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नक्सली कमांडर सोढ़ी केशा ने 42 साथियों संग किया आत्मसमर्पण

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तेलंगाना| तेलंगाना में नक्सलियों के बटालियन के अंतिम कमांडर सोढी केशा ने अपने साथियों के साथ समर्पण कर दिया. हैदराबाद में पुलिस के सामने सोढी केशा और उसके साथियों ने आत्मसमर्पण किया. सोढी केशा और उसके साथी दक्षिण बस्तर में सक्रिय नक्सलियों की अंतिम टुकड़ी माने जा रहे थे. हिड़मा के एनकाउंटर और बारसे देवा के समर्पण के बाद बटालियन की कमान सोढी केशा के हाथों में ही थी|

लंबे समय तक सोढी केशा और बटालियन के लड़ाकों ने कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों को अपना ठिकाना बना रखा था. इन 42 नक्सलियों के समर्पण के बाद अब दक्षिण बस्तर में नक्सल संगठन लगभग खत्म हो चुका है|

भारी मात्रा में मिले हथियार

नक्सल सरेंडर के दौरान नक्सलियों ने बड़ी मात्रा में हथ‍ियार भी पुलिस को सौंपे है. इन हथियारों में 5 AK-47, 4 SLR, 3 INSAS राइफल, 9 BGL और 3 रिवॉल्वर शामिल हैं. ये सभी सौंपे गए हथियार वहीं है, जिनका इस्‍तेमाल सुरक्षाबलों पर हमलों में किया था|

PLGA का बड़ा कमांडर है सोडी केशा

सोढी केशा पीपुल्‍स लिबरेशन गुरिल्‍ला आर्मी (PLGA) का टॉप कमांडर माना जाता है. सोढी के सरेंडर से बस्‍तर और आसपास के इलाकों में नक्सलवाद नेटवर्क के कमजोर होने का बड़ा संकेत माना जा रहा है|

सरेंडर में कई बड़े नेता शामिल

इस सरेंडर में नक्सलियों में सिर्फ आम कैडर ही नहीं, बल्कि डिवीजनल कमेटी के मेंबर और एरिया कमेटी के बड़े लीडर के नाम भी शामिल हैं. इन सभी के सरेंडर से संगठन को बड़ा झटका लगा है|

हिमाचल के कांगड़ा में भीषण हादसा, 90 फीट गहरी खाई में गिरी ट्रैक्टर-ट्रॉली; कई श्रद्धालु घायल

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डाडासीबा (कांगड़ा)। एनएच-503 पर ढलियारा स्थित ‘खूनी मोड़’ के पास राधा स्वामी सत्संग घर के नजदीक एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है। एक ट्रैक्टर-ट्राली अनियंत्रित होकर करीब 90 फीट गहरी खाई में जा गिरी, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

मिली जानकारी के अनुसार, पंजाब के कपूरथला से श्रद्धालुओं का एक समूह ट्रैक्टर-ट्राली में सवार होकर देवी दर्शन के लिए हिमाचल आया हुआ था। श्रद्धालुओं ने पहले चिंतपूर्णी मंदिर में माथा टेका और इसके बाद ज्वालामुखी मंदिर के लिए रवाना हुए थे।

बताया जा रहा है कि जैसे ही ट्रैक्टर ढलियारा के खतरनाक ‘खूनी मोड़’ के पास पहुंचा, अचानक ब्रेक फेल हो गए। चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख पाया और ट्रैक्टर-ट्राली सीधी खाई में जा गिरी। हादसे के तुरंत बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई।

घटना के समय सड़क से गुजर रहे स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए आगे आए और घायलों को खाई से बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य तेज किया गया। घायलों को उपचार के लिए नजदीकी अस्पतालों में भेजा जा रहा है। फिलहाल हादसे में घायल लोगों की संख्या और स्थिति की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।

728 किलोमीटर का सफरः नर्मदा का नीर पहुँचा देश के आखिरी गाँव सुंदरा तक, बदली ज़िंदगी की धारा

