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‘जननायकन’ के प्रोड्यूसर को विजय ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, तमिलनाडु की राजनीति में मचा बवाल

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चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय ने एक बड़ा और नीतिगत फैसला लेते हुए फिल्म निर्माता के. वेंकट नारायण को नई दिल्ली में राज्य सरकार का विशेष प्रतिनिधि मनोनीत किया है। तमिलनाडु सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, यह नियुक्ति पूर्णतः अस्थाई है और इसका कार्यकाल एक वर्ष के लिए तय किया गया है, जबकि प्रशासनिक दर्जे के लिहाज से यह पद कैबिनेट मंत्री के समकक्ष माना जाता है। मुख्यमंत्री विजय के इस अप्रत्याशित कदम के सामने आते ही राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सहित अन्य प्रमुख विपक्षी दलों ने इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया है।

कौन हैं नवनियुक्त विशेष प्रतिनिधि के. वेंकट नारायण

विशेष प्रतिनिधि बनाए गए के. वेंकट नारायण पेशेवर रूप से एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और लॉ ग्रेजुएट (विधि स्नातक) हैं। वे बेंगलुरु स्थित मशहूर फिल्म निर्माण कंपनी 'केवीएन प्रोडक्शंस' के संस्थापक भी हैं। उल्लेखनीय है कि नारायण ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की मुख्य भूमिका वाली आगामी फिल्म 'जननायक' का निर्माण किया है, जो कुछ तकनीकी और सेंसर प्रमाणन संबंधी दिक्कतों के चलते अभी तक सिनेमाघरों में प्रदर्शित नहीं हो सकी है।

नियुक्ति को लेकर भारतीय जनता पार्टी के तीखे सवाल

भाजपा की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष नैनार नागेन्द्रन ने इस प्रशासनिक फैसले पर गहरी हैरानी प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि विजय सरकार ने दिल्ली में राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक ऐसे व्यक्ति को चुना है, जिसे तमिल भाषा और वहां की समृद्ध संस्कृति का बुनियादी ज्ञान तक नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस व्यक्ति का तमिलनाडु की धरती से कोई सीधा सरोकार नहीं रहा, वह केंद्र और राज्य सरकार के बीच एक मजबूत सेतु की भूमिका कैसे निभा सकता है और क्या उन्हें यह अहम पद केवल इसलिए दिया गया है क्योंकि वे मुख्यमंत्री की फिल्म के निर्माता हैं या फिर इसके पीछे कांग्रेस पार्टी का कोई अदृश्य राजनीतिक दबाव काम कर रहा है।

कावेरी और मेकेदातु बांध विवाद पर द्रमुक और अन्नाद्रमुक का विरोध

इस संवेदनशील मुद्दे पर द्रमुक नेता तिरुची शिवा ने सरकार को घेरते हुए कहा कि सबसे बड़ा संशय यह है कि क्या मूल रूप से कर्नाटक के रहने वाले नारायण, मेकेदातु बांध के गंभीर विवाद पर तमिलनाडु के हितों और यहां के किसानों के पक्ष में मुस्तैदी से खड़े हो पाएंगे। उन्होंने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री विजय खुद विधानसभा में कह चुके हैं कि उनकी सरकार कावेरी नदी पर बांध बनाने के कर्नाटक के रुख का पुरजोर विरोध करेगी क्योंकि इससे डेल्टा क्षेत्र के कृषकों की आजीविका प्रभावित होगी, ऐसे में इस नियुक्ति पर स्पष्टीकरण जरूरी है। दूसरी तरफ, अन्नाद्रमुक ने भी इस कदम की तीव्र भर्त्सना करते हुए वर्तमान प्रशासन को कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की 'प्रॉक्सी सरकार' करार दिया और पूछा कि पड़ोसी सूबे का कोई नागरिक तमिलनाडु के जल अधिकारों की रक्षा दिल्ली में किस तरह कर पाएगा।

