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पीएम आवास से साकार हुआ सपना: कांति को मिला अपना आशियाना

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रायपुर : हर व्यक्ति के मन मे एक पक्का आवास का सपना  रहता जिसमे वह सुकून की नींद ले सके. मुंगेली विकासखंड के ग्राम पचौटिया की निवासी कांति के जीवन में प्रधानमंत्री आवास योजना ने एक नया अध्याय जोड़ दिया है। वर्षों से पक्के घर का सपना देख रही कांति के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं रही। पहले कांति अपने परिवार के साथ कच्चे मकान में निवास करती थीं, जहां हर मौसम में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकना, गर्मी में अत्यधिक गर्मी और सर्दी में ठंड से जूझना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। ऐसे में सुरक्षित और मजबूत घर की आवश्यकता लगातार महसूस होती थी।

     प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उन्हें पक्का मकान स्वीकृत हुआ, जिसके बाद उन्होंने अपने सपनों का घर तैयार किया। अब कांति और उनका परिवार पक्के घर में सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर रहे हैं। कांति बताती हैं कि अब उन्हें मौसम की मार का सामना नहीं करना पड़ता और घर की सुरक्षा से उन्हें मानसिक शांति मिली है। उनके बच्चों को भी पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण मिल रहा है, जिससे उनके भविष्य की नींव मजबूत हो रही है। उन्होंने शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना उनके जीवन में खुशियां लेकर आई है और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिला है।

मरीज को मिला समय पर उपचार, सुकमा के चिकित्सकों की टीम ने दिखाई तत्परता

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रायपुर :  सुकमा जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवा की तत्परता और आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता का एक सराहनीय उदाहरण सामने आया है। सिविल सर्जन डॉ. एमआर कश्यप से प्राप्त जानकारी के अनुसार छिंदगढ़ विकासखंड के कुन्ना निवासी 38 वर्षीय पाली कवासी को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल सुकमा में भर्ती कराया गया।

देरी से अस्पताल पहुंचने के कारण स्थिति अत्यंत जोखिमपूर्ण थी और तत्काल सर्जरी आवश्यक हो गई। अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुजा ने बिना समय गंवाए तुरंत एलएससीएस (सीजर) ऑपरेशन कर मरीज का उपचार प्रारंभ किया। हालांकि ऑपरेशन के दौरान मृत बच्चा पैदा होने से महिला की स्थिति और अधिक जटिल हो गई।

महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और रेफर करने की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान महिला का श्वास बंद सा हो गया, साथ ही नाड़ी और हृदय की धड़कन भी थम सी गई। ऐसे संकट की घड़ी में जिला अस्पताल की मेडिकल टीम ने त्वरित निर्णय लेते हुए महिला को दो बार सीपीआर दिया और तत्काल वार्ड में शिफ्ट कर आधुनिक वेंटीलेटर की सहायता से उपचार शुरू किया गया। इसके बाद महिला को दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया।

 डॉक्टरों की सतर्कता और उपलब्ध संसाधनों के कारण महिला की जान बचा ली गई। आज पाली कवासी पूरी तरह स्वस्थ हैं और जिला अस्पताल के डॉक्टरों व स्टाफ के प्रयासों की सराहना कर रही हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष यज्ञदत्त शर्मा की जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की

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भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्व. यज्ञदत्त शर्मा की जयंती पर विधानसभा में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनका स्मरण किया। पुष्पांजलि कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, स्व. शर्मा के परिजन, विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व. शर्मा ने जनकल्याण के दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया। स्व. यज्ञदत्त शर्मा, मध्यप्रदेश विधानसभा के सम्मानित पूर्व अध्यक्ष थे। उन्होंने सदन की गरिमा और लोकतंत्र की मर्यादा को हमेशा बनाए रखा। शर्मा ने अपने लम्बे राजनीतिक जीवन में सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया।

पशुपालन की विभिन्न योजनाओं से किसान होंगे आत्मनिर्भर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में किसानों को पशुपालन के लिए प्रेरित कर विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। पशुपालन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ेगी और वे आत्मनिर्भर होंगे। हमारा संकल्प है कि हम प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को निरंतर बढ़ाएंगे और वर्ष 2028 तक प्रदेश को देश की मिल्क कैपिटल बनाएंगे। गो-संरक्षण और गो-संवर्धन सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में पशुपालन विभाग को अब गौपालन विभाग का नाम दिया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में “स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना नीति-2025” लागू की गई है। इसके अंतर्गत नगरीय क्षेत्रों में उपलब्ध गोवंश के आश्रय और भरण-पोषण के लिए 5 हजार से अधिक क्षमता वाली वृहद गौशालाएं स्थापित की जा रही हैं। प्रदेश के आगर मालवा, इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन जिलों में आदर्श गौशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं, जबकि भोपाल, जबलपुर और सागर में इनके निर्माण कार्य प्रगतिरत हैं। ग्वालियर स्थित आदर्श गौशाला में देश का पहला 100 टन क्षमता वाला सीएनजी प्लांट स्थापित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश देश के कुल दुग्ध उत्पादन का लगभग 9 प्रतिशत योगदान देता है, जिसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में सांची ब्रांड को और अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के साथ करार किया गया है। गोवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। प्रदेश में गौसंवर्धन बोर्ड के माध्यम से गौशालाओं को चारा-भूसा अनुदान के लिए 505 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। गौशालाओं में गोवंश के बेहतर आहार की व्यवस्था के लिए प्रति गोवंश दी जाने वाली सहायता राशि 20 रुपये प्रतिदिन से बढ़ाकर 40 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है। घायल अथवा असहाय गायों के लिए हाइड्रोलिक कैटल लिफ्टिंग वाहनों की व्यवस्था भी की जा रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि पशुपालन और डेयरी विकास को गति देने के लिए “मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना” का नाम परिवर्तित कर “डॉ. भीमराव अंबेडकर विकास योजना” किया गया है। इस योजना के अंतर्गत 25 दुधारू पशुओं की डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए लगभग 42 लाख रुपये तक ऋण सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें 25 से 33 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है।

प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और संग्रहण को बढ़ाने के लिए व्यापक योजना बनाई गई है। दुग्ध संकलन क्षमता को बढ़ाते हुए 50 लाख लीटर प्रतिदिन तक दुग्ध संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है। अगले 5 वर्षों में दूध संकलन कवरेज वाले गांवों की संख्या 9 हजार से बढ़ाकर 26 हजार करने का लक्ष्य है। इसी अवधि में प्रदेश के कम से कम 50 प्रतिशत गांवों में प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों की स्थापना की जाएगी।

अब तक प्रदेश में 1,181 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है और 617 निष्क्रिय समितियों को पुनः सक्रिय बनाया गया है। इसमें लगभग 150 बहुउद्देशीय सहकारी समितियों का गठन भी शामिल है। दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के हर ब्लॉक में एक वृंदावन ग्राम विकसित किया जा रहा है।

गो-संरक्षण और गो-संवर्धन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बन रहा है। मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना, कामधेनु निवास योजना, मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम और नस्ल सुधार कार्यक्रम सहित विभिन्न योजनाओं का प्रदेश में प्रभावी क्रियान्वयन जारी है।

अति पिछड़ी जनजातियों बैगा, सहरिया और भारिया के पशुपालकों के लिए प्रदेश के 14 जिलों में मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना संचालित की जा रही है, जिसमें 90 प्रतिशत अनुदान पर दो-दो मुर्रा भैंस या गाय प्रदान की जाती हैं। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सीहोर, विदिशा और रायसेन जिलों में संचालित किया जा रहा है।

केंद्र सरकार के राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत प्रदेश में 1500 “मैत्री” (मल्टीपर्पज आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन टेक्नीशियन इन रूरल इंडिया) केंद्रों की स्थापना की जा रही है, जिसके माध्यम से कृत्रिम गर्भाधान द्वारा पशु नस्ल सुधार का कार्य निरंतर किया जा रहा है।

बस्तर राइडर्स मीट 2026 : रोमांच, संस्कृति और पर्यटन का अद्भुत संगम

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रायपुर :  बस्तर की धरती एक बार फिर रोमांच, ऊर्जा और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर नजर आई, जब बस्तर राइडर्स मीट 2026 का भव्य आयोजन गरुड़ा राइडर क्लब के तत्वावधान में किया गया। देश के विभिन्न राज्यों से आए बाइकर्स और एडवेंचर प्रेमियों ने इस आयोजन को यादगार बना दिया।

देशभर के राइडर्स का जगदलपुर में जमावड़ा, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की पहल से बस्तर को मिली नई पहचान

इस आयोजन में बाइक स्टंट्स, राइडिंग शो और एडवेंचर एक्टिविटीज ने युवाओं में जबरदस्त उत्साह भर दिया। राइडर्स ने अपनी बेहतरीन स्किल्स का प्रदर्शन करते हुए दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
 
जहां एक ओर एडवेंचर का जोश था, वहीं दूसरी ओर बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत भी पूरे शबाब पर दिखी। लोकनृत्य, संगीत और पारंपरिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। यह आयोजन आधुनिकता और परंपरा का बेहतरीन संगम बनकर उभरा।

कार्यक्रम में उन प्रभावशाली व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने बस्तर की पहचान को सकारात्मक रूप से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसमें इन्फ्लुएंसर्स, कलाकार, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल रहे।

इस आयोजन में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल  द्वारा होटल एम्बिशन में विशेष स्टॉल लगाया गया, जहां बस्तर के प्रमुख पर्यटन स्थलों, संस्कृति और स्थानीय उत्पादों की जानकारी दी गई।

यह पहल राज्य सरकार की उस सोच को दर्शाती है, जिसके तहत स्थानीय पर्यटन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ सरकार लगातार बस्तर जैसे आदिवासी अंचलों को विकास और पहचान दिलाने के लिए प्रयासरत है। इस प्रकार के आयोजन न केवल पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार और अवसर भी प्रदान करते हैं।

सरकार की योजनाओं और पर्यटन मंडल की सक्रिय भागीदारी से बस्तर आज एक उभरते पर्यटन एवं एडवेंचर हब के रूप में सामने आ रहा है।
बस्तर अब केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि एडवेंचर और सांस्कृतिक पर्यटन के लिए भी तेजी से उभर रहा है।

हरी खाद से बदल रही खेती की तस्वीर : कम लागत, बेहतर मुनाफा और स्वस्थ मिट्टी

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रायपुर :  छत्तीसगढ़ में खेती की पारंपरिक तस्वीर तेजी से बदल रही है। रायगढ़ जिले में हरी खाद आधारित खेती किसानों के लिए एक प्रभावी और टिकाऊ विकल्प के रूप में उभर रही है। यह पद्धति जहां मिट्टी की उर्वरता को दीर्घकालिक रूप से मजबूत कर रही है, वहीं किसानों को कम लागत में बेहतर मुनाफा भी दिला रही है।

लैलूंगा विकासखंड के प्रगतिशील किसान जतिराम भगत इस बदलाव की जीवंत मिसाल हैं। वे पिछले 22 वर्षों से जैविक और हरी खाद आधारित खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि शुरुआती दौर में उत्पादन थोड़ा कम लग सकता है, लेकिन समय के साथ मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होने पर उत्पादन स्थायी और बेहतर हो जाता है। उन्होंने इस वर्ष 2 एकड़ में श्री विधि और लाइन कतार पद्धति से खेती कर प्रति एकड़ लगभग 15 क्विंटल धान और 9 क्विंटल चावल उत्पादन प्राप्त किया। उनकी लागत 15 से 20 हजार रुपये प्रति एकड़ रही, जबकि शुद्ध मुनाफा लगभग 80 हजार रुपये तक पहुंचा।

कृषि विभाग के अनुसार खरीफ सीजन से पहले 15 मई के बाद हरी खाद की बुआई का उपयुक्त समय होता है। ढैंचा, सनई और मूंग जैसी फसलों को 45-50 दिन बाद खेत में मिलाने से मिट्टी में जैविक पोषक तत्वों की वृद्धि होती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। लैलूंगा में हरी खाद का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। विभाग ने इस वर्ष 2000 एकड़ में हरी खाद बुआई का लक्ष्य निर्धारित किया है। “यूरिया-डीएपी छोड़बो, हरी खाद बुआई करबो” जैसे संकल्प अब किसानों के बीच नई दिशा तय कर रहे हैं।

शहीद के संघर्ष और बलिदान की गाथा भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा : राज्यपाल पटेल

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भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने धार जिले के गौरव, अमर शहीद नायब सूबेदार रवींद्र सिंह राठौर की प्रतिमा का रविवार को अनावरण किया। शहीद की वीरता को नमन करते हुए उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि शहीद की स्मृति को चिरस्थाई बनाने की यह पहल और अटूट निष्ठा अनुकरणीय है।

राज्यपाल द्वारा शहीद की पत्नी प्रताप कंवर और उनके परिवारजन का आत्मीय सम्मान किया गया। नगर परिषद द्वारा बदनावर की माथुर कॉलोनी में नवनिर्मित शहीद पार्क में समारोह का भव्य आयोजन किया गया था।

राज्यपाल पटेल ने शहीद रवींद्र सिंह के जीवन संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्राम पाना के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे रवींद्र सिंह ने सेना में भर्ती होने के लिए लगातार तीन बार प्रयास किए। उनकी यह जिद और देश सेवा का जज्बा ही उन्हें सेना तक ले गया। उन्होने बताया कि 9 जुलाई 2001 को जम्मू की सुरनकोट तहसील के जंगलों में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए उन्होंने वीरगति प्राप्त की। उनका बलिदान धार जिले सहित पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने परिसर में पौध-रोपण कर पर्यावरण-संरक्षण का संदेश दिया।

समारोह में केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर, क्षेत्रीय विधायक नीना वर्मा, पूर्व मंत्री राजवर्धनसिंह दत्तीगांव, नगर परिषद अध्यक्ष मीना शेखर यादव सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

चंबल के कछुए बने नमामि गंगे मिशन में मां गंगा के ‘प्राकृतिक सफाई-योद्धा’

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भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश सरकार जंगलों और जल स्रोतों को समृद्ध बनाकर वन्य और जलीय जीवों के संरक्षण के लिये सतत प्रयास कर रही है। विशेष रूप से साफ पानी वाली नदियों में कछुओं की विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण-संवर्धन से हमारा जलीय पारिस्थिकी तंत्र सशक्त और संतुलित बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रकृति और वन्यजीवों की सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है। कछुओं का विमुक्तिकरण और चीता पुनर्वास की दिशा में बढ़ते कदम मध्यप्रदेश को वन्य-जीव पर्यटन और संरक्षण के वैश्विक मानचित्र पर और अधिक प्रभावी रूप से स्थापित करेंगे। उन्होंने पारिस्थितिकी तंत्र में कछुओं की महत्ता पर जोर देते हुए जल संरचनाओं के संरक्षण का आहवान किया।

नमामि गंगे मिशन के अंतर्गत चंबल नदी में संरक्षित दुर्लभ प्रजातियों के कछुए अब गंगा नदी की स्वच्छता और पारिस्थितिकी पुनर्जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। प्राकृतिक रूप से जैविक कचरे और सड़े-गले अवशेषों को खाने की क्षमता के कारण इन्हें नदी के ‘प्राकृतिक सफाई-योद्धा’ के रूप में उपयोग किया जा रहा है।

प्रदेश में नमामि गंगे परियोजना के शुभारंभ के बाद से ही चंबल में संरक्षित कछुओं को गंगा में छोड़ने का प्रयोग शुरू किया गया था। इसी क्रम में 26 अप्रैल 2025 को चंबल के संरक्षण केंद्रों से 20 दुर्लभ ‘रेड क्राउन रूफ्ड टर्टल’ (बटागुर कछुये) उत्तर प्रदेश के हैदरपुर वेटलैंड और गंगा की मुख्य धारा में छोड़े गये।

गंगा पुनर्जीवन के ‘जलीय योद्धा’

राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य क्षेत्र में पाए जाने वाले बटागुर और बटागुर डोंगोका जैसे दुर्लभ कछुए गंगा की सफाई और जैव विविधता को पुनर्जीवित करने में सहायक माने जा रहे हैं। इन कछुओं को गंगा नदी के विभिन्न हिस्सों में छोड़ा जा रहा है। नमामि गंगे मिशन के अंतर्गत चंबल के ये दुर्लभ कछुए अब गंगा के पुनर्जीवन अभियान के ‘जलीय योद्धा’ बनकर उभरे हैं। अपनी प्राकृतिक सफाई क्षमता के माध्यम से ये न केवल नदी की स्वच्छता में योगदान दे रहे हैं, बल्कि जलीय जैव विविधता को पुनर्जीवित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

गंगा की प्राकृतिक सफाई में कैसे मददगार हैं कछुए

विशेषज्ञों के अनुसार गंगा नदी के कई शहरी तटों पर बढ़ते प्रदूषण के कारण जैव विविधता संकट में है। ऐसे में कछुए जैसे जलीय जीव नदी की प्राकृतिक सफाई में अहम भूमिका निभाते हैं।

मांसाहारी प्रकृति: ये कछुए नदी में मौजूद सड़े-गले जैविक पदार्थ और मृत जीवों को खाकर पानी को प्रदूषित होने से बचाते हैं।

पारिस्थितिकी संतुलन: इनके कारण नदी के जलीय तंत्र में संतुलन बना रहता है, जिससे पानी की गुणवत्ता बेहतर होती है।

जैविक कचरे का निपटान: ये कछुए ऐसे जैविक अवशेषों को भी खत्म कर देते हैं जिन्हें मशीनों से साफ करना कठिन होता है।

गंगा की स्वच्छता पर सकारात्मक प्रभाव

गंगा में छोड़े गए कछुओं का जल गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव देखा गया है। जल शक्ति मंत्रालय और प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के आकलन के अनुसार कई स्थानों पर जल गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया है।

         बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) और फीकल कोलीफॉर्म (FC) स्तर में कमी देखी गई है।

         वाराणसी के अस्सी घाट पर FC स्तर 2014 में 2500 MPN/100mL से घटकर 2025 में 790 MPN/100mL रह गया।

         पटना के गांधी घाट पर यह स्तर 5400 से घटकर 2200 MPN/100mL दर्ज किया गया।

         गंगा के अधिकांश हिस्सों में डिजॉल्व्ड ऑक्सीजन (DO) स्तर अब 5.0 mg/l से अधिक है, जो जलीय जीवन के लिए अनुकूल माना जाता है।

             हैदरपुर वेटलैंड में कछुओं की 50 प्रतिशत से अधिक जीवित रहने की दर को भी नदी के स्वास्थ्य में सुधार का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

चंबल में पाई जाती हैं कछुओं की नौ दुर्लभ प्रजातियां

चंबल नदी में कुल नौ दुर्लभ प्रजातियों के कछुए पाए जाते हैं। इनमें बटागुर कछुआ प्रमुख है, जो मीठे पानी में रहने वाला सर्वहारी जीव है। यह नदी में बहते वनस्पति और मृत जीवों को खाकर जल को स्वच्छ बनाए रखने में मदद करता है। इसी प्रजाति का बटागुर डोंगोका ‘नदी का स्वीपर’ कहलाता है। इसके अलावा साल कछुआ, धमोक, चौड़, मोरपंखी, कटहेवा, पचेड़ा और इंडियन स्टार कछुआ जैसी दुर्लभ प्रजातियां भी चंबल में हैं।

अवैध खनन के मामले मेें जेसीबी सहित 5 वाहन जब्त

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रायपुर : बेमेतरा जिले में खनिज के अवैध उत्खनन एवं परिवहन के मामले में जिला प्रशासन द्वारा लगातार कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में राजस्व एवं खनिज विभाग के संयुक्त दल द्वारा तहसील थान खमरिया अंतर्गत ग्राम कुरदा एवं जेवरा में  अवैध खनन एवं परिवहन में संलिप्त 1 जेसीबी मशीन, 2 हाईवा वाहन तथा ईंट से भरा 1 स्वराज माजदा वाहन जब्त किया गया। इन वाहनों को सुरक्षार्थ थाना थान खमरिया में रखा गया है।

 इसके अतिरिक्त अवैध परिवहन के एक अन्य प्रकरण में रेत से भरा 1 हाईवा वाहन भी जब्त कर थाना बेरला में सुरक्षित रखा गया है, जिस पर नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई की जा रही है। गौरतलब है कि बीते दिनों भी प्रशासन द्वारा गिट्टी से भरी 2 हाईवा गाडि़यां जब्त कर थाना बेरला में खड़ी कराई गई थीं, जिन पर विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन एवं परिवहन के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा तथा आम नागरिकों से भी ऐसी गतिविधियों की सूचना देने की अपील की गई है।

सरायपाली सीएचसी में सुरक्षित मातृत्व की ओर महत्वपूर्ण उपलब्धि तीसरा सफल सिजेरियन

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रायपुर :  महासमुंद जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरायपाली में सुरक्षित मातृत्व सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। यहां चिकित्सकों की टीम ने सफलतापूर्वक तीसरा सिजेरियन (सी-सेक्शन) ऑपरेशन करते हुए 26 वर्षीय महिला नरगिस का सुरक्षित प्रसव कराया, जिसमें उन्होंने 3.2 किलोग्राम वजनी स्वस्थ शिशु को जन्म दिया।

कलेक्टर विनय कुमार लंगेह एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आई. नागेश्वर राव ने इस सफलता पर चिकित्सा दल को बधाई देते हुए कहा कि राज्य शासन की प्राथमिकता सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करना एवं आमजन को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। सरायपाली सीएचसी इस दिशा में निरंतर उत्कृष्ट कार्य कर रहा है।

इस जटिल ऑपरेशन को डॉ. संजय अग्रवाल, डॉ. के. वी. किरण कुमार, डॉ. कुणाल नायक, स्टाफ नर्स प्रगति शर्मा एवं समीर पटेल की टीम ने कुशलतापूर्वक संपन्न किया। यह सफलता स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती गुणवत्ता, उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग और विशेषज्ञता को दर्शाती है। प्रसव के पश्चात जच्चा एवं शिशु दोनों स्वस्थ हैं और चिकित्सकीय निगरानी में सुरक्षित हैं। सरायपाली सीएचसी में मिल रही सुलभ एवं बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से क्षेत्रीय नागरिकों में संतोष और विश्वास बढ़ा है।

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