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जयपुर। राजस्थान के बाड़मेर जिले की भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसा सुंदरा गाँव एक ऐतिहासिक बदलाव का साक्षी बना है। आज़ादी के बाद पहली बार इस दूरस्थ रेगिस्तानी गाँव के हर घर तक नल से स्वच्छ पेयजल पहुँचा है। यह केवल पानी की आपूर्ति नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही कठिनाइयों पर जीत और नई उम्मीदों की शुरुआत है।

सदियों पुराना गाँव, लेकिन बुनियादी सुविधाओं से दूर—

सन् 1734 में स्थापित सुंदरा कभी क्षेत्रफल की दृष्टि से देश की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत माना जाता था। लगभग 1345 वर्ग किलोमीटर में फैले इस गाँव का जीवन हमेशा से रेगिस्तान की कठिन परिस्थितियों से जुड़ा रहा है। बाड़मेर मुख्यालय से करीब 170 किलोमीटर दूर बसे इस गाँव के लोगों को पीने के पानी के लिए वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा।

यहाँ का भूजल इतना खारा था कि इंसानों के साथ-साथ पशु भी उसे पीने से कतराते थे। सरकार द्वारा लगाए गए ट्यूबवेल भी बेकार साबित हुए। मजबूरी में लोगों को 15दृ20 किलोमीटर दूर अन्य गाँवों से पानी ढोकर लाना पड़ता था।

युद्ध और विस्थापन की पीड़ा—

भारत-पाकिस्तान युद्ध 1965 और भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 के दौरान इस सीमा क्षेत्र के गाँव को खाली करवा दिया गया था। ऐसे में सुंदरा के लोगों ने न सिर्फ प्राकृतिक कठिनाइयों, बल्कि ऐतिहासिक चुनौतियों का भी सामना किया।

नर्मदा का नीरः एक असंभव को संभव करने वाली परियोजना—

इस क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या-पेयजल-का समाधान बना नर्मदा नहर आधारित पेयजल परियोजना। सरदार सरोवर बांध से शुरू होकर नर्मदा का पानी 728 किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर सुंदरा तक पहुँचा।

करीब 513 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहतः—

200 से अधिक गाँवों तक पानी पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया
16 बड़े जल संग्रहण केंद्र (CWR) बनाए गए
कई पम्पिंग स्टेशन स्थापित किए गए
80 से अधिक एलिवेटेड सर्विस रिज़र्वायर तैयार किए गए

रेत के ऊँचे-ऊँचे टीलों को काटकर पाइपलाइन बिछाना, बिजली की कमी और सीमा क्षेत्र में सुरक्षा प्रतिबंधकृइन सभी बाधाओं को पार करते हुए यह परियोजना पूरी की गई।

जब सपना हकीकत बना—

सुंदरा के लोगों के लिए यह बदलाव किसी चमत्कार से कम नहीं है। 80 वर्षीय महिलाओं ने पहली बार अपने घर के सामने मीठे पानी का नल देखा। दशकों तक खारा पानी पीने के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ाकृदाँत पीले होना, हड्डियाँ कमजोर होना और समय से पहले बुढ़ापा आम बात थी।

गाँव की महिलाओं को रोजाना कई किलोमीटर दूर पानी लाने की मजबूरी से अब मुक्ति मिल गई है। अब न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि स्वास्थ्य और जीवन स्तर में भी सुधार आएगा।

नई शुरुआत की ओर कदम—

आज सुंदरा गाँव में नल से बहता पानी सिर्फ प्यास बुझाने का साधन नहीं, बल्कि विकास, सम्मान और बेहतर जीवन का प्रतीक बन चुका है। यह कहानी बताती है कि सही योजना, दृढ़ संकल्प और तकनीकी प्रयासों से देश के सबसे कठिन इलाकों में भी बदलाव संभव है।
 

छोटे बच्चों में कब्ज के कारण और आसान घरेलू उपाय

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Home Remedies For Constipation in Kids: छोटे बच्चों की सेहत का ख्याल रखना हर माता-पिता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। लेकिन कई बार बच्चों में पेट साफ न होने यानी कब्ज की समस्या देखने को मिलती है, जिससे बच्चा चिड़चिड़ा हो जाता है और ठीक से खा-पी भी नहीं पाता। ऐसी दिक्कत ज्यादातर छोटे बच्चों के सामने आती है, क्योंकि छोटे बच्चों में पाचन तंत्र पूरी तरह विकसित नहीं होता, इसलिए उनकी डाइट और दिनचर्या का खास ध्यान रखना जरूरी होता है।

 कई माता-पिता तुरंत दवा का सहारा लेते हैं, जबकि कुछ आसान घरेलू उपायों से भी इस समस्या को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। इस लेख में हम आपको बच्चों में कब्ज की समस्या दूर करने के कुछ असरदार घरेलू नुस्खे और कारण बताएंगे, जिन्हें अपनाकर आप अपने बच्चे को राहत दिला सकते हैं।
 
कैसे पहचानें कि बच्चे को कब्ज है?

