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उत्तर कोरिया में देख लिया दक्षिण कोरियाई टीवी शो……..फांसी की सजा तय

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प्योंगयान । उत्तर कोरिया में लोगों को जानी दुश्मन देश दक्षिण कोरियाई के टीवी शो देखने या के-पॉप सुनने पर फांसी की सजा दी जा रही है और उन्हें लेबर कैंप में भेजा जा रहा है। इसमें स्कूल के बच्चे भी शामिल हैं। यह जानकारी एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी रिपोर्ट में दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर कोरिया से भागकर आए लोगों ने बताया कि क्रैश लैंडिंग ऑन यू, डिसेंडेंट्स ऑफ द सन और स्क्विड गेम जैसे लोकप्रिय दक्षिण कोरियाई ड्रामा देखने या के-पॉप सुनने पर मौत तक की सजा हो सकती है। जिन लोगों के पास पैसा या अच्छे संपर्क नहीं होते, उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान होता है।
तानाशाह के देश से भागकर आए लोगों ने बताया कि देश में डर का माहौल है और दक्षिण कोरियाई संस्कृति को बड़ा अपराध माना जाता है। वहीं अमीर लोग कई बार अधिकारियों को रिश्वत देकर सजा से बच जाते हैं। लेकिन गरीबों के पास पैसा नहीं होने के कारण उन्हें सजा भुगतनी पड़ती है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल की डिप्टी रीजनल डायरेक्टर सारा ब्रूक्स ने कहा कि उ.कोरिया इसतरह कानून लागू कर रहा है जिसमें एक टीवी शो देखना भी आपके लिए जानलेवा हो सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार जानकारी तक पहुंच को अपराध बना रही है और अधिकारी इसका फायदा उठा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तर कोरियाई सरकार के डर की वजह से पूरा देश एक तरह के वैचारिक कैदखाने में बंद है। जो लोग बाहरी दुनिया के बारे में जानना चाहते हैं या सिर्फ मनोरंजन करना चाहते हैं, उन्हें सबसे कठोर सजा दी जाती है। यह व्यवस्था डर और भ्रष्टाचार पर आधारित है और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों का उल्लंघन करती है।

सीएम स्टालिन का पीएम मोदी को पत्र—रेलवे परियोजनाओं के लिए जरूरी धनराशि शीघ्र जारी करने की मांग

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चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर रेल मंत्रालय को राज्य में स्वीकृत रेलवे परियोजनाओं के लिए जरुरी धनराशि जल्द जारी करने और लंबित परियोजनाओं को फिर शुरु करने का आग्रह किया है।
सीएम स्टालिन ने अपने पत्र में कहा, ‘‘रेल मंत्रालय से धनराशि जारी करने में हो रही देरी’’ और विभिन्न परियोजनाओं के लिए टुकड़ों में निधि आवंटित होने की व्यवस्था के कारण कई महत्वपूर्ण रेलवे परियोजनाओं की प्रगति प्रभावित हो रही है। आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि राज्य सरकार ने विभिन्न रेलवे परियोजनाओं के लिए 2,500.61 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण करने की मंजूरी दे दी है, लेकिन रेलवे विभाग ने अब तक 931.52 हेक्टेयर भूमि के लिए धनराशि आवंटित नहीं की है। सीएम स्टालिन ने कहा, ‘‘निधि जारी करने में देरी और टुकड़ों में आवंटन ने तमिलनाडु में रेलवे परियोजनाओं की प्रगति में बाधा डाली है।
इससे प्रभावित भूमि मालिकों के लिए लंबे समय तक अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।’’ उन्होंने बताया कि 19 प्रमुख परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य 94 प्रतिशत पूरा हो चुका है और 1,198.02 हेक्टेयर भूमि रेलवे को सौंप दी गई है। स्टालिन ने विशेष रूप से ‘तिरुवनंतपुरम-कन्याकुमारी दोहरीकरण’ परियोजना का उल्लेख कर कहा कि रेलवे द्वारा मुआवजे के लिए आवश्यक 289.78 करोड़ रुपये जारी न करने के कारण 16.86 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण अब रुका हुआ है। सीएम स्टालिन ने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया कि स्वीकृत परियोजनाओं के लिए ‘‘संपूर्ण धनराशि और इस प्राथमिकता के आधार पर’’ जारी किया जाए, ताकि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी की जा सके।
उन्होंने तूत्तिकोरिन–मदुरै और तिण्डिवनम–तिरुवण्णायलै रेल लाइन सहित वर्तमान में लंबित प्रमुख परियोजनाओं पर पुनर्विचार कर उन्हें फिर से शुरू करने का अनुरोध किया। 

