नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के कैलाश नगर में साल 2017 में हुई चंद्रशेखर की हत्या के मामले में अदालत ने मंदिर के पुजारी और उसकी पत्नी को दोषी ठहराया है, जिन्होंने साजिश के तहत गला घोंटकर शव को जलाने का प्रयास किया था। पूर्वी दिल्ली के कैलाश नगर इलाके में वर्ष 2017 में मंदिर के भीतर एक व्यक्ति की हत्या के मामले में अदालत ने पुजारी और उसकी पत्नी को दोषी करार दिया है। कड़कड़डूमा स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुराग ठाकुर की अदालत ने पुजारी लखन दुबे और उसकी पत्नी कमलेश को हत्या, सबूत मिटाने और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मृतक चंद्रशेखर का शव 27 सितंबर 2017 को उसी मंदिर के कमरे में मिला था, जहां लखन दुबे पुजारी के रूप में कार्यरत था। मंदिर के सभी कमरों और सीढ़ियों की चाबियां उसी के पास थीं। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और गवाहों के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि हत्या में पुजारी और उसकी पत्नी की संलिप्तता थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 25 सितंबर 2017 को कमलेश चंद्रशेखर को यह कहकर दिल्ली लाई कि उसका पति बाहर गया हुआ है। आरोप है कि उसने खाने में नींद की गोलियां मिलाईं। जब चंद्रशेखर बेहोश हो गया, तो दोनों ने मिलकर रस्सी से उसका गला घोंटकर हत्या कर दी। इसके बाद पहचान छिपाने और सबूत नष्ट करने के उद्देश्य से शव को आग लगा दी गई। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में सफल रहा है। दोषी दंपति की सजा पर सात जनवरी को दलीलें सुनी जाएंगी।