  • 2–3 दिन तक पॉटी न होना
  • पॉटी करते समय दर्द या रोना
  • पेट में सूजन या भारीपन
  • सख्त और सूखी स्टूल

बच्चों में कब्ज के कारण

  • पानी की कमी
  • फाइबर की कमी वाली डाइट
  • ज्यादा दूध या प्रोसेस्ड फूड
  • शारीरिक गतिविधि की कमी
  • नई डाइट शुरू होने पर बदलाव

ये घरेलू नुस्खे आजमाकर देख लें

1. गुनगुना पानी

सुबह बच्चे को थोड़ा गुनगुना पानी पिलाने से पेट साफ होने में मदद मिलती है

2. फाइबर युक्त आहार

बच्चे को पपीता, सेब, नाशपाती, गाजर और हरी सब्जियां दें

3. घी का सेवन

दूध में थोड़ा सा देसी घी मिलाकर देने से पाचन बेहतर होता है और मल नरम होता है

 4. किशमिश का पानी

रातभर भिगोई हुई किशमिश का पानी या मसलकर देना कब्ज में राहत देता है

 5. पेट की हल्की मालिश

नाभि के आसपास घड़ी की दिशा में हल्की मालिश करने से मल त्याग आसान होता है

  • कब डॉक्टर से संपर्क करें
  • कई दिनों तक कब्ज बनी रहे
  • बच्चा बहुत ज्यादा रोए या दर्द महसूस करे
  • मल में खून दिखाई दे
  • बच्चे का वजन कम होने लगे

भीषण गर्मी में कारगर है ये एक शरबत, जानें बनाने का तरीका

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Summer Special Drink: अगर आप भी रोज सुबह जल्दी घर से काम के लिए निकलते हैं तो अपनी दिनचर्या में एक छोटा सा बदलाव आपकी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। गर्मियों के मौसम में शरीर को ठंडक और एनर्जी की जरूरत होती है, और ऐसे में सत्तू का शरबत एक बेहतरीन प्राकृतिक पेय माना जाता है।

खास बात यह है कि यह पारंपरिक ड्रिंक आसानी से घर पर तैयार किया जा सकता है और इसमें किसी तरह के हानिकारक केमिकल नहीं होते। सत्तू का शरबत बिहार और उत्तर भारत में काफी लोकप्रिय है, और अब पूरे देश में लोग इसके फायदे जानकर इसे अपनी डाइट में शामिल कर रहे हैं। इस लेख में हम इसके फायदे और सही तरीके से सेवन की जानकारी देंगे।

सत्तू शरबत क्या है ?

सत्तू चने को भूनकर और पीसकर बनाया गया एक पौष्टिक आटा है, जिसे पानी, नींबू, नमक और मसालों के साथ मिलाकर शरबत के रूप में पिया जाता है।

सत्तू के शरबत के फायदे?

  • सत्तू में मौजूद प्राकृतिक कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन शरीर को तुरंत ऊर्जा देते हैं, जिससे थकान और कमजोरी दूर होती है।
  • गर्मियों में सत्तू शरीर के तापमान को संतुलित रखता है और लू लगने के खतरे को कम करता है।
  • इसमें फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जिससे भूख कम लगती है और ओवरईटिंग से बचाव होता है।
  • सत्तू पेट की सफाई में मदद करता है और कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करने में सहायक होता है।
  • कम कैलोरी और हाई फाइबर होने के कारण यह वजन कम करने वालों के लिए बेहतरीन विकल्प है।
  • गर्मियों में शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता और हाइड्रेशन बनाए रखता है।
  • सत्तू का शरबत शरीर की गर्मी को कम करता है और अंदर से ठंडक पहुंचाता है।

