Thursday, December 8, 2022
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Pandit Pradeep Mishra – पं प्रदीप मिश्रा की शिवपुराण कथा 12 से 18 दिसंबर बैतूल में

Pandit Pradeep Mishra : खचाखच भीड़ के बीच कथा में आने वाले हर व्यक्ति की एक ही आस होती है किसी तरह प्रसिध्द कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा की कथा पंडाल में बैठकर कथा सुन सकें। नजारा ऐसा होता है मानो कथा नहीं मेला लगा हो। हालांकि, यह संभव नहीं हो सकता क्योंकि कथा के दूसरे दिन यहां दोगुनी भीड़ उमड़ पड़ती है। इस डर में कि अगले दिन जगह नहीं मिली तो? सुबह होते भीड़ बढ़ने लगती है।

Pandit Pradeep Mishra – प्रसिध्द कथावाचक पं प्रदीप मिश्रा की शिवपुराण कथा मां ताप्ती शिवपुराण समिति बैतूल के बैनर तले आगामी 12 दिसंबर से 18 दिसंबर बैतूल में होने जा रही है। इस संबंध में समिति के संयोजक राजा ठाकुर ने बताया कि किलेदार परिवार और बाथरे परिवार के संयुक्त तत्वावधान में बालाजीपुरम रोड पर ब्रह्माकुमारी आश्रम के पास किलेदार गार्डन में यह कथा होगी। राजा ठाकुर ने बताया कि इन सात दिनों की कथा में लाखों शिवभक्त आएंगे। इसके लिए पूरा बैतूल इनकी मेजबानी कर शिवभक्तों के लिए आवास, भोजन, पानी, सफाई, आवागमन, पार्किंग की व्यवस्था करेगा। इन व्यवस्थाओं के लिए भारी संख्या में शिवभक्त स्वमेव संपर्क कर रहे हैं।

एक लोटा जल समस्या का हल

अपने कथा के कार्यक्रमों में पंडित प्रदीप मिश्रा लोगों से कहते हैं एक लोटा जल समस्या का हल। इसके बारे में उन्होंने कहा- शिव बाबा की कृपा होती है जल चढ़ाने से। माता पार्वती भी उन्हें जल चढ़ाती थीं। भगवान गणेश जी भी। भगवान राम जब अयोध्या से निकले और जहां-जहां रुके शिवलिंग बनाए और जल चढ़ाया। जल का महत्व ये है कि हम अपने हृदय भाव भगवान को अर्पित कर रहे हैं। हृदय में शिव का ध्यान करके जल चढ़ाइए और अपनी समस्या भगवान से साझा करिए। हमारे यहां शिव पुराण में कमल गट्‌टे के जल का प्रयोग बताया गया है। इसे शुक्रवार के दिन भगवान शिव पर चढ़ाएं, इससे लक्ष्मी आती है और आरोग्यता रहती है।

कर्म करिए और विश्वास के साथ भगवान शिव की आराधना करें

पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा- भगवान शिव कर्म करने को कहते हैं। हम अपनी कथा में भी लोगों से यही कहते हैं कि कर्म करिए और विश्वास के साथ भगवान शिव की आराधना करें। भगवान शिव ने अपने पुत्रों को विष्णु की तरह बैकुंठ और रावण को दी गई सोने की लंका नहीं दी। उन्होंने उन्हें भी कर्म करने दिया।

भगवान शिव कोई नशा नहीं करते

विष पीते समय जो बूंदे गिरीं वो भांग धतूरा बनीं, वो सिर्फ शिव के पास रखी होती हैं। उनका सेवन शिव नहीं करते। आजकल युवा नशे की ओर जा रहे हैं। आज के पोस्टर्स भगवान शिव को गांजा पीते या चिलम के साथ दिखाया जाता है। स्वयं माता पार्वती ने शिव जी से पूछा था आप किस नशे में रहते हैं तो उन्होंने कहा – राम नाम का नशा है।

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