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सेशेल्स पहुंचे पीएम मोदी, 3 दिवसीय दौरे में द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगी नई मजबूती

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार से सेशेल्स की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। वे सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस की स्वर्ण जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाले विशेष समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेंगे। प्रधानमंत्री की यह यात्रा सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के विशेष आमंत्रण पर हो रही है, जिससे दोनों देशों के बीच के गहरे और मजबूत राजनयिक संबंधों का पता चलता है।

द्विपक्षीय वार्ता और राष्ट्रीय सभा को संबोधन

विदेश मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति हरमिनी के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक होगी, जिसमें दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग के सभी आयामों की समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर के महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे। अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स की राष्ट्रीय सभा (संसद) को भी संबोधित करेंगे और ऐसा करने वाले वे भारत के पहले प्रधानमंत्री बनेंगे। इसके अलावा, वे वहां रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात और बातचीत करेंगे।

भारत के समुद्री विजन में सेशेल्स की भूमिका

भारत और सेशेल्स के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और मजबूत जन-संपर्क पर आधारित हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में स्थित होने के कारण सेशेल्स भारत के समुद्री सुरक्षा और विकास विजन (सागर) के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ोसी देश है। वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) के प्रति भारत की प्रतिबद्धता में भी सेशेल्स का स्थान बेहद खास है। इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मॉरीशस में आयोजित हिंद महासागर सम्मेलन के दौरान सेशेल्स के विदेश मंत्री बैरी फॉरे से मुलाकात कर आर्थिक चुनौतियों से निपटने में नई दिल्ली की ओर से हरसंभव मदद का भरोसा दिया था।

उभरते क्षेत्रों में सहयोग और नए समझौते

सेशेल्स में भारत के उच्चायुक्त रोहित रातीश के अनुसार, दोनों देशों के आपसी संबंध बेहद गतिशील और शानदार दौर में हैं। भारत और सेशेल्स अब पारंपरिक सहयोग से आगे बढ़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), साइबरस्पेस, साइबर सुरक्षा, समुद्री विज्ञान, पर्यावरण संरक्षण और 'ब्लू इकोनॉमी' जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में अपनी साझेदारी बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं। प्रधानमंत्री की इस यात्रा के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने और नई परियोजनाओं की घोषणा होने की पूरी संभावना है।

गोपनीय दस्तावेज केस में जॉन बोल्टन ने माना दोष, जेल और करोड़ों के जुर्माने का खतरा

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वॉशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने गोपनीय सरकारी दस्तावेजों को अवैध रूप से अपने पास रखने के मामले में संघीय अदालत में अपना गुनाह कबूल कर लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में इस महत्वपूर्ण पद पर रहे 77 वर्षीय बोल्टन ने मैरीलैंड की जिला अदालत में यह दोष स्वीकार किया। इस मामले में बोल्टन और अमेरिकी न्याय विभाग के बीच एक समझौता भी हुआ है, जिससे उनकी संभावित जेल की सजा की अवधि कम हो सकती है, हालांकि सजा पर अंतिम निर्णय अदालत द्वारा ही लिया जाएगा। इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बोल्टन की आलोचना की है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

जानें क्या हैं जॉन बोल्टन पर लगे आरोप

बोल्टन पर सरकारी सेवा के दौरान तैयार किए गए अपने निजी नोट्स, डायरियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों को अवैध रूप से अपने पास रखने के कुल 18 आरोप लगाए गए थे। जांच के मुताबिक, उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अपने दैनिक कामकाज के करीब 1,000 से अधिक पन्नों के गोपनीय दस्तावेजों को अनधिकृत रूप से अपने पास रखा था। इन दस्तावेजों में से कुछ को उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों के साथ भी साझा किया था, जिसे अमेरिकी कानून के तहत एक गंभीर सुरक्षा चूक माना गया है।

