ईंधन संकट के बीच राहत: रूस से कच्चा तेल और अमेरिका से रसोई गैस के जहाज मंगलुरु पहुंचा

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मंगलुरु (कर्नाटक): इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते वैश्विक तनाव और युद्ध के माहौल के बीच, कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के न्यू मंगलुरु पोर्ट (NMPA) पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बड़ी हलचल देखी गई है. शनिवार और रविवार को रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल और अमेरिका से एलपीजी लेकर दो बड़े जहाज सुरक्षित पहुंच गए हैं.

रूस से आया 96,000 मीट्रिक टन कच्चा तेल

रूस के प्रिमोर्स्क (Primorsk) बंदरगाह से 'एक्वा टाइटन' नामक विशाल जहाज शनिवार देर रात मंगलुरु पहुंचा. इस जहाज में लगभग 96,000 मीट्रिक टन 'यूराल क्रूड ऑयल' (कच्चा तेल) लदा हुआ है. अधिकारियों के मुताबिक, यह तेल मंगलुरु रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) के लिए मंगाया गया है. वर्तमान में जहाज से तेल उतारने की प्रक्रिया जारी है, जो स्थानीय रिफाइनरी की जरूरतों को पूरा करेगा.

 

    अमेरिका से पहुंची 16,000 मीट्रिक टन रसोई गैस

    कच्चे तेल के साथ-साथ गैस आपूर्ति के मोर्चे पर भी राहत भरी खबर है. रविवार सुबह अमेरिका के टेक्सस से 'पिक्सिस पायोनियर' नामक मालवाहक जहाज 16,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर मंगलुरु बंदरगाह पहुंचा. यह खेप मंगलुरु स्थित 'एजिस गैस स्टोरेज यूनिट' को सप्लाई की जा रही है. न्यू मंगलुरु पोर्ट अथॉरिटी के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि गैस उतारने का काम शुरू कर दिया गया है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं.

    क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम

    वैश्विक स्तर पर चल रहे युद्ध और अस्थिरता के बीच रूस और अमेरिका जैसे देशों से ईंधन की यह निर्बाध आपूर्ति भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. अधिकारियों ने बताया कि दोनों जहाजों के आगमन और अनलोडिंग की प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और सुचारू रूप से चल रही है.