कर्नाटक हाईवे पर दर्दनाक हादसा, ट्रक ने डिवाइडर पार कर वैन को मारी टक्कर

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कोप्पल। कर्नाटक के कोप्पल जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है, जहां एक तेज रफ्तार ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क के डिवाइडर को पार करते हुए सामने से आ रही वैन से जा टकराया। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, इस भीषण टक्कर में वैन सवार चार तीर्थयात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार बच्चों समेत कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया।

तीर्थयात्रा पर जा रहा था पीड़ित परिवार

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह दर्दनाक दुर्घटना कुकानूर तालुक के अंतर्गत भानपुर के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग-63 (NH-63) पर घटित हुई। वैन में सवार सभी पीड़ित हावेरी जिले के रत्तीहल्ली तालुक के कब्बर गांव के निवासी थे। यह पूरा परिवार आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मंत्रालयम की तीर्थयात्रा पर जा रहा था। इसी दौरान सामने से आ रहे एक बेकाबू ट्रक ने डिवाइडर तोड़कर उनकी गाड़ी को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे यह बड़ा हादसा हुआ।

मृतकों की पहचान और घायलों की स्थिति

इस भीषण सड़क हादसे में जान गंवाने वाले श्रद्धालुओं की पहचान केंचम्मा बालेकायी (35), अमृता कोट्याल (25), रमेश बल्लारी (45) और प्रवीण (23) के रूप में की गई है। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वैन में सवार अन्य सहयात्रियों को भी गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस ने बताया कि कुल घायलों में चार मासूम बच्चे भी शामिल हैं, जिनमें से दो पीड़ितों की स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है।

अस्पताल में उपचार और कानूनी कार्रवाई

दुर्घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को उपचार के लिए कोप्पल जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की टीम उनकी देखरेख कर रही है। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारियों ने घटना स्थल का बारीकी से मुआयना किया और क्षतिग्रस्त वाहनों को हाईवे से हटाकर यातायात सुचारु कराया। इस पूरे मामले में कुकानूर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

कोरबा सड़क हादसा: दो ट्रेलरों की टक्कर बनी काल, एक की मौत, फरार चालक की तलाश

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कोरबा: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कटघोरा थाना इलाके में शनिवार की सुबह एक बेहद दर्दनाक और भीषण सड़क दुर्घटना सामने आई है। कटघोरा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भालूमोड़ के पास दो अनियंत्रित और तेज गति से आ रहे भारी वाहनों (ट्रेलरों) में आमने-सामने की सीधी और जोरदार भिड़ंत हो गई। यह टक्कर इतनी विनाशकारी थी कि दोनों ही ट्रेलरों के सामने का हिस्सा (केबिन) पूरी तरह चकनाचूर हो गया और लोहे के मलबे में तब्दील हो गया। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे में एक वाहन चालक की मौके पर ही सांसें थम गईं, जबकि दूसरा चालक दुर्घटना के तुरंत बाद वाहन सहित मौके से भागने में कामयाब रहा।

कटर से काटना पड़ा केबिन, दर्दनाक रूप से फंसा रहा चालक का शव

स्थानीय थाना पुलिस से मिली प्राथमिक जानकारियों के अनुसार, दुर्घटना सुबह के वक्त घटित हुई जब दोनों भारी वाहन विपरीत दिशाओं से अत्यधिक रफ्तार में आ रहे थे। तीखे मोड़ या ढलान पर नियंत्रण खोने की वजह से दोनों के बीच सीधी टक्कर हो गई। टक्कर का प्रभाव इतना भयावह था कि एक ट्रेलर का चालक ड्राइविंग सीट पर ही स्टीयरिंग और केबिन के मलबे के बीच बुरी तरह पीस गया और उसकी घटना स्थल पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई। शव लोहे की चादरों के बीच इस कदर फंस चुका था कि उसे सामान्य तरीके से बाहर निकालना नामुमकिन था।

कटघोरा पुलिस ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन, परिजनों को दी सूचना