न्याय विभाग के साथ समझौता और संभावित सजा

अदालती नियमों के अनुसार इस तरह के अपराध के लिए अधिकतम 10 वर्ष तक की जेल का प्रावधान है, लेकिन न्याय विभाग के साथ हुए समझौते के तहत बोल्टन को कुछ राहत मिल सकती है। इस समझौते के मुताबिक, बोल्टन 22.5 लाख अमेरिकी डॉलर का जुर्माना भरने और अपनी सरकारी पेंशन छोड़ने के लिए तैयार हो गए हैं। इसके साथ ही उन्हें जांच अधिकारियों के पूछताछ सत्रों में शामिल होना होगा और 100 घंटे की सामुदायिक सेवा करनी होगी। इस समझौते में उनकी जेल की सजा को अधिकतम 5 साल तक सीमित रखने का सुझाव दिया गया है, जिस पर अदालत आगामी 28 अक्टूबर को अपना अंतिम फैसला सुनाएगी।

दस्तावेजों की लीक और ट्रंप से रिश्तों में खटास

जांच में यह बात सामने आई है कि बोल्टन ने कुछ संवेदनशील दस्तावेज अपनी पत्नी और बेटी को ईमेल के जरिए भेजे थे। हालांकि, ये दस्तावेज उनके परिवार से आगे किसी और तक नहीं पहुंचे, लेकिन पद छोड़ने के बाद बोल्टन का निजी ईमेल खाता ईरान के एक हैकर समूह के निशाने पर आ गया था, जिससे इस गोपनीय डेटा के लीक होने का खतरा पैदा हो गया था। गौरतलब है कि वर्ष 2019 में पद से हटने के बाद बोल्टन ने एक किताब लिखी थी, जिसमें उन्होंने ट्रंप की नीतियों की कड़ी आलोचना की थी, जिसके बाद से ही दोनों नेताओं के बीच संबंध काफी खराब हो गए थे।

तीन साल में NCERT के कौन से बदलाव बने सबसे बड़े विवाद? पूरी टाइमलाइन

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट-1’ जारी की है। इस नई पाठ्यपुस्तक में आपातकाल, चुनाव आयोग की भूमिका, भारतीय ज्ञान परंपरा, वेदों और महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। इसके साथ ही महिलाओं की स्थिति को दर्शाने के लिए मनुस्मृति के एक श्लोक का भी उल्लेख किया गया है। एनसीईआरटी द्वारा किताबों में किए जाने वाले बदलाव अक्सर चर्चा और विवादों का कारण बनते रहे हैं। इस बार भी नए पाठ्यक्रम के जारी होते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, जहां विपक्षी दल इसकी आलोचना कर रहे हैं, वहीं सरकार से जुड़े लोग और शिक्षा मंत्रालय इसका स्वागत कर रहे हैं।

कक्षा 9 की नई किताब में जोड़े गए मुख्य विषय

नई पुस्तक में वर्ष 1975-77 के दौरान देश में लगाए गए राष्ट्रीय आपातकाल पर एक पूरा अलग खंड शामिल किया गया है। इसमें आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताते हुए बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और आंतरिक अशांति के आधार पर इसके लागू होने के कारणों की व्याख्या की गई है। इस खंड में मौलिक अधिकारों के निलंबन, प्रेस सेंसरशिप, राजनीतिक नेताओं की गिरफ्तारी के साथ-साथ जयप्रकाश नारायण के आंदोलन और बिहार-गुजरात के जन आंदोलनों का विशेष रूप से जिक्र है। पुस्तक में भारतीय ज्ञान परंपरा के तहत ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद की जानकारी दी गई है और बताया गया है कि वैदिक काल में महिलाओं का स्थान अत्यंत उच्च और आदरणीय था, जिसके प्रमाण के रूप में मनुस्मृति का वह श्लोक उद्धृत किया गया है जिसमें कहा गया है कि जहां महिलाओं का सम्मान होता है, वहां देवता निवास करते हैं। इसके अलावा, देश की चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग की निष्पक्षता की सराहना करते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और वीवीपैट (VVPAT) की भूमिका को विस्तार से समझाया गया है।

