पश्चिम बंगाल में सियासी घमासान तेज, TMC विधायक पर हमले के आरोपों पर भाजपा ने क्या कहा?

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कोलकाता| पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपने बारुईपुर पूर्व के विधायक बिभास सरदार पर हुए कथित हिंसक हमले के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाते हुए 'डराने-धमकाने की राजनीति' करने का दावा किया है। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि दक्षिण 24 परगना जिले के जयनगर में शनिवार रात पार्टी के एक राजनीतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेकर घर लौटते समय विधायक बिभास सरदार पर अज्ञात हमलावरों द्वारा हमला किया गया।

तृणमूल कांग्रेस ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि विपक्षी दल की डराने और धमकाने की हिंसक राजनीति एक बार फिर जनता के सामने बेनकाब हो गई है। जयनगर में विधायक बिभास सरदार पर किया गया बर्बर हमला और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का समर्थन करने के कारण उन्हें जान से मारने की धमकियां दिया जाना, राज्य में बढ़ती राजनीतिक हिंसा पर बेहद गंभीर सवाल खड़े करता है।

पार्टी ने आगे कहा कि जब वैचारिक और राजनीतिक मतभेदों का जवाब ईंट-पत्थरों, हिंसक धमकियों और किसी की जान लेने के प्रयासों से दिया जाता है, तो यह सीधे तौर पर लोकतंत्र की मूल आत्मा पर प्रहार होता है। टीएमसी ने इस हमले के जिम्मेदार तत्वों की तत्काल पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। इसके साथ ही पार्टी ने स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस निष्पक्ष होकर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बजाय प्रशासनिक शिथिलता दिखा रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री का समर्थन करने पर दी गई जान से मारने की धमकी

तृणमूल कांग्रेस द्वारा जारी बयान में यह दावा किया गया कि हमलावरों ने घटना के वक्त विधायक सरदार को खुलेआम धमकाया था। पार्टी के अनुसार, हमलावरों में से एक ने कथित तौर पर कहा कि ममता बनर्जी का अत्यधिक समर्थन करने के कारण उन्हें इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा।

घटना के तुरंत बाद तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी ने विधायक बिभास सरदार से टेलीफोन पर बात की। उन्होंने विधायक के स्वास्थ्य का हालचाल जाना और उन्हें हरसंभव चिकित्सीय व प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराने का पूर्ण आश्वासन दिया।

भाजपा ने आरोपों को नकारा, पुलिस जांच जारी

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम में अपने कार्यकर्ताओं की किसी भी तरह की संलिप्तता के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। वहीं, स्थानीय पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेते हुए औपचारिक जांच शुरू कर दी है। फिलहाल, पुलिस घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है और मामले की कानूनी प्रक्रिया जारी है।