लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक तीखी पोस्ट साझा करते हुए केंद्र और राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर जमकर निशाना साधा है। युवाओं द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन का पुरजोर समर्थन करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बल और ताकत के जरिए आम जनता की आवाज को दबाने की कोशिश करना सरकार की एक बहुत बड़ी भूल साबित होगी। अखिलेश ने जोर देकर कहा कि अब देश की जनता दिल्ली में एकजुट होगी और वर्तमान समय में जंतर-मंतर केवल एक स्थान का नाम नहीं, बल्कि देश के युवाओं की 'नई चेतना और जागरण' का एक बड़ा प्रतीक बन चुका है।
'किसी के रोके नहीं रुकेगा, अब दिल्ली में देश जुटेगा'
अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट शेयर करते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लिखा, "किसी के रोके नहीं रुकेगा, अब दिल्ली में देश जुटेगा! हम देश की युवा ऊर्जा के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं।" उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भाजपा सरकार यह गलतफहमी पाल रही है कि वह अपनी प्रशासनिक ताकत के बल पर जनता के आंदोलन को कुचल देगी या रोक लेगी, तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल होगी। उनके मुताबिक, आज दिल्ली का जंतर-मंतर देश भर के आंदोलनों और वैचारिक क्रांति का केंद्र बन चुका है।
आंदोलनकारियों को रोकने पर सरकार को कड़ी चेतावनी
सपा अध्यक्ष ने अपनी पोस्ट में सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन द्वारा आंदोलनकारियों के रास्ते में बाधाएं डाली गईं और उन्हें रोकने का प्रयास किया गया, तो देश के कोने-कोने में जंतर-मंतर जैसे विरोध स्थल बन जाएंगे। उनके इस मुखर बयान को देश के युवाओं के आंदोलन के प्रति पूर्ण राजनीतिक समर्थन और सरकार की दमनकारी नीतियों पर गंभीर सवाल उठाने के रूप में देखा जा रहा है।
युवाओं के हौसले और उनकी तैयारी को दर्शाते हुए अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में एक ओजस्वी कविता की पंक्तियां भी साझा कीं:
"माना बादशाहों का बंदोबस्त है बख़्तरबंद,
पर उन्होंने देखा न नौजवानों का दमखम।।
यहां हौसलों की भी तैयारी है चाकचौबंद,
हैं साथ सब, मानकर इसको अंतिम जंग।।"
राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना बयान
अखिलेश यादव के इस आक्रामक तेवर और बयान से युवाओं की एकजुटता, चल रहे आंदोलनों और सरकार के प्रति उनके रवैये को लेकर समाजवादी पार्टी का राजनीतिक रुख पूरी तरह साफ हो गया है। हालांकि, उनकी इस सोशल मीडिया पोस्ट में जिस विशिष्ट आंदोलन का उल्लेख किया गया है, उससे जुड़े जमीनी घटनाक्रम और सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया के बारे में अभी विस्तृत और पुख्ता जानकारियां सामने आनी बाकी हैं।