कब और कैसे पिएं

  • सुबह खाली पेट या नाश्ते के समय
  • गर्मियों में दिन में 1–2 बार
  • नींबू, काला नमक और ठंडे पानी के साथ

सत्तू का शरबत पीते समय ध्यान रखें ये बातें

  • अधिक मात्रा में सेवन न करें
  • गैस या एसिडिटी वाले लोग सीमित मात्रा में लें
  • हमेशा ताजा बनाकर ही पिएं

 कैसे बनाएं सत्तू शरबत

  • 2–3 चम्मच सत्तू लें
  • ठंडा पानी मिलाएं
  • नींबू और काला नमक डालें
  • चाहें तो भुना जीरा भी मिला सकते हैं
  • अच्छे से मिलाकर सुबह खाली पेट पिएं

पवन खेड़ा को बड़ी राहत, तेलंगाना हाईकोर्ट ने दी एक हफ्ते की अग्रिम जमानत

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राजनीतिक बयानबाजी के चलते नेताओं के कानूनी दांव-पेंच में फंसने के मामले कई बार सामने आ चुके है। हाल ही में भी कांग्रेस नेता पवन खेड़ा से जुड़ा एक ऐसा ही मुद्दा राष्ट्रिय राजनीति के केंद्र में बना हुआ है। यह मामला असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी को लेकर दिए गए खेड़ा के बयान से जुड़ा है। खेड़ा ने सीएम की पत्नी के पास एक से अधिक पासपोर्ट होने का आरोप लगाया था। इस मामले में अब खेड़ा के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। तेलंगाना हाईकोर्ट ने उन्हें एक सप्ताह की अग्रिम जमानत दे दी है।

हैदराबाद में दाखिल की गई थी याचिका

तेलंगाना हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पवन खेड़ा को एक सप्ताह की अग्रिम जमानत प्रदान की। न्यायमूर्ति के सुजना ने आदेश सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को संबंधित अदालत में आवेदन दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया जाता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह राहत सीमित अवधि के लिए है और कुछ शर्तों के साथ दी गई है। विस्तृत आदेश की प्रति अभी जारी नहीं हुई है, लेकिन इस फैसले ने फिलहाल खेड़ा को गिरफ्तारी से राहत दी है। यह याचिका हैदराबाद में दाखिल की गई थी, जहां खेड़ा का निवास भी है।

असम सरकार के वकील ने जमानत पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान असम सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल देवजीत सैकिया ने याचिका की वैधता पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि खेड़ा दिल्ली के निवासी हैं और उन्हें असम जाकर ही अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कोई मेडिकल इमरजेंसी नहीं है, इसलिए देश के किसी भी हिस्से से असम में आवेदन किया जा सकता है। सैकिया ने खेड़ा को फ्लाइट रिस्क बताते हुए आरोप लगाया कि पुलिस के पहुंचने पर वह स्थान बदल लेते हैं। दूसरी ओर, वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि यह पूरा मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है और आपराधिक कार्रवाई का दुरुपयोग किया जा रहा है।

असम पुलिस ने खेड़ा के खिलाफ केस दर्ज किया
यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भूयान सरमा से जुड़ा है। खेड़ा ने आरोप लगाया था कि उनके पास एक से अधिक पासपोर्ट हैं। इसके बाद गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई। इनमें धोखाधड़ी, जालसाजी, मानहानि और शांति भंग करने जैसे आरोप शामिल हैं। इस बीच असम पुलिस खेड़ा की तलाश में हैदराबाद और दिल्ली दोनों जगह पहुंच चुकी है और उनके आवास पर जांच भी की गई है।

 

68 कॉलेजों में शुरू होंगे कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सर्टिफिकेट कोर्स, नए शैक्षणिक सत्र से होगा लाभ

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मध्य प्रदेश के छात्रों के लिए खुशखबरी है। उच्च शिक्षा विभाग नवीन शैक्षणिक सत्र 2026-27 से 68 महाविद्यालयों में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने जा रहा है। इसमें आईआईटी दिल्ली के सहयोग से पाठ्यक्रम संचालित होगा। इससे 2000 छात्रों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। विभाग ने इसकी तैयारी पूर्ण कर ली गई है।

मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग द्वारा महाविद्यालयों में रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम प्रारंभ करने को लेकर महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसके तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रदेश के 68 शासकीय महाविद्यालयों में एआई एवं फिनटेक विथ एआई के ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स शुरू होने जा रहे हैं । इनमें 55 प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस तथा 13 स्वायत्त महाविद्यालय शामिल हैं। यह कोर्स आईआईटी दिल्ली के सहयोग से संचालित किया जाएगा।

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अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन ने बताया कि महाविद्यालयों में परंपरागत विषयों से पढ़ाई कर रहे छात्रों को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे वे आसानी से रोजगार से जुड़ सकेंगे। विभाग द्वारा इस वर्ष 2000 छात्रों को कोर्स के माध्यम से प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रथम चरण में यह लक्ष्य 1000 छात्रों का था, जिसे इस वर्ष बढ़ाकर दोगुना कर दिया गया है।

 

 

आसमान से सुरक्षित लौटा क्रू मॉड्यूल, ISRO ने गगनयान मिशन में रचा इतिहास

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श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अंतरिक्ष में तिरंगा फहराने के अपने सपने गगनयान की ओर एक और विशाल कदम बढ़ा दिया है। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में इसरो ने दूसरे इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (आईएडीटी-02) को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह परीक्षण इतना महत्वपूर्ण है कि इसकी सफलता ने भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन की सुरक्षा को पक्का कर दिया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस गौरवशाली उपलब्धि को देश के साथ साझा किया।
इस परीक्षण की जटिलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें एक डमी क्रू मॉड्यूल को कई किलोमीटर की ऊंचाई से नीचे गिराया गया। मिशन का सबसे मुश्किल हिस्सा तब होता है जब अंतरिक्ष यात्री 400 किलोमीटर ऊपर से वापस धरती के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं। उस वक्त मॉड्यूल की रफ्तार इतनी तेज होती है कि उसे सुरक्षित उतारने के लिए पैराशूट का सही क्रम में खुलना अनिवार्य है। आईएडीटी -02 ने साबित कर दिया कि भारत का पैराशूट सिस्टम और रिकवरी तकनीक पूरी तरह सटीक है। गगनयान मिशन के तहत तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को 3 दिन के लिए अंतरिक्ष में भेजा जाना है। इस मिशन की सबसे बड़ी चुनौती उन्हें सुरक्षित समुद्र में उतारना है। इसरो की इस सफलता ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि लैंडिंग के वक्त कोई अनहोनी नहीं होगी। यह मिशन अगले साल के लिए निर्धारित है और ऐसी हर कामयाबी भारत को उन गिने-चुने देशों की कतार में खड़ा कर रही है जो इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता रखते हैं।
 

जिंदगी में प्यार की कमी बढ़ा सकती है कैंसर का जोखिम, अध्ययन का खुलासा

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कैंसर का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है, ये दुनियाभर में मौत के सबसे बड़े कारणों में से भी एक है। कैंसर को कभी उम्र के आखिरी पड़ाव वाली बीमारी माना जाता था, हालांकि पिछले कुछ दशकों में ये चुपचाप सभी उम्र के लोगों को अपना शिकार बनाती जा रही है।अध्ययनों में पाया गया है कि जिस तरह से लोगों की लाइफस्टाइल खराब होती जा रही है, उसने कैंसर का खतरा और भी बढ़ा दिया है। तनाव, प्रोसेस्ड फूड, नींद की कमी और स्क्रीन टाइम को भी इस बीमारी को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार पाया गया है।मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि लाइफस्टाइल-खानपान की समस्याओं ने हमारे शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा को कमजोर कर दिया है। नतीजतन अब कैंसर के मामले ज्यादा रिपोर्ट किए जा रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हालिया अध्ययनों में विशेषज्ञों की टीम ने अलर्ट किया है कि गैर-शादीशुदा लोगों में कैंसर का खतरा ज्यादा हो सकता है।10 करोड़ से अधिक लोगों पर किए गए अध्ययन में पता चला है कि शादीशुदा लोगों की तुलना में अविवाहितों में कैंसर होने का खतरा 85% तक ज्यादा हो सकता है। अब सवाल ये है कि वैवाहिक स्थिति और कैंसर जैसी बीमारियों का आपस में क्या संबंध हो सकता है? आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं।

अविवाहितों में कैंसर का खतरा अधिक 

कैंसर शरीर की कोशिकाओं में अनियंत्रित वृद्धि होने की बीमारी है। जब ये कोशिकाएं शरीर के सामान्य नियंत्रण से बाहर जाकर तेजी से बढ़ने लगती हैं तो इससे कैंसर का खतरा हो सकता है। क्या शादीशुदा न होना भी कैंसर के खतरे को बढ़ा देता है? 

