भारत का उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं का बाजार तेजी से विस्तार के दौर में है। वर्ष 2029 तक इसके 11 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर (CAGR) से बढ़कर करीब तीन लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। जीआई ग्रुप होल्डिंग की रिपोर्ट में यह आकलन किया गया है।
वेतनभोगियों में किस वर्ग की रहेगी अमह भूमिका?
रिपोर्ट के मुताबिक, इस बाजार की वृद्धि में वेतनभोगी वर्ग, खासतौर पर युवा पेशेवरों की अहम भूमिका रहेगी।वर्तमान में तेजी से बिकने वाले कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की बिक्री में युवा पेशेवरों की हिस्सेदारी करीब 37 प्रतिशत है।वहीं लगभग 45 प्रतिशत खरीद फाइनेंस, यानी कर्ज या ईएमआई के माध्यम से की जा रही है।
खरीदारी के पैटर्न में कैसे आया बदलाव?
करीब 74 प्रतिशत जेन जेड उपभोक्ता ईएमआई या ‘बाय नाउ, पे लेटर’ जैसे विकल्पों का उपयोग करते हैं।वहीं, 68 प्रतिशत खरीदारों के लिए उत्पाद की विशेषताएं सबसे बड़ा निर्णयकारी कारक हैं।इसके बाद 61 प्रतिशत के लिए रिव्यू, 59 प्रतिशत के लिए कीमत और 55 प्रतिशत के लिए वारंटी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
वैल्यू फॉर मनी उत्पादों को दी जा रही प्राथमिकता
रिपोर्ट में बताया गया कि 73 प्रतिशत उपभोक्ता अभी भी ‘वैल्यू फॉर मनी’ उत्पादों को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन बेहतर प्रदर्शन मिलने पर लगभग 70 प्रतिशत लोग मिड-टियर या प्रीमियम उत्पादों में निवेश करने के लिए तैयार हैं।
अपग्रेड का ट्रेंड कैसे हो रहा मजबूत?
महिलाओं की भूमिका भी इस अपग्रेड ट्रेंड में तेजी से बढ़ रही है, जहां 61 प्रतिशत महिलाओं ने अधिक महत्वाकांक्षी खरीदारी की इच्छा जताई है।करीब 46 प्रतिशत उपभोक्ता हर 2-3 साल में अपने ड्यूरेबल उत्पाद बदल रहे हैं और 63 प्रतिशत लोग अपग्रेड के दौरान अक्सर ब्रांड भी बदल लेते हैं।ऐसे में खरीद का अनुभव, बिक्री के बाद सेवा और भरोसेमंद सपोर्ट बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त के अहम कारक बनते जा रहे हैं।
स्मार्ट लिविंग की बढ़ रही मांग
रिपोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि अगली बड़ी मांग ‘स्मार्ट लिविंग’ से जुड़ी होगी। लगभग 42 प्रतिशत उपभोक्ताओं के पास पहले से कम से कम एक स्मार्ट डिवाइस है, जबकि 67 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनकी अगली खरीद स्मार्ट फीचर वाले उत्पाद की होगी।
कंपनियों को उपभोक्ता रुझाने के अनुरूप खुद को ढालना होगा
जीआई ग्रुप होल्डिंग की कंट्री मैनेजर सोनल अरोड़ा ने कहा कि बदलती मांग को देखते हुए कर्मचारियों का प्रशिक्षण, बेहतर रिटेल अनुभव, मजबूत आफ्टर-सेल्स सर्विस और पीएलआई योजनाओं के जरिए विस्तार बेहद जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि जो कंपनियां इन उपभोक्ता रुझानों के अनुरूप खुद को ढालेंगी, वे भारत के तेजी से बढ़ते मध्यम वर्ग की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर पाएंगी।









