कितना भी कमाओ, हमेशा कम? किस्मत बदल देगा गुप्त नवरात्रि पर ये तरीका, तंत्र-मंत्र के लिए भी जरूरी

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अयोध्या. सनातन धर्म में गुप्त नवरात्रि का अत्यंत विशेष महत्त्व माना गया है. वैसे तो साल में चार बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, जिसमें एक शारदीय नवरात्रि, दूसरी चैत्र नवरात्रि और दो गुप्त नवरात्रि होती हैं. गुप्त नवरात्रि में गुप्त रूप से माता दुर्गा के 10 महाविद्याओं की पूजा आराधना की जाती है. तंत्र-मंत्र की साधना के लिए यह समय बेहद उत्तम माना जाता है. अगर आप गुप्त नवरात्रि के दौरान कुछ खास उपाय करते हैं तो जीवन की कई परेशानियां दूर होंगी. आर्थिक तंगी से भी मुक्ति मिलेगी. अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम बताते हैं कि वर्ष में दो बार आने वाली गुप्त नवरात्रि साधना, मंत्र सिद्धि और तंत्र-उपासना के लिए बेहद फलदायी होती है. वर्तमान में गुप्त नवरात्रि का पर्व चल रहा है. इस दौरान किए गए कुछ सरल उपाय व्यक्ति के जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल सकते हैं.

नौ फूल और लौंग
पंडित कल्कि राम बताते हैं कि गुप्त नवरात्रि में हल्दी से किया गया एक विशेष उपाय माता दुर्गा की कृपा प्राप्त करने में सहायक होता है. इसके लिए हल्दी की एक गांठ लें और उस पर नौ अलग-अलग स्थानों पर सिंदूर से टीका करें. इसके बाद इस हल्दी को माता दुर्गा के सम्मुख स्थापित करें और लौंग के नौ फूल अर्पित करें. ऐसा करने से माता रानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन की अनेक परेशानियों से मुक्ति मिलती है. माता दुर्गा को गुड़हल और गुलाब के पुष्प अर्पित करें. इसके बाद सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें. गुप्त नवरात्रि में रात्रि के समय एकांत स्थान पर दीपक प्रज्वलित कर सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का नौ बार पाठ करना शुभ है. ऐसा करने से साधक के जीवन से संकट और बाधाएं दूर हो जाती हैं.

लाल आसन
धन प्राप्ति के लिए भी गुप्त नवरात्रि में विशेष उपाय बताए गए हैं. गुप्त नवरात्रि की किसी भी रात्रि में नौ गोमती चक्र, नौ कौड़ियां और एक लाल आसन खरीदकर माता भगवती के सामने रखें. इसके ऊपर घी का दीपक प्रज्वलित करें और माता जगदंबा के मंत्रों का श्रद्धा से जाप करें. ऐसा करने से धन आगमन के मार्ग प्रशस्त होते हैं और आर्थिक स्थिति में सुधार आता है. गुप्त नवरात्रि के दौरान माता दुर्गा के मंत्रों का गुप्त रूप से जाप करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है. कहा जाता है कि इस पावन समय में की गई साधना शीघ्र फल प्रदान करती है और साधक को मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक सुख-शांति प्राप्त होती है.