संसद के विशेष सत्र पर सहमति बनाने के लिए सरकार अब द्रमुक और एनसीपी (शरद) के साथ परिसीमन व महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन बिल के नए ड्राफ्ट के साथ बातचीत करेगी। नए ड्राफ्ट में इन दलों की मांगों के अनुरूप सभी राज्यों की लोकसभा और विधानसभा की सीटों में आनुपातिक रूप से 50 फीसदी सीटों की बढ़ोतरी का प्रावधान लिखित रूप से जुड़ा होगा।
विशेष सत्र और इस बिल पर प्रत्यक्ष या परोक्ष समर्थन के लिए सरकार सपा के भी संपर्क में है। एसआईआर पर छिड़े नए सियासी संग्राम और विपक्ष के तीखे तेवर के बावजूद सरकार को परिसीमन बिल पर द्रमुक और एनसीपी (शरद) के साथ सहमति बनने की उम्मीद है। चेन्नई में डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन की ओर से शनिवार को बुलाई गई सांसदों की अहम बैठक में इस मसले पर बातचीत हुई। बैठक में फैसला किया गया है कि इस मामले में अंतिम फैसला करने के लिए पहले ड्राफ्ट बिल देखा जाए। फरवरी में इस बिल के लिए बुलाए गए विशेष सत्र में डीएमके ने सभी राज्यों में समान रूप से 50 फीसदी सीटों की बढ़ोत्तरी पर महज मौखिक आश्वासन पर सवाल उठाया था।
एनसीपी-द्रमुक से क्या हुई बात?
सरकार के सूत्रों का कहना है कि विशेष सत्र के लिए नए सिरे से बातचीत हुई है। दोनों दलों की मुख्य मांग बिल में सभी राज्यों की सीटों में समान रूप 50 फीसदी की बढ़ोत्तरी को लिखित रूप में शामिल करने की है। अब अगले सप्ताह सरकार बिल के नए ड्राफ्ट के साथ बातचीत करेगी, जिसमें समान बढ़ोत्तरी संबंधी प्रावधान लिखित रूप में दर्ज होगा। उक्त सूत्र ने कहा कि जहां तक एसआईआर पर इन दलों के अलग रुख राजनीतिक कारणों से है। ये दल नहीं चाहते कि कांग्रेस उन पर इस मामले में समझौता करने का आरोप लगाए।
परिसीमन के बिना लागू नहीं होगा महिला आरक्षण
जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम यानी महिला आरक्षण कानून लाया गया, तो उसमें स्पष्ट प्रावधान किया गया था कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें तब तक लागू नहीं की जा सकतीं, जब तक देश में नया परिसीमन पूरा नहीं हो जाता।
परिसीमन यह तय करता है कि किस क्षेत्र की सीमा कहां तक होगी और सीट कहां बनेगी, जबकि महिला आरक्षण यह तय करेगा कि कौन-सी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यही वजह है कि दोनों एक-दूसरे से जुड़े हैं।
सरकार ने परिसीमन और महिला आरक्षण को पास कराने के लिए 15 से 17 अप्रैल तक तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया था। लेकिन इस दौरान बिल पास नहीं हो पाया था। संसद के मानसून सत्र की अंतिम बैठक 13 अगस्त को हुई थी। इसके दो महीने बाद अब तक सेशन औपचारिक रूप से खत्म होने की घोषणा नहीं हुई है।
द्रमुक, एनसीपी (शरद), टीएमसी बागी गुट के समर्थन से बन सकती है बात
द्रमुक, एनसीपी (शरद), तृणमूल बागी गुट के समर्थन के बाद बिल के लिए जरूरी दो तिहाई बहुमत के बेहद करीब होगी। क्योंकि इससे पहले शिवसेना यूबीटी में भी टूट हो गई है। सपा को सरकार बिल के प्रत्यक्ष या परोक्ष समर्थन के लिए मना रही है। सूत्रों का कहना है कि चूंकि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं, ऐसे में सपा इन परिस्थितियों में महिला आरक्षण की राह की बाधा बन कर नहीं उभरना चाहेगी। सपा से संपर्क के सवाल पर सरकार के वरिष्ठ मंत्री ने कहा, हम संख्या बल की दृष्टि से विपक्ष पर स्पष्ट बढ़त चाहते हैं।