नए बदलावों पर राजनीतिक प्रतिक्रिया और विवाद

इन नए अध्यायों को शामिल किए जाने पर कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कड़ा ऐतराज जताते हुए आरोप लगाया है कि एनसीईआरटी अब मासूम छात्रों के मन में पक्षपातपूर्ण बातें भरने और इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने के लिए एक राजनीतिक विभाग की तरह काम कर रही है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने भी चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को पाठ्यक्रम में शामिल करने की निंदा की और आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में इसके कारण लाखों मतदाता अपने अधिकारों से वंचित हुए थे। इसके विपरीत, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आपातकाल से जुड़े अध्याय का स्वागत करते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों को उस दौर के काले कारनामों के बारे में पता होना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा उत्पन्न न हों।

पिछले वर्षों के चर्चित बदलाव और अन्य विवाद

हाल के दिनों में कक्षा 6 की कन्नड़ भाषा की पाठ्यपुस्तक 'कृष्णा' के नाम और उसमें शाकाहार को बढ़ावा देने के आरोपों पर विवाद हुआ था, जिस पर परिषद ने स्पष्ट किया कि पुस्तक का नाम नदी पर है और अध्याय में दोनों तरह के आहार शामिल हैं। इसी तरह, कक्षा 9 की कला शिक्षा की पुस्तक में मोहनजोदड़ो की 'डांसिंग गर्ल' की प्रतिमा के चित्र को डिजिटल रूप से ढके जाने पर इतिहासकारों के विरोध के बाद एनसीईआरटी ने मूल तस्वीर को बहाल करने का निर्णय लिया। इसके पूर्व, कक्षा 8 की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और लंबित मामलों के जिक्र पर देश के मुख्य न्यायाधीश ने भी आपत्ति जताई थी। पिछले तीन वर्षों के इतिहास पर नजर डालें तो अगस्त 2025 में भारत विभाजन के विशेष मॉड्यूल्स में जिन्ना, कांग्रेस और लॉर्ड माउंटबेटन को जिम्मेदार ठहराने पर विवाद हुआ था। जुलाई 2025 में मुगल काल के शासकों को असहिष्णु और क्रूर दर्शाने वाले बदलाव किए गए थे, जबकि 2024 में राजनीति विज्ञान की किताबों से बाबरी मस्जिद, गुजरात दंगे और अल्पसंख्यकों जैसे संवेदनशील विषयों को हटाया गया था। इससे पहले अप्रैल 2023 में कक्षा 12 की इतिहास की किताबों से मुगल साम्राज्य, अकबरनामा और राजनीति विज्ञान से शीत युद्ध व अमेरिकी वर्चस्व जैसे अध्यायों को हटाया गया था, जिसे परिषद ने पाठ्यक्रम को हल्का करने की प्रक्रिया का हिस्सा बताया था।

UP Weather Alert: भीषण गर्मी के बाद मौसम बदलेगा करवट, बारिश को लेकर बड़ा अपडेट

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में चिलचिलाती धूप, उमस और जानलेवा लू (हीटवेव) का दौर लगातार बना हुआ है। बीते शुक्रवार को भी राज्य के कई अंचलों में भीषण से अति-भीषण लू का प्रभाव देखा गया। हालांकि, इन सब के बीच राहत की एक बड़ी खबर यह है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून बेहद तेजी से आगे बढ़ रहा है और आगामी तीन से चार दिनों के भीतर उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश कर सकता है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के मुताबिक, प्रदेशवासियों को 28 जून तक इस भीषण गर्मी का सामना करना पड़ेगा, लेकिन 29 जून से पारे में भारी गिरावट आने की उम्मीद है।

राजधानी लखनऊ के साथ-साथ बांदा, गाजीपुर, बलिया, सुल्तानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, सोनभद्र, अलीगढ़, बरेली, शाहजहांपुर और फर्रुखाबाद जैसे जिले इस समय भयंकर लू की चपेट में हैं। वहीं लखीमपुर खीरी, बाराबंकी और बहराइच में भी तीव्र लू ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में किसी मजबूत मौसमी सिस्टम के सक्रिय न होने के कारण शुष्क और गर्म हवाएं चल रही हैं। 29 जून से प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियों के कारण तापमान में 8 से 9 डिग्री सेल्सियस तक की बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे तपिश से बड़ी राहत मिलेगी। इसके बाद 30 जून से पूरे राज्य में झमाझम और व्यापक वर्षा का दौर शुरू होने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं।