  • इस बारे में किए गए एक व्यापक अध्ययन से पता चला है कि जिन महिलाओं ने कभी शादी नहीं की है, उनमें कैंसर का खतरा 85 प्रतिशत तक ज्यादा हो सकता है।
  • पुरुषों में भी खतरा कम नहीं है। विशेषज्ञों ने यह भी पाया कि जो पुरुष जीवन भर अविवाहित रहते हैं, उनमें कैंसर होने की आशंका लगभग 70 प्रतिशत ज्यादा होती है।
  • फेफड़े, आंत और एसोफैगल कैंसर जैसे कई प्रकार के कैंसर में इस तरह का जोखिम सामने आया है।

अध्ययन में क्या पता चला?

'कैंसर रिसर्च कम्युनिकेशंस' जर्नल में प्रकाशित इस रिपोर्ट में 100 मिलियन (10 करोड़) से ज्यादा लोगों के डेटा का अध्ययन किया गया। इसमें पता चला कि आपकी वैवाहिक स्थिति और कैंसर के खतरे के बीच एक मजबूत और अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाना वाला संबंध हो सकता है।विशेषज्ञों ने पाया कि लंबे समय से माना जाता रहा है कि शादी के बाद व्यक्ति का भावनात्मक, आर्थिक और व्यावहारिक सपोर्ट बढ़ जाता है। ऐसे लोगों में किसी बीमारी के जल्दी पता चलने और इससे जल्दी ठीक होने का संभावना भी अधिक होती है।

  • इस निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए टीम ने 2015 से 2022 के बीच पता चले 40 लाख से ज्यादा कैंसर के मामलों का विश्लेषण किया। 
  • इसमें 30 साल और उससे ज्यादा उम्र के वयस्कों पर खास ध्यान दिया गया, जिनमें कैंसर का पता चला था। अध्ययन में समलैंगिक विवाहित जोड़ों को भी शामिल किया गया।
  • अध्ययन में शामिल हर पांच में से एक व्यक्ति ऐसा था जिसने कभी शादी नहीं की थी।
  • विशेषज्ञों ने पाया कि जिन पुरुषों की कभी शादी नहीं हुई थी, उनमें शादीशुदा या फिर तलाकशुदा पुरुषों के मुकाबले कैंसर होने की आशंका काफी ज्यादा थी। महिलाओं में खतरा और भी ज्यादा पाया गया।

किस प्रकार के कैंसर का जोखिम अधिक

अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि कुछ तरह के कैंसर के मामले में सबसे कॉमन थे।
 
जिन पुरुषों की कभी शादी नहीं हुई थी, उनमें इसोफेगल कैंसर होने का खतरा लगभग ढाई गुना ज्यादा पाया गया।
जिन महिलाओं की कभी शादी नहीं हुई थी, उनमें शादीशुदा महिलाओं के मुकाबले सर्वाइकल कैंसर होने की दर लगभग तीन गुना ज्यादा थी।
सर्वाइकल कैंसर ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) इन्फेक्शन से होता हैं। यह एक आम वायरस है जो यौन संबंधों से फैलता है। अविवाहितों में इसका जोखिम अधिक देखा गया।

मियामी मिलर स्कूल ऑफ मेडिसिन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और इस अध्ययन के सह-लेखक प्रोफेसर फ्रैंक पेनेडो कहते हैं, इन नतीजों का यह मतलब नहीं है कि शादी अपको कैंसर से बचाती है। बल्कि वैवाहिक स्थिति आपकी जिम्मेदारियों और स्वास्थ्य को लेकर परवाह को बढ़ावा देती है।जो लोग धूम्रपान-शराब नहीं करते आमतौर पर उनके रिश्ते के स्थिर होने की संभावना ज्यादा होती है। ये सभी स्थितियां आपको गंभीर बीमारियों से बचाने वाली भी मानी जाती हैं। कुल मिलाकर, यह निष्कर्ष निकाला गया है कि भले ही शादी कोई 'जादुई कवच' न हो, लेकिन यह कैंसर के अंतर्निहित जोखिम को कम करने वाली जरूर हो सकती है।

