Monday, July 22, 2024
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IIT Technology: गोबर से बनेगी ईंट, गर्मियों में घरों को ठंडा और सर्दियों में गर्म रखने में मिलेगी मदद

IIT Technology: भोपाल। देश में हर दिन नए इनोवेशन होते जा रहे हैं। सीमेंट और मिट़टी से बनी ईंट जहां ठंड में अधिक ठंड का अहसास कराती हैं वहीं गर्मीयों में यह ज्‍यादा तपती हैं। लेकिन आईआईटी इंदौर ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसके माध्‍यम से अब गोबर से ईंट बनाई जा सकेगी। इस ईंट से बने मकान न केवल कास्‍ट के लिहाज से सस्‍ते होंगे या यह कहें कि मकान की निर्माण लागत घटाएंगे, बल्कि गर्मियों में ठंडक का अहसास दिलाएंगे। यह तकनीक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर ने कम लागत में गोबर की मदद से ईंटें बनाने की नई तकनीक विकसित की है। आईआईटी इंदौर के प्रो. संदीप चौधरी और शोधार्थी संचित गुप्ता द्वारा सिविल अभियांत्रिकी विभाग ने गोबर आधारित प्राकृतिक फोमिंग एजेंट विकसित किया है। गाय के गोबर से बना प्राकृतिक फोमिंग एजेंट देश में अपनी तरह का पहला उत्पाद है। इस पर्यावरण हितैषी उत्पाद को ने विकसित किया है। गोब-एयर के इस्तेमाल से ग्रीन बिल्डिंग स्कीम में भी लाभ मिलेगा। दरअसल, भारत सरकार ग्रीन बिल्डिंग्स स्कीम पर जोर दे रही है। इसके लिए सरकार ने रेटिंग सिस्टम भी बनाए हैं। जिन बिल्डिंग को ग्रीन रेटिंग अधिक मिलती है, उन्हें टैक्स में सब्सिडी व अन्य लाभ मिलते हैं। भारत में तीन एजेंसी बिल्डिंग की रेटिंग करती हैं, जिसमें जीआरएचए, एलईईडी और आइजीबीसी शामिल हैं। गोब-एयर से तैयार की गई ईंट के इस्तेमाल पर बिल्डर्स को कुछ अधिक प्वाइंट अर्जित करने में मदद मिलेगी। साथ ही बिल्डिंग अधिक पर्यारवरण हितैषी रहेंगी। प्रो. चौधरी ने कहा कि हम गाय के गोबर से अधिक आय उत्पन्न करने और आवारा पशुओं के प्रबंधन में गौशालाओं की सहायता करने के तरीकों और साधनों पर काम कर रहे थे। तभी हमने गोबर आधारित फोमिंग एजेंट विकसित किया। इसे हमने गोब-एयर नाम दिया है। इसे तैयार करने के लिए गोबर को सुखाकर उसे पांच मिनट तक मिक्सर मशीन में पीसा जाता है। इससे यह 300 माइक्रोन मीटर के साइज पर पिस जाता है और एक अच्छा फोम तैयार होता है।

गुणवत्‍तापूर्ण ईंट होगी तैयार

दरअसल, अभी तक ईंट में फोमिंग एजेंट के लिए कई तरह के कैमिकल मिलाए जाते हैं। हमने गोबर से ही फोमिंग एजेंट तैयार किए हैं। इसे कांक्रीट में मिलाने से हल्का और अच्छी गुणवत्ता वाली ईंट तैयार होती है। यह व्यावसायिक रूप से उपयोग की जाने वाली निर्माण सामग्री की तुलना में लगभग 24 प्रतिशत कम लागत पर उत्पादित की जा सकती है। यह लाल मिट्टी की ईंटों और फ्लाई ऐश ईंटों की तुलना में अधिक किफायती है। इस प्रकार गाय के गोबर से होने वाली आय में भी बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा गर्मियों के दौरान घरों को ठंडा और सर्दियों के दौरान गर्म रखने में मदद कर सकता है। गोक्रीट के जरिए बने घर की, तो इसमें जरा भी कार्बन उत्सर्जित नहीं होता। यही नहीं गोबर इकलौती ऐसी चीज है जो पशुपालक रोजाना प्राप्त कर सकता है।

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