त्रेतायुग में जब प्रभु राम को 14 साल का वनवास हुआ और लंका का राजा रावण सीता जी का हरण कर ले गया. तो राम और रावण में भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें मेघनाद के हाथों शक्ति लगने से लक्ष्मण मूर्छित हो गए और उस कड़ी में ही कालनेमि का जिक्र आता है. वो कालनेमि सतयुग में ही मारा गया था, लेकिन अचानक से आज कलियुग में वो क्यों ट्रेंड कर रहा है? वहीं कालनेमि द्वापर युग में मथुरा का राजा भी बना था.
‘कालनेमि सनातन को कर रहे कमजोर’
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि एक संत के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ भी नहीं होता. उसकी कोई संपत्ति नहीं होती, धर्म ही उसकी संपत्ति और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है. जब कोई धर्म के विरुद्ध आचरण करता है तो समझना चाहिए कि ऐसे
अविमुक्तेश्वरानंद विवाद
18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या पर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी को संगम तट तक नहीं जाने दिया गया था. मेला प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा वजहों से उस क्षेत्र में पैदल जाने की अनुमति दी थी. पालकी रोके जाने से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद काफी नाराज हैं और वे धरने पर बैठे हैं. सीएम योगी के इस बयान को अविमुक्तेश्वरानंद विवाद से ही जोड़कर देखा जा रहा है.
रामायण काल यानि त्रेतायुग में कालनेमि को रावण का ममेरा भाई माना जाता है. कालनेमि मायावी राक्षस मारीच का बेटा था, मारीच रावण का मामा लगता था. कालनेमि ने हनुमान जी को छलने और उनको मारने के लिए साधु का रूप धारण किया था.
एक अन्य कथा में कालनेमि को हिरण्याक्ष का बेटा बताया गया है, जिसका वध भगवान विष्णु ने किया था. कालनेमि के भाई का नाम अंधक था. कालनेमि भक्त प्रह्लाद का चचेरा भाई था. जब कालनेमि मारा गया तो भक्त प्रह्लाद ने भगवान विष्णु से उसकी मुक्ति की प्रार्थना की. तब उन्होंने कहा कि अगले जन्म में फिर वो उनके हाथों मारा जाएगा, और तब उसका उद्धार होगा. वही कालनेमि अगले जन्म में कंस के रूप में पैदा हुआ और द्वापर में मथुरा का राजा बना, जिसे विष्णु अवतार श्रीकृष्ण ने मारा.
हनुमान को छलना चाहता था कालनेमि
लंका युद्ध के समय जब मेघनाद ने लक्ष्मण को शक्ति बाण मारा तो वे मूर्छित हो गए. उनके प्राणों की रक्षा के लिए संजीवनी बूटी सूर्योदय से पहले लेकर आनी थी. राम भक्त हनुमान संजीवनी बूटी लाने के लिए हिमालय की ओर उड़ चले. इस बात की जानकारी रावण को हुई तो उसने अपने मायावी भाई कालनेमि को बुलाया. उसने कालनेमि से कहा कि वह हनुमान को रास्ते में ही रोक दे, ताकि सूर्योदय तक वे संजीवनी बूटी लेकर लक्ष्मण तक न पहुंच सकें.
कालनेमि एक पहाड़ी पर साधु का रूप धारण करके एक कुटिया में बैठ गया. अपनी माया से एक सरोवर का निर्माण किया और उसमें एक मकरी को भी रख दिया. वीर हनुमान जब आकाश मार्ग से उड़ते हुए उसके पास से जा रहे थे, तो साधु बने कालनेमि ने जोर जोर से राम नाम का जाप करने लगा. राम नाम सुनते ही हनुमान वहां रूक गए, जिज्ञासावश वे उसके पास गए. वे जानना चाहते थे कि ऐसी जगह पर कौन व्यक्ति है, जो उनके प्रभु के नाम का जाप कर रहा है. हनुमान जब कालनेमि के पास गए तो उसने कहा कि आप थक गए होंगे. सरोवर में जाकर स्नान कर लीजिए.







