ग्वालियर। सिंधिया राजघराने की 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विशाल संपत्ति के बंटवारे का बहुचर्चित मामला एक बार फिर कानूनी उलझनों में फंस गया है। परिवार के सदस्यों के बीच आपसी सहमति से तैयार किए गए समझौते प्रस्ताव को अदालत में पेश किया गया था, लेकिन इस पर प्रतिमा देवी राना द्वारा उठाई गई आपत्ति ने पूरे मामले को एक नया और पेचीदा मोड़ दे दिया है। ग्वालियर की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत में आज इसी अंतरिम आवेदन और आपत्ति आवेदन पर अहम सुनवाई होनी है, जिसके बाद इस कानूनी विवाद की आगे की दिशा तय होगी।
आपसी समझौते पर प्रतिमा देवी राना की आपत्ति
संपत्ति के इस हाई-प्रोफाइल विवाद में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और परिवार के अन्य सदस्यों के बीच लंबी कानूनी जंग चल रही है। पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा पाने के लिए राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, मध्य प्रदेश की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे और उषा राजे ने सिविल मुकदमा दायर किया था। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद पक्षों में आपसी सहमति से समझौता प्रस्ताव बन गया था, जिस पर ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ दिवंगत पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा देवी राना ने आपत्ति दर्ज करा दी है। प्रतिमा देवी का आरोप है कि उनसे धोखाधड़ी करके उस समझौता प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कराए गए हैं। उन्होंने अदालत में औपचारिक आवेदन देकर मामले की सुनवाई में दोबारा पक्षकार बनने और समझौते में अपना कानूनी अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की है।
मौसियों और ज्योतिरादित्य सिंधिया का पक्ष
प्रतिमा देवी की इस आपत्ति के जवाब में उनकी तीनों मौसियों—वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे की ओर से अदालत में जवाब दाखिल कर दिया गया है। उनका कहना है कि समझौता प्रस्ताव पर किए गए सभी हस्ताक्षर पूरी तरह आपसी सहमति से थे। उनके पक्ष के मुताबिक, हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिवार के सभी सदस्य वहां रुके थे, साथ में पारिवारिक भोज का आयोजन हुआ था और इस दौरान तस्वीरें भी खिंचवाई गई थीं। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया के पक्ष की ओर से भी स्पष्ट किया गया है कि समझौते में किसी भी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं की गई है और सभी के हस्ताक्षर स्वेच्छा व सहमति से हुए थे। आज की अदालतई सुनवाई के बाद इस संपत्ति विवाद के सुलझने या उलझने का भविष्य साफ होगा।








