पुराने मटके में पानी पीना पड़ सकता है भारी, बढ़ सकता है पेट खराब होने का खतरा

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मिट्टी के मटके का उपयोग भारत में वर्षों से पानी रखने के लिए किया जाता रहा है। ये न केवल पानी को ठंडा रखता है बल्कि इसमें प्राकृतिक स्वाद भी बना रहता है। मिट्टी के मटके की खासियत है कि यह पानी को लंबे समय तक ताजगी बनाए रखता है और उसका स्वाद भी बढ़ाता है।इसी बीच अब जब दोबारा से गर्मी का मौसम शुरू हो गया है तो अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या पिछले साल वाला मटका फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे में आपको ये समझने की जरूरत है कि मिट्टी के मटके का रखरखाब काफी अलग होता है। इसलिए इसका इस्तेमाल एक ही सीजन किया जा सकता है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि अगर आप पिछले साल का मटका फिर इस्तेमाल में लाएंगे तो क्या होगा।

पेट में संक्रमण

पुराने मटके में जमा बैक्टीरिया और फफूंदी से दस्त, पेट दर्द और अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं। जब मटका पूरी तरह से साफ नहीं होता, तो इसमें मौजूद सूक्ष्मजीव भोजन या पानी के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इसलिए इसके इस्तेमाल से बचें। 
 
फूड पॉइजनिंग

गंदे मटके में उगने वाले सूक्ष्मजीव खाने या पानी के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इससे उल्टी, बुखार और पेट में गंभीर तकलीफ हो सकती है। इसलिए इस सीजन नया मटका लेकर आएं। 

एलर्जी और त्वचा रोग

कुछ लोगों में मटके की फफूंदी या धूल से त्वचा पर चकत्ते, खुजली या एलर्जिक रिएक्शन हो सकते हैं। यह विशेष रूप से बच्चों और संवेदनशील लोगों में अधिक दिखाई देता है। तो अगर नये मटके का पानी पीने से भी ऐसी दिक्कत दिख रही है तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।

सांस संबंधी समस्या

अगर मटका गीला या फफूंदी वाला हो, तो इसके माइक्रोस्पोर्स हवा में फैल सकते हैं। इससे अस्थमा, सर्दी-जुकाम और सांस लेने में तकलीफ जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं। इसलिए गंदे मटके से दूर रहें। 

स्वास्थ्य पर लंबी अवधि के असर

लगातार गंदे मटके का इस्तेमाल करने से शरीर में संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। लंबे समय में यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर सकता है और शरीर को बीमारियों के प्रति संवेदनशील बना सकता है। इसलिए स्वस्थ्य रहने के लिए साफ मटका जरूरी है।