कर्ज के बावजूद प्रदेश में जमीनी विकास और रोजगार के द्वार क्यों नहीं खुल रहे हैं।

सरकार का स्पष्टीकरण: पूंजीगत व्यय के लिए लिया जा रहा है ऋण

चालू वित्त वर्ष में भी सरकार की उधारी की यह प्रक्रिया अनवरत जारी है। राज्य सरकार द्वारा गत 4 अक्टूबर को जारी किए गए स्पष्टीकरण के मुताबिक, सितंबर 2026 तक आरबीआई के माध्यम से कुल 37,400 करोड़ रुपये का ऋण प्राप्त किया जा चुका है। प्रदेश सरकार ने यह भी जानकारी दी है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश की कुल ऋण सीमा लगभग 87 हजार करोड़ रुपये निर्धारित की है, और मार्च 2027 तक इसी तय सीमा के भीतर रहकर विकास परियोजनाओं की आवश्यकतानुसार ही ऋण लिया जाएगा।

सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि कर्मचारियों के वेतन और 'लाड़ली बहना' जैसी प्रमुख सामाजिक दायित्व वाली कल्याणकारी योजनाओं के नियमित राजस्व व्यय के लिए आरबीआई के जरिए कोई अतिरिक्त ऋण नहीं लिया जाता है। आरबीआई के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रतिस्पर्धी बोलियां प्राप्त की जाती हैं और पूरी तरह से बाजार की मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर अनुकूल ब्याज दरों पर ही यह ऋण लिया जाता है। सरकार का यह भी दावा है कि राज्य की जीएसडीपी (GSDP) में लगातार वृद्धि होने के कारण उसकी निर्धारित ऋण लेने की क्षमता भी बढ़ी है, और मध्य प्रदेश ने ऋण के समय पर पुनर्भुगतान के मामले में कभी कोई डिफॉल्ट नहीं किया है।