Wednesday, February 21, 2024
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CAA: राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद सरकार करेगी नागरिकता (संशोधन) अधिनियम लागू!

CAA: देश में इस वक्त राम मंदिर में 22 जनवरी को होने जा रही राम प्राण प्रतिष्ठा समारोह की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। अब जानकारी मिली है कि सरकार राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद कुछ ही दिनों में देश सीएए को लागू करने तैयारी कर रही है। आपको बता दें कि इस विधेयक को दिसंबर 2019 में संसद में मंजूरी मिल चुकी है। याद दिला दें कि इस विधेयक के संसद में पारित होने के बाद सीएए के विरोध में देश में जगह जगह प्रदर्शन शुरू हो गए थे। इस नियम के तहत बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पंजाब में जो लोग धार्मिक उत्पीडऩ को शिकार होंगे उन हिन्दुओं, सिखों, बौद्ध, जैनियों, इसाईयों और पारसियों को भारतीय नागरिक देने का प्रावधान किया गया है। चूंकि बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान मुस्लिम बहुसंख्यक देश है इसलिये यहां के मुस्लिमों को इससे अलग रखा गया है देश भर में इसी को लेकर प्रदर्शनों की शुरूआत हो गई थी।

सीएए की पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन

सरकारी सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) के नियम तैयार किये गये हैं उन्हें लोकसभा चुनावों से काफी पहले अधिसूचित किया जा सकता है। अभी तक सीएए के अधिनियमों को अधिसूचित नहीं किया गया था। यह जानकारी भी मिली है कि सीएए की पूरी प्रक्रिया आनलाइन होगी जिसमें मोबाइल एप के द्वारा भी आवेदन किया जा सकेगा। जो लोग भारतीय नागरिकता लेने चाहेंगे उन्हें यह बताना जरूरी होगा कि उन्होंने किस वर्ष में बिना दास्तावेजों के भारत में शरण ली अथवा यात्रा की और फिर यही रह रहे हैं। इस संबंध में उनसे कोई भी डाक्यूमेंट्स नहीं मांगे जाएंगे। देशभर में अभी तक 9 राज्यों में जिला मजिस्ट्रेटों और होम सेक्रेट्रीज को नागरिकता अधिनियम 1955 की शक्तियों के तहत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आने वाले हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों, पारसियों और ईसाइयों को भारतीय नागरिकता देने की शक्तियां दे दी गई हैं। नियमों की अधिसूचना जारी होने के साथ ही देश में सीएए लागू हो जाएगा। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पिछले दिनों पश्चिम बंगाल में एक सभा में कहा भी था कि सीएए भारत का कानून है और इसे कोई रोक नहीं सकता है। सभी पात्र लोगों को नागरिक दी जाएगी। सीएए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।

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