सड़क मार्ग से गुजर रहे अन्य राहगीरों द्वारा घटना की जानकारी दिए जाने के तुरंत बाद कटघोरा थाना प्रभारी अपनी टीम और रेस्क्यू उपकरणों के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने बिना वक्त गंवाए राहत कार्य शुरू किया। केबिन में फंसे शव को बाहर निकालने के लिए हाइड्रोलिक कटर और गैस कटर की मदद ली गई। काफी मशक्कत के बाद लोहे की बॉडी को काटकर मृतक चालक के शव को बाहर निकाला जा सका, जिसे तुरंत एम्बुलेंस के जरिए मर्चुरी (शवगृह) भिजवाया गया। पुलिस ने पंचनामा तैयार कर शव को पोस्टमार्टम के लिए सुरक्षित रखवा दिया है। इसके साथ ही, दुर्घटनाग्रस्त वाहन के दस्तावेजों के आधार पर मृतक के परिजनों तथा संबंधित ट्रांसपोर्टर/वाहन मालिक को हादसे की आधिकारिक सूचना दे दी गई है और उनके कोरबा पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है।

फरार आरोपी ड्राइवर के खिलाफ हिट एंड रन का मुकदमा, सीसीटीवी खंगाल रही पुलिस

पुलिस प्रशासन ने इस पूरे मामले में मर्ग कायम कर दुर्घटना के सही कारणों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। शुरुआती मैकेनिक निरीक्षण और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर दोनों वाहनों की अत्यधिक रफ्तार को ही इस जानलेवा हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है। हादसे के बाद मौके से भाग निकले दूसरे ट्रेलर और उसके चालक के खिलाफ पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या, लापरवाही से वाहन चलाने और 'हिट एंड रन' (दुर्घटना कर भाग जाना) की कड़ी धाराओं के तहत आपराधिक केस दर्ज कर लिया है। पुलिस घटनास्थल के आस-पास के ढाबों और टोल प्लाजा पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है ताकि फरार वाहन के नंबर और आरोपी चालक की सटीक पहचान कर उसे जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जा सके।

मोहर्रम पर खतरनाक स्टंट पड़ा भारी, आग की लपटों में घिरा युवक, मोबाइल में रिकॉर्ड हुआ हादसा

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दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह जिले में मोहर्रम की शहर गश्त के दौरान हैरतअंगेज स्टंट दिखाने का प्रयास एक नौजवान के लिए बेहद खतरनाक साबित हुआ। जलती हुई मशाल के आगे मुंह से पेट्रोल की फूंक मारकर आग का गुबार उड़ाने के दौरान अचानक लपटें युवक के मुंह के भीतर तक समा गईं। इस खौफनाक हादसे के होते ही आयोजन स्थल पर चीख-पुकार मच गई और चारों तरफ अफरातफरी का माहौल पैदा हो गया। दिल दहला देने वाली इस पूरी घटना का एक वीडियो इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर काफी तेजी से प्रसारित हो रहा है।

गढ़ी मोहल्ला में पारंपरिक गश्त के दौरान हादसा

यह दर्दनाक वाकया जिले के गढ़ी मोहल्ला क्षेत्र में मोहर्रम के जुलूस और पारंपरिक गश्त के दौरान घटित हुआ, जहां प्रदर्शन के लिए एक बड़ी मशाल प्रज्वलित की गई थी। इसी बीच कुछ उत्साही युवक आग के साथ जोखिमभरे स्टंट कर रहे थे, जिसमें एक युवक अपने मुंह में पेट्रोल भरकर मशाल की तरफ तेज फूंक मारते हुए आग उगलने का हुनर दिखा रहा था। उसने दो-तीन बार तो यह सफलतापूर्वक कर दिखाया, किंतु चौथी बार जैसे ही उसने पेट्रोल की फूंक मारी, आग ने उलटी दिशा पकड़ ली और सीधे उसके मुंह के अंदर चली गई, जिससे उसका चेहरा और गला लपटों की चपेट में आ गया।

