Friday, June 14, 2024
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आज मनाई जा रही नारद जयंती, जानें क्या इसका महत्व

हर साल ज्येष्ठ माह में नारद जयंती मनाई जाती है। इस यह जयंती 6 को पड़ रही है। इस नारद जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन देवर्षि नारद की पूजा की जाती है। नारद जी को तीनों लोकों का पत्रकार भी कहा जाता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल ज्येष्ठ माह की प्रतिपदा तिथि को में नारद जयंती मनाई जाती है। नारद मुनि ब्रह्मधा के मानस पुत्र माने जाते हैं । नारद मुनि जी को तीनों लोकों के संदेशवाहक के रूप में जाना जाता है। नारद जी को तीनों लोकों में भ्रमण करने का वरदान मिला हुआ था। नारद जयंती पर नारद जी की पूजा करने से व्यक्ति को ज्ञान की प्राप्ति होती है।

नारद जयंती की तारीख

नारद जयंती के दिन गंगा में स्नान का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक इस दिन गंगा स्नान करने से मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है। ज्येष्ठ माह की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 5 मई को रात 11ः03 मिनट पर हो रही है। वहीं 6 मई को रात 09ः52 मिनट पर समाप्त होगी।

नारद जयंती की जन्म कथा

पौराणिक कथाओं के मुताबकि अपने पूर्व जन्म में नारद ‘उपबर्हण‘ नामक गंधर्व थे। उपबर्हण को अपने रूप का बहुत घमंड था। एक बार जब स्वर्ग में अप्सराएं और गंधर्व गीत व नृत्य से सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी की उपासना कर रहे थे। उसी दौरान उपबर्हण ने स्त्रियों के साथ स्वर्ग में प्रवेश किया और वह रामलीला में लीन हो गए। यह देख ब्रह्मा जी ने क्रोधित होकर उनको श्राप देते हुए कहा कि उनका अगला जन्म शूद्र योनि में होगा। ब्रह्मा जी के श्राप के कारण ‘उपबर्हण‘ का अगला जन्म शूद्र दासी के घर हुआ। इसके बाद वह भगवान की भक्ति में दिन रात लीन रहने लगे। कहा जाता है कि जब उपबर्हण एक दिन वृक्ष के नीचे बैठे ध्यान कर रहे थे। तभी उनको अचानक से भगवान की एक झलक दिखी। जो फौरन ही अदृश्य भी हो गई। इसके बाद उनकी भगवान के प्रति आस्था और दृढ़ व गहरी हो गई। फिर एक दिन आकाशवाणी हुई कि उपबर्हण इस जन्म में कभी भगवान के दर्शन नहीं कर पाएंगे। लेकिन अगले जन्म में वह उनके पुत्र होगें। इस आकाशवाणी के बाज उपबहर्ण ने भगवान विष्णु की घोर तपस्या की। उसी तपस्या के प्रभाव से उनका ब्रम्हा जी के मानस पुत्र नारद जी के रूप में अवतार हुआ।

कहते है कि नारद जयंती पर नारद जी की पूजा करने से व्यक्ति को ज्ञान की प्राप्ति होती है।

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