इस लिंक को समझना जरूरी

विशेषज्ञों ने कहा, कैंसर से मौत का एक बड़ा कारण इसका समय पर पता न चल पाना है। वैवाहिक स्थिति में आप अपने पार्टनर की सेहत पर भी ध्यान देते रहते हैं। ऐसे में किसी भी समस्या में वह जल्दी डॉक्टर के पास जाते हैं और बीमारी के सही निदान की संभावना भी बढ़ जाती है। कैंसर का शुरुआती स्तर पर पता चल जाए तो इसके इलाज और जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।अविवाहित लोगों में कैंसर का पता अक्सर देर से चल पाता है। इसका कारण सामाजिक और भावनात्मक समर्थन की कमी हो सकता है। शादीशुदा लोगों को अक्सर परिवार का सहयोग मिलता है, जिससे वे समय पर जांच और इलाज करवा लेते हैं।इस अध्ययन में उन लोगों को भी शामिल नहीं किया गया जो लंबे समय से किसी रिश्ते में हैं, लेकिन शादीशुदा नहीं हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि भविष्य के शोध में इस पहलू पर भी गौर किया जाना चाहिए। 

40 के बाद महिलाओं की सेहत का कैसे रखें ख्याल

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Women Health: अगर आपकी उम्र 40 से 50 साल के बीच है तो यह समय शरीर में कई बड़े बदलावों का होता है, जिन्हें समझना बेहद जरूरी है। इस उम्र में महिलाओं के शरीर में हार्मोनल बदलाव तेजी से होने लगते हैं, जिसका सबसे बड़ा चरण मेनोपॉज होता है। 

मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है, जिससे शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के बदलाव महसूस हो सकते हैं। ये एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन सही जानकारी और लाइफस्टाइल अपनाकर इसे आसानी से मैनेज किया जा सकता है।इस लेख में हम आपको बताएंगे कि मेनोपॉज के दौरान शरीर में क्या बदलाव होते हैं, किन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है और कैसे आप अपनी सेहत का बेहतर ध्यान रख सकती हैं।
 
मेनोपॉज के दौरान शरीर में होने वाले मुख्य बदलाव

मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में कई बदलाव आते हैं, जैसे:

  •  हार्मोनल असंतुलन के कारण शरीर में उतार-चढ़ाव
  •  मासिक धर्म का धीरे-धीरे बंद होना
  •  मूड स्विंग, गुस्सा और चिड़चिड़ापन
  • नींद की गुणवत्ता खराब होना
  •  हड्डियों का कमजोर होना 
  •  वजन बढ़ने की समस्या

मेनोपॉज का दिमाग पर क्या प्रभाव पड़ता है?

इस समय सिर्फ शरीर ही नहीं, मानसिक स्थिति पर भी असर पड़ता है:

  • चिंता और तनाव बढ़ सकता है
  • आत्मविश्वास में कमी महसूस हो सकती है
  • कुछ महिलाओं में डिप्रेशन जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं

सेहत का ध्यान कैसे रखें

मेनोपॉज के प्रभाव को कम करने के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव जरूरी है:

  • कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर भोजन लें
  •  रोजाना हल्की एक्सरसाइज और वॉक करें
  • योग और मेडिटेशन को दिनचर्या में शामिल करें
  • 7–8 घंटे की पर्याप्त नींद लें
  •  जंक फूड और ज्यादा चीनी से बचें
  •  शरीर को हाइड्रेट रखें

कब डॉक्टर से संपर्क करें

  • बहुत ज्यादा या असामान्य ब्लीडिंग
  •  लगातार डिप्रेशन या चिंता
  •  नींद बिल्कुल न आना
  • हड्डियों में तेज या लगातार दर्द
  • रोजमर्रा के कामों में परेशानी होना
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