गंभीर रूप से झुलसे युवक को जबलपुर किया गया रेफर

वहां उपस्थित प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य लोगों ने बिना वक्त गंवाए तुरंत युवक के शरीर पर लगी बाहरी आग को शांत किया, परंतु मुंह के भीतर पेट्रोल चले जाने के कारण वह अंदरूनी रूप से काफी गंभीर रूप से झुलस गया और असहनीय दर्द से तड़पने लगा। स्थानीय स्तर पर प्राथमिक चिकित्सा देने के बाद युवक की नाजुक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे त्वरित और बेहतर इलाज के लिए जबलपुर के उच्च चिकित्सा केंद्र में स्थानांतरित (रेफर) कर दिया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उसका उपचार किया जा रहा है।

हादसे का वीडियो वायरल और स्टंट के खतरों की चेतावनी

जुलूस में शामिल कई लोग इस प्रदर्शन को देख रहे थे और कुछ युवाओं ने इस पूरी घटना को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया, जिसके बाद यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और सुरक्षित रहने की अपील कर रहे हैं। इस दुखद हादसे ने एक बार फिर त्योहारों या सार्वजनिक आयोजनों के दौरान बिना सुरक्षा मानकों के किए जाने वाले ऐसे जानलेवा और अग्नि संबंधी खतरनाक स्टंटों के बड़े जोखिम को लेकर समाज के सामने एक गंभीर चेतावनी पेश की है।

CM मोहन यादव दो दिन के लिए बैतूल के कुकरू में, ग्रामीणों से करेंगे सीधा संवाद

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बैतूल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बैतूल जिले के प्रसिद्ध हिल स्टेशन कुकरू के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब 6:30 बजे कुकरू पहुंचने के बाद वे सबसे पहले वहां के विख्यात सनसेट पॉइंट का दीदार करेंगे। इसके पश्चात मुख्यमंत्री स्थानीय ग्राम पंचायत में आयोजित होने वाली रात्रि चौपाल का हिस्सा बनेंगे, जहां वे ग्रामीण जनता से सीधे रूबरू होकर उनकी समस्याओं एवं शिकायतों को सुनेंगे और स्थानीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद भी लेंगे। मुख्यमंत्री का रात्रि विश्राम भी कुकरू के नैसर्गिक वातावरण में ही तय किया गया है।

सुबह का ध्यान और स्थानीय विकास कार्यों का जायजा

अगले दिन यानी 28 जून की सुबह मुख्यमंत्री सनराइज और बुच पॉइंट पर जाकर योग एवं मेडिटेशन के साथ अपने दिन की शुरुआत करेंगे। इसके बाद वे क्षेत्र के विकास में जुटी स्व-सहायता समूह की महिलाओं की आत्मनिर्भर गतिविधियों का अवलोकन करेंगे, पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से पौधरोपण कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे और कुकरू की पहचान माने जाने वाले कॉफी प्लांटेशन (कॉफी के बागानों) का जमीनी निरीक्षण करेंगे।

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उच्च स्तरीय मंथन

फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में मुख्यमंत्री पर्यटन विभाग के आला अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक करेंगे, जिसमें कुकरू क्षेत्र को एक बड़े पर्यटन हब के रूप में स्थापित करने के लिए होम स्टे योजना, एडवेंचर टूरिज्म, इको टूरिज्म और कॉफी टूरिज्म को बढ़ावा देने की रणनीतियों पर गहन मंथन होने की उम्मीद है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाले मोटे अनाज कोदो-कुटकी की ब्रांडिंग करने तथा क्षेत्र में पेयजल संकट को दूर करने वाली योजनाओं को लेकर भी बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

जनप्रतिनिधियों से मुलाकात, मन की बात और प्रशासनिक मुस्तैदी

दोपहर के सत्र में मुख्यमंत्री सुबह 10:00 बजे स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से भेंट कर क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे, जिसके बाद वे पूर्वाह्न 11:00 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के सामूहिक प्रसारण को सुनेंगे और दोपहर 12:10 बजे राजधानी भोपाल के लिए प्रस्थान करेंगे। मुख्यमंत्री के इस बेहद खास दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने कुकरू में अस्थाई हेलीपैड का निर्माण कराने सहित चौपाल और अन्य सभा स्थलों पर सुरक्षा एवं स्वागत की सभी तैयारियां समय से पहले पूरी कर ली हैं।

मध्य प्रदेश में 86 डॉक्टरों का संकट, डिग्री अटकी और लोन चुकाना हुआ मुश्किल

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भोपाल। मध्य प्रदेश के चिकित्सा क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है, जहां राज्य के 86 डॉक्टरों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र और डिग्रियां सरकारी विभागों के पास 'बंधक' बनी हुई हैं। एक तरफ जहां प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के आधे से अधिक पद रिक्त पड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ मूल डिग्रियां न मिलने के कारण इन योग्य डॉक्टरों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है। इस प्रशासनिक गतिरोध के चलते किसी को अपना बैंक लोन चुकाने में भारी परेशानी हो रही है, तो किसी का विवाह तक टल गया है।

डॉक्टरों की आपबीती और मूल दस्तावेज अटकने का संकट

सेना की चिकित्सा विंग में अपनी सेवाएं देने के बाद भोपाल वापस आए मेजर डॉ. यश श्रीवास्तव ने अपनी व्यथा साझा की है। उन्होंने बताया कि शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) के जरिए सेना में सेवा देने के बाद कुछ पारिवारिक कारणों से उन्हें वापस लौटना पड़ा। उन्होंने दिसंबर 2025 में जनरल सर्जरी में एमएस (मास्टर्स ऑफ सर्जरी) की डिग्री पूरी की थी। नियमानुसार, दाखिले के समय उनसे ग्रामीण क्षेत्रों में अनिवार्य सेवा देने का एक शासकीय बॉन्ड भरवाया गया था, परंतु कोर्स पूरा होने के बाद भी सरकार द्वारा उन्हें कहीं पोस्टिंग नहीं दी गई। विडंबना यह है कि इस बॉन्ड के चक्कर में उनकी 10वीं, 12वीं और एमबीबीएस जैसी पिछली सभी मूल डिग्रियां भी चिकित्सा शिक्षा विभाग के पास जमा हैं, जिसके अभाव में वे मध्य प्रदेश या देश के किसी भी अन्य राज्य में प्रैक्टिस या नौकरी करने में पूरी तरह असमर्थ हैं, क्योंकि इसके लिए चिकित्सा संचालनालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) की अनिवार्यता होती है।

लोन की ईएमआई और शादी रुकने की बड़ी परेशानी

पीड़ित डॉक्टरों के अनुसार, इस प्रशासनिक शिथिलता का उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। डॉ. यश ने बताया कि उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा के लिए बैंक से एक बड़ा लोन लिया था, लेकिन नौकरी न मिल पाने के कारण अब वे उसकी मासिक किस्त (ईएमआई) चुकाने की स्थिति में भी नहीं हैं। इसके अलावा, मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र पास में न होने से उनके कई सहकर्मियों के वैवाहिक संबंध तक टूट रहे हैं या अटक गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वे देश में जहां कहीं भी रोजगार या निजी अस्पतालों में साक्षात्कार के लिए जाते हैं, वहां सबसे पहले मूल दस्तावेजों की मांग की जाती है, जिन्हें प्रस्तुत न कर पाने के कारण उन्हें बैरंग लौटना पड़ता है।

विभागों की आपसी खींचतान और अदालती आदेश

इस गंभीर संवेदनशील मामले पर सरकारी महकमों में आपसी तालमेल का घोर अभाव देखने को मिल रहा है। चिकित्सा शिक्षा विभाग का तर्क है कि बॉन्ड और पोस्टिंग से जुड़ा यह पूरा मामला सीधे तौर पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है। इस प्रशासनिक खींचतान के बीच सरकार की ओर से अभी तक कोई भी आधिकारिक स्पष्टीकरण या राहत भरा बयान सामने नहीं आया है। अपनी डिग्रियों की वापसी के लिए संघर्ष कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि इस विषय पर उच्च न्यायालय का भी स्पष्ट दिशा-निर्देश है, जिसके तहत यदि किसी डॉक्टर को कोर्स पूरा होने के बाद तीन महीने के भीतर बॉन्ड आधारित सरकारी पोस्टिंग नहीं दी जाती है, तो वह बॉन्ड स्वतः ही निरस्त माना जाएगा। इसके बावजूद अधिकारी डिग्रियां लौटाने में आनाकानी कर रहे हैं।

