सेंसेक्स-निफ्टी की शानदार शुरुआत, पिछली गिरावट के बाद बाजार में लौटी रौनक

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मुंबई: सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन आज भारतीय शेयर बाजार ने एक मजबूत और सकारात्मक शुरुआत की है। सुबह के सत्र में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का बेंचमार्क सूचकांक निफ्टी दोनों में अच्छी खासी वृद्धि दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में यह तेजी निवेशकों के बीच सकारात्मक धारणा और विश्वास को बखूबी दर्शाती है। सेंसेक्स 71,997.37 के स्तर पर कारोबार करता हुआ नजर आया, जिसमें 404.13 अंकों की ठोस बढ़त यानी 0.56 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया। इसी प्रकार, निफ्टी ने भी 22,363.55 के स्तर पर अपनी शुरुआत की, जिसमें 131.75 अंकों की बढ़त यानी 0.59 फीसदी की वृद्धि रही।

कल जिस शेयर बाजार में चौतरफा भारी गिरावट देखी गई थी और निवेशकों के लगभग 10 लाख करोड़ रुपये डूब गए थे, उसी बाजार में आज सुबह एक नया और सकारात्मक मोड़ आया है। दलाल स्ट्रीट पर आज सुबह से ही 'बुल्स' (तेजी लाने वाले निवेशकों) ने बाजार को संभालने की पूरी कोशिश की है। पिछले कारोबारी सत्र में ऐतिहासिक गिरावट के चलते सेंसेक्स 32 महीने और निफ्टी 18 महीने के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया था, जिसके बाद आज एक तकनीकी बाउंस-बैक देखने को मिल रहा है।

आज सुबह बाजार में क्या रही मुख्य हलचल?

कल की भयंकर गिरावट के बाद आज सुबह भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ खुले। शुरुआती कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स करीब 338 अंक उछलकर 71,930 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, वहीं एनएसई निफ्टी 50 भी करीब 91 अंक चढ़कर 22,323 के पार निकल गया। बाजार में आई यह बढ़त मुख्य रूप से 'शॉर्ट कवरिंग' यानी कल की भारी-भरकम बिकवाली के बाद बेहद कम कीमतों पर हुई लिवाली की वजह से आई है। आसान शब्दों में समझें तो जब बाजार जरूरत से ज्यादा नीचे गिर जाता है, तो उसमें एक प्राकृतिक सुधार या रिकवरी आती है, और आज बाजार में ठीक वैसा ही रुझान देखने को मिल रहा है।

बाजार में अचानक इस सुधार के पीछे क्या हैं कारण?

इस मामूली रिकवरी की सबसे बड़ी वजह यह है कि कल की बड़ी गिरावट के बाद भारतीय बाजार 'ओवरसोल्ड जोन' यानी अत्यधिक बिकवाली के दायरे में आ चुके थे। जब शेयर बहुत ज्यादा सस्ते हो जाते हैं, तो घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) और ट्रेडर्स खरीदारी के नए अवसर तलाशने लगते हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कल के मुकाबले आई हल्की नरमी ने भी घरेलू बाजार को थोड़ा बहुत संबल प्रदान किया है।

वे कौन से बड़े कारक हैं जो बाजार की तेजी पर लगा रहे हैं ब्रेक?

बाजार भले ही आज शुरुआती हरे निशान में तैरता हुआ दिखाई दे रहा है, लेकिन इसका आगे का सफर काफी चुनौतियों भरा हो सकता है। इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं:

  • कच्चा तेल और पश्चिम एशिया का तनाव: वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड अभी भी 104 डॉलर प्रति बैरल के आसपास उच्च स्तर पर बना हुआ है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने का निरंतर डर बना हुआ है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए महंगा तेल हमारी पूरी अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

  • विदेशी निवेशकों (एफआईआई) की अंधाधुंध बिकवाली: विदेशी संस्थागत फंड्स लगातार भारतीय बाजार से अपना पैसा तेजी से निकाल रहे हैं। बीते सत्र में ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 12,944 करोड़ रुपये से अधिक के शेयरों की भारी बिकवाली की, जो हाल के दिनों में एक दिन में की गई सबसे बड़ी बिकवाली में से एक है।

  • आईटी सेक्टर पर मंडराता दोहरा दबाव: देश की प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से कुछ कमजोर रहे हैं, जिससे इस सेक्टर में चिंता का माहौल है। इसके अलावा, अमेरिका द्वारा ग्रीन कार्ड से जुड़े एक प्रमुख लेबर प्रोग्राम को लेकर सामने आई खबरों से भारतीय आईटी कंपनियों पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।

आम निवेशकों के लिए क्या होनी चाहिए सही रणनीति?

बाजार के तमाम वित्तीय जानकारों का मानना है कि आज की यह तेजी मुख्य रूप से एक 'तकनीकी उछाल' भर है, इसे किसी स्थायी और मजबूत सुधार की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। जब तक वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें शांत नहीं होतीं और विदेशी निवेशकों द्वारा की जा रही लगातार बिकवाली पर रोक नहीं लगती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर बना रहेगा। ऐसे में छोटे और खुदरा निवेशकों को जल्दबाजी में बड़ा निवेश करने से बचना चाहिए। इस समय केवल चुनिंदा और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ही नजर बनाए रखना सबसे समझदारी भरा कदम होगा।