 मेला हादसे में दो लोग गिरफ्तार

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 सूरजकुंड। सूरजकुंड मेला परिसर में 7 फरवरी को हुए झूला हादसे के मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए झूला संचालक कंपनी के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हादसे में घायलों को बचाते हुए हरियाणा पुलिस के निरीक्षक जगदीश प्रसाद शहीद हो गए थे। पुलिस के अनुसार थाना सूरजकुंड में हिमाचल प्रदेश की हिमाचल फन केयर कंपनी के प्रोपराइटर मोहम्मद शाकिर के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की धारा में मामला दर्ज किया गया है। जांच के दौरान पुलिस ने मोहम्मद शाकिर निवासी गांव टोका नंगला, जिला सिरमौर (हिमाचल प्रदेश) व एक अन्य आरोपी नितेश निवासी धर्मपुरी सदर, मेरठ कैंट (उत्तर प्रदेश) को गिरफ्तार किया है। अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की जांच जारी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त सतेंद्र कुमार गुप्ता के निर्देश पर पुलिस उपायुक्त अपराध के पर्यवेक्षण में तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित की गई है। टीम वैज्ञानिक और तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है।

अमेरिकी कांग्रेस सदस्य गिल ने डलास मॉल की पाकिस्तान से की तुलना, छिड़ी बहस

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वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी से ताल्लुक रखने वाले अमेरिकी कांग्रेस सदस्य ब्रैंडन गिल ने कहा कि वहां के स्थानीय मॉल में जाने पर ऐसा महसूस होता है जैसे आप पाकिस्तान में हों, डलास में नहीं। इस बयान के बाद बहस छिड़ गई। कई यूजर्स ने उनकी टिप्पणियों को उनकी भारतीय मूल की पत्नी डेनियल डीसूजा गिल से जोड़कर देखा।
ब्रैंडन गिल ने इंटरव्यू में डलास की सांस्कृतिक पहचान बदलने पर चिंता जताई। गिल ने दावा किया कि उनका निर्वाचन क्षेत्र डलास मॉल की पाकिस्तान से तुलना की। उन्होंने आरोप लगाया कि उन जमीनों के पास मस्जिदें बनाई जा रही हैं जो दशकों से स्थानीय परिवारों के पास रही हैं। उन्होंने पोस्ट किया कि बड़े पैमाने पर इस्लामी प्रवासन उस अमेरिका को खत्म कर रहा है जिसे वे जानते और प्यार करते हैं।
ब्रैंडन गिल की पत्नी डेनियल डीसूजा गिल मशहूर भारतीय-अमेरिकी लेखक और ट्रंप के सहयोगी दिनेश डीसूजा की बेटी हैं। गिल के पाकिस्तान वाले बयान पर सोशल मीडिया यूजर्स ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कई यूजर्स ने लिखा कि गिल केवल अपनी भारतीय मूल की पत्नी को खुश करने के लिए पाकिस्तान का नाम ले रहे हैं। एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा- गिल साहब नई दिल्ली में रहने के इतने आदी हो गए हैं कि अब पाकिस्तान से नफरत करना उनके स्वभाव में आ गया है।
यह पहली बार नहीं है जब यह दंपत्ति चर्चा में है। कुछ समय पहले न्यूयॉर्क के नवनिर्वाचित मेयर जोहरान ममदानी के साथ उनका विवाद हुआ था। ब्रैंडन गिल ने ममदानी का हाथ से चावल खाते हुए एक वीडियो साझा कर उन्हें असभ्य कहा था और उन्हें तीसरी दुनिया में वापस जाने की सलाह दी थी। डेनियल डीसूजा गिल ने अपने पति का बचाव करते हुए कहा था कि वह अमेरिका में पली-बढ़ी हैं और हमेशा फोर्क का इस्तेमाल करती हैं। जब लोगों ने उन्हें उनकी भारतीय जड़ों की याद दिलाई, तो उन्होंने खुद को क्रिश्चियन मागा देशभक्त बताते हुए कहा कि उनके ईसाई रिश्तेदार भी हाथ से खाना नहीं खाते।
ब्रैंडन गिल टेक्सास के 26वें कांग्रेस जिले का प्रतिनिधित्व करते हैं। 2024 में निर्वाचित होने के बाद से वे अपने सख्त आव्रजन विरोधी रुख और शरिया मुक्त अमेरिका जैसे अभियानों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने हाल ही में सोमालिया से आने वाले प्रवासियों पर 25 साल के प्रतिबंध का बिल भी पेश किया था।

जन केंद्रित न्यायपालिका की जरूरत, स्ट्रेटेजिक रोडमैप से केस बैकलॉग कम किया जाये

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भोपाल (PTI): भोपाल में नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी में हाई कोर्ट के चीफ जस्टिसों की दो दिन की कॉन्फ्रेंस में एक मॉडर्न और लोगों पर फोकस करने वाली ज्यूडिशियरी बनाने पर फोकस किया गया. इसके साथ ही कॉन्फ्रेंस में राज्यों द्वारा फाइल किए गए पुराने केसों पर भी चर्चा हुई.

