पेरिस में हिंसा का तांडव! 143 साल पुराने टाउन हॉल को नुकसान, दुकानों को बनाया गया निशाना

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पेरिस। फ्रांस समेत यूरोप के कई प्रमुख देशों में आसमान छूती महंगाई, कम वेतन और सार्वजनिक सेवाओं की बदहाल स्थिति के खिलाफ शनिवार को अभूतपूर्व और उग्र प्रदर्शन देखने को मिले। फ्रांस, बेल्जियम, इटली और पुर्तगाल की सड़कों पर लाखों की संख्या में नागरिक उतर आए, जो देखते ही देखते हिंसक झड़पों में तब्दील हो गया। कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच संघर्ष हुआ, दुकानों में लूटपाट की गई और आगजनी की घटनाओं से अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने उग्र भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और बल प्रयोग किया।

फ्रांस में व्यापक हिंसा और ऐतिहासिक इमारतों को नुकसान

केवल फ्रांस में ही लगभग 5.5 लाख लोगों ने इन प्रदर्शनों में भाग लिया, जिन्होंने ईंधन के बढ़ते दामों, जीवनयापन के भारी खर्च और स्कूलों की दयनीय स्थिति के खिलाफ गहरा रोष व्यक्त किया। राजधानी पेरिस, मार्सेई, नीस, नांत और स्ट्रासबर्ग समेत कई शहरों में दर्जनों दुकानों को निशाना बनाकर लूटपाट की गई। पेरिस में देर शाम तक आग की लपटें उठती रहीं, जहाँ एक 143 साल पुराने ऐतिहासिक फ्रांसीसी स्मारक को आग के हवाले कर दिए जाने से उसकी छत ढह गई। इसके अलावा, लिमोज शहर में प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाई गई आग के कारण वहां के टाउन हॉल का लगभग दो-तिहाई हिस्सा पूरी तरह जलकर राख हो गया।

प्रशासनिक सख्ती और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की चेतावनी

इन हिंसक प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षाबलों ने कार्रवाई करते हुए कम से कम 195 लोगों को हिरासत में लिया है। इस बीच पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं क्योंकि कार्रवाई के दौरान एक किशोर का जबड़ा टूटने और एक अधिकारी द्वारा अनुचित बल प्रयोग के मामले सामने आए हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की आड़ में अराजकता फैलाने वालों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि प्रशासनिक कार्यालयों, कारोबारी प्रतिष्ठानों और टाउन हॉल में तोड़फोड़ व लूटपाट करने वाले उपद्रवियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ सख्त मुकदमे चलाए जाएंगे और उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।

बेल्जियम, पुर्तगाल और इटली में भी उग्र हुए आंदोलन

महंगाई और जनसमस्याओं का यह असंतोष यूरोप के अन्य देशों में भी फैल गया। बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स और लीज शहर में पुलिस ने उग्र भीड़ को खदेड़ने के लिए आंसू गैस और पानी की तेज बौछारों का इस्तेमाल किया, क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाकर्मियों पर पथराव और आगजनी की थी। उधर, पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में हजारों लोगों ने आवास की भयंकर किल्लत, आसमान छूते किराए और कम वेतन के खिलाफ मोर्चा खोला। हालांकि पुर्तगाली सरकार ने साफ किया है कि वह जन-दबाव के आगे नहीं झुकेगी। इसके अतिरिक्त, इटली के मिलान और बोलोन्या में भी प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ तीखी झड़पें हुईं, जिसने यूरोपीय सरकारों की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं।