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इराकी जहाजों के लिए खुला है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, संघर्ष में इराकी लोगों का मिल रहा समर्थन

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तेहरान। मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच ईरान ने इराक की जनता को खास संदेश दिया है। ईरान ने इराक के लोगों के प्रति आभार जताते हुए उनसे और करीब आएं ईराकी भाई। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल इब्राहिम जुल्फघारी ने कहा कि इस पूरे संघर्ष में इराक के लोगों का समर्थन महसूस किया गया है। उन्होंने कहा कि इराक के लोगों का दिल, उनकी भावनाएं और उनका मजबूत रुख हमेशा ईरान के साथ रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इब्राहिम ने कहा कि ईरान अकेला नहीं है और इराक के लोग उनके साथ मजबूती से खड़े हैं। ईरान ने अमेरिका-इजराइल पर गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि इन देशों ने ईरान की संप्रभुता पर हमला किया है और महिलाओं, बच्चों और आम लोगों को निशाना बनाया है। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल, अस्पताल और सार्वजनिक जगहों पर हमले किए गए हैं। सबसे अहम बात यह रही कि ईरान ने घोषणा की कि इराक को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर लगाए गए प्रतिबंधों से बाहर रखा गया है यानी इराक के जहाजों को इस रास्ते से गुजरने में कोई रोक नहीं होगी। ईरान ने कहा कि यह प्रतिबंध सिर्फ दुश्मन देशों पर लागू हैं और वह इराक की संप्रभुता का सम्मान करता है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी कहा कि जो देश दुश्मन नहीं हैं, उनके जहाज ईरानी पानी से गुजर सकते हैं, लेकिन इसके लिए पहले से जानकारी देना जरूरी होगा। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर 48 घंटे के अंदर कोई समझौता नहीं हुआ, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा कि समय तेजी से खत्म हो रहा है और अगर जल्द फैसला नहीं हुआ तो बड़ा एक्शन लिया जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान के परमाणु ठिकाने के पास हमले के बाद लोगों को हटाया गया और ईरान ने भी इलाके में नए हमले शुरू करने की बात कही है।

MP में मौसम का कहर: 9 अप्रैल तक आंधी-बारिश, ग्वालियर समेत 24 जिलों में अलर्ट

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भोपाल: मध्य प्रदेश में अगले 4 दिन यानी, 9 अप्रैल तक आंधी-बारिश का दौर जारी रहेगा। टर्फ के सक्रिय होने से सोमवार को ग्वालियर-चंबल, जबलपुर, रीवा और शहडोल और सागर संभाग के 24 जिलों में असर बना रहेगा। IMD (मौसम केंद्र), भोपाल के अनुसार, 7 अप्रैल से नया सिस्टम एक्टिव हो रहा है।

सोमवार को जिन जिलों में आंधी, बारिश और गरज-चमक का अलर्ट है, उनमें ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, सिवनी और बालाघाट शामिल है। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में सिस्टम की एक्टिविटी देखने को मिल रही है। वहीं, 7 अप्रैल से एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) भी सक्रिय होगा। इसकी वजह से कहीं आंधी चलेगी तो कहीं बारिश हो सकती है।

अप्रैल में एमपी में दिखा कश्मीर जैसा नजारा
इससे पहले 4 और 5 अप्रैल को प्रदेश में सिस्टम की स्ट्रॉन्ग एक्टिविटी देखने को मिली है। शनिवार को 14 जिलों में ओलावृष्टि और 39 जिलों में तेज आंधी-बारिश का दौर रहा। जिन जिलों में बारिश हुई, उनमें ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, सागर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, पन्ना, जबलपुर, डिंडौरी, मंडला, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, सिवनी, अनूपपुर, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी, कटनी, बड़वानी, बैतूल, नर्मदापुरम, रायसेन, भोपाल, विदिशा, राजगढ़, खरगोन, धार, इंदौर, मंदसौर और खंडवा शामिल हैं।

वहीं, मंदसौर, श्योपुर, शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, छतरपुर, विदिशा, रायसेन, राजगढ़, बैतूल, नरसिंहपुर और सागर जिलों में ओले गिरे हैं। दूसरी ओर, कई जिलों में तेज आंधी का दौर भी रहा है।जबलपुर में रफ्तार 59Km, सागर में 54Km, बड़वानी में 50Km,शिवपुरी में 43Km, कटनी, मुरैना-अशोकनगर में 41Km, सीधी, गुना-ग्वालियर में 37Km, इंदौर-रीवा में 33Km, चित्रकूट-सतना में 31Km, मंदसौर-धार में 28Km और बैतूल में 26Km प्रतिघंटा रही।रविवार को भी मौसम का मिजाज बदला रहा। कहीं तेज आंधी चली तो कहीं बारिश भी हुई।

50 से 60Km/प्रतिघंटा से चलेगी आंधी
मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में तेज आंधी भी चलेगी। कुछ जिलों में इसकी अधिकतम रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा तक रहेगी। बाकी में 30 से 40 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी चलेगी।

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: BJP ने जारी की 40 स्टार प्रचारकों की सूची, पीएम मोदी और अमित शाह शामिल

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Election 2026) नजदीक है। इसकी तैयारी राज्य में जोरों-शोरों से जारी है। तृणमूल कांग्रेस के बाद के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी अपने 40 स्टार प्रचारकों की सूची रविवार को जारी कर दी है। पहले नंबर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम है। वहीं दूसरे नंबर पर नितिन नवीन और तीसरे नंबर पर राजनाथ सिंह का नाम शामिल है।

भाजपा के चुनाव प्रचार में कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल होने वाले हैं। इस लिस्ट में असम के मुख्यमंत्री हिंनता बिस्वा शर्मा, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, दिल्ली मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और महाराष्ट्र सीएम देवेंद्र फडणावीस के नाम शामिल है।

स्मृति ईरानी और कंगना रनौत भी लिस्ट में शामिल 

बंगाल चुनाव में बीजेपी कैंपेनर्स के तौर पर कई अभिनेत्रियाँ भी नजर आएंगी। स्मृति ईरानी, हेमा मालिनी और कंगना रनौत का नाम इस सूची में जोड़ा गया है।  इसके अलावा मिथुन चक्रवर्ती भूपेंद्र और मनोज तिवारी भी अहम भूमिका निभाएंगे।

इन मंत्रियों के नाम भी शामिल

केंद्र पर्यावरण मंत्री और श्रम एवं रोजगार मंत्री भूपेंद्र यादव, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान,  केंद्रीय कैबिनेट मंत्री केंद्रीय मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा समेत कई केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों के नाम शामिल किए गए हैं।

इसके अलावा इस लिस्ट में मोहन चरण माझी, अनुराग ठाकुर, बाबूलाल मरांडी, सम्राट चौधरी, सुनील बंसल, बिपलब कुमार देव, मंगल पांडे ,अमित मालवीय, समिक भट्टाचार्य, सुवेंदु अधिकारी, दिलीप घोष, सुकांत मजूमदार, शांतनु ठाकुर, राजू बिष्ट ,जयंत कुमार राय, मनोज तिग्गा, बिजन गोस्वामी और लिएंडर एड्रियन पेस जैसी बड़ी हस्तियाँ भी शामिल हैं।

 

 

 

बंगाल में पीएम मोदी की रैलियां और BJP की माइक्रो मैनेजमेंट से बदलेगा सियासी खेल? इन इलाकों पर खास नजर

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West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में जैसे-जैसे वोटिंग का समय नजदीक आ रहा है, वैसे वैसे ही सियासी पारा हाई होता जा रहा है. तमाम राजनीतिक दल अपने दमखम के साथ मैदान में उतर रहे हैं. 9 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्‍च‍िम बंगाल में अपने चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत करेंगे. वह एक दिन में 3 जनसभाओं को संबोधित करेंगे. बीजेपी इस चुनाव में दावा कर रही है कि वह सत्ता परिवर्तन करके ही रहेगी. यही वजह है कि पूरी जोर आजमाइश लगाई जा रही है.

बंगाल में जीत हासिल करने के लिए बीजेपी पिछले 5 सालों से ही मेहनत कर रही है. इस समय राज्य में कई केंद्रीय मंत्रियों के साथ-साथ कई राज्यों के मंत्री और नेताओं ने डेरा डाल रखा है. बंगाल में सत्ता की लड़ाई हर दिन तेज होती जा रही है.

किन इलाकों पर है बीजेपी की नजर

पश्‍च‍िम बंगाल चुनाव में बीजेपी ने बहुत पहले तय कर लिया था कि किन इलाकों में मेहनत की जरूरत है. खासतौर पर इस बार फोकस बॉर्डर वाले इलाकों में है. यही वजह है कि इन इलाकों में कई दिग्गज नेताओं की जनसभाएं आयोजित कराई जा रही हैं. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 6 अप्रैल को बंगाल पहुंचकर बोंगांव में रोड शो और नामांकन कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे.काकद्वीप में केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर की जनसभा भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है.

पीएम मोदी की सभा के बाद तेज होगा प्रचार

भारतीय जनता पार्टी ने तय किया है कि 9 अप्रैल को पीएम मोदी 3 जगहों पर जनसभाएं संबोधित करेंगे. इसके बाद ही चुनाव प्रचार को और तेज किया जाएगा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ साथ पार्टी के कई दिग्गज नेताओं की जन सभाएं आयोजित की जाएगी.

पीएम 9 अप्रैल को आसनसोल में जनसभा करेंगे, इसका फोकस औद्योगिक और हिंदी भाषी वोट बैंक रहने वाला है. दूसरी सभा तमलुक में आयोजित की जाएगी. इसका मुख्य फोकस ग्रामीण और तटीय बेल्ट  की वोटों को अपने पाले में लाना है. तीसरी और आखिरी सभा बीरभूमि‍ में आयोजित की जाएगी. यह इलाका राजनीतिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है. इसके साथ ही काफी संवेदनशील और हिंसा प्रभावित क्षेत्र भी है. यही वजह है कि यहां जनसभा को आयोजन किया जा रहा है.

बंगाल में किसके बीच मुख्य मुकाबला

पश्चिम बंगाल में इस बार मुकाबला बीजेपी और टीएमसी के बीच ही नजर आ रहा है. कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने खुद स्वीकार किया है कि उनकी पार्टी के लिए यह चुनाव काफी कठिन रहने वाला है. जबकि सीबीएम पहले ही राज्य में कमजोर स्थिति में पहुंच चुकी है. हालांकि कुछ सीटों पर स्थानीय राजनीतिक दल मजबूत स्‍थ‍ित‍ि में नजर आ रहे हैं. जबकि पूरे प्रदेश की बात की जाए तो मुकाबला बीजेपी और टीएमसी के बीच है.

 

नेपाल में गहराया तेल संकट……………..सप्ताह में दो दिन छुट्टी रखने का प्रस्ताव

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काठमांडू। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और युद्ध के कारण दुनिया के कई देशों में तेल की आपूर्ति बाधित हुई है। नेपाल भी तेल के वैश्विक संकट से अछूता नहीं रहा। पेट्रोलियम और डीजल की कमी को देखकर नेपाल सरकार ने अहम निर्णय लिया है। राजधानी काठमांडू में हुई शाह कैबिनेट की बैठक में हर हफ्ते दो दिन की छुट्टी देने का प्रस्ताव पास किया गया, ताकि ऊर्जा की खपत कम की जा सके और पेट्रोलियम की बचत सुनिश्चित हो सके।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह नई नीति विशेष रूप से निजी और सरकारी कार्यालयों में लागू होगी। कैबिनेट ने बताया कि कदम देश में ईंधन की कमी को देखकर अस्थायी उपाय के रूप में लिया है। अधिकारियों ने कहा कि छुट्टी का दिन सप्ताह के मध्य और अंत में निर्धारित किया जा सकता है, ताकि कार्यालयों और उद्योगों में काम प्रभावित न हो।
नेपाल में पेट्रोलियम संकट पिछले कुछ महीनों से बढ़ता जा रहा है। मिडिल ईस्ट में जारी जंग के कारण तेल के निर्यात में बाधाएं आई हैं, जिससे देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में औसतन तेल की खपत में 15-20 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। इसकारण सरकार ने ऊर्जा बचत के लिए यह कदम उठाया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस निर्णय से ईंधन की बचत होगी, लेकिन आर्थिक गतिविधियों पर इसका असर भी पड़ेगा। कई उद्योगों ने चिंता जाहिर की है कि सप्ताह में दो दिन की छुट्टी से उत्पादन और व्यवसाय प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि यह अस्थायी कदम है और स्थिति के अनुरूप बदलाव किए जाएंगे। नेपाल की जनता और व्यापारिक वर्ग नए निर्णय पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ लोग ऊर्जा संकट से निपटने का सकारात्मक उपाय मान रहे हैं, जबकि अन्य दैनिक जीवन और उद्योगों के लिए चुनौतीपूर्ण कदम मान रहे हैं।

मंदिर के पास घर बनाने से पहले जान लें ये वास्तु नियम, वरना छोटी सी चूक पड़ सकती है भारी!

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वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर के पास घर होना बिल्कुल भी शुभ नहीं माना जाता. इसके अलावा, अगर मंदिर की परछाई घर पर पड़ती है, तो इसे वहां रहने वालों के लिए अशुभ माना जाता है. यह नियम विशेष रूप से शिव मंदिर के मामले में और भी अधिक सख्ती से लागू होता है.

 वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर के पास घर होना बिल्कुल अच्छा नहीं माना जाता. घर पर मंदिर की छाया पड़ना भी वहां रहने वालों के लिए ठीक नहीं है. ये नियम शिव मंदिर के लिए और भी ज्यादा लागू होता है. वास्तु शास्त्र के मुताबिक शिव मंदिर से कम से कम 750 मीटर दूर घर होना चाहिए, और बाकी मंदिरों से कम से कम 30 फीट के अंदर घर नहीं बनाना चाहिए. चाहे कोई भी मंदिर हो, उसकी छाया घर पर नहीं पड़नी चाहिए, और घर के मुख्य दरवाजे के सामने मंदिर होना भी अच्छा नहीं माना जाता. ये बातें हैदराबाद के मशहूर ज्योतिषी गंडूरी राजशुक, जिनके पास 57 साल का अनुभव है, बता रहे हैं.

 वास्तु शास्त्र के अनुसार मंदिर और घर के बीच कम से कम 30 फीट की दूरी होनी चाहिए. अगर घर मंदिर के बहुत पास या उसके बगल में बना है तो उस घर में रहने वालों को कोई तरक्की नहीं मिलती. घर में हमेशा उदासी का माहौल रहता है. घर या घर के लोगों में कोई चमक या खुशहाली नहीं दिखती.

 मंदिर की छाया घर पर नहीं पड़नी चाहिए. अगर घर पर मंदिर की छाया पड़ती है तो उस घर में असफलता, बीमारियां और परेशानियां ज्यादा होती हैं. उस घर के मालिक को किसी भी तरह से तरक्की का मौका नहीं मिलता. धन का नुकसान भी ज्यादा होता है.

 घर का मुख्य दरवाजा मंदिर, गोपुर या मंदिर के ध्वज स्तंभ के सामने नहीं होना चाहिए. माना जाता है कि मंदिर की दिव्य शक्ति आसपास के इलाके को बहुत प्रभावित करती है, और वहां फैली हुई शक्ति गर्भगृह, मंदिर परिसर और ध्वज स्तंभ की तरफ खींची जाती है. इसी वजह से आसपास के घरों की ऊर्जा कमजोर हो जाती है, ऐसा वास्तु शास्त्र के साथ-साथ पुराणों और पुराने ग्रंथों में भी बताया गया है.

 अगर घर का मुख्य दरवाजा मंदिर या ध्वजस्तंभ के सामने हो, तो संतान का नुकसान, संतान की कमी, गरीबी, और बीमारियां जैसी परेशानियां आती हैं. पैसे की बहुत खर्च होती है. जो काम और व्यवहार सोचते हैं, उनमें रुकावटें आती हैं. आमदनी और सेहत में भी कमी रहती है.

 मंदिर की दीवार और घर की दीवार के बीच जरूर खाली जगह होनी चाहिए. दोनों दीवारें एक ही दीवार नहीं होनी चाहिए. अगर ऐसा हुआ तो उस घर में रहने वालों को आर्थिक, निजी और पारिवारिक समस्याएं ज्यादा होती हैं. वास्तु शास्त्र के अनुसार, जेष्ठादेवी यानी दरिद्र देवी उस घर में परेशानियां बढ़ा सकती हैं.

 अगर घर मंदिर के बिलकुल पास है तो उस घर में हमेशा कोई न कोई समस्या बनी रहती है. चाहे जितना भी मेहनत करें, कोई समस्या हल नहीं होती. शोर, हवा और पानी की प्रदूषण जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं. अगर शिव मंदिर या देवी मंदिर घर के पास है तो घर के लोग स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान रहते हैं. उनकी तरक्की और विकास रुक जाता है.

 वास्तु के हिसाब से मंदिर के सामने वाली जगह नहीं खरीदनी चाहिए. भगवान की सीधी नजर में घर नहीं बनाना चाहिए. मंदिर की छाया घर या जमीन पर नहीं पड़नी चाहिए. इसमें छोटा या बड़ा मंदिर कोई फर्क नहीं है. चाहे दाईं तरफ हो या बाईं तरफ, मंदिर के पास रहना अच्छा नहीं माना जाता. हालांकि, कुछ वास्तु ग्रंथों के मुताबिक सिर्फ दाईं तरफ घर नहीं बनाना चाहिए, बाईं तरफ बना सकते हैं. मंदिर की ऊंचाई से ज्यादा घर की ऊंचाई नहीं होनी चाहिए. शास्त्रों के अनुसार भगवान की सीधी नजर में घर नहीं बनाना चाहिए.

 भगवान का कमरा कहां होना चाहिए? भगवान का कमरा किसी भी कमरे के साथ हो सकता है, लेकिन बाथरूम, टॉयलेट, स्टोर रूम या कचरा रखने की जगह नहीं होनी चाहिए. भगवान के कमरे के पास वाले दरवाजे या खिड़कियों से कोई शोर नहीं आना चाहिए. दरवाजा खोलने या बंद करने पर भी आवाज नहीं आनी चाहिए. पूजा घर या मंदिर के पास कचरा फेंकना, कचरा जमा करना, टूटी हुई चीजें रखना, कचरे की टोकरी रखना या झाड़ू रखना जैसी चीजें नहीं करनी चाहिए. पूजा घर और उसके आसपास हमेशा साफ और पवित्र रहना चाहिए.

 

 

अक्षय तृतीया की तारीख को लेकर कंफ्यूज हैं? ये है सही तिथि, शुभ मुर्हूत, इस बार इन नक्षत्रों के कारण बेहद खास

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अप्रैल का महीना शुरू होते ही वातावरण में उत्साह और आस्था की एक अलग ही लहर देखने को मिलती है, क्योंकि इस महीने में कई महत्वपूर्ण पर्व और त्योहार आते हैं. इन्हीं में से एक अत्यंत शुभ और पवित्र पर्व है अक्षय तृतीया, जिसे सनातन धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है. मान्यता है कि इस दिन किए गए हर शुभ कार्य का फल कभी समाप्त नहीं होता, बल्कि वह अक्षय यानी अनंत होता है.

इस दिन नहीं होती मुर्हूत देखने की जरूरत
यही कारण है कि लोग इस दिन नए कार्यों की शुरुआत, खरीदारी, दान-पुण्य, विवाह और धार्मिक अनुष्ठानों को बिना किसी संकोच के करते हैं. इस दिन को अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है, यानी ऐसा दिन जब किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती. तो चलिए देवघर के ज्योतिषाचार्य से जानते हैं कि कब है अक्षय तृतीया, क्या है शुभ मुहूर्त और क्या बन रहा है खास शुभ योग?
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य
अक्षय तृतीया का पर्व वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. इस वर्ष तिथि की गणना के अनुसार तृतीया 19 अप्रैल को पड़ रही है, लेकिन उदया तिथि 20 अप्रैल को होने के कारण अक्षय तृतीया का पर्व 20 अप्रैल को ही मनाया जाएगा. हिंदू पंचांग में उदया तिथि का विशेष महत्व होता है, इसलिए पर्व-त्योहार उसी दिन मनाए जाते हैं जब तिथि सूर्योदय के समय विद्यमान रहती है. यही वजह है कि इस बार अक्षय तृतीया 20 अप्रैल को पूरे विधि-विधान के साथ मनाई जाएगी.

क्या रहेगा पूजा का शुभ मुहूर्त
इस दिन पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों के लिए विशेष शुभ समय भी निर्धारित है. प्रातःकाल 05 बजे से लेकर दोपहर 12:20 बजे तक का समय अत्यंत शुभ माना गया है. इस दौरान मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है. मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि, धन-वैभव और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है. साथ ही इस दिन सोना-चांदी खरीदना भी अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इसे भविष्य में समृद्धि और स्थिरता का प्रतीक समझा जाता है.

बन रहे हैं बेहद शुभ योग
अक्षय तृतीया का महत्व इस वर्ष और भी बढ़ गया है, क्योंकि इस दिन कई शुभ योगों का संयोग बन रहा है. इस दिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग रहेगा, जो स्वयं में अत्यंत शुभ माना जाता है. इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है, जो किसी भी कार्य को सफल और फलदायी बनाने के लिए श्रेष्ठ माने जाते हैं.
इन योगों के प्रभाव से इस दिन किए गए कार्यों में सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है. यही कारण है कि इस दिन लोग नए व्यापार, निवेश, गृह प्रवेश और विवाह जैसे बड़े निर्णय लेने में भी संकोच नहीं करते.

इस पवित्र गुफा में परिवार साथ मौजूद हैं महादेव, अमरनाथ गुफा तक जाता है रहस्यमयी गुफा का दूसरा छोर

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जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित शिवखोड़ी एक ऐसी पवित्र गुफा है, जिसे देखने और अनुभव करने के लिए हर साल हजारों श्रद्धालु आते हैं. यह गुफा संगर गांव में है और भगवान शिव को समर्पित है. यहां का सबसे बड़ा आकर्षण है इसका स्वयंभू शिवलिंग, जिसे देखकर हर भक्त की श्रद्धा और बढ़ जाती है. गुफा के भीतर का वातावरण धार्मिक आस्था के साथ-साथ रहस्यमयी अनुभूति भी कराता है. संकीर्ण रास्तों और प्राकृतिक चट्टानी संरचनाओं के बीच से गुजरते हुए श्रद्धालु मुख्य गर्भगृह तक पहुंचते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां दर्शन करने मात्र से भक्तों की सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं और हर कष्ट से मुक्ति मिलती है. आइए जानते हैं रियासी जिले में स्थित शिवखोड़ी गुफा के बारे में…

शिव परिवार के प्राकृतिक चिन्ह मौजूद
गुफा प्राकृतिक रूप से बनी है और इसे देखकर ऐसा लगता है कि यह भगवान की बनाई हुई कोई सुरंग हो. गुफा लगभग 200 मीटर लंबी है और इसमें स्वयंभू शिवलिंग, माता पार्वती, गणेश और कार्तिकेय के प्राकृतिक चिन्ह मौजूद हैं. इसके अलावा, यहां नंदी की मूर्ति, पार्वती की मूर्ति और गुफा की छत पर सांप की आकृति जैसी प्राकृतिक संरचनाएं भी हैं, जो अपने आप बनी हैं. यही कारण है कि इसे देखकर हर श्रद्धालु चकित रह जाता है.
गुफा को कहा जाता है देवताओं का घर
महाशिवरात्रि के समय शिव खोड़ी में विशेष मेला लगता है. इस समय पूरे इलाके में भक्तों की भीड़ उमड़ती है और हर कोई भगवान शिव के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से आता है. कहा जाता है कि गुफा और इसके आसपास के क्षेत्र में 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास है, इसलिए इसे देवताओं का घर भी कहा जाता है.

यहां आकर विराजमान हो गए थे भगवान शिव
शिव खोड़ी केवल एक गुफा नहीं, बल्कि आस्था और रहस्य का संगम है. मान्यता है कि भगवान शिव ने भस्मासुर से बचने के लिए इस गुफा में खुद को छिपाया था. पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने भस्मासुर को वरदान दिया था कि वो जिसके भी सिर पर हाथ रखेगा, वह भस्म हो जाएगा. भस्मासुर ने इस वर को भगवान शिव पर ही आजमाने की कोशिश की. ऐसे में भगवान शिव इसी गुफा में आकर विराजमान हो गए थे. इसी दौरान भगवान विष्णु सुंदर रूप धारण करके आए और भस्मासुर को अपने ही वर से भस्म कर दिया.

यहीं से अमरनाथ जाते थे साधु-संत
गुफा का एक और रहस्य यह भी है कि कहा जाता है इसका दूसरा छोर अमरनाथ गुफा तक जाता है. इस रहस्य ने शिव खोड़ी को और भी आकर्षक और रहस्यमय बना दिया है. हालांकि इस बात की पुष्टि नहीं हुई है लेकिन स्थानीय मान्यताओं के अनुसार पहले साधु-संत इसी रास्ते से अमरनाथ जाया करते थे.

 

सुख-सौभाग्य के लिए एकबार वॉलेट में रखकर देखें चांदी, फिजूलखर्चों से मिलेगी मुक्ति लेकिन शुभ तिथि का रखें ध्यान

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भारतीय ज्योतिष शास्त्र में धातुओं का विशेष महत्व बताया गया है. इन्हीं में से एक है चांदी, जिसे शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि अगर पर्स में चांदी का छोटा टुकड़ा या सिक्का रखा जाए, तो यह व्यक्ति के जीवन में सुख-सौभाग्य और आर्थिक स्थिरता को बढ़ाने में मदद कर सकता है. ज्योतिष में चांदी का संबंध चंद्र ग्रह से भी बताया गया है, अगर आप वॉलेट में चांदी रखते हैं तो आपकी कुंडली में चंद्रमा की स्थिति भी मजबूत होती है. ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, जो लोग तनाव में रहते हैं, नींद नहीं आती, मूड स्विंग्स होते हैं या रिश्तों में अस्थिरता है, उनको चांदी धारण जरूर करनी चाहिए. आइए जानते हैं वॉलेट में चांदी का टुकड़ा या सिक्का रखने के फायदे…

ज्योतिष में चांदी का महत्व
वैदिक ज्योतिष में चांदी का संबंध चंद्रमा से है, जो भावनाओं, विचारों, अंतर्ज्ञान और मातृत्व ऊर्जा का कारक ग्रह माना जाता है. कुछ लोगों का मानना है कि चंद्रमा का मूड, मानसिक शांति और भावनात्मक स्थिरता पर असर पड़ता है. माना जाता है कि चांदी, जो चंद्र ऊर्जा से जुड़ी धातु है, कुंडली में चंद्रमा के शुभ प्रभाव को बढ़ाती है. ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, जो लोग तनाव में रहते हैं, नींद नहीं आती, मूड स्विंग्स होते हैं या रिश्तों में अस्थिरता है, उनको चांदी धारण करनी चाहिए. अगर वॉलेट में चांदी रहती है तो सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहता है और माता लक्ष्मी का भी आशीर्वाद मिलता है.

पर्स में चांदी रखने के फायदे
ज्योतिषियों का कहना है कि चांदी मन को शांत करने और भावनाओं को स्थिर करने में मदद करती है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर है. वॉलेट या पर्स में चांदी रखने से अचानक धन लाभ की बजाय स्थिरता से धन का प्रवाह बना रहता है. फिजूल के खर्चे बंद हो जाते हैं और बजट का पालन करते हैं, जिससे धीरे-धीरे आपका बैलेंस भी बढ़ता रहता है.

नकारात्मक ऊर्जा रहती है दूर
कई संस्कृतियों में यह विश्वास है कि चांदी नकारात्मक ऊर्जा और भावनात्मक समस्याओं से बचाती है, जिससे मानसिक सुरक्षा महसूस होती है. साथ ही चांदी निर्णय लेने की क्षमता और अंतर्ज्ञान को मजबूत करती है, खासकर जब आप भावनात्मक रूप से कमजोर महसूस करते हैं. ज्योतिषियों का कहना है कि वॉलेट में चांदी रखने की आपकी आदत भावनाओं को नियंत्रित करने, धन की सुरक्षा करने और नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखने में मदद कर सकती है.
कैसे रखें चांदी?
पर्स में चांदी रखने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी बताया गया है. चांदी का सिक्का या छोटा टुकड़ा साफ और शुद्ध होना चाहिए. इसे गुरुवार, शुक्रवार के दिन, किसी शुभ मुहूर्त या पूर्णिमा तिथि के दिन रखने से अधिक लाभ मिलता है. कई लोग इसे लाल या सफेद कपड़े में लपेटकर पर्स में रखते हैं, जिसे शुभ माना जाता है. अधिकांश ज्योतिषी सलाह देते हैं कि आप पतली चांदी की वर्क या छोटी, शुद्ध चांदी की सिक्का साथ रखें.

किन लोगों के लिए है लाभकारी?
वॉलेट में चांदी रखने से आर्थिक ऊर्जा को संतुलित करता है और अनावश्यक खर्चों को कम करने में मदद करता है. साथ ही यह भी माना जाता है कि चांदी सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है, जिससे व्यक्ति के जीवन में अच्छे अवसर आने लगते हैं. ज्योतिष के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर होता है, उनके लिए चांदी धारण करना विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है. इसके अलावा, जो लोग मानसिक तनाव, अस्थिरता या आर्थिक परेशानी से जूझ रहे हैं, वे भी इसका लाभ उठा सकते हैं.

राशिफल 6 अप्रैल 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा

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  • मेष राशि :- इष्ट मित्र सुखवर्धक होंग, मनोबल बनाये रखें, कार्य विचार कर आगे बढ़े।
  • वृष राशि :- भाग्य का सितारा साथ देगा, मित्र सहयोग अवश्य ही करेंगे ध्यान रखें।
  • मिथुन राशि :- इष्ट मित्रों से परेशानी, अशांति का वातावरण रहेगा, धैर्य पूर्वक कार्य करें।
  • कर्क राशि :- मान-प्रतिष्ठा, प्रभुत्व वृद्धि होगी, स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास, दैनिक कार्य में उन्नति होगी।
  • सिंह राशि :- कार्यगति अनुकूलता से संतोष होगा, समृद्धि के साधन जुटायें लाभ होगा।
  • कन्या राशि :- कुटुम्ब की परेशानी, चिन्ता एवं व्यग्रता रहेगी, भ्रमणशील स्थिति बनेगी।
  • तुला राशि :- धन हानि, शरीर कष्ट तथा मानसिक बेचैनी, भ्रमणशील स्थिति बनेगी।
  • वृश्चिक राशि :- इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे, अधिकारियों का समर्थन फलप्रद होगा।
  • धनु राशि :- कार्य कुशलता से संतोष, दैनिक समृद्धि के साधन जुटायें, धैर्य रखें।
  • मकर राशि :- दैनिक कार्यवृत्ति में सुधार होगा, योजना फलीभूत होगी, कार्य पर ध्यान अवश्य दें।
  • कुंभ राशि :- विशेष कार्य स्थगित रखें, मानसिक विभ्रम, कार्य में सुधार अवश्य करें।
  • मीन राशि :- कार्य विफल होगा, प्रयत्न करने पर भी सफलता न मिले, धैर्य पूर्वक आगे बढ़े।
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