टाटा ट्रस्ट्स बनाएगा 40 से 50 गैर-लाभकारी अस्पताल, वित्त वर्ष 2026 में बांटे ₹1,556 करोड़

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मुंबई। देश के सबसे प्रमुख परोपकारी समूह टाटा ट्रस्ट्स ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 1,556.31 करोड़ रुपये की भारी राशि विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यों में वितरित की है। इसके साथ ही समूह देशभर में 40 से 50 गैर-लाभकारी सामान्य अस्पतालों का एक विशाल नेटवर्क तैयार करने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य आम जनता को गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से सुलभ कराना है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने वार्षिक रिपोर्ट जारी करते हुए इस दूरगामी रणनीति की विस्तृत जानकारी साझा की।

40 से 50 गैर-लाभकारी अस्पतालों का नेटवर्क और नया मॉडल

वार्षिक रिपोर्ट में अपने संदेश में नोएल टाटा ने बताया कि समूह का लक्ष्य एक ऐसा अस्पताल मॉडल विकसित करना है, जिससे समाज के हर वर्ग को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके। इस प्रस्तावित मॉडल के तहत इलाज का खर्च वहन करने में सक्षम मरीजों से मिलने वाली राशि का उपयोग उन गरीब और असहाय लोगों के इलाज के लिए किया जाएगा, जो चिकित्सा का खर्च उठाने में असमर्थ हैं। हालांकि, रिपोर्ट में इन अस्पतालों के निर्माण, उनके स्थान और वित्तीय निवेश के समयबद्ध ब्योरे को अभी रणनीतिक कारणों से गोपनीय रखा गया है।

2026 से 2031 की स्वास्थ्य रणनीति और भारी बजटीय आवंटन

समूह ने वर्ष 2026 से 2031 तक के लिए पांच वर्षीय विशेष स्वास्थ्य रणनीति तैयार की है, जिसके तहत 75 ब्लॉक में करीब 25 लाख लोगों तक पहुंचने तथा 100 से अधिक सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में बांटे गए 1,556.31 करोड़ रुपये में से ग्रामीण विकास और आजीविका के लिए सर्वाधिक 457.62 करोड़ रुपये दिए गए। इसके अलावा शिक्षा क्षेत्र को 270.26 करोड़ रुपये, कैंसर देखभाल को 178.46 करोड़ रुपये और स्वास्थ्य सेवाओं को 105.97 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जबकि व्यक्तिगत चिकित्सा व शिक्षा सहायता के रूप में 202.99 करोड़ रुपये दिए गए।

लाखों लोगों तक पहुंचा लाभ और दीर्घकालिक प्रभाव पर जोर

रिपोर्ट के अनुसार, कैंसर देखभाल कार्यक्रमों के माध्यम से 1.06 लाख से अधिक मरीजों को बाह्य परामर्श दिया गया, 24 हजार से ज्यादा कीमोथेरेपी चक्र पूरे हुए और करीब तीन हजार सफल सर्जरायां की गईं। ग्रामीण आजीविका कार्यक्रमों से चार लाख परिवारों और शिक्षा पहलों से 21 लाख विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिला। चेयरमैन नोएल टाटा ने जोर देकर कहा कि परोपकारी कार्यों का वास्तविक मूल्यांकन केवल खर्च की गई राशि से नहीं, बल्कि उससे समाज में आए स्थायी और सकारात्मक बदलाव से होना चाहिए।