 

CJI जस्टिस सूर्यकांत सहित सुप्रीम कोर्ट के सीनियर जजों ने लिया भाग

रविवार को खत्म हुए इस इवेंट को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और सुप्रीम कोर्ट के सीनियर जजों ने गाइड किया और ज्यूडिशियल एडमिनिस्ट्रेशन को इंस्टीट्यूशनल बनाने और एक नेशनल ज्यूडिशियल पॉलिसी बनाने के तरीकों पर चर्चा की गई.

 

कॉन्फ्रेंस में 25 हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने हिस्सा लिया

नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी में हुई चर्चा ज्यूडिशियल गवर्नेंस को ट्रेडिशनल फ्रेमवर्क से एक स्ट्रेटेजिक डेटा-ड्रिवन सिस्टम में बदलने पर केंद्रित थी ताकि हाई कोर्ट को इंस्टीट्यूशनल इंटीग्रिटी बनाए रखते हुए आज के कानूनी चैलेंज से निपटने में मदद मिल सके.

 

केस बैकलॉग को लेकर एक स्ट्रेटेजिक रोडमैप पर चर्चा

केस के बैकलॉग को कम करने के लिए एक स्ट्रेटेजिक रोडमैप पर चर्चा की गई, जिसमें प्रोसीजर को आसान बनाना और 7 साल तक की जेल की सजा वाले अपराधों से जुड़े मामलों में ट्रायल को प्रायोरिटी देना शामिल था.

 

मीडिया ट्रायल्स के मुद्दे पर भी चर्चा

कॉन्फ्रेंस में 'मीडिया ट्रायल्स' के मुद्दे पर भी चर्चा हुई, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया कि बेगुनाही के अंदाजे को सुरक्षित रखने के लिए कोर्टरूम में न्याय दिया जाना चाहिए. इसमें कहा गया कि "राज्य द्वारा दायर पुराने या गैर-ज़रूरी मुकदमों" से जुड़े मुद्दों की जांच की गई, जिसमें सरकार की भूमिका को बार-बार मुकदमा करने वाले के तौर पर कम करने पर जोर दिया गया.

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत सहित टॉप जजों ने कहा कि "न्याय तक पहुंच को मजबूत करने के लिए डिजिटल इनोवेशन और भाषाई समावेशिता के जरिए सुधारों पर भी चर्चा हुई. कॉन्फ्रेंस ने एक मॉडर्न, आसान, एक जैसा और नागरिक केंद्रित न्याय सिस्टम बनाने के लिए मिलकर किए गए वादे को फिर से पक्का किया गया. "

यूपी विधानसभा का बजट सत्र आज से, राज्यपाल के अभिभाषण पर सपा के हंगामे के आसार

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लखनऊ |विधानमंडल का बजट सत्र की शुरुआत सोमवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण से होगी। इस दौरान विपक्ष मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर), कोडीन कफ सिरप की तस्करी, विदेश नीति, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा समेत कई मुद्दों पर राज्य सरकार को घेरेगा। खासकर समाजवादी पार्टी के सदस्य अभिभाषण के दौरान इन मुद्दों को लेकर हंगामा कर सकते हैं। बजट सत्र को लेकर विधानभवन की सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त भी किए गए हैं।बजट सत्र की शुरुआत से पहले रविवार को सर्वदलीय बैठक और कार्यमंत्रणा समिति की बैठक हुई, जिसमें सभी दलों ने सदन को सुचारू रूप से संचालित करने में सहयोग करने का आश्वासन दिया। सोमवार को वर्ष 2026 के पहले सत्र की शुरुआत राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' से होगी। इसके बाद राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा अभिभाषण पढ़कर सुनाया जाएगा, जिसमें राज्य सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं की जानकारी शामिल होगी। अभिभाषण के दौरान दोनों सदनों के सदस्य विधानसभा के मुख्य मंडप में मौजूद रहेंगे। इसके बाद राज्य सरकार द्वारा विधायी कार्य भी निपटाए जाएंगे। मंगलवार को विधानसभा की कार्यवाही पूर्व एवं वर्तमान दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि देने के बाद बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी जाएगी। बुधवार को राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेगी।

सीएम बोले स्वस्थ चर्चा हो

सदन में स्वस्थ चर्चा होनी चाहिए। स्वस्थ चर्चा से प्रदेश का विकास और जनता की समस्याओं का समाधान होता है। जनप्रतिनिधि के रूप में जनता के हित से जुड़े हर मुद्दों पर सदन में सुचारु रूप से चर्चा करनी चाहिए। सदन के संचालन में किसी प्रकार की बाधाएं न आएं, इसका ध्यान सभी सदस्यों को रखना चाहिए।- योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री

सहमति-असहमति एक अंग

संसदीय व्यवस्था में संवाद तथा सकारात्मक चर्चा-परिचर्चा से लोकतंत्र मजबूत होता है। सहमति और असहमति लोकतंत्र का अभिन्न अंग हैं। सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर दिया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर देर शाम तक सदन की कार्यवाही संचालित की जाएगी। सतीश महाना, विधानसभा अध्यक्ष
 
सपा ने तैयार की रणनीति

राजधानी लखनऊ में बजट सत्र का पहला दिन हंगामे की भेंट चढ़ना तय माना जा रहा है। सत्र शुरू होने से पहले विधानभवन में सोमवार को चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा पर सपा के विधायक प्रदर्शन करेंगे। उसके बाद सदन के भीतर राज्यपाल के अभिभाषण का विरोध करेंगे और पूरे समय गो-बैक के नारे लगाएंगे।पूर्व सीएम अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा विधायक मंडल दल की बैठक में सत्र को लेकर रणनीति तैयार की गई। तय हुआ है कि एसआईआर में गड़बड़ियों को सदन के भीतर मुखर ढंग से उठाया जाएगा। बढ़ती मंहगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महिलाओं की सुरक्षा, खाद संकट, एमएसपी पर बिचौलियों की खरीद आने आदि मुद्दों पर सरकार को घेरेंगे। इसके अलावा कोडीन सिरप का मामला भी प्रमुखता से उठाया जाएगा।

यह ट्रेड डील नहीं, ढील है -अखिलेश

विधायक मंडल दल की बैठक के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर कहा कि यह डील नहीं ढील है। इस ट्रेड डील से खेती किसानी पर संकट आएगा। हमारे किसान और एमएसएमई अमेरिका से मुकाबला कैसे करेंगे। यूपी के बजट का इस्तेमाल जनता के लिए नहीं होता है।बजट सत्र के दौरान विपक्ष की घेरेबंदी का मुकाबला करने के लिए रविवार को हुई भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का असर रहा। रविवार को लोकभवन में आयोजित भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्रियों और विधायकों को सदन में पूरी तैयारी के साथ नियमित मौजूद रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सत्र के दौरान भी यह सुनिश्चित किया जाए कि एसआईआर का कार्य किसी भी स्तर पर प्रभावित न हो।मुख्यमंत्री ने विधायकों को अपने-अपने कार्यालय खुले रखने के निर्देश देते हुए कहा कि मतदाता सूची में पात्र लोगों के नाम जुड़वाने, मृतकों के नाम हटवाने और स्थानांतरण संबंधी प्रविष्टियों को दुरुस्त कराने के लिए अधिक से अधिक आवेदन कराए जाएं। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए एसआईआर बेहद अहम है। वहीं, सीएम ने देर शाम को अपने आवास पर भाजपा सचेतक दल के साथ भी बैठक करके सदन के संचालन को लेकर तैयार रणनीति पर चर्चा की।बैठक में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने विधायकों से कहा कि विपक्ष सत्र के दौरान भ्रम फैलाने की कोशिश करेगा, लेकिन तथ्यों के साथ उसका जवाब दिया जाए। उन्होंने घोषणा की कि सत्र के दौरान विधायकों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण शिविर भी लगाए जाएंगे।उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि पार्टी को अभी से अगले चुनाव की तैयारियों में जुट जाना चाहिए और इस बार पहले से भी बड़े बहुमत के साथ सरकार बनानी है। उन्होंने सभी विधायकों से नियमित रूप से सदन में उपस्थित रहने का आह्वान किया।प्रदेश भाजपा के संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि भाजपा पंडित दीन दयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर ''''समर्पण दिवस'''' मना रही है। इसमें सभी विधायकों की भागीदारी अनिवार्य रूप से होना चाहिए। उन्होंने एसआईआर में संगठन के साथ मिलकर सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।

बजट का अध्ययन करके दें जवाब : खन्ना

वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि 11 फरवरी को पेश होने वाले बजट का सभी विधायक गहन अध्ययन करें और विपक्ष के सवालों के लिए पूरी तैयारी के साथ सदन में आएं। उन्होंने जोर दिया कि सरकार का फोकस विकास योजनाओं पर है और विपक्ष के दुष्प्रचार में नहीं फंसना चाहिए।

बैठक में नहीं पहुंचे ब्रजभूषण

पिछले दिनों महोबा दौरे पर गए जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का काफिला रोकने को लेकर उठे विवादों से घिरे चरखारी के भाजपा विधायक ब्रजभूषण राजपूत विधानमंडल दल की बैठक में नहीं पहुंचे। इसकों लेकर तरह-तरह की चर्चा रही।

MP News: CM हेल्पलाइन पर CS की रिपोर्ट, 10 विभागों के अफसरों का डी-कैटेगरी परफॉर्मेंस

