हैदराबाद: आज का दिन हरेक भारतीयों के लिए काफी खास है. यह एक ऐसा दिन है, जिसपर हरेक भारतीय नागरिकों को भारत पर गर्व होना चाहिए. आज से ठीक दो साल पहले, 23 अगस्त 2023 को भारत ने अंतरिक्ष में एक शानदार उपलब्धि हासिल की थी. इस दिन भारत चंद्रमा के साउथ पोल यानी दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र तक पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बना था. इसके अलावा भारत चांद की सतह तक पहुंचने वाला दुनिया का चौथा देश भी बना था. इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हमेशा के लिए यादगार बनाने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 अगस्त को ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ (National Science Day) घोषित किया. इस कारण आज पूरा देश अपना दूसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मना रहा है. इस कारण भारतीय अंतरिक्ष विभाग के द्वारा पूरे देश में कई प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है.
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2025 की थीम "विकसित भारत 2047 के लिए अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी और ऐप्लिकेशन्स का उपयोग (Leveraging Space Technology and Applications for Viksit Bharat 2047)" है. भारत में दूसरे राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस को मनाने के लिए पिछले करीब एक महीने से देशभर में कई कार्यक्रम और उत्सवों का आयोजन किया जा रहा है. इन आयोजनों का उद्देश्य भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को हरेक इंसान तक पहुंचाना, वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करना और विकसित भाकत के सपने को साकार करने में अंतरिक्ष क्षेत्र की भूमिका पर ध्यान देना है. यह थीम भारत की लंबे विज़न और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट का प्रतिक है, जो आने वाले सालों में भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद करेगी.
भारतीय स्पेस मिशन की शुरुआत
भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में कमाल की कामयाबियां हासिल की है, जिसका लोहा दुनिया के बड़े-बड़े देश भी मानने लगे हैं. इसकी शुरुआत भारत की आज़ादी के महज 12 साल बाद यानी सन् 1962 में ही हो गई थी. उस साल भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने नेशनल स्पेस प्रोग्राम के तहत Indian National Committee for Space Research (INCOSPAR) की स्थापना की थी, जिसका नेतृत्व भारतीय नेशनल स्पेस प्रोग्राम के पहले चेयरमैन विक्रम साराभाई कर रहे थे.
21 नवंबर 1963 को केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम के पास थुम्बा से भारत ने पहला साउंडिंग रॉकेट लॉन्च किया.उसके बाद 15 अगस्त 1969 विक्रम साराभाई के नेतृत्व में ही भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी Indian Space Research Organisation (ISRO) की स्थापना की गई. उस वक्त भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं. 1972 में Space Commission और Department of Space बनाए गए और इसरो का स्थानांतरण हुआ.
19 अप्रैल 1975 में भारत का पहला सैटेलाइट आर्यभट्ट (Aryabhata) सोवियत रॉकेट (Kosmos-3M) द्वारा लॉन्च किया गया और यह तारीख भारतीय अंतरिक्ष इतिहास के लिए अमर हो गई. 1975 में ही भारत ने नासा (NASA) की मदद से SATELLITE INSTRUCTIONAL TELEVISION EXPERIMENT (SITE) को सफलतापूर्वक पूरा किया, जिसकी मदद से भारत में टीवी देखने और टीवी पर दूरदर्शन चैनल देखने की शुरुआत हुई.
उसके बाद से भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में कई शानदार उपलब्धियों को हासिल किया, जिनमें से एक खास उपलब्धि 3 अप्रैल 1984 को हासिल की गई थी. उस दिन राकेश शर्मा अंतरिक्ष तक पहुंचने वाले पहले भारतीय बने थे. वह सोवियत Soyuz T‑11 से अंतरिक्ष गए थे, जो रूस का एक स्पेसक्राफ्ट था.