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गाजा पर भारत के रुख को लेकर सोनिया गांधी का आर्टिकल, BJP ने साधा तीखा निशाना

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नई दिल्ली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने गाजा पट्टी में जारी मानवीय संकट पर केंद्र की मोदी सरकार के रुख को लेकर तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने एक लेख के माध्यम से आरोप लगाया कि भारत सरकार फिलिस्तीन के न्यायसंगत अधिकारों के समर्थन की अपनी दशकों पुरानी ऐतिहासिक और पारंपरिक नीति को दरकिनार कर रही है और वर्तमान में इजरायल के साथ द्विपक्षीय संबंधों को अनुचित प्राथमिकता दी जा रही है। सोनिया गांधी के अनुसार, गाजा संकट के प्रति भारत का यह बदला हुआ नजरिया देश की दीर्घकालिक विदेश नीति की प्रासंगिकता और दिशा पर गंभीर सवालिया निशान लगाता है।

गाजा में मानवीय त्रासदी और वैश्विक चुप्पी पर चिंता

सोनिया गांधी ने वैश्विक संस्थाओं की रिपोर्टों का हवाला देते हुए लिखा कि गाजा में जारी सैन्य संघर्ष ने अभूतपूर्व तबाही मचाई है, जिसकी सबसे बड़ी कीमत वहां के निर्दोष और आम नागरिकों को चुकानी पड़ रही है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के जरिए रेखांकित किया कि इस युद्ध में अब तक 20 हजार से अधिक मासूम बच्चों की असमय मौत हो चुकी है, जबकि 44 हजार से ज्यादा बच्चे गंभीर रूप से घायल और अपाहिज हुए हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की विफलता पर भी गहरा क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि इतने बड़े पैमाने पर मिल रहे साक्ष्यों और अंतरराष्ट्रीय कानूनी अपीलों के बावजूद वैश्विक शक्तियां इस भीषण रक्तपात को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई हैं।

नीतिगत बदलाव से भारत की वैश्विक छवि को नुकसान का दावा

कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार की भूमिका पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि नई दिल्ली ने गाजा के लोगों की इस असीम पीड़ा और मानवाधिकारों के हनन पर रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है। उन्होंने याद दिलाया कि भारत हमेशा से ही फिलिस्तीनी नागरिकों के अधिकारों का एक मजबूत और मुखर पैरोकार रहा है, ऐसे में अपनी इस स्थापित कूटनीतिक नीति से पीछे हटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि और साख को गहरी ठेस पहुंचा सकता है। सोनिया गांधी के मुताबिक, इस संवेदनशील विषय पर सरकार की निरंतर खामोशी नैतिक और रणनीतिक, दोनों ही दृष्टिकोण से तर्कसंगत नहीं है और उन्होंने केंद्र से फिलिस्तीन के समर्थन में अपनी आवाज पुनः बुलंद करने का आग्रह किया।

भारतीय जनता पार्टी का पलटवार और वोट बैंक की राजनीति का आरोप

सोनिया गांधी के इन गंभीर आरोपों पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बेहद आक्रामक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी देश की संवेदनशील विदेश नीति को भी हमेशा अपनी संकीर्ण वोट बैंक की राजनीति के चश्मे से देखती आई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने गाजा और फिलिस्तीन के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंचों और संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में युद्ध विराम के प्रस्तावों पर मतदान के दौरान अपना रुख पूरी तरह साफ किया है और युद्धग्रस्त क्षेत्र में लगातार मानवीय एवं चिकित्सा सहायता सामग्री भी भेजी है। भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए ही लंबे समय तक इजरायल के साथ देश के रणनीतिक संबंधों को विकसित नहीं होने दिया और उनकी यह चिंता केवल चुनिंदा वैश्विक मुद्दों पर ही दिखाई देती है।

BSP में आकाश आनंद की भूमिका पर सवाल, आखिर क्यों नहीं मिली कोई बड़ी जिम्मेदारी?

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लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर अपनी सांगठनिक और चुनावी रणनीतियों को धार देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में विभिन्न विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों के चयन और स्क्रीनिंग की प्रक्रिया भी युद्ध स्तर पर चल रही है। हालांकि, इस पूरे चुनावी घटनाक्रम के बीच पार्टी के भीतर एक बड़ा सस्पेंस भी गहरा गया है। बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद की चुनावी और संगठनात्मक निर्णयों में किसी भी तरह की सक्रिय भूमिका दिखाई न देने से कैडर और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। खुद बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा भी अब तक आकाश आनंद की भावी भूमिका को लेकर पार्टी स्तर पर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है, जिससे असमंजस और बढ़ गया है।

पार्टी के रणनीतिकारों और आंतरिक सूत्रों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की मौजूदा जमीनी राजनीति में आकाश आनंद की अनुपस्थिति या निष्क्रियता से बसपा को चुनावी मोर्चे पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। भले ही आकाश आनंद के पास प्रत्यक्ष रूप से चुनाव लड़ने का अनुभव न हो, लेकिन वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के मुखिया और सांसद चंद्रशेखर आजाद के बढ़ते सियासी प्रभाव का मुकाबला करने के लिए बसपा को एक मजबूत और आक्रामक युवा चेहरे की सख्त जरूरत है।

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के दौरान एक नाटकीय घटनाक्रम में जब आकाश आनंद की पार्टी पदों पर वापसी हुई थी, तब उन्हें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की प्रत्यक्ष राजनीति से दूर रखने की आंतरिक रूप से सहमति बनी थी। हिंदी पट्टी के इन दो सबसे प्रमुख राज्यों में, जहां कभी बहुजन समाज पार्टी का सबसे मजबूत कोर जनाधार रहा है, वहां आकाश को किसी बड़ी जिम्मेदारी से महरूम रखना पार्टी के भविष्य और चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है।

सोशल इंजीनियरिंग के लिए कद्दावर ब्राह्मण चेहरों की तलाश

दूसरी तरफ, साल 2007 के अपने ऐतिहासिक 'सोशल इंजीनियरिंग' (ब्राह्मण-दलित गठजोड़) के फॉर्मूले को दोबारा जीवित कर उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी का ख्वाब देख रही बसपा के सामने इस समय बड़े ब्राह्मण नेताओं का संकट खड़ा है। वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में अब तक किसी भी अन्य प्रमुख दल के बड़े या कद्दावर ब्राह्मण चेहरे ने बसपा का दामन नहीं थामा है। फिलहाल पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने वाले नए चेहरों में सबसे बड़ी संख्या मुस्लिम और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के नेताओं की ही है।

2007 की तुलना में बिखरा सतीश चंद्र मिश्रा का कुनबा, माधोगढ़ से नई शुरुआत

संसदीय इतिहास गवाह है कि वर्ष 2007 में जब मायावती ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी, तब बसपा खेमे में ब्राह्मण नेताओं की एक लंबी कतार मौजूद थी। उस दौर में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के परिवार और सगे-संबंधियों के ही करीब एक दर्जन से ज्यादा रसूखदार चेहरे सीधे बसपा से जुड़े हुए थे और संगठन में मजबूत पकड़ रखते थे। हालांकि, समय बदलने के साथ अब इस कुनबे से केवल सतीश चंद्र मिश्रा ही पार्टी में सक्रिय बचे हैं।

इस कमी को पाटने और ब्राह्मण समाज के बीच अपनी गंभीर पैठ साबित करने के लिए बहुजन समाज पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए जालौन जिले की माधोगढ़ सीट से आशीष पांडेय को अपना पहला आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इस टिकट वितरण के जरिए बसपा ने एक बार फिर ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की बड़ी कवायद शुरू की है। पार्टी आलाकमान की ओर से यह संकेत भी दिए गए हैं कि आने वाले दिनों में सामान्य सीटों पर बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के उम्मीदवारों को तरजीह दी जाएगी।

अयोध्या दौरे पर केजरीवाल के बयान से संत नाराज, राम मंदिर चढ़ावा विवाद ने पकड़ा तूल

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अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी को लेकर जारी विवाद के बीच आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले हनुमानगढ़ी में शीश नवाया और इसके बाद श्री राम जन्मभूमि मंदिर में जाकर रामलला के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया, जहां उनके साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह भी उपस्थित रहे। दर्शन के उपरांत केजरीवाल ने मंदिर के चढ़ावे में हुई कथित चोरी को लेकर प्रदेश की भाजपा सरकार और प्रशासनिक जांच की गति पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में केवल निचले स्तर के छोटे कर्मियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है, जबकि उच्च पदों पर बैठे रसूखदार और प्रभावशाली लोगों को साफ तौर पर बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

केजरीवाल के गंभीर आरोप और सरकार से निष्पक्षता की अपील

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए चढ़ावे में किसी भी प्रकार की धांधली बेहद निंदनीय है और इस विषय की निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष आग्रह किया कि वे इस मामले में पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित करें ताकि असली दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिल सके और किसी भी अपराधी को कोई राजनीतिक संरक्षण न प्राप्त हो पाए। दूसरी तरफ, साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास ने केजरीवाल के इन बयानों को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाने और स्थिति मजबूत करने के लिए ऐसे हथकंडे अपना रहे हैं, जिनकी जितनी निंदा की जाए वो कम है। महंत ने आरोप लगाया कि जिसकी सनातन धर्म और भगवान राम में वास्तविक आस्था होगी वही इसकी मर्यादा समझेगा, जबकि केजरीवाल के मन में रामलला के प्रति कोई सच्ची भक्ति या श्रद्धा नहीं है।

संत समाज की तीखी प्रतिक्रिया और तीखे कटाक्ष

केजरीवाल के इस अयोध्या दौरे और उनके द्वारा लगाए गए आरोपों पर तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने भी बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी के प्रमुख रामलला के दरबार में केवल गंदी राजनीति के इरादे से आए थे। उन्होंने एक कहावत का हवाला देते हुए कहा कि नकली फूलों के पीछे कभी असलियत को छुपाया नहीं जा सकता और न ही कागजी फूलों से कभी खुशबू आ सकती है। परमहंस आचार्य ने जोर देकर कहा कि आस्था और धर्म के पवित्र केंद्रों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक स्वार्थ और लाभ के लिए करना सर्वथा अनुचित है तथा अयोध्या की पावन गरिमा और मर्यादा को अक्षुण्ण बनाए रखना हर नागरिक और नेता का परम कर्तव्य है।

चोरी के मामले की जांच और बढ़ता सियासी घमासान

इस बीच, राम मंदिर के कथित चढ़ावा चोरी प्रकरण की कमान विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों और विशेष जांच दल (एसआईटी) ने संभाल रखी है। इस मामले में अब तक कई संदिग्धों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की जा चुकी है और पुलिस साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है। इस प्रशासनिक मुस्तैदी के समानांतर ही इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक दलों के बीच शह-मात का खेल और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। जहां एक ओर सत्तारूढ़ दल और सरकार का दावा है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से आगे बढ़ रही है और किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा, वहीं दूसरी ओर समूचा विपक्ष इस जांच की प्रामाणिकता पर निरंतर सवालिया निशान लगा रहा है।

तारातला गोदाम हादसा: मृतकों की संख्या बढ़कर 16, चौथे दिन भी जारी रेस्क्यू ऑपरेशन

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक गोदाम के मलबे में तब्दील होने की भीषण दुर्घटना में मरने वालों का आंकड़ा शनिवार को बढ़कर 16 तक पहुंच गया है। हादसे में गंभीर रूप से घायल एक और व्यक्ति ने अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इस बीच विभिन्न आपदा प्रबंधन एजेंसियों के बचाव दल घटना के चौथे दिन भी मलबे के विशाल ढेर में जिंदगी की तलाश करने और फंसे हुए लोगों की स्थिति स्पष्ट करने के लिए लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं।

खोज अभियान के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग

राहत कार्य में जुटे प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, मलबे की गहराई में फंसे संभावित जीवित व्यक्तियों का पता लगाने के लिए अत्याधुनिक कैमरों की मदद ली जा रही है। इसके अतिरिक्त, तकनीकी टीमें मोबाइल फोन टावर के डेटा का विश्लेषण कर रही हैं ताकि मलबे के नीचे सक्रिय फोन रखने वाले व्यक्तियों की सटीक लोकेशन का निर्धारण किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता खोज और जीवन रक्षा अभियान को सफलतापूर्वक पूर्ण करना है, जिसके तहत ढही हुई संरचना के प्रत्येक हिस्से की बेहद बारीकी से पड़ताल की जा रही है। मलबे को पूरी तरह हटाने की भारी मशीनरी का प्रयोग तभी किया जाएगा, जब यह सुनिश्चित हो जाएगा कि अब कोई भी व्यक्ति अंदर नहीं दबा है।

अस्पताल में एक और घायल की मौत और रेस्क्यू की स्थिति

प्रशासनिक सूत्रों ने पुष्टि की है कि बसन्ती क्षेत्र के रहने वाले घायल नागरिक खालिक सरदार का अस्पताल में इलाज चल रहा था, जहां चोटों के कारण उनकी मृत्यु हो गई। इस दुखद क्षति के बाद हादसे में जान गंवाने वालों की कुल संख्या 16 हो गई है, जबकि 17 अन्य घायलों का विभिन्न चिकित्सालयों में उपचार किया जा रहा है। रेस्क्यू ऑपरेशन को अत्यधिक सतर्कता और वैज्ञानिक ढंग से अंजाम दिया जा रहा है ताकि वहां काम कर रहे बचाव कर्मियों की सुरक्षा को कोई खतरा न हो और मलबे में दबे किसी भी पीड़ित को सुरक्षित निकाला जा सके।

भारतीय रेलवे का सहयोग और दुर्घटना की उच्च स्तरीय जांच

उल्लेखनीय है कि बुधवार की दोपहर को यह निर्माणाधीन गोदाम अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गया था। मलबे में तब्दील हुई मुड़ी हुई स्टील और लोहे की भारी संरचनाओं को काटने व हटाने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) ने भारतीय रेलवे से तकनीकी सहायता मांगी थी, जिसके बाद शुक्रवार से रेलवे की विशेषज्ञ टीमें और कटर मशीनें भी इस महाअभियान का हिस्सा बन चुकी हैं। इस हादसे के संबंध में दर्ज की गई प्राथमिकी (एफआईआर) में नामजद पांच आरोपियों में से मुख्य ठेकेदार का शव भी घटनास्थल के मलबे से ही बरामद हुआ है। पुलिस प्रशासन ने गोदाम के गिरने के वास्तविक तकनीकी कारणों और निर्माण की गुणवत्ता का पता लगाने के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया है।

भारत-अमेरिका रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, ट्रंप के भारत दौरे की पुष्टि

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वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आगामी दिनों में भारत की एक महत्वपूर्ण और आधिकारिक यात्रा पर आने वाले हैं। इस बात की आधिकारिक पुष्टि खुद अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने की है। विदेश मंत्री रुबियो ने एक हालिया साक्षात्कार के दौरान जानकारी साझा की कि वे स्वयं राष्ट्रपति ट्रंप के इस ऐतिहासिक भारत दौरे की कूटनीतिक और प्रशासनिक तैयारियों को अंतिम रूप देने में बेहद सक्रियता से जुटे हुए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन तैयारियों की समीक्षा करने और द्विपक्षीय वार्ता का एजेंडा तय करने के लिए वे बहुत जल्द खुद भी भारत का दौरा करेंगे।

राष्ट्रपति ट्रंप के आगामी भारत दौरे की आधिकारिक पुष्टि

अमेरिकी प्रशासन की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस प्रस्तावित भारत यात्रा को दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि इस दौरे को ऐतिहासिक और दोनों देशों के लिए मील का पत्थर बनाने के लिए वाशिंगटन में उच्च स्तरीय बैठकों का दौर जारी है। इस यात्रा के दौरान कई बड़े रक्षा, व्यापारिक और रणनीतिक समझौतों पर मुहर लगने की संभावना जताई जा रही है।

तैयारियों का जायजा लेने भारत आएंगे विदेश मंत्री मार्को रुबियो

राष्ट्रपति के मुख्य एजेंडे को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो खुद जमीनी स्तर पर तैयारियों की समीक्षा करेंगे। उन्होंने बताया कि इस बहुप्रतीक्षित यात्रा की रूपरेखा और सुरक्षा प्रोटोकॉल को पूरी तरह व्यवस्थित करने के उद्देश्य से वे जल्द ही नई दिल्ली पहुंचेंगे। वहां वे भारतीय समकक्षों और उच्च अधिकारियों के साथ बैठकें करेंगे, ताकि राष्ट्रपति ट्रंप के आगमन से पहले दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्राथमिकताओं को पूरी स्पष्टता के साथ तय किया जा सके।

भारत-अमेरिका के बीच वैश्विक रणनीतिक संबंधों पर पड़ेगा प्रभाव

बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति का यह भारत दौरा अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहने वाला है। कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस यात्रा से न केवल प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों की भागीदारी मजबूत होगी, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई, तकनीकी सहयोग और आर्थिक नीतियों के समन्वय को भी एक नई दिशा मिलेगी। अमेरिकी विदेश मंत्रालय इस यात्रा को लेकर बेहद गंभीर है और दोनों ही राष्ट्र इस शिखर वार्ता से बड़े सकारात्मक परिणामों की उम्मीद लगाए हुए हैं।

कच्चे तेल में गिरावट से अर्थव्यवस्था को राहत, कमजोर मानसून बना नई चिंता

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नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) को लेकर इस वक्त ग्लोबल और घरेलू मोर्चों से दो बिल्कुल अलग और चौंकाने वाले संकेत मिल रहे हैं। एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों से देश के लिए बड़ी राहत की खबर आ रही है, वहीं दूसरी तरफ घरेलू मौसम वैज्ञानिकों और अर्थशास्त्रियों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

पश्चिम एशिया में हुए शांति समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है, जिसे देखते हुए तमाम बड़ी वैश्विक ब्रोकरेज फर्म्स ने भारत की विकास दर (GDP Growth Rate) के अनुमान को बढ़ा दिया है। लेकिन इसके ठीक उलट, घरेलू मोर्चे पर 'अल नीनो' (El Niño) के असर और सुस्त मानसून ने देश के नीति-निर्माताओं की सांसें अटका दी हैं।

वैश्विक एजेंसियों को भारतीय बाजार पर भरोसा: जीडीपी अनुमान में बढ़ोतरी

वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने भारत के आर्थिक प्रदर्शन को देखते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश का विकास अनुमान 6.1 फीसदी से बढ़ाकर 6.5 फीसदी कर दिया है।

बैंक का मानना है कि चालू तिमाही में भारत की जीडीपी उम्मीद से कहीं बेहतर रफ्तार से आगे बढ़ रही है। कच्चे तेल के दामों में आई कमी का सीधा और बड़ा फायदा भारतीय सरकारी खजाने और आम जनता को मिलेगा।

इसके साथ ही जानी-मानी एजेंसी ईवाई (EY) ने भी मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ रेट 6.6% से 6.8% के बीच रहने का अनुमान जताया है। ईवाई के मुताबिक, भारत का मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) और सर्विस सेक्टर (सेवा क्षेत्र) इतना मजबूत है कि देश किसी भी बाहरी वैश्विक संकट या अनिश्चितता का सामना आसानी से कर लेगा।

घरेलू मोर्चे पर मानसून का खतरा: 300 अरब डॉलर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था दांव पर

जहां एक तरफ विदेशी एजेंसियां भारत के मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और पेट्रोलियम रिफाइनिंग क्षमता को देखकर गदगद हैं, वहीं दूसरी तरफ कृषि और ग्रामीण मामलों के विशेषज्ञ जमीनी हकीकत को लेकर चेतावनी दे रहे हैं।

भारत की लगभग 300 अरब डॉलर की विशाल कृषि अर्थव्यवस्था और ग्रामीण इलाकों की पूरी डिमांड पूरी तरह से दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) की बारिश पर टिकी हुई है। अगर अल नीनो के कारण इस बार बारिश कमजोर रहती है, तो इसका सीधा असर देश के गांवों और किसानों की जेब पर पड़ेगा।

अर्थशास्त्री/संस्थामुख्य चिंता और असर
रजनी ठाकुर (अर्थशास्त्री, एलएंडटी फाइनेंस)कम बारिश से ग्रामीण इलाकों में सेंटीमेंट खराब होता है। इसका सीधा असर त्योहारी सीजन (Festive Season) के दौरान गांवों में होने वाली खरीदारी और शेयर बाजार पर देखने को मिल सकता है।
युविका सिंघल (क्वांटइको रिसर्च)मानसून की बारिश में महज 10 फीसदी की कमी भी देश में उपभोक्ता महंगाई (Consumer Inflation) को 1 फीसदी तक बढ़ा सकती है, जिससे खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं।

साफ है कि भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय एक दोराहे पर खड़ी है। अब देखना यह होगा कि कच्चे तेल की गिरावट से मिलने वाली राहत, मानसून की इस सुस्ती और अल नीनो के आर्थिक झटकों को कितना संभाल पाती है।

‘वसुधैव कुटुंबकम’ की मिसाल, वेनेजुएला की मदद के लिए भारत ने भेजी मेडिकल टीम

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नई दिल्ली। वेनेजुएला में प्राकृतिक आपदा के बाद राहत सामग्री और चिकित्सा दलों को भेजना कोई एकमात्र घटना नहीं है, बल्कि वैश्विक आपदाओं के समय भारत हमेशा 'वसुधैव कुटुंबकम्' (पूरी धरती ही एक परिवार है) के अपने शाश्वत संदेश पर अडिग रहा है। पिछले दस वर्षों के कालखंड पर नजर डालें तो भारत ने अपनी सीमाओं से परे जाकर, बिना किसी राजनीतिक लाभ-हानि की चिंता किए, संकट में फंसे देशों की बढ़-चढ़कर सहायता की है। वर्तमान दौर में भारतीय तिरंगा संकटग्रस्त देशों के नागरिकों के लिए जीवन की एक नई उम्मीद और गहरे भरोसे का प्रतीक बन गया है। एक विकासशील अर्थव्यवस्था होने के बावजूद वैश्विक स्तर पर मानवीय मदद पहुंचाने के मामले में भारत का इतिहास दुनिया के कई बड़े और संपन्न देशों से कहीं अधिक बेहतर और अनुकरणीय रहा है।

नेपाल का महाभूकंप और 'ऑपरेशन मैत्री' की मिसाल

वर्ष 2015 में जब हमारे पड़ोसी देश नेपाल में इस सदी का सबसे प्रलयंकारी भूकंप आया था, तब भारतीय प्रशासन ने बिना समय गंवाए महज कुछ ही घंटों के भीतर 'ऑपरेशन मैत्री' नामक एक व्यापक बचाव अभियान शुरू कर दिया था। इस मिशन के तहत भारतीय सेना और राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल (एनडीआरएफ) के जवानों ने दिन-रात एक करके मलबे के ढेर से हजारों नागरिकों को जिंदा बाहर निकाला था। भारत ने नेपाल को केवल भारी मात्रा में खाद्य सामग्री, टेंट और दवाइयां ही उपलब्ध नहीं कराईं, बल्कि भूकंप प्रभावित इलाकों में तबाह हो चुके बुनियादी ढांचे, सड़कों और मकानों के पुनर्निर्माण में भी बेहद सक्रिय और सराहनीय भूमिका अदा की थी।

तुर्की-सीरिया में 'ऑपरेशन दोस्त' और म्यांमार में 'ऑपरेशन ब्रह्मा'

इसी प्रकार जब तुर्की और सीरिया में विनाशकारी भूकंप ने हाहाकार मचाया, तब भारत सरकार ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाते हुए 'ऑपरेशन दोस्त' का आगाज किया। आपदा वाले क्षेत्रों में मलबे के नीचे दबे जीवन को खोजने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित खोजी कुत्तों (स्निफर डॉग्स) और वायुसेना के जांबाज गरुड़ कमांडो की टीमें भेजी गईं। इस मिशन में भारतीय सेना के 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल ने विपरीत परिस्थितियों के बीच अस्थाई चिकित्सा केंद्र स्थापित कर चौबीसों घंटे घायलों का इलाज किया, जिसकी वैश्विक स्तर पर खूब सराहना हुई। इसके अलावा पिछले वर्ष म्यांमार में आए भीषण भूकंप के दौरान भी भारत ने अपनी 'पड़ोसी पहले' की विदेश नीति का परिचय देते हुए तत्काल 'ऑपरेशन ब्रह्मा' शुरू किया, जिसके जरिए भारतीय वायुसेना और नौसेना के जहाजों से भारी मात्रा में जीवन रक्षक औषधियां, सूखा राशन और बचाव दल वहां भेजे गए थे।

अफगानिस्तान का मानवीय संकट और भारत की खेलदिली

बीते साल जब अफगानिस्तान एक साथ राजनीतिक उथल-पुथल और भीषण प्राकृतिक आपदाओं की दोहरी मार झेल रहा था, तब भारत ने सभी प्रकार के राजनीतिक गतिरोधों और कूटनीतिक मतभेदों को दरकिनार करते हुए विशुद्ध रूप से मानवीय संवेदनाओं को सर्वोपरि रखा। भूखमरी और तबाही की कगार पर खड़े अफगान नागरिकों की सहायता के लिए भारत की ओर से हजारों टन गेहूं की बड़ी खेप, आपातकालीन चिकित्सा उपकरण और जीवन रक्षक टीके भेजे गए, जिससे वहां पनप रहे एक बहुत बड़े मानवीय संकट को रोकने में सफलता मिली। इस ऐतिहासिक मदद के बाद भी भारत ने समय-समय पर अफगानिस्तान की जनता को जरूरत के मुताबिक हर संभव मानवीय सहायता पहुंचाना जारी रखा है।

‘जननायकन’ के प्रोड्यूसर को विजय ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, तमिलनाडु की राजनीति में मचा बवाल

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चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय ने एक बड़ा और नीतिगत फैसला लेते हुए फिल्म निर्माता के. वेंकट नारायण को नई दिल्ली में राज्य सरकार का विशेष प्रतिनिधि मनोनीत किया है। तमिलनाडु सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, यह नियुक्ति पूर्णतः अस्थाई है और इसका कार्यकाल एक वर्ष के लिए तय किया गया है, जबकि प्रशासनिक दर्जे के लिहाज से यह पद कैबिनेट मंत्री के समकक्ष माना जाता है। मुख्यमंत्री विजय के इस अप्रत्याशित कदम के सामने आते ही राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सहित अन्य प्रमुख विपक्षी दलों ने इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया है।

कौन हैं नवनियुक्त विशेष प्रतिनिधि के. वेंकट नारायण

विशेष प्रतिनिधि बनाए गए के. वेंकट नारायण पेशेवर रूप से एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और लॉ ग्रेजुएट (विधि स्नातक) हैं। वे बेंगलुरु स्थित मशहूर फिल्म निर्माण कंपनी 'केवीएन प्रोडक्शंस' के संस्थापक भी हैं। उल्लेखनीय है कि नारायण ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की मुख्य भूमिका वाली आगामी फिल्म 'जननायक' का निर्माण किया है, जो कुछ तकनीकी और सेंसर प्रमाणन संबंधी दिक्कतों के चलते अभी तक सिनेमाघरों में प्रदर्शित नहीं हो सकी है।

नियुक्ति को लेकर भारतीय जनता पार्टी के तीखे सवाल

भाजपा की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष नैनार नागेन्द्रन ने इस प्रशासनिक फैसले पर गहरी हैरानी प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि विजय सरकार ने दिल्ली में राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक ऐसे व्यक्ति को चुना है, जिसे तमिल भाषा और वहां की समृद्ध संस्कृति का बुनियादी ज्ञान तक नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस व्यक्ति का तमिलनाडु की धरती से कोई सीधा सरोकार नहीं रहा, वह केंद्र और राज्य सरकार के बीच एक मजबूत सेतु की भूमिका कैसे निभा सकता है और क्या उन्हें यह अहम पद केवल इसलिए दिया गया है क्योंकि वे मुख्यमंत्री की फिल्म के निर्माता हैं या फिर इसके पीछे कांग्रेस पार्टी का कोई अदृश्य राजनीतिक दबाव काम कर रहा है।

कावेरी और मेकेदातु बांध विवाद पर द्रमुक और अन्नाद्रमुक का विरोध

इस संवेदनशील मुद्दे पर द्रमुक नेता तिरुची शिवा ने सरकार को घेरते हुए कहा कि सबसे बड़ा संशय यह है कि क्या मूल रूप से कर्नाटक के रहने वाले नारायण, मेकेदातु बांध के गंभीर विवाद पर तमिलनाडु के हितों और यहां के किसानों के पक्ष में मुस्तैदी से खड़े हो पाएंगे। उन्होंने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री विजय खुद विधानसभा में कह चुके हैं कि उनकी सरकार कावेरी नदी पर बांध बनाने के कर्नाटक के रुख का पुरजोर विरोध करेगी क्योंकि इससे डेल्टा क्षेत्र के कृषकों की आजीविका प्रभावित होगी, ऐसे में इस नियुक्ति पर स्पष्टीकरण जरूरी है। दूसरी तरफ, अन्नाद्रमुक ने भी इस कदम की तीव्र भर्त्सना करते हुए वर्तमान प्रशासन को कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की 'प्रॉक्सी सरकार' करार दिया और पूछा कि पड़ोसी सूबे का कोई नागरिक तमिलनाडु के जल अधिकारों की रक्षा दिल्ली में किस तरह कर पाएगा।

कर्नाटक हाईवे पर दर्दनाक हादसा, ट्रक ने डिवाइडर पार कर वैन को मारी टक्कर

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कोप्पल। कर्नाटक के कोप्पल जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है, जहां एक तेज रफ्तार ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क के डिवाइडर को पार करते हुए सामने से आ रही वैन से जा टकराया। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, इस भीषण टक्कर में वैन सवार चार तीर्थयात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार बच्चों समेत कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया।

तीर्थयात्रा पर जा रहा था पीड़ित परिवार

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह दर्दनाक दुर्घटना कुकानूर तालुक के अंतर्गत भानपुर के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग-63 (NH-63) पर घटित हुई। वैन में सवार सभी पीड़ित हावेरी जिले के रत्तीहल्ली तालुक के कब्बर गांव के निवासी थे। यह पूरा परिवार आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मंत्रालयम की तीर्थयात्रा पर जा रहा था। इसी दौरान सामने से आ रहे एक बेकाबू ट्रक ने डिवाइडर तोड़कर उनकी गाड़ी को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे यह बड़ा हादसा हुआ।

मृतकों की पहचान और घायलों की स्थिति

इस भीषण सड़क हादसे में जान गंवाने वाले श्रद्धालुओं की पहचान केंचम्मा बालेकायी (35), अमृता कोट्याल (25), रमेश बल्लारी (45) और प्रवीण (23) के रूप में की गई है। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वैन में सवार अन्य सहयात्रियों को भी गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस ने बताया कि कुल घायलों में चार मासूम बच्चे भी शामिल हैं, जिनमें से दो पीड़ितों की स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है।

अस्पताल में उपचार और कानूनी कार्रवाई

दुर्घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को उपचार के लिए कोप्पल जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की टीम उनकी देखरेख कर रही है। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारियों ने घटना स्थल का बारीकी से मुआयना किया और क्षतिग्रस्त वाहनों को हाईवे से हटाकर यातायात सुचारु कराया। इस पूरे मामले में कुकानूर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

कोरबा सड़क हादसा: दो ट्रेलरों की टक्कर बनी काल, एक की मौत, फरार चालक की तलाश

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कोरबा: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कटघोरा थाना इलाके में शनिवार की सुबह एक बेहद दर्दनाक और भीषण सड़क दुर्घटना सामने आई है। कटघोरा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भालूमोड़ के पास दो अनियंत्रित और तेज गति से आ रहे भारी वाहनों (ट्रेलरों) में आमने-सामने की सीधी और जोरदार भिड़ंत हो गई। यह टक्कर इतनी विनाशकारी थी कि दोनों ही ट्रेलरों के सामने का हिस्सा (केबिन) पूरी तरह चकनाचूर हो गया और लोहे के मलबे में तब्दील हो गया। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे में एक वाहन चालक की मौके पर ही सांसें थम गईं, जबकि दूसरा चालक दुर्घटना के तुरंत बाद वाहन सहित मौके से भागने में कामयाब रहा।

कटर से काटना पड़ा केबिन, दर्दनाक रूप से फंसा रहा चालक का शव

स्थानीय थाना पुलिस से मिली प्राथमिक जानकारियों के अनुसार, दुर्घटना सुबह के वक्त घटित हुई जब दोनों भारी वाहन विपरीत दिशाओं से अत्यधिक रफ्तार में आ रहे थे। तीखे मोड़ या ढलान पर नियंत्रण खोने की वजह से दोनों के बीच सीधी टक्कर हो गई। टक्कर का प्रभाव इतना भयावह था कि एक ट्रेलर का चालक ड्राइविंग सीट पर ही स्टीयरिंग और केबिन के मलबे के बीच बुरी तरह पीस गया और उसकी घटना स्थल पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई। शव लोहे की चादरों के बीच इस कदर फंस चुका था कि उसे सामान्य तरीके से बाहर निकालना नामुमकिन था।

कटघोरा पुलिस ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन, परिजनों को दी सूचना

सड़क मार्ग से गुजर रहे अन्य राहगीरों द्वारा घटना की जानकारी दिए जाने के तुरंत बाद कटघोरा थाना प्रभारी अपनी टीम और रेस्क्यू उपकरणों के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने बिना वक्त गंवाए राहत कार्य शुरू किया। केबिन में फंसे शव को बाहर निकालने के लिए हाइड्रोलिक कटर और गैस कटर की मदद ली गई। काफी मशक्कत के बाद लोहे की बॉडी को काटकर मृतक चालक के शव को बाहर निकाला जा सका, जिसे तुरंत एम्बुलेंस के जरिए मर्चुरी (शवगृह) भिजवाया गया। पुलिस ने पंचनामा तैयार कर शव को पोस्टमार्टम के लिए सुरक्षित रखवा दिया है। इसके साथ ही, दुर्घटनाग्रस्त वाहन के दस्तावेजों के आधार पर मृतक के परिजनों तथा संबंधित ट्रांसपोर्टर/वाहन मालिक को हादसे की आधिकारिक सूचना दे दी गई है और उनके कोरबा पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है।

फरार आरोपी ड्राइवर के खिलाफ हिट एंड रन का मुकदमा, सीसीटीवी खंगाल रही पुलिस

पुलिस प्रशासन ने इस पूरे मामले में मर्ग कायम कर दुर्घटना के सही कारणों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। शुरुआती मैकेनिक निरीक्षण और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर दोनों वाहनों की अत्यधिक रफ्तार को ही इस जानलेवा हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है। हादसे के बाद मौके से भाग निकले दूसरे ट्रेलर और उसके चालक के खिलाफ पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या, लापरवाही से वाहन चलाने और 'हिट एंड रन' (दुर्घटना कर भाग जाना) की कड़ी धाराओं के तहत आपराधिक केस दर्ज कर लिया है। पुलिस घटनास्थल के आस-पास के ढाबों और टोल प्लाजा पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है ताकि फरार वाहन के नंबर और आरोपी चालक की सटीक पहचान कर उसे जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जा सके।

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