अदाणी फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. प्रीति अदाणी ने भारत के विकसित भारत 2047 की यात्रा में महिलाओं को केंद्रीय सूत्रधार बनाने का आह्वान किया है। उन्होंने 'सशक्त नारी, विकसित भारत' सम्मेलन में कहा कि महिलाओं की आर्थिक क्षमता विकसित भारत की परिकल्पना का केंद्रबिंदु है। यह सम्मेलन नई दिल्ली में चिंतन रिसर्च फाउंडेशन द्वारा 26 फरवरी 2026 को आयोजित किया गया था।डॉ. अदाणी ने महिला व बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी का स्वागत करते हुए महिला नेतृत्व वाले विकास के पीछे की नीतिगत गति को स्वीकार किया। उन्होंने संकल्पना से आगे बढ़कर सतत आर्थिक भागीदारी की ओर बढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने जोर दिया कि सशक्तिकरण की शुरुआत पहुंच से होती है। अदाणी समूह की सामाजिक कल्याण शाखा, फाउंडेशन की आरे से समर्थित पहलों के माध्यम से कृषि, डेयरी, स्वास्थ्य और उद्यम के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर परिणाम प्राप्त हुए हैं।ग्रामीण समुदायों में महिला किसानों को सरल कृषि मोबाइल एप्लिकेशन से परिचित कराया गया है, जिससे उन्हें सिंचाई, उर्वरक उपयोग और मंडी मूल्य ट्रैकिंग में मार्गदर्शन मिलता है। इससे उच्च उत्पादकता और मजबूत आय प्राप्त हुई है। दुग्ध उत्पादन क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 3,500 से अधिक महिलाएं प्रतिवर्ष 75 लाख लीटर से अधिक दूध का संग्रहण करती हैं। पारदर्शी मूल्य निर्धारण और संगठित खरीद से उनकी आय स्थिरता बढ़ी है।
स्वास्थ्य और आजीविका पहल
फाउंडेशन की प्रमुख मातृ व महिला स्वास्थ्य पहल, सुपोषण के तहत प्रशिक्षित स्थानीय महिला स्वयंसेवकों ने 32 लाख से अधिक महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार में सहयोग किया है। इसके अतिरिक्त, स्वाभिमान कार्यक्रम ने 300 उद्यम स्वयं सहायता समूहों में 4,500 से अधिक महिलाओं को स्थायी आजीविका प्राप्त करने में सक्षम बनाया है। डॉ. अदाणी ने कहा कि सशक्तिकरण का अर्थ दान देना नहीं है, बल्कि कौशल, वित्त, बाजार और नेतृत्व के अवसरों तक पहुंच बढ़ाना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जमीनी स्तर पर ऐसे कार्यक्रम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हैं।
नीतिगत समर्थन और भविष्य की दिशा
उन्होंने हाल ही में पारित केंद्रीय बजट की स्वयं सहायता उद्यमी पहल का जिक्र किया। डॉ. अदाणी ने इसे महिलाओं को सूक्ष्म ऋण लेने वाली संस्थाओं से उद्यम मालिकों के रूप में विकास पूंजी तक पहुंच प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम बताया। उन्होंने जोर दिया कि भारत की दीर्घकालिक समृद्धि के लिए महिलाओं की आर्थिक भागीदारी अत्यावश्यक है। अपने संबोधन के समापन में, डॉ. अदाणी ने संस्थानों से संरचनात्मक बाधाओं को दूर करने और अवसरों तक पहुंच को व्यापक बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "उसे मौका दो। और वह कर दिखाएगी।"