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MP News: मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव ने पिछले दिनों समीक्षा अफसरों की समीक्षा बैठक की थी. कलेक्टर कमिश्नर स्तर के अधिकारी भी बैठक में शामिल थे. जिसके बाद एक और समीक्षा खुद मुख्य सचिव कार्यालय ने की है. सीएम हेल्पलाइन की रिपोर्ट के आधार पर 10 विभागों के बड़े अधिकारियों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट डी कैटेगरी की आई है. यह ऐसे विभाग हैं, जिनको लेकर जनता से जुड़े हुए काम अक्सर होते हैं. मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में पहुंचने के बाद अफसरों को शिकायतों का निराकरण करना था, लेकिन रवैया यह रहा कि शिकायतें दम तोड़ रही हैं. उनका निराकरण नहीं हुआ है.

मुख्य सचिव कार्यालय के मुताबिक 10 विभागों की समीक्षा पिछले दिनों की गई थी. जनवरी 2026 की समीक्षा बैठक में कई ऐसे विभाग हैं, जो जनता से जुड़े हुए हैं. लेकिन उनमें कारवाई काफी कम हुई है. पंचायत, लोक निर्माण विभाग, पिछड़ा और अल्पसंख्यक, जल संसाधन, जनजाति अनुसूचित जाति कल्याण, राजस्व उद्योग नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग का रिकॉर्ड डी कैटेगरी के मुताबिक आया है. जानकारी के मुताबिक इन विभागों में 50% से कम और 27 प्रतिशत रहा है. यानी कि शिकायतें विभाग तक पहुंची उनका निराकरण नहीं हुआ. अधिकांश शिकायतों का निराकरण 50 दिन की भीतर भी नहीं हुआ है.

60 दिन बाद भी नहीं हुआ निराकरण

60 दिन बाद भी शिकायत जस की तरफ पड़ी हुई है. खास बात है कि नीचे स्तर से शिकायत का निराकरण न होने पर यह शिकायत प्रमुख सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव तक पहुंचती है. इसके बाद भी अधिकारियों का रवैया है कि जनता की शिकायतों का निराकरण हो ही नहीं रहा है. उन्हें इस बात की भी चिंता नहीं है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक शिकायत पहुंचना यानी मुख्यमंत्री सचिवालय और मुख्यमंत्री के संज्ञान में है. फिर भी जनता से जुड़ी हुई शिकायतों का निराकरण नहीं हो रहा है.

इन अधिकारियों के विभागों का कामकाज रहा खराब

जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी डॉ राजेश अजोरा का है लेकिन सीएम हेल्पलाइन में शिकायतों का अंबार लगा हुआ है. हायर एजुकेशन विश्वविद्यालय की समस्या भी जमकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक पहुंच रही है. इस विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुपम राजन है. सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ला है. यहां पर भी शिकायतों के निराकरण का हिसाब किताब खराब है. कड़क मिजाज महिला अधिकारी अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी के विभाग पंचायत का बेहतर नहीं है. लोक निर्माण विभाग का भी यही हाल है. इसके साथ ही नामांकन सीमांकन बंटवारे और अन्य किसानों की समस्या से जुड़े हुए विभाग राजस्व की जिम्मेदारी प्रमुख सचिव विवेक कुमार पोरवाल की है. उनके भी विभाग की यही स्थिति है. खराब परफार्मेंस वाली सूची में इसलिए टॉप टेन में शामिल है.

शिकायतों का क्या रहा हाल? यहां देखिए डाटा

  • 1 जनवरी 2026 से 31 जनवरी 2026 तक कुल शिकायतें- 3 लाख 97 हजार
  • संतुष्टि के साथ बंद की गई शिकायतें- 2 लाख 4206
  • स्पेशल क्लोज- 730
  • नॉट कनेक्टेड और बंद करने की 30 शिकायतें
  • कार्यक्षेत्र से बाहर 3782 शिकायतें
  • आंशिक बंद 3900 शिकायतें
  • लंबित 179439 शिकायतें

अफसर के साथ कर्मचारियों का भी परफॉर्मेंस खराब

सीएम हेल्पलाइन डैशबोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के सभी जिले सी और डी कैटेगरी में है. करीब 22 जिले ऐसे हैं. जिनकी परफॉर्मेंस रिपोर्ट डी कैटेगरी के आधार पर हैं, जबकि तीन ऐसे जिले हैं. जिनकी रिपोर्ट डी आई है. जिसमें खरगोन, शिवपुरी आगर मालवा शामिल है. इससे स्पष्ट है कि अफसर के पास पहुंचने वाली शिकायतों के साथ नीचे वाले कर्मचारियों का भी रवैया जिम्मेदारी पूर्वक नहीं है. जिसकी वजह से एल 1 से लेकर एल 4 तक शिकायत घूमती रहती हैं और निराकरण के लिए आप में शिकायतकर्ता आस लगाकर बैठा रहता है.

