मानसून जाने के बाद भी नहीं थमे बादल, पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का दौर जारी

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मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई 3 अक्टूबर को हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद राज्य के मौसम का मिजाज पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है। पूर्वी हिस्से में सक्रिय चक्रवात और ट्रफ के असर से अभी भी बारिश का दौर जारी है, जिससे प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का दोतरफा रूप देखने को मिल रहा है।

पूर्वी हिस्से में चक्रवात और ट्रफ का असर

राज्य के पूर्वी संभागों में पिछले चार दिनों से आंधी और बारिश का सिलसिला लगातार बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यह मौसमी हलचल आगामी 11 अक्टूबर तक सक्रिय रह सकती है, जिसके चलते पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बादलों की आवाजाही और बारिश की संभावना बनी हुई है।

शुक्रवार को इन जिलों में बारिश के आसार

आज यानी शुक्रवार को पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, शहडोल और अनूपपुर जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 10 और 11 अक्टूबर को भी इन इलाकों में वर्षा का दौर जारी रह सकता है, और 12 अक्टूबर के बाद ही मौसम पूरी तरह साफ होने की उम्मीद है।

पश्चिमी मध्य प्रदेश में शुष्क रहेगा मौसम

पूर्वी हिस्से के विपरीत, राजधानी भोपाल और इंदौर समेत पूरे पश्चिमी मध्य प्रदेश में मौसम मुख्य रूप से शुष्क बना रहेगा। यहाँ तेज धूप निकलने के कारण दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है, जिससे गर्मी का अहसास हो सकता है। अक्टूबर के इस महीने में दिन के समय धूप और रात के समय हल्की ठंडक का मिला-जुला असर नजर आ रहा है।

कृषि गतिविधियों पर मौसम का मिला-जुला प्रभाव

मौसम में आए इस बदलाव का सीधा असर खेती-किसानी पर भी पड़ रहा है। पूर्वी जिलों में हो रही बारिश से खेतों की ऊपरी मिट्टी में नमी बढ़ रही है, लेकिन पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश न होने के कारण किसानों को रबी फसलों की बोवनी और सिंचाई का फैसला बहुत सोच-समझकर लेना होगा। विशेषज्ञों की सलाह है कि किसान भाई बोवनी या सिंचाई का निर्णय लेते समय केवल बारिश की संभावना पर निर्भर न रहें, बल्कि अपने खेत की वास्तविक नमी और सिंचाई के उपलब्ध साधनों को प्राथमिकता दें।