क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि पैसा आते ही गायब हो जाता है? महीने की शुरुआत में भरा हुआ पर्स कुछ ही दिनों में खाली लगने लगता है, जबकि कमाई ठीक-ठाक होती है. ऐसे में लोग अक्सर बजट, खर्च या किस्मत को दोष देते हैं, लेकिन वास्तु मान्यताओं के अनुसार इसके पीछे छोटी-छोटी आदतें भी जिम्मेदार हो सकती हैं. खासकर पर्स से जुड़ी कुछ गलतियां, जिन्हें हम रोजमर्रा में नजरअंदाज कर देते हैं, आर्थिक रुकावट की वजह बनती हैं. दिलचस्प बात यह है कि इन्हीं समस्याओं का समाधान भी बेहद सरल उपायों में बताया गया है. माना जाता है कि अगर पर्स में एक खास पोटली रखी जाए और कुछ चीजों से दूरी बनाई जाए, तो पैसों का ठहराव बढ़ सकता है और अनावश्यक खर्च कम होने लगते हैं. आइए जानते हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से पर्स से जुड़े ये आसान वास्तु टिप्स और उनसे जुड़ी मान्यताएं.
पर्स और धन प्रवाह का वास्तु संबंध
घर का मुख्य द्वार, तिजोरी या पूजा स्थान ही नहीं, बल्कि पर्स को भी वास्तु में धन ऊर्जा से जुड़ा माना जाता है. ज्योतिष मान्यता कहती है कि पर्स व्यक्ति की आर्थिक ऊर्जा का प्रतीक होता है-यानी पैसा कैसे आता है और कितना टिकता है, इसका संकेत इससे जुड़ा माना जाता है. अक्सर देखा गया है कि जिन लोगों का पर्स हमेशा साफ और व्यवस्थित रहता है, उनके खर्च भी संतुलित रहते हैं. वहीं जो लोग पर्स में रसीदें, पुराने कागज या बेकार सामान भरकर रखते हैं, उनका ध्यान भी पैसों पर कम रहता है. वास्तु में इसे “ऊर्जा अवरोध” की तरह समझाया जाता है.
पर्स में न रखें ये चीजें
फटे नोट, पुराने बिल और बेकार कागज
पर्स में जमा पुराने बिल या मुड़े-तुड़े नोट न सिर्फ जगह घेरते हैं, बल्कि प्रतीकात्मक रूप से आर्थिक अव्यवस्था को दिखाते हैं. वास्तु मान्यता कहती है कि इससे धन का प्रवाह रुकता
फटा या गंदा पर्स
कई लोग सालों तक वही पर्स इस्तेमाल करते रहते हैं, चाहे वह घिस चुका हो. माना जाता है कि ऐसा पर्स धन हानि का संकेत देता है. जैसे घर की टूटी चीजें नकारात्मकता बढ़ाती हैं, वैसे ही फटा पर्स भी आर्थिक ऊर्जा कमजोर करता है.
पर्स का रंग भी डालता है असर
वास्तु मान्यताओं में रंगों का खास महत्व बताया गया है. माना जाता है कि बहुत गहरे रंग जैसे काला या नेवी ब्लू कभी-कभी धन रुकावट का प्रतीक बनते हैं. इसके बजाय हल्के और स्थिरता दर्शाने वाले रंग-हरा, भूरा या क्रीम-पैसे के स्थायित्व से जोड़े जाते हैं. कई लोग इसे मनोवैज्ञानिक नजरिये से भी सही मानते हैं, क्योंकि हल्के रंग व्यवस्थित और साफ रखने की प्रेरणा देते हैं.
पर्स में देवी-देवता की तस्वीर: सही या गलत?
बहुत से लोग श्रद्धा से पर्स में माता लक्ष्मी या कुबेर की तस्वीर रखते हैं, लेकिन पारंपरिक मान्यता के अनुसार पर्स को मुद्रा रखने का स्थान माना जाता है, जहां देव प्रतिमा रखना उचित नहीं माना गया.
इसके स्थान पर कुछ लोग लाल स्याही से बना छोटा यंत्र या शुभ चिह्न रखने की सलाह देते हैं, जिसे सम्मानजनक भी माना जाता है और प्रतीकात्मक रूप से शुभ भी.
मोर पंख रखने की परंपरा
मोर पंख को भारतीय परंपरा में सकारात्मकता और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. कई लोग इसे किताबों या तिजोरी में भी रखते हैं. पर्स में छोटा सा मोर पंख रखने की मान्यता भी इसी विचार से जुड़ी है कि यह नकारात्मकता दूर करता है और अवसरों को आकर्षित करता है. ग्रामीण इलाकों में आज भी कई परिवारों में बच्चों के स्कूल बैग या बटुए में मोर पंख रखने की परंपरा देखी जाती है, जिसे “नजर से बचाव” और भाग्य वृद्धि से जोड़ा जाता है.
पर्स में रखें ये छोटी पोटली-सबसे लोकप्रिय उपाय
वास्तु मान्यता में सबसे आसान उपाय एक छोटी पोटली का बताया गया है. इसके लिए पीले कपड़े का छोटा टुकड़ा लें और उसमें कुछ चावल के दाने व हल्दी रखकर बांध दें.
क्यों माना जाता है इसे शुभ
पीला रंग समृद्धि और गुरु ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. चावल को अन्न और स्थिरता का संकेत माना जाता है, जबकि हल्दी शुभता से जुड़ी है. इन तीनों का संयोजन आर्थिक स्थिरता का प्रतीक माना जाता है. कई लोग बताते हैं कि इस उपाय के बाद उन्होंने पर्स व्यवस्थित रखना शुरू किया और अनावश्यक खर्च पर ध्यान गया-यानी प्रभाव का एक हिस्सा व्यवहार बदलाव से भी जुड़ा हो सकता है.
आस्था के साथ आदत भी बदलें
पर्स से जुड़े ये वास्तु उपाय सिर्फ आस्था तक सीमित नहीं, बल्कि व्यवहार सुधार से भी जुड़े दिखते हैं. साफ पर्स, सीमित सामान और व्यवस्थित मुद्रा रखने की आदत खुद ही खर्च पर नियंत्रण ला सकती है.
इसलिए चाहे इसे वास्तु मानें या मनोवैज्ञानिक अनुशासन-पर्स को व्यवस्थित रखना और प्रतीकात्मक रूप से शुभ चीजें रखना कई लोगों के लिए आर्थिक जागरूकता का तरीका बन सकता है.