देश भर के सबसे गर्म इलाकों में चमके यूपी के जिले

शुक्रवार को दर्ज किए गए आंकड़ों के अनुसार, थर्मामीटर के पारे ने उत्तर प्रदेश के कई शहरों में रिकॉर्ड बनाए, जिसके चलते देश के सबसे गर्म शहरों की सूची में यूपी के कई जिले शीर्ष पर रहे:

  • लखीमपुर खीरी: यह जिला 43.2 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ पूरे देश में दूसरे नंबर पर सबसे गर्म स्थान दर्ज किया गया। (देश में सबसे अधिक तापमान हरियाणा के रोहतक में 43.4 डिग्री रहा)।

  • बांदा और आगरा: ये दोनों शहर 43 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान के साथ देश में संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहे।

  • लखनऊ: प्रदेश की राजधानी 42.4 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ देश भर में पांचवें पायदान पर रही।

  • कानपुर, फतेहगढ़ और अलीगढ़: इन क्षेत्रों में भी पारा 42.2 डिग्री सेल्सियस के ऊंचे स्तर पर दर्ज किया गया।

राजधानी में सामान्य से 6 डिग्री ऊपर पहुंचा पारा, दिनभर चलीं गर्म हवाएं

नवाबों के शहर लखनऊ में शुक्रवार का दिन इस सीजन के सबसे कष्टदायक दिनों में से एक रहा। यहां का अधिकतम तापमान सामान्य से 6.3 डिग्री ज्यादा यानी 42.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जिसने इसे देश का पांचवां सबसे गर्म शहर बना दिया। दिन के साथ-साथ रातें भी बेहद गर्म रहीं और न्यूनतम तापमान सामान्य से 4 डिग्री अधिक यानी 30.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह से ही शुरू हुए लू के थपेड़ों और चिलचिलाती धूप ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले दो दिनों तक राजधानी का यही हाल रहेगा, लेकिन सोमवार से ठंडी हवाओं के चलने और बादलों की आवाजाही से लू का असर समाप्त हो जाएगा और मंगलवार (30 जून) से बारिश की बूंदें राहत बरसाएंगी।

मौसम विभाग की सख्त हिदायत: दोपहर में निकलने से बचें

तेज धूप और हीटवेव के खतरनाक स्तर को देखते हुए मौसम विज्ञान केंद्र ने नागरिकों के लिए विशेष स्वास्थ्य एडवायजरी जारी की है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अगले दो दिनों तक बेहद जरूरी काम न होने पर दोपहर के समय घरों या दफ्तरों से बाहर न निकलें। शरीर में पानी की कमी न होने दें और लगातार पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करते रहें। इसके साथ ही घर के बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से बीमार या संवेदनशील लोगों की सेहत का इस मौसम में विशेष ख्याल रखने की हिदायत दी गई है।

मध्य प्रदेश में झमाझम बारिश का दौर, 40+ जिलों के लिए IMD ने जारी किया येलो अलर्ट

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भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसूनी हवाओं के सक्रिय होने के साथ ही प्रदेश भर में झमाझम बारिश का दौर जारी है। बीते शुक्रवार को राज्य के बालाघाट और विदिशा जिलों में जोरदार बरसात दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त इंदौर संभाग के झाबुआ और आलीराजपुर जिलों को छोड़ दिया जाए, तो उज्जैन, भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर और जबलपुर संभाग के अधिकांश हिस्सों में बिजली चमकने और बादलों की गर्जना के साथ बौछारें पड़ीं। इस दौरान वारासिवनी क्षेत्र में राज्य की सर्वाधिक 74.2 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई, जबकि इंदौर शहर में 44 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज गति से हवाएं चलीं।

बीते 24 घंटों के दौरान मौसम का हाल

पिछले एक दिन के भीतर प्रदेश के 40 से अधिक जिलों में मानसूनी बादलों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, जिससे शहडोल संभाग में पारा सामान्य से 2.6 डिग्री सेल्सियस नीचे आ गया। मौसम के आंकड़ों के अनुसार पठारी में 65.6 मिमी, सिरोंज में 53 मिमी, आमला में 48 मिमी, सोनकच्छ में 47 मिमी और नर्मदापुरम में 46.6 मिमी बारिश दर्ज की गई। इस अवधि में छतरपुर का नौगांव कस्बा 41.6 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान के साथ राज्य का सबसे गर्म स्थान रहा, जबकि खंडवा में न्यूनतम तापमान 20.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जिससे यह प्रदेश का सबसे ठंडा शहर बना। इसके अलावा पचमढ़ी में 20.6 डिग्री, खरगोन और दमोह में 20.8 डिग्री, सागर में 20.9 डिग्री तथा अनूपपुर के अमरकंटक में रात का पारा 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।

आगामी दिनों के लिए मौसम का पूर्वानुमान

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में मौसमी परिस्थितियों में कोई बड़ा फेरबदल होने के आसार नहीं हैं। हालांकि, अगले तीन दिनों के दौरान वायुमंडल में बदलाव के कारण दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की आंशिक वृद्धि देखी जा सकती है। मौसम केंद्र ने देवास, डिंडोरी, छिंदवाड़ा और सागर जिलों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है, जहां बादलों की गड़गड़ाहट के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की आशंका है।

विभिन्न जिलों के लिए अलर्ट और शुष्क क्षेत्र

मौसम विभाग ने राज्य के लगभग 40 जिलों में आगामी समय के लिए वर्षा की चेतावनी जारी की है, जिनमें प्रमुख रूप से भोपाल, इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, रतलाम, जबलपुर, कटनी, सतना, अनूपपुर, शहडोल, दमोह और पन्ना शामिल हैं। इन क्षेत्रों के निवासियों को आकाशीय बिजली और तेज हवाओं के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई है। इसके विपरीत, चंबल और ग्वालियर संभाग के कुछ हिस्सों जैसे शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना और श्योपुर जिलों में फिलहाल मौसम के शुष्क बने रहने की संभावना जताई गई है, जहां मानसून की सक्रियता अभी थोड़ी धीमी है।

IMD Alert: कई राज्यों में भारी बारिश तो कहीं गर्मी का कहर, जानिए मौसम का ताजा हाल

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नई दिल्ली। पश्चिमी विक्षोभ और दक्षिण-पश्चिम मानसून के संयुक्त प्रभाव के कारण देश के मौसम तंत्र में व्यापक बदलाव देखा जा रहा है। जहां एक ओर उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में पारे में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, वहीं दूसरी ओर पूर्वी, पूर्वोत्तर और दक्षिणी राज्यों में मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी है। हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में अचानक आई बाढ़ के कारण एक गांव का संपर्क पूरी तरह टूट गया है, जिसमें एक व्यक्ति की मृत्यु और चार अन्य के लापता होने की खबर है। इसके अतिरिक्त, झारखंड और ओडिशा में आकाशीय बिजली की चपेट में आने से चार लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में उत्तर-पश्चिम के राज्यों में गर्मी का प्रकोप और बढ़ेगा, जबकि देश के अन्य हिस्सों में तेज हवाओं के साथ आंधी-तूफान और बारिश की स्थिति बनी रहेगी।

तापमान में बढ़ोतरी और मानसून की रफ्तार

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के पूर्वानुमान के अनुसार, आगामी 28 जून तक उत्तर-पश्चिम भारत के क्षेत्रों में अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक का उछाल आ सकता है। हालांकि, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की बूंदाबांदी होने की भी संभावना है, जहां हवा की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती है। वहीं, पूर्वी राजस्थान में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाएं जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं। दूसरी तरफ, दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से आगे की ओर अग्रसर है और इसकी उत्तरी सीमा अरब सागर से होते हुए सूरत, इंदौर, मंडला, डाल्टनगंज और मोतिहारी तक पहुंच चुकी है। आगामी तीन से चार दिनों में अनुकूल परिस्थितियां होने के कारण इसके गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बचे हुए हिस्सों में सक्रिय होने की संभावना है, जिससे किसानों को खरीफ फसलों की बुवाई में मदद मिलेगी।

विभिन्न राज्यों में बारिश का अलर्ट और कृषि सलाह

देश के पूर्वी और मध्य भागों जैसे बिहार, झारखंड, ओडिशा, पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में गरज-चमक के साथ मानसूनी बौछारें पड़ने की उम्मीद है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़, तेलंगाना, केरल, लक्षद्वीप और पश्चिम बंगाल में तेज हवाओं के साथ मध्यम वर्षा का अनुमान जताया गया है। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला और उसके आसपास के पर्यटन स्थलों में तेज हवाओं के साथ भारी वर्षा दर्ज की गई है, जिसमें मशोबरा क्षेत्र में सर्वाधिक 35 मिलीमीटर बारिश हुई। स्थानीय मौसम केंद्र ने राज्य में अगले छह दिनों तक वर्षा जारी रहने की संभावना जताई है और 1 व 2 जुलाई के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इस बदलते मौसम को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को विशेष हिदायत दी है कि वे खेतों में जल निकासी का उचित प्रबंध रखें, तैयार हो चुकी फसलों की कटाई जल्द से जल्द कर लें और वर्तमान परिस्थितियों में कीटनाशकों या उर्वरकों का छिड़काव रोक दें।

आकाशीय बिजली और बाढ़ से भारी नुकसान

मौसम के इस उग्र रूप के कारण झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में फुटबॉल खेल रहे दो युवक, साहिल राज समद (32) और पोंडेराम समद (25), आकाशीय बिजली की चपेट में आ गए, जिन्हें अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इसी तरह ओडिशा के बौध जिले में क्रिकेट खेलने जा रहे दो नाबालिग लड़के बारिश से बचने के लिए एक पेड़ के नीचे खड़े हो गए और वज्रपात की चपेट में आने से उनकी जान चली गई। उधर, अरुणाचल प्रदेश के केयी पान्योर जिले में अचानक आई बाढ़ के बाद नीपको कॉलोनी से लापता हुए चार नागरिकों की तलाश के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), स्थानीय पुलिस और स्वयंसेवकों द्वारा एक व्यापक खोज अभियान चलाया जा रहा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए नावों की मदद ली जा रही है, क्योंकि इस जिले का संपर्क अभी भी राज्य के अन्य हिस्सों से कटा हुआ है।

मोहर्रम: कर्बला पर हुसैन के लिए लड़ने गए भारत के कौन से ब्राह्मण, जिन्हें कहा जाता है हुसैनी

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हिंदुस्तानी सपूतों का एक कारवां हवा से बातें करता रेत के गुबार उड़ाता बिजली की रफ्तार से बढ़ रहा था. जिनकी आंखों में एक मजबूती थी. वो अरब की ज़मीं कर्बला की ओर जा रहे थे. नबी मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन ने जब सभी से इंसानियत को ज़िंदा रखने के लिए जंग-ए-कर्बला में शामिल होने का ऐलान किया था, तो उस जंग में हिंदुस्तानी से इन जांबाजों ने भी हिस्सा लिया. उनके कंधे पर जनेऊ डाले, माथे पर तिलक लगे थे. ये जांबाज ‘हुसैनी ब्राह्मण’ थे. उन्होंने एक ऐसी सुनहरी इबारत लिखी, जो आज भी जिंदा है. भारत का एक ब्राह्मण समुदाय खुद हुसैनी ब्राह्मण कहता है और हिंदू होते हुए भी कुछ शिया परंपराओं का पालन करता है. मोहर्रम भी मनाता है.

कर्बला में ज़ालिम बादशाह यज़ीद अपनी हुकूमत के नशे में चूर होकर इंसानियत का चेहरा बिगाड़ देना चाहता था. लेकिन उसे पता था जब तक नबी मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन ज़िंदा हैं तब तक वो अपनी मर्ज़ी की नहीं कर सकता. उसके इसी डर ने इमाम हुसैन को उनके परिवार के साथ कर्बला में घेर कर उसकी हुकूमत के सामने सर झुकाने को कहा. लेकिन उन्होंने यज़ीद की गुलामी करने से साफ इनकार कर दिया. इमाम को दरिया-ए-फ़रात के किनारे घेर लिया गया.
उनके बच्चों और औरतों को प्यासा रखने का हुक्म दे दिया गया. मुसीबत में पड़े इमाम हुसैन ने तब अपने बचपन के दोस्त हबीब को एक ख़त लिखकर मदद के लिए बुलाया. दूसरा खत उसने एक हिंदू राजा को भेजा.