वेनेजुएला के बाद अब पाकिस्तान में कांपी धरती, डेरा गाजी खान के पास आया भूकंप

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इस्लामाबाद। दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप की त्रासदी के बीच अब पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी भूगर्भीय हलचल तेज हो गई है। शनिवार सुबह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के अंतर्गत आने वाले डेरा गाजी खान क्षेत्र और उसके आस-पास के इलाकों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 5.4 आंकी गई है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस प्राकृतिक आपदा के कारण तत्काल किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान या बड़ी तबाही की कोई खबर सामने नहीं आई है, लेकिन स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और स्थिति की निगरानी कर रहा है।

भूकंप का समय, तीव्रता और केंद्र की स्थिति

स्थानीय समय के अनुसार यह भूकंप सुबह 8:53 बजे आया, जिसने लोगों को डरा दिया। भू-वैज्ञानिकों के मुताबिक भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.4 दर्ज की गई और इसका मुख्य केंद्र डेरा गाजी खान के निकटवर्ती क्षेत्र में जमीन के भीतर लगभग 75 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। झटके इतने तेज थे कि धरती हिलते ही घबराए लोग अपने घरों, दुकानों और बहुमंजिला इमारतों से सुरक्षा के लिए तुरंत खुले मैदानों की तरफ भागने लगे।

पाकिस्तान की भौगोलिक संवेदनशीलता और पूर्व के झटके

पाकिस्तान में पिछले कुछ समय से लगातार भूकंपीय गतिविधियां देखी जा रही हैं। इस घटना से ठीक एक दिन पहले, यानी शुक्रवार को भी देश के बलूचिस्तान प्रांत के विभिन्न हिस्सों में धरती कांपी थी। भौगोलिक संरचना के दृष्टिकोण से पाकिस्तान एक अत्यधिक संवेदनशील फॉल्ट लाइन क्षेत्र में स्थित है, जिसके कारण यहां समय-समय पर टेक्टोनिक प्लेटों में टकराव होने से भूकंप आते रहते हैं। भू-गर्भ शास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि ऐसे संवेदनशील इलाकों में रहने वाले नागरिकों को सुरक्षा मानकों के प्रति हमेशा सजग रहना चाहिए।

वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप का असर और वर्तमान स्थिति

पाकिस्तान में आई इस प्राकृतिक आपदा ने लोगों का ध्यान वेनेजुएला की ओर भी खींचा है, जो वर्तमान में इतिहास के सबसे भीषण भूकंपों में से एक का सामना कर रहा है। बीते बुधवार को वेनेजुएला में 7.2 और 7.5 की तीव्रता वाले दो अत्यंत विनाशकारी भूकंप आए थे, जिन्होंने वहां भारी तबाही मचाई है। कई रिहायशी इमारतें और बुनियादी ढांचे जमींदोज हो गए हैं, जिससे हजारों लोग बेघर हो चुके हैं। मलबे में दबे जीवित लोगों को निकालने के लिए अंतरराष्ट्रीय बचाव दल और राहत एजेंसियां युद्ध स्तर पर काम कर रही हैं, हालांकि बुनियादी सुविधाएं ठप होने से दुर्गम इलाकों तक पहुंचना अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

ओंकारेश्वर मंदिर प्रशासन का बड़ा फैसला, शीघ्र दर्शन टिकट 4000 से बढ़ाकर 6000 किए

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खंडवा। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर मंदिर में आने वाले भक्तों की लगातार बढ़ती तादाद को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रबंधन ने 'शीघ्र दर्शन' (वीआईपी दर्शन) व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव किया है। मंदिर प्रशासन ने प्रतिदिन जारी होने वाले शीघ्र दर्शन पास की संख्या में 2,000 की बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है। इस नए फैसले के लागू होने से अब हर रोज दो हजार अतिरिक्त श्रद्धालु कम समय में भगवान भोलेनाथ के सुलभ दर्शन कर सकेंगे, जिससे यहां आने वाले तीर्थयात्रियों को काफी सहूलियत होगी।

अब रोजाना छह हजार भक्त कर सकेंगे शीघ्र दर्शन

ओंकारेश्वर मंदिर में अब तक प्रतिदिन केवल 4,000 श्रद्धालुओं को ही शीघ्र दर्शन के टिकट जारी किए जाते थे। अब इसमें 2,000 की वृद्धि होने के बाद कुल टिकटों की संख्या बढ़कर 6,000 हो गई है। यह नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। जिला कलेक्टर ऋषव गुप्ता के अनुसार, मंदिर में उमड़ रही भारी भीड़ को देखते हुए इंटरनेट के माध्यम से प्रतिदिन 2,000 अतिरिक्त ऑनलाइन टिकट जारी करने का फैसला लिया गया है। इससे श्रद्धालु पहले से ही अपनी बुकिंग कराकर तय समय पर दर्शन कर सकेंगे, जिससे आम दर्शनार्थियों की कतारों में लगने वाली भीड़ और दबाव को कम करने में भी मदद मिलेगी।

व्यवस्था में बदलाव से मंदिर की आय में होगी बढ़ोतरी

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में शीघ्र दर्शन के लिए प्रत्येक श्रद्धालु को 300 रुपये का शुल्क देना होता है। पहले जहां 4,000 टिकटों की बिक्री से मंदिर ट्रस्ट को प्रतिदिन 12 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होता था, वहीं अब टिकटों की संख्या बढ़कर 6,000 होने से यह दैनिक आय बढ़कर 18 लाख रुपये हो जाएगी। इसके अतिरिक्त, मंदिर प्रशासन को अन्य श्रेणियों के वीआईपी और विशेष पासों के माध्यम से भी प्रतिदिन लगभग 3 लाख रुपये की अतिरिक्त आय होने की उम्मीद है। इस प्रकार इस नई व्यवस्था से मंदिर के खजाने में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जाएगी।

सुचारु दर्शन व्यवस्था का स्थानीय स्तर पर स्वागत

मंदिर के इस निर्णय का स्थानीय पुरोहितों और तीर्थ पुरोहित संघ ने पुरजोर स्वागत किया है। स्थानीय पुजारी पंडित नीलेश पुरोहित ने बताया कि देश के कोने-कोने और दूर-दराज के राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह एक बेहद कल्याणकारी कदम है। इससे यात्रियों को लंबे समय तक कतारों में परेशान नहीं होना पड़ेगा और वे समय पर दर्शन कर अपनी यात्रा पूरी कर सकेंगे। इसके साथ ही मंदिर परिसर के भीतर की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था भी पहले की तुलना में कहीं अधिक सुचारु, अनुशासित और व्यवस्थित रूप से संचालित हो सकेगी।

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर प्रियंका गांधी का हमला, जिम्मेदारों की भूमिका पर उठाए सवाल

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अयोध्या। श्री राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला अब एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल चुका है। इस घटनाक्रम पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि यह मामला सिर्फ वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि देश-विदेश के करोड़ों राम भक्तों की धार्मिक भावनाओं और अटूट आस्था से जुड़ा हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभु श्री राम के चरणों में अर्पित किया जाने वाला दान श्रद्धालुओं की परम श्रद्धा का प्रतीक है और इसमें किसी भी प्रकार की हेराफेरी या धांधली को बेहद गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा जाना चाहिए।

धार्मिक आस्था और निष्पक्ष जांच की मांग

प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया के माध्यम से जारी अपने संदेश में कहा कि धर्म, आस्था और विश्वास के नाम पर की जाने वाली कोई भी चोरी या गड़बड़ी समाज के नैतिक ताने-बाने को गहरी चोट पहुंचाती है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की अत्यंत निष्पक्ष, गहन और पारदर्शी जांच कराने की पुरजोर मांग की है ताकि इस मामले से जुड़े सच को किसी भी स्तर पर दबाया या छुपाया न जा सके। उनका मानना है कि जब तक जांच पूरी तरह स्पष्ट नहीं होगी, तब तक लोगों के मन में संशय बना रहेगा।

सुरक्षा चूक और बड़े अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

कांग्रेस सांसद ने जांच की दिशा और उसकी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए यह आशंका जताई कि क्या इतने बड़े पैमाने पर की गई हेराफेरी सिर्फ निचले स्तर के छोटे कर्मचारियों के बूते संभव है। उन्होंने कहा कि घटना के वक्त सीसीटीवी कैमरों का बंद होना और चढ़ावे की राशि गायब होना कई बड़े सवाल खड़े करता है। इसकी तह तक जाना बेहद जरूरी है कि क्या इसमें केवल छोटे कर्मचारी ही शामिल हैं या फिर इसके पीछे किसी उच्च स्तर पर बैठे लोगों का हाथ है, जिनकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

पारदर्शिता की आवश्यकता और बढ़ती राजनीतिक बयानबाजी

उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि आस्था से जुड़े ऐसे संवेदनशील मामलों में महज औपचारिकता के लिए की गई सीमित या दिखावे की कार्रवाई से जनता का विश्वास बहाल नहीं किया जा सकता। यदि जांच में किसी की भी संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ बिना किसी भेदभाव के सख्त कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए। दूसरी तरफ, इस चोरी के मामले में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज होने के बाद से ही सियासी पारा चढ़ गया है, जहां विपक्ष लगातार प्रशासनिक मुस्तैदी और जवाबदेही पर सवाल दाग रहा है, वहीं जांच एजेंसियां मिले सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई में जुटी हुई हैं।

सेशेल्स पहुंचे पीएम मोदी, 3 दिवसीय दौरे में द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगी नई मजबूती

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार से सेशेल्स की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। वे सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस की स्वर्ण जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाले विशेष समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेंगे। प्रधानमंत्री की यह यात्रा सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के विशेष आमंत्रण पर हो रही है, जिससे दोनों देशों के बीच के गहरे और मजबूत राजनयिक संबंधों का पता चलता है।

द्विपक्षीय वार्ता और राष्ट्रीय सभा को संबोधन

विदेश मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति हरमिनी के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक होगी, जिसमें दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग के सभी आयामों की समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर के महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे। अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स की राष्ट्रीय सभा (संसद) को भी संबोधित करेंगे और ऐसा करने वाले वे भारत के पहले प्रधानमंत्री बनेंगे। इसके अलावा, वे वहां रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात और बातचीत करेंगे।

भारत के समुद्री विजन में सेशेल्स की भूमिका

भारत और सेशेल्स के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और मजबूत जन-संपर्क पर आधारित हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में स्थित होने के कारण सेशेल्स भारत के समुद्री सुरक्षा और विकास विजन (सागर) के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ोसी देश है। वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) के प्रति भारत की प्रतिबद्धता में भी सेशेल्स का स्थान बेहद खास है। इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मॉरीशस में आयोजित हिंद महासागर सम्मेलन के दौरान सेशेल्स के विदेश मंत्री बैरी फॉरे से मुलाकात कर आर्थिक चुनौतियों से निपटने में नई दिल्ली की ओर से हरसंभव मदद का भरोसा दिया था।

उभरते क्षेत्रों में सहयोग और नए समझौते

सेशेल्स में भारत के उच्चायुक्त रोहित रातीश के अनुसार, दोनों देशों के आपसी संबंध बेहद गतिशील और शानदार दौर में हैं। भारत और सेशेल्स अब पारंपरिक सहयोग से आगे बढ़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), साइबरस्पेस, साइबर सुरक्षा, समुद्री विज्ञान, पर्यावरण संरक्षण और 'ब्लू इकोनॉमी' जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में अपनी साझेदारी बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं। प्रधानमंत्री की इस यात्रा के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने और नई परियोजनाओं की घोषणा होने की पूरी संभावना है।

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