चंबा में जयराम ठाकुर का बड़ा बयान, बोले- राजनीतिक फायदे के लिए जिले बनाने की कोशिश

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चंबा। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने राज्य सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। चंबा प्रवास के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश की वर्तमान सरकार आगामी विधानसभा चुनावों में राजनीतिक फायदा उठाने की मंशा से जल्दबाज़ी में नए जिलों का गठन करती है, तो भविष्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने पर इन सभी निर्णयों पर पुनर्विचार किया जाएगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी नए जिले का भविष्य महज राजनीतिक भाषणों और घोषणाओं के आधार पर तय नहीं हो सकता, बल्कि इसके लिए प्रशासनिक आवश्यकताओं और आम जनता के हितों को सर्वोपरि रखना बेहद जरूरी है।

चुनावी फायदे के लिए फैसले लेने का आरोप

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि वर्तमान प्रदेश सरकार केवल चुनावी समीकरणों को साधने के लिए इस तरह के बड़े प्रशासनिक निर्णय ले रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि चुनाव से ठीक पहले नए जिले गठित किए जाते हैं, तो भाजपा के सत्ता में आते ही इन सभी फैसलों का गहन आकलन किया जाएगा। सरकार में आने के बाद संबंधित क्षेत्रों की वास्तविक मांग, प्रशासनिक परिस्थितियों और जनता को मिलने वाली सुविधाओं की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि महज राजनीतिक स्वार्थ के लिए आनन-फानन में लिए गए निर्णयों को बिना उचित जांच-पड़ताल के आगे जारी रखने की कोई बाध्यता नहीं होगी।

प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर उठाए गंभीर सवाल

सत्तारूढ़ दल पर कड़ा तंज कसते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि अगर कांग्रेस सरकार प्रदेश के सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों में 68 जिले भी घोषित कर दे, तब भी वह सत्ता में दोबारा वापसी नहीं कर सकती। नए जिलों के गठन की चर्चाओं के बीच उन्होंने राज्य की आर्थिक बदहाली की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश पहले से ही भारी वित्तीय संकट से जूझ रहा है और कर्मचारियों के वेतन तथा पेंशनभोगियों की पेंशन देने तक के लाले पड़े हैं, तब इतने बड़े पैमाने पर नए जिले बनाने के लिए जरूरी वित्तीय संसाधन कहां से जुटाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि चुनावी लाभ साधने के बजाय जनता को बुनियादी और बेहतर सुविधाएं प्रदान करना सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकारियों की भूमिका पर साधा निशाना

अपने वक्तव्य में पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश की चरमराती प्रशासनिक व्यवस्था और मुख्यमंत्री कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार में कुछ चुनिंदा और प्रभावशाली अधिकारियों की भूमिका तथा उनकी कार्यशैली पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। राज्य छोड़कर बाहर जा रहे अधिकारियों के रुख का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को अपने प्रशासनिक तंत्र को मजबूत करने और राज्य की वास्तविक समस्याओं का स्थाई समाधान ढूंढने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।