दूसरा ख़त कर्बला से बहुत दूर भारत के एक हिंदू राजा के नाम भेजा. ये ख़त इमाम हुसैन ने अपने भाई जैसे दोस्त भारत के मोहयाल राजा राहिब सिद्ध दत्त नाम भेजा था. राहिब सिद्ध दत्त एक मोहयाल ब्राह्मण थे. इमाम हुसैन की ख़बर मिलते ही राहिब दत्त मोहयाल ब्राह्मणों की सेना के साथ कर्बला के लिए निकल पड़े. जब तक वो वहां पहुंचे तो इमाम हुसैन को शहीद किया जा चुका था.

ये जानकर राहिब दत्त का दिल टूट गया. जोश में तलवार को गले पर रख लिया. वो कहने लगे, “जिसकी जान बचाने आए थे वही नहीं बचा तो हम जीकर क्या करेंगे!” इमाम के चाहने वाले वीर योद्धा जनाबे अमीर मुख़्तार के मना करने पर राहिब ने तलवार को गर्दन से हटाया. फिर मुख़्तार के साथ मिलकर इमाम हुसैन के ख़ून का बदला लेने के मकसद से दुश्मनों से जंग करने निकल गए. ये तारीख़ थी 10 अक्टूबर 680 ईसवी की.
फिर क्या किया हिंदू राजा ने
उस समय यज़ीद की फौज़ इमाम हुसैन के सिर को लेकर कूफा में इब्ने जियाद के महल ला रही थी. राहिब दत्त ने यजीद दस्ते का पीछा कर हुसैन का सिर छीना और दमिश्क की ओर कूच कर गए. रास्ते में एक पड़ाव पर रात बिताने के लिए रुके, जहां यजीद की फ़ौज ने उन्हें घेर लिया. हुसैन के सिर की मांग की.
राहिब दत्त ने इमाम का सिर बचाने के लिए अपने बेटे का सिर काट कर दे दिया.  जिस पर वो चिल्लाए, “ये इमाम हुसैन का सिर नहीं है”. हुसैन का सिर बचाने के लिए राहिब दत्त ने अपने सातों बेटों का सिर काट डाला लेकिन फौजियों ने उन्हें हुसैन का सिर मानने से इनकार कर दिया.

फिर दिखाया तलवार का जौहर
राहिब दत्त के दिल में इमाम हुसैन के क़त्ल का बदला लेने की आग भड़क रही थी. इसके लिए वो इमाम हुसैन के लिए लड़ रहे बाक़ी लोगों के साथ जंग-ए-मैदान में उतर आए. बहादुरी से लड़ते हुए चुन-चुन कर हुसैन के कातिलों से बदला लिया. उन्हें हिंदुस्तानी तलवार के जौहर दिखाए. कूफे के सूबेदार इब्ने जियाद के किले पर कब्जा कर उसे गिरा दिया. जंग-ए-कर्बला में इन मोहयाली सैनिकों में कई वीरगति को प्राप्त हुए.

उस जगह को हिंदिया नाम मिला
जंग खत्म होने के बाद कुछ मोहयाली सैनिक वहीं बस गए और बाक़ी अपने वतन हिंदुस्तान वापस लौट आए. इन वीर मोहयाली सैनिकों ने कर्बला में जहां पड़ाव डाला था उस जगह को ‘हिंदिया’ कहते हैं. इतिहास इन वीर मोहयाल ब्राह्मणों को ‘हुसैनी ब्राह्मण’ के नाम से जानता है.
इस कुर्बानी को याद रखने के लिए हुसैनी ब्राह्मण मोहर्रम के वक़्त अपने घरों में दर्जनों नोहे पढ़ते हैं. नोहा का मतलब है कर्बला की जंग में शहीद हुए लोगों को याद करना.
“दर-ए-हुसैन पर मिलते हैं हर ख़याल के लोग
ये इत्तेहाद का मरकज़ है आदमी के लिए”
क्यों हुआ था जंग-ए-कर्बला
कर्बला की जंग इंसानी तारीख़ की बहुत जरूरी घटना है. ये महज जंग नहीं बल्कि जिंदगी के कई पहलुओं की लड़ाई भी थी. इस लड़ाई की बुनियाद तो हज़रत मुहम्मद की मृत्यु के बाद रखी जा चुकी थी. हजरत इमाम अली का ख़लीफ़ा बनना दूसरे खेमे के लोगों को पसंद नहीं था. कई लड़ाइयां हुईं. अली को शहीद कर दिया गया. बाद में इमाम हसन इब्न अली ख़लीफ़ा बने. उनको भी ज़हर खिलाकर शहीद कर दिया गया.

