Monday, June 24, 2024
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Geeta Jayanti 22 दिसंबर: इस गीता जयंती पर पढ़ें गीता के कुछ ऐसे उपदेश, जो बदल देंगे आपकी जिंदगी

Geeta Jayanti 22 दिसंबर 2023 : मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी का हिंदू धर्म में बहुत महत्व माना गया है। इस दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है। महाभारत काल में कुरुक्षेत्र के युद्ध में भगवद गीता का जन्म हुआ था। इस अद्भुत और शक्तिशाली ज्ञान को उत्पन्न करने वाला कोई और नहीं भगवान श्री कृष्ण हैं, यह एक मात्र ऐसा ग्रंथ है, जिसकी जयंती मनाई जाती है। इस साल गीता जयंती 22 दिसंबर 2023 को मनाई जाएगी। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी दिन कुरुक्षेत्र के मैदान में भगवान श्री कृष्ण ने कर्म से विमुख हो रहे अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। उपदेश का परिणाम निकला और अर्जुन ने अपना गांडीव उठा लिया और कर्म पथ पर चल पड़े। इसी कारण से गीता को संजीवनी विद्या की संज्ञा दी गयी है। कहा जाता है, जो जातक इस विशेष दिन पर गीता का पाठ करते हैं, उनके जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। ऐसे में आज हम गीता के कुछ उपदेश यहां साझा करेंगे, जिससे आपको जीवन जीने का सार मिलेगा।

गीता के कुछ खास उपदेश

  1. गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है कि मनुष्य को फल की इच्छा छोड़कर कर्म पर ध्यान देना चाहिए। मनुष्य जैसा कर्म करता है, उसे फल भी उसी के अनुरूप मिलता है। इसलिए व्यक्ति को अच्छे कर्म करते रहना चाहिए।
  2. श्रीकृष्ण के अनुसार व्यक्ति को खुद से बेहतर कोई नहीं जान सकता, इसलिए स्वयं का आकलन करना बेहद जरूरी है। गीता में कहा गया है कि जो व्यक्ति अपने गुणों और कमियों को जान लेता है वह अपने व्यक्तित्व का निर्माण करके हर काम में सफलता प्राप्त कर सकता है।
  3. श्रीकृष्ण का कहना है कि जो भाग्य में है, वह कहीं से भी भागकर आएगा और जो भाग्य में नहीं है, वह आकर भी भाग जाएगा, फिर चिंता किस बात की? आप सिर्फ कर्म करते रहें।
  4. श्रीकृष्ण के कहा है वह व्यक्ति मुझे प्रिय है जो न सुख के पीछे भागता है, न दुःख से दूर भागता है, न शोक करता है, न वासना करता है, बल्कि चीजों को वैसे ही आने और जाने देता है।
  5. श्रीकृष्ण का कहना है नरक के तीन द्वार हैं – काम, क्रोध और लालच। इन तीनो का त्याग करें।
  6. श्रीकृष्ण कहते हैं शरीर नश्वर हैं पर आत्मा अमर है। यह तथ्य जानने पर भी व्यक्ति अपने इस नश्वर शरीर पर घमंड करता है जोकि बेकार है। शरीर पर घमंड करने की बजाय मनुष्य को सत्य स्वीकार करना चाहिए।
  7. गीता के अनुसार समस्याएं व्यक्ति को भले अकेला कर देती हैं लेकिन उस समय ही व्यक्ति को पता चलता है कि कौन उसके साथ है और कौन नहीं।
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