CG News: ‘पहले की सरकारों ने माओवादी आतंक को संरक्षण दिया’, अमित शाह बोले- विकसित भारत का शुभंकर बनेगा छत्तीसगढ़

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CG News: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रायपुर में रविवार को ऑर्गनाइजर के कॉनक्लेव में कहा, ‘मैं भूपेश बघेल के समय भी केंद्रीय गृह मंत्री रहा था. मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ यह कह सकता हूं कि बघेल की सरकार ने माओवादी आतंक को प्रश्रय दिया था. मैं समझ नहीं पाता हूं कि कैसे कोई शासन किसी हथियारबंद समूह को प्रश्रय दे सकती है.’

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित छत्तीसगढ़ @25 : शिफ्टिंग द लेंस कार्यक्रम में शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ न केवल स्वयं विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है, बल्कि यह नए भारत के लिए शुभंकर सिद्ध होगा. छत्तीसगढ़ अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण कर विकसित भारत @2047 की दिशा में एक मजबूत स्तंभ बनकर उभर रहा है.

‘विकसित छत्तीसगढ़” केवल एक नारा नहीं, बल्कि विचार’

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि “विकसित छत्तीसगढ़” केवल एक नारा नहीं, बल्कि विचार, विचारधारा और सुशासन से निकली हुई 25 वर्षों की यात्रा का परिणाम है. उन्होंने कहा कि छोटे राज्यों की अवधारणा को लेकर कभी शंका व्यक्त की जाती थी, लेकिन छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तराखंड ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि शासन स्पष्ट विचारधारा से संचालित हो, तो छोटे राज्य भी विकास के बड़े मॉडल बन सकते हैं.

शाह ने कहा कि जब छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तराखंड के लिए आंदोलन चल रहे थे, तब लंबे समय तक देश में कांग्रेस की सरकार रही और कहा जाता था कि इतने छोटे राज्य कैसे टिकेंगे, इनके पास संसाधन कहां से आएंगे और क्या ये विकास कर पाएंगे. उस समय छत्तीसगढ़ भोपाल से 500 किलोमीटर से अधिक दूर था और संयुक्त मध्यप्रदेश की भौगोलिक व प्रशासनिक संरचना ऐसी थी कि इस क्षेत्र के साथ न्याय होना कठिन था. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी तत्कालीन मुख्यमंत्री की असफलता नहीं थी, बल्कि संरचना ही ऐसी थी कि एक ही प्रशासनिक इकाई से इसे संभालना संभव नहीं था.

‘अटल सरकार में ऐतिहासिक फैसले लिए गए’

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री रहते हुए ऐतिहासिक निर्णय लिया और कहा कि छोटे राज्यों का निर्माण कोई प्रयोग नहीं, बल्कि जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति है. इसी निर्णय के तहत मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़, बिहार से झारखंड और उत्तरप्रदेश से उत्तराखंड का गठन हुआ. उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि विचारधारा आधारित निर्णय था.

शाह ने राज्य विभाजन के दो उदाहरण देते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में हुए विभाजन शांतिपूर्ण रहे और आज मध्यप्रदेश–छत्तीसगढ़, बिहार–झारखंड तथा उत्तरप्रदेश–उत्तराखंड एक-दूसरे के पूरक बनकर देश के विकास में योगदान दे रहे हैं. वहीं कांग्रेस शासन में हुए आंध्रप्रदेश–तेलंगाना विभाजन के दौरान लोकसभा में सांसदों को बाहर निकालकर कानून पारित करना पड़ा और दोनों राज्यों के बीच कटुता एक दशक से अधिक समय तक बनी रही, जिसके कई विवाद आज भी अनसुलझे हैं. उन्होंने कहा कि इससे सिद्ध होता है कि राजनीति में विचारधारा का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है.

‘MP और छत्तीसगढ़ विकसित राज्य बनने की कगार पर हैं’

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज 25 वर्ष का हो चुका है और इस दौरान राज्य ने अभूतपूर्व परिवर्तन देखा है. कभी ‘बीमारू’ राज्यों की श्रेणी में गिने जाने वाले क्षेत्रों में शामिल रहे मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ आज विकसित राज्य बनने की कगार पर हैं. उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के 25 वर्षों में से लगभग 18 वर्ष भारतीय जनता पार्टी की सरकार रही और 7 वर्ष कांग्रेस की सरकार रही. 25 वर्षों बाद यदि पीछे मुड़कर देखें तो छत्तीसगढ़ बीमारू राज्य से विकसित राज्य की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ चुका है.

शाह ने आर्थिक आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि राज्य के वार्षिक बजट में 25 वर्षों में 30 गुना वृद्धि हुई है, प्रति व्यक्ति आय 17 गुना बढ़ी है और सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में 25 गुना वृद्धि दर्ज की गई है. उन्होंने कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति को मापने वाले 16 के 16 संकेतकों में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय सुधार किया है.

कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सिंचाई क्षमता दोगुनी हुई है. खरीफ फसलों के उत्पादन में तीन गुना और रबी फसलों के उत्पादन में लगभग छह गुना वृद्धि दर्ज की गई है. स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में हुए सुधारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि जिला अस्पतालों की संख्या 7 से बढ़कर 30 हो गई है, मेडिकल कॉलेज 1 से बढ़कर 16 हो गए हैं और आंगनबाड़ी भवनों में 18 गुना वृद्धि हुई है. कुपोषण से होने वाली मृत्यु दर 61 से घटकर 15, मातृ मृत्यु दर 365 से घटकर 146 और शिशु मृत्यु दर 79 से घटकर 37 रह गई है.

छत्तीसगढ़ में साक्षरता दर 65 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत हुई

आदिवासी कल्याण पर बोलते हुए शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ में साक्षरता दर 65 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत हो गई है. एक भी एकलव्य आवासीय विद्यालय नहीं था, आज 75 संचालित हो रहे हैं और छात्रावासों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या तीन गुना बढ़ी है. उन्होंने कहा कि देश में यदि सबसे अच्छा आदिवासी कल्याण किसी राज्य ने किया है, तो वह छत्तीसगढ़ है.

माओवादी समस्या पर स्पष्ट शब्दों में बोलते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि यह न तो विकास की कमी का परिणाम है और न ही केवल कानून-व्यवस्था की समस्या, बल्कि पूरी तरह विचारधारा आधारित चुनौती है. उन्होंने कहा कि बंदूक से समस्या का समाधान भारतीय संविधान की आत्मा के विरुद्ध है.

उन्होंने दोहराया कि सरकार किसी पर गोली नहीं चलाना चाहती, हथियार डालने वालों के लिए रेड कारपेट बिछा है और आदिवासी युवाओं से अपील की कि वे आत्मसमर्पण करें और मुख्यधारा में लौटें.

शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर सहित माओवादी प्रभावित क्षेत्र तेजी से विकास की ओर बढ़ रहे हैं और केंद्र व राज्य सरकार मिलकर 31 मार्च 2026 से पहले देश को माओवादी समस्या से पूरी तरह मुक्त करने के लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं. उन्होंने कहा कि 25 वर्षों का ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि छत्तीसगढ़ ने जिस गति से विकास किया है, आने वाले 25 वर्षों में वह दोगुनी रफ्तार से आगे बढ़ेगा और देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा.

RSS कार्यक्रम में मोहन भागवत का बड़ा बयान—संघ कहे तो पद छोड़ने को तैयार

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मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि यदि संघ उनसे पद छोडऩे को कहेगा, तो वे तुरंत ऐसा करेंगे। आमतौर पर 75 साल की उम्र के बाद किसी पद पर नहीं रहने की परंपरा की बात कही जाती है।आरएसएस प्रमुख ने कहा कि सरसंघचालक बनने के लिए क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र या ब्राह्मण होना कोई योग्यता नहीं है। जो हिंदू संगठन के लिए काम करता है। वही सरसंघचालक  बनता है। भागवत रविवार को मुंबई में आरएसएस के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि वीर सावरकर को भारत रत्न दिया गया तो इससे पुरस्कार की गरिमा और बढ़ेगी।
भागवत ने कहा कि समान नागरिक संहिता सभी को विश्वास में लेकर बनाई जानी चाहिए और इससे समाज में मतभेद नहीं बढऩे चाहिए। उम्मीद है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारत के हितों को ध्यान में रखकर किया गया होगा और देश को किसी तरह का नुकसान नहीं होगा। घुसपैठ के मुद्दे पर सरकार को बहुत काम करना है। पहचान कर निष्कासन की प्रक्रिया होनी चाहिए। यह पहले नहीं हो पा रहा था, लेकिन अब धीरे-धीरे शुरू हुआ है और आगे बढ़ेगा।
भागवत ने कहा कि आरएसएस का काम प्रचार करना नहीं, बल्कि समाज में संस्कार विकसित करना है। जरूरत से ज्यादा प्रचार से दिखावा और फिर अहंकार आता है। प्रचार बारिश की तरह होना चाहिए। सही समय पर और सीमित मात्रा में। संघ अपने स्वयंसेवकों से आखिरी बूंद तक काम लेता है। संघ के इतिहास में अब तक ऐसी कोई स्थिति नहीं आई, जब किसी को जबरन रिटायर करना पड़ा हो। संघ की कार्यप्रणाली में अंग्रेजी कभी मुख्य भाषा नहीं बनेगी, क्योंकि यह भारतीय भाषा नहीं है। जहां जरूरत होती है, वहां अंग्रेजी का इस्तेमाल किया जाता है। हमें अंग्रेजी सीखनी चाहिए, लेकिन मातृभाषा को नहीं भूलना चाहिए।