हसन के शहादत के बाद यजीद ने खुद को वहां का खलीफा घोषित कर दिया. यजीद बेहद ही जालिम और तानाशाही किस्म का था. यज़ीद चाहता था कि हुसैन उसके साथ हो जाएं, वो जानता था अगर हुसैन उसके साथ आ गए तो सारा इस्लाम उसकी मुट्ठी में होगा. लाख दबाव के बाद भी हुसैन ने उसकी किसी भी बात को मानने से इनकार कर दिया, तो यजीद ने हुसैन को रोकने की योजना बनाई.

तारीख़ चार मई, 680 ईसवी को इमाम हुसैन मदीने में अपना घर छोड़कर शहर मक्का पहुंचे, जहां उनका हज करने का इरादा था लेकिन उन्हें पता चला कि दुश्मन हाजियों के भेष में आकर उनका कत्ल कर सकते हैं. हुसैन नहीं चाहते थे कि काबा जैसे पवित्र स्थान पर खून बहे, फिर इमाम हुसैन ने हज का इरादा बदल दिया और शहर कूफे की ओर चल दिए. रास्ते में दुश्मनों की फौज उन्हें घेर कर कर्बला ले आई, जहां उन्हें शहीद कर दिया गया.

राहिब दत्त और इमाम हुसैन की दोस्ती
मान्यताओं के मुताबिक राहिब सिद्ध दत्त यूं तो एक सुखी राजा थे पर उनकी कोई औलाद नहीं थी. उन्होंने जब इमाम हुसैन का नाम सुना तो वो उनके पास गए. उन्होंने कहा, ‘ इमाम साहब मुझे औलाद चाहिए, अगर आप ईश्वर से दुआ करेंगे तो मेरी पिता बनने की तमन्ना पूरी हो जाएगी’. इस पर इमाम हुसैन ने जवाब दिया कि उनकी किस्मत में औलाद नहीं है. ये सुनकर दत्त काफी दुखी हुए. रोने लगे.

राहिब दत्त की ये उदासी इमाम हुसैन से देखी नहीं गई. इमाम साहब ने राहिब दत्त के लिए अल्लाह से दुआ की. जिसके बाद राहिब दत्त सात बेटों के पिता बने. कहा जाता है कि इमाम हुसैन, उनके परिवार, और 72 अनुयायियों के साथ राहिब दत्त के सात बेटे भी कर्बला के जंग में शहीद हो गए थे. मरहूम अभिनेता सुनील दत्त भी इन्हीं हुसैनी ब्राह्मणों के वंशज थे.
कौन हैं हुसैनी ब्राह्मण
हुसैनी ब्राह्मण, ब्राह्मणों का एक छोटा सा ऐसा समूह माना जाता है, जो इमाम हुसैन की कर्बला शहादत को याद करते हैं. उपलब्ध स्रोतों के अनुसार, यह समुदाय हिंदू पहचान रखते हुए भी मुहर्रम और मातम जैसी कुछ शिया परंपराओं का पालन करता है. ये समुदाय सामान्यतौर पर पंजाब के मोहयाल ब्राह्मण परंपरा से जोड़ा जाता है, जिसमें कई उप-शाखाएं होती हैं.
इनके बारे में कहा जाता है कि वे हिंदू सामाजिक पहचान के साथ-साथ इमाम हुसैन के प्रति श्रद्धा रखते हैं. रिपोर्टों के अनुