दिसंबर का पहला प्रदोष व्रत मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को है. यह मंगलवार को पड़ रहा है, इसलिए यह भौम प्रदोष व्रत है. इस बार प्रदोष व्रत के दिन 3 शुभ योगों का निर्माण हो रहा है. जो लोग प्रदोष व्रत रखकर शिव जी की पूजा करते हैं, उनके कार्य सफल होते हैं, पाप, रोग और दोष मिट जाते हैं. शिव कृपा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. आइए जानते हैं कि भौम प्रदोष व्रत कब है? पूजा का मुहूर्त क्या है?
भौम प्रदोष व्रत की तारीख
दृक पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 2 दिसंबर को दोपहर में 3 बजकर 57 मिनट पर शुरू हो रही है. इस तिथि का समापन 3 दिसंबर को दोपहर 12 बजकर 25 मिनट पर होगा. प्रदोष पूजा मुहूर्त के आधार पर भौम प्रदोष व्रत 2 दिसंबर को रखा जाएगा.
इस बार भौम प्रदोष व्रत के दिन 3 शुभ योग बन रहे हैं. प्रदोष के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह में 06:57 ए एम से बनेगा, जो रात में 08:51 पी एम तक रहेगा. वहीं अमृत सिद्धि योग भी 06:57 ए एम से 08:51 पी एम तक है. उस दिन रवि योग रात में 08:51 पी एम से लेकर देर रात 01:22 ए एम तक है. सर्वार्थ सिद्धि योग में किए गए कार्य सफल होते हैं. इस योग में प्रदोष व्रत की पूजा की जाएगी, जिससे आपकी मनोकामनाएं पूरी होंगी.
उस दिन वरीयान् योग प्रात:काल से लेकर रात 09:08 पी एम तक रहेगा, उसके बाद से परिघ योग बनेगा. प्रदोष के दिन अश्विनी नक्षत्र प्रात:काल से लेकर रात 08:51 पी एम तक है, वहीं उसके बाद से भरणी नक्षत्र है.
भौम प्रदोष पूजा मुहूर्त
भौम प्रदोष के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम को 05:24 पी एम से लेकर रात 08:07 पी एम तक है. शिव पूजा के लिए आपको 02 घंटे 43 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा. शिव जी की पूजा के समय लाभ-उन्नति मुहुर्त भी होगा, उसका समय शाम को 07:06 पी एम से रात 08:47 पी एम तक है.
भौम प्रदोष व्रत के फायदे
भौम प्रदोष का व्रत करने से व्यक्ति को धन, सुख, समृद्धि की प्राप्ति होती है. भगवान शिव की कृपा से कर्ज से मुक्ति मिलती है और कर्ज भी दूर होता है. जो लोग किसी बीमारी से ग्रस्त हैं, उनको भी यह व्रत करना चाहिए, यदि उनके लिए संभव हो तो. इससे सेहत ठीक होती है.









