नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देश के निर्वाचन आयोग और अन्य संबंधित पक्षों को एक याचिका पर नोटिस जारी कर उनसे जवाब तलब किया है। यह याचिका लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य प्रमुख विपक्षी नेताओं द्वारा प्रस्तुत की गई थी। इसमें आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) की प्रक्रिया और मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने के तरीकों को चुनौती दी गई है। सर्वोच्च अदालत ने चुनाव आयोग के अलावा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी से इस पूरे मामले पर अपना पक्ष रखने को कहा है।
याचिकाकर्ता के व्यवहार पर अदालत ने जताई नाखुशी
सुनवाई के दौरान अदालत ने मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया को चुनौती देने वाले 13 याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण पर गंभीर असंतोष व्यक्त किया। मुख्य न्यायाधीश ने याचिका पर नोटिस जारी करने का निर्देश देते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि अदालत संबंधित याचिकाकर्ता से उसके इस तरह के आचरण के बारे में जवाब मांगेगी।
अदालत पर किसी भी तरह का दबाव संभव नहीं
मामले की सुनवाई के समय विपक्षी नेताओं द्वारा चुनाव आयोग के पुनरीक्षण कार्य के विरोध में शीर्ष अदालत तक निकाले गए पैदल मार्च का मुद्दा भी उठा। इस पर सीजेआई ने कड़े शब्दों में कहा कि न्यायपालिका को किसी भी माध्यम या तरीके से दबाव में नहीं लाया जा सकता। वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया द्वारा राजनीतिक प्रदर्शन और वकीलों के ज्ञापन का जिक्र किए जाने पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अदालत आसपास घट रही गतिविधियों से पूरी तरह अवगत है और वह किसी से अलग-थलग नहीं रहती। उन्होंने कहा कि ऐसे निष्फल प्रयासों से अदालत के कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ता। इसी दौरान असदुद्दीन ओवैसी सहित अन्य नेताओं की ओर से दायर इसी तरह की याचिकाओं पर भी केंद्र सरकार व अन्य पक्षों को नोटिस दिए गए और सभी मामलों की सुनवाई एक साथ करने के निर्देश जारी किए गए।
याचिका दाखिल करने वाले प्रमुख विपक्षी चेहरे
इस याचिका को दायर करने वाले नेताओं में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत शामिल हैं। 12 अक्टूबर को अदालत में दी गई इस याचिका में शुरुआती तकनीकी कमियों को सुधारे जाने के बाद 13 अक्टूबर को रजिस्ट्री द्वारा औपचारिक रूप से दर्ज कर लिया गया था।









