CRPF में भ्रष्टाचार के आरोप: क्या डीआईजी और कमांडेंट स्तर के अफसरों को मिल रहा संरक्षण?

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नई दिल्ली|प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भ्रष्टाचार के खिलाफ जहां सख्ती से पेश आ रहे हैं और सरकारी खर्च घटाने की नीति पर जोर दे रहे हैं, वहीं सीआरपीएफ में एक कमांडेंट और डीआईजी, सरकार के इन प्रयासों को धता बता रहे हैं। भ्रष्टाचार के दो मामलों की शिकायत सीआरपीएफ डीजी को दी गई है। 149 वीं बटालियन के कमांडेंट के खिलाफ शिकायत देने वाले अधिकारी वहीं पर बतौर 'सेकेंड-इन-कमांड' तैनात हैं। दूसरे मामले में डीआईजी, ग्रुप केंद्र 'खटखटी' पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। जबरन वसूली की यह शिकायत भी बल के महानिदेशक को भेजी गई है। आरोप है कि फोर्स मुख्यालय में लंबे समय से कार्यरत एक आला आईपीएस अधिकारी, इन मामलों में सख्त कार्रवाई की प्रक्रिया को रोक रहे हैं। दूसरी तरफ सूत्रों का कहना है कि डीजी जीपी सिंह, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हैं। संभव है कि वे जल्द ही इन केसों में कार्रवाई करें। इस बाबत सीआरपीएफ हेडक्वार्टर के डीआईजी एम दिनाकरण, जिसके पास 'पर्स/पीआर' का चार्ज है, उनसे दोनों मामलों में पक्ष जानने का प्रयास किया गया। फोन कॉल और मैसेज किए जाने के बावजूद जवाब नहीं मिल सका। 

कमांडेंट आशीष यादव पर लगाए गंभीर आरोप … 

149 वीं बटालियन के कमांडेंट आशीष यादव पर भ्रष्टाचार के कथित आरोप लगाए हैं। यह शिकायत भूप किशोर शर्मा, सेकेंड-इन-कमांड द्वारा भेजी गई है। शिकायतकर्ता के पास लेखा अधिकारी के कर्तव्यों का निर्वहन करने के अलावा सेकेंड-इन-कमांड (ऑपरेशन) का अतिरिक्त प्रभार भी है। शिकायत में सरकारी निधि, जीआईए और एसएस फंड के दुरुपयोग की बात कही गई है। उन्होंने एसआई/जीडी एन. माचक्कलाई का हवाला दिया है, जो पिछले पांच वर्ष से लगातार इस यूनिट में क्यूएमसी के कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं। उन पर सरकारी निधियों के दुरुपयोग और आपूर्ति आदेश के अनुसार माल प्राप्त न होने का आरोप है। उन्हें कमांडेंट का करीबी बताया जाता है। वे स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं/विक्रेताओं से माल की खरीद के दौरान कथित तौर पर कमीशन प्राप्त करते हैं और चुप रहते हैं। यादव पर आरोप है कि वे दूसरे अधिकारियों को कार्यभार नहीं सौंपते। वे 29/11/2023 को कमांडेंट बनकर आए थे। पिछले 2 वर्षों से उन्होंने केवल 30 दिनों की छुट्टी ली है। वे अपने नियंत्रण वाले अधिकारियों को अक्सर चेतावनी पत्र जारी करते रहते हैं।

 राजस्थान, हरियाणा व दिल्ली एनसीआर का स्टाफ …  

कमांडेंट आशीष यादव ने बटालियन मुख्यालय में राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली एनसीआर से ताल्लुक रखने वाले स्टाफ को अहम जिम्मेदारी दी। इन्हें स्टॉक रजिस्टर में प्रविष्टि करने के लिए प्रमुख धारक बनाया गया था। भंडार, वस्त्र, शिविर सुरक्षा सामग्री, पुलिस बल और सरकारी रेजिमेंटल फंड आदि में दुरुपयोग किया जाता। शिकायत में एएसआई धर्मपाल 'बीक्यूएमएच', हवलदार एचसी/जीडी अनिल लता 'एमटी हवलदार', एचसी/जीडी मुकेश 'पुलिस बल हवलदार', एचसी/जीडी प्रदीप 'कैंटीन हवलदार', सीटी/जीडी अमित 'कमांडेंट कार्यालय का सहायक', इंस्पेक्टर/जीडी घासी राम यादव 'एसएम' और एएसआई/जीडी मूल चंद यादव 'बीएचएम' का नाम लिखा है। आरोप है कि ये कार्मिक, सीओ के लिए जासूस की भूमिका निभाते हैं। इन कर्मियों की तैनाती 2023 से प्रभावी है। वे यूनिट, मेस, कैंटीन, स्टोर्स, पुलिस डिपो पर नजर रखते हैं। 