काई भी हिंदू बन सकता हैं सरसंघचालक
मोहन भागवत ने कहा कि संघ प्रमुख की जिम्मेदारी संभालने के लिए किसी खास जाति का होना जरूरी नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ब्राह्मण ही नहीं, बल्कि क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र या एससी-एसटी समाज का कोई भी व्यक्ति सरसंघचालक बन सकता है।कार्यक्रम में बातचीत के दौरान भागवत ने एक सवाल के जवाब में कहा कि संघ में इस आधार पर कार्यकर्ता नियुक्त नहीं होते कि उनकी जाति क्या है। जो हिंदू है, वह सरसंघचालक बन सकता है। हमारे यहाँ काम करने वाले को जिम्मेदारी मिलती है। एससी/एसटी वर्ग का व्यक्ति भी इस पद पर पहुँच सकता है। सिर्फ ब्राह्मण होना कोई योग्यता नहीं है और किसी अन्य जाति का होना कोई अयोग्यता नहीं।

ब्राह्मणों का संघ वाली छवि पर दी सफाई
संघ की पुरानी छवि पर चर्चा करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि जब संघ की शुरुआत हुई थी, तब वह एक छोटी सी ब्राह्मण बस्ती से शुरू हुआ था। उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआती दौर में संघ छोटा था और एक ब्राह्मण बहुल बस्ती में सक्रिय था, इसलिए स्वाभाविक रूप से पदाधिकारी ब्राह्मण थे। इसी वजह से लोग कहने लगे कि संघ ब्राह्मणों का है और कुछ लोग आज भी यही कहते हैं, क्योंकि वे केवल जाति देखते हैं। लेकिन वास्तविकता इससे अलग है।

MP Weather Update: एमपी में अगले 2 दिन तेज सर्दी, इसके बाद बढ़ेगा टेम्प्रेचर, कटनी सबसे ठंडा शहर, जानिए आपके शहर का हाल

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MP Weather Update: मौसम विभाग (Indian Meteorological Department) ने मध्य प्रदेश में अगले दो दिनों तक तेज सर्दी का अलर्ट जारी किया है. इसका सबसे ज्यादा असर ग्वालियर, चंबल, रीवा, शहडोल, सागर और जबलपुर संभागों में देखने को मिल रहा है. राज्य का पूर्वी हिस्सा सबसे ज्यादा ठंडा बना हुआ है. लोगों को धुंध और कोहरे से निजात मिली है, हालांकि उज्जैन, जबलपुर, भोपाल समेत कई शहरों में सुबह के समय हल्का देखने को मिल रहा है.

पिछले 24 घंटे में मौसम कैसा रहा?

एमपी में पिछले 24 घंटे के मौसम की बात करें तो सभी संभागों के जिलों में मौसम शुष्क रहा. अधिकतम तापमान में कोई विशेष परिवर्तन नहीं देखा गया. इसके साथ ही तापमान सामान्य ही बना रहा. उज्जैन में हल्का कोहरा देखा गया.

कटनी, एमपी का सबसे ठंडा शहर

पिछले कुछ दिनों से कटनी जिले का करौंदी एमपी का सबसे ठंडा स्थान बना हुआ है. यहां रविवार (8 फरवरी) को मिनिमम टेम्प्रेचर 5.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं, शहडोल जिले के कल्याणपुर में 6.1 डिग्री, उमरिया, छतरपुर जिले के खजुराहो और नर्मदापुरम के पचमढ़ी में 8.4 डिग्री, राजगढ़ में 8.5 डिग्री और शाजापुर जिले के गिरवर में न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस रहा.

प्रदेश के पांच बड़े शहरों की बात करें तो राजधानी भोपाल सबसे ठंडा शहर रहा. जहां न्यूनतम तापमान 10.4 डिग्री सेल्सियस रहा. इंदौर में 10.6 डिग्री, ग्वालियर में 11.2 डिग्री, जबलपुर में 11.9 डिग्री और उज्जैन में मिनिमम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. खंडवा में रविवार को अधिकतम तापमान 31.1 डिग्री सेल्सियस मापा गया.

एमपी में आने वाले दिनों में मौसम कैसा रहेगा?

  • मौसम विभाग के मुताबिक अगले दो दिन मौसम ऐसा ही रहेगा, यानी तेज सर्दी का दौर जारी रहेगा.
  • इसके बाद अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी.
  • मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के लिए किसी तरह की चेतावनी जारी नहीं की है.
  • मध्य प्रदेश के सभी जिलों में मौसम शुष्क बना रहेगा.
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