पाकिस्तान में तीन महिलाओं के कथित अपहरण से बढ़ा विवाद

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इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान के बेटे कासिम खान ने पाकिस्तानी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि अधिकारियों ने उनकी तीन मौसियों को अगवा कर लिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से उन्होंने यह चिंता जताई है कि परिवार और वकीलों को इस बात की कोई जानकारी नहीं दी गई है कि उनकी मौसियों की तबियत कैसी है, उन्हें किस जगह पर रखा गया है और उन्हें किस आधार पर हिरासत में लिया गया है।

पिता से संपर्क टूटने और सेहत पर अनिश्चितता

कासिम खान ने इस बात का भी खुलासा किया कि उनके पिता इमरान खान के मामलों को लेकर पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है और उन्हें तथा उनके भाई को पिछले छह महीने से अधिक समय से अपने पिता से संपर्क करने का कोई मौका नहीं मिला है। स्थिति यहाँ तक है कि उन्हें अपने पिता की स्वास्थ्य स्थिति की भी सटीक जानकारी नहीं है। विदित हो कि इमरान खान अगस्त 2023 से अदियाला जेल में अपनी सजा काट रहे हैं।

पिछले महीने हुई थी इमरान की बहनों की गिरफ्तारी

इमरान खान की तीनों बहनें—अलीमा खान, नोरीन नियाजी और उजमा खान—को पिछले महीने पीटीआई द्वारा इस्लामाबाद तक निकाले जाने वाले प्रस्तावित विरोध मार्च से ठीक पहले 30 दिनों की निवारक हिरासत में लिया गया था। पार्टी इस मार्च के जरिए इमरान खान की सेहत की जानकारी और उनकी रिहाई की माँग कर रही थी। कासिम का कहना है कि हजारों पाकिस्तानी नागरिक शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतरकर इस राजनीतिक और गैरकानूनी कैद का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब तक जनता की लोकतांत्रिक इच्छाओं को कुचला जाएगा और उनके लोकप्रिय नेता को सलाखों के पीछे रखा जाएगा, तब तक देश में अमन-चैन और स्थिरता कायम नहीं हो सकती।

लाहौर हाई कोर्ट में दायर की गई याचिका

यह पूरा मामला तब सामने आया जब परिवार की तरफ से लाहौर हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई। अधिवक्ता राणा मुद्दस्सर उमर ने अलीमा खान के बेटे शाह रेज खान और नोरीन नियाजी की बेटी सकीना नियाजी की ओर से दो अलग-अलग सिविल आवेदन दाखिल किए। इन याचिकाओं में हिरासत में ली गई महिलाओं से परिवार और वकीलों की मुलाकात पर रोक लगाने तथा उन्हें समय पर दवाइयां न दिए जाने के आदेश को चुनौती दी गई है। परिवार का मुख्य आरोप है कि रिश्तेदारों और वकीलों को मिलने से लगातार वंचित रखा जा रहा है। 24 सितंबर को लाहौर हाई कोर्ट ने इन बहनों की हिरासत के नोटिफिकेशन को तुरंत रद्द करने की मांग को खारिज कर दिया था, जिसके बाद से परिवार लगातार उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर चिंतित बना हुआ है।