सहायक कमांडेंट का काम इंस्पेक्टर को दे दिया … 

इस यूनिट में पांच सहायक कमांडेंट तैनात हैं, लेकिन इन कंपनी कमांडरों का बार-बार तबादला हो रहा है। कमांडिंग ऑफिसर का प्रभार इंस्पेक्टर/जीडी को सौंप दिया जाता है। आरोप है कि हर महीने कमांडेंट इन इंस्पेक्टर/जीडी को मेसर्स अरविंद ट्रेडर्स द्वारा आपूर्ति किए जा रहे राशन को प्राप्त करने के लिए कहते हैं। चेक के माध्यम से राशन का भुगतान किया जाता है। कमीशन आदि बातें, इंस्पेक्टर/जीडी घासी राम यादव देखते हैं। वहां से तय राशि सीओ तक पहुंचती है। कंपनी कमांडर के रूप में ए/149 इंस्पेक्टर/जीडी सरवनन, बी/149 इंस्पेक्टर/जीडी घासी राम यादव, सी/149 इंस्पेक्टर/जीडी अंकुर मोहन साहू, डी/149 इंस्पेक्टर/जीडी मदन लाल, ई/149 – इंस्पेक्टर/जीडी कमलेश कुमार सिंह और एफ/149 इंस्पेक्टर/जीडी गुरुसदय पांडा को तैनात किया गया। अफसरों के शौचालयों के नवीनीकरण के लिए 5,50,000 रुपये प्राप्त हुए थे। आरोप है कि कमांडेंट यादव ने इस पर पैसा खर्च नहीं किया। धन को हड़प लिया गया। शौचालयों के नवीनीकरण का काम एएसआई/जीडी मूल चंद, बीएचएम द्वारा किया गया था, जिसमें पीटी, प्रशिक्षण और रोटेशनल प्रशिक्षण में कार्यरत जवानों का इस्तेमाल किया गया था। पुरानी इमारतों और मुख्यालय भंडार में उपलब्ध अनुपयोगी सामान से नवीनीकरण कर दिया गया। डीजी जनरेटर सेटों की मरम्मत और स्पेयर पार्ट्स बदलने के लिए मंजूरी दी गई, लेकिन कोई स्पेयर पार्ट्स नहीं बदले। निजी लाभ के लिए पैसे हड़प लिए गए। बिल संख्या 913170381 एसआई/जीडी एन. माचक्कलाई द्वारा बीक्यूएमएच एएसआई/जीडी धर्मपाल को दिए गए थे, और उन्होंने इसे स्टॉक रजिस्टर में दर्ज किया। 

बैडमिंटन कोर्ट में आवास तैयार किए गए …  

यूनिट में ओएसएल के कई मामले हैं, जो कि प्रभावी तिथि से लागू हैं। 29/11/03 को, सभी मामलों को कमांडेंट द्वारा जवानों से इंस्पेक्टर/जीडी के माध्यम से ले देकर नियमित किया गया। यहां पर घासी राम यादव ने सीओ के खास आदमी की भूमिका निभाई। वह ओसी मुख्यालय/149 और ओसी बी/149 का प्रभार संभाल रहा है। यादव, सीओ की मेहरबानी के चलते दूसरे अधिकारियों को कुछ नहीं समझता। जॉयसागर में बी/149 स्थान पर दो कंपनियों को जबरन तैनात किया गया। बी/149 और जी/149। वहां जवानों के रहने के लिए आवास की कमी है। युद्धग्रस्त टिन शीट से बना अस्थायी आवास बैडमिंटन कोर्ट में तैयार किया गया। दोनों कंपनियों के कर्मियों को एक ही स्थान पर जबरन ठहराया गया है। इस स्थान पर केवल 5 शौचालय उपलब्ध हैं। डीजी को इसके फोटो भी भेजे गए हैं। जवानों को स्थानीय विक्रेताओं से आरओ का पानी खरीदना पड़ता है। वे पिकअप वाहन के माध्यम से पानी की आपूर्ति करते हैं। इसके अतिरिक्त, ओएनजीसी द्वारा डी/149 बटालियन, सीआरपीएफ को खाना पकाने के लिए गैस की आपूर्ति की जाती है। इसका बिल भी स्थानीय खरीद रजिस्टर में दर्ज किया जाता है। हर महीने 20,000 रुपये का गैस बिल इंस्पेक्टर/जीडी से प्राप्त होता है। आरोप है कि कमांडेंट यादव को उनके निजी लाभ के लिए इस राशि का भुगतान किया जाता है। 

उत्पीड़न की घटनाओं पर कार्रवाई नहीं … 

आरोप है कि बी/149 के कांस्टेबल आशीष कुमार जेना, इंस्पेक्टर/जीडी घासी राम यादव द्वारा उत्पीड़न किए जाने के कारण मानसिक पीड़ा झेल रहे हैं। कांस्टेबल ने कमांडेंट कार्यालय जाकर इंस्पेक्टर यादव द्वारा किए गए यौन उत्पीड़न की सूचना दी थी, लेकिन कमांडेंट द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। अंततः कांस्टेबल ने सीओ दफ्तर को पत्र लिखकर आत्महत्या करने का निर्णय लिया। अंत में डीआईजी ऑप्स डिब्रूगढ़ ने उन्हें अटैचमेंट ड्यूटी पर भेजकर उनकी जान बचाई। कई दूसरे मामलों में भी कार्रवाई इसलिए नहीं हो सकी, क्योंकि सीओ अपने लोगों को बचा रहे हैं। इंस्पेक्टर यादव पर भ्रष्टाचार का आरोप है कि उन्होंने एसएम ओसी-मुख्यालय/149 और ओसी बी/149 रहते हुए 2023 बैच I/149 के नए भर्ती हुए सीटी/जीडी से हर महीने कथित तौर पर हजार रुपये लेते थे। जॉयसागर में एक ही कंपनी के लिए परिसर है, लेकिन यहां बी/149 और जी/149 को रखा गया है। 80 सदस्यों की जगह पर 160 कर्मियों को ठहराया गया। सीओ के कार्यकाल में कई जवान शहीद हुए हैं। इस मामले की उचित जांच हो तो बड़ा खुलासा हो सकता है। 

एसडीजी, आईजी के दौरे से कुछ नहीं बदला … 

डीआईजी सीएनटी जीसी एसएलजी द्वारा सिग्नल संख्या सी.आई.वी-01/2026-पीए-जीसीएसएलआर दिनांक 05/01/2026 के माध्यम से इंस्पेक्टर/जीडी घासी राम यादव के खिलाफ जांच का आदेश दिया गया था। डीआईजी डीटी बनर्जी जांच अधिकारी थे। जांच के लिए जब वे बटालियन मुख्यालय गए, तब लेकिन इंस्पेक्टर घासी राम यादव नशे में थे। उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। जांच के दौरान वे ऑफिसर कमांडिंग जी/149 के प्रभार में रहे। 27/12/2025 को इंस्पेक्टर/जीडी घासी राम यादव (ओसी जी/149 के अस्थायी प्रभार में) ने एफएसएस फंड से 10000 रुपये निकाले। 13/01/2026 को घासी राम यादव (ओसी जी/149 के अस्थायी प्रभार में) ने चेक संख्या 856266 के माध्यम से 23000 रुपये निकाले। इन मामलो में जो पैसा निकाला, वह सीओ को दिया गया। डीआईजी डीटी बनर्जी, डीआईजी प्रभाकर त्रिपाठी, डीआईजी हरपाल सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने इन शिकायतों की जांच की है। उन्हें सही पाया है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई है। शिकायत में लिखा है कि एसडीजी एनईजेड, आईजी जोरहाट और आईजी एनईएस सभी ने यूनिट का दौरा किया। जवानों की रहने की स्थिति देखी है और उनकी शिकायतें सुनी हैं, फिर भी कुछ नहीं बदला। 

डीआईजी पर जबरन वसूली का आरोप … 

ग्रुप केंद्र खटखटी के डीआईजी अनिल बिष्ट पर भी एक शिकायत में भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। शिकायत में जबरन वसूली का भी आरोप लगाया गया है। यह शिकायत एक रंगरुट द्वारा डीजी सीआरपीएफ को भेजी गई है। रंगरुट ने 42.54 लाख रुपये की वसूली को लेकर बल मुख्यालय को सबूत भी दिए हैं। इस बाबत सीआरपीएफ में एक वीडियो भी वायरल हुआ है। 24 फरवरी को  डीआईजी ने ग्रुप केंद्र खटखटी में 709 नए रंगरूटों को विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों में भेजने के लिए रिसीव किया। शिकायत में लिखा है कि उन्होंने सरकार द्वारा निःशुल्क आपूर्ति की गई वर्दी के दो ट्रक मंगवाए। रंगरूटों को उनकी इच्छा के विरुद्ध 6000 रुपये प्रति रंगरूट, किट लेने के लिए मजबूर किया गया। शिकायतकर्ता ने जबरन वसूली के ऑडियो और वीडियो सबूत उपलब्ध कराए हैं। इस किट की बिक्री से 4254000 रुपये एकत्रित हुए। आरोप है कि आपूर्तिकर्ता ने 2000000 रुपये कथित तौर पर सीधे डीआईजी को भुगतान कर दिए। बताया गया कि उक्त डीआईजी बिष्ट दो मार्च से को एनडीआरएफ में प्रतिनियुक्ति पर जा रहे थे। रंगरूटों ने इस मामले की गहन जांच कराने की मांग की है। यह केस भी सीआरपीएफ हेडक्वार्टर तक पहुंचा है, लेकिन अभी तक किसी तरह की कोई कार्रवाई हुई है या नहीं, इसका पता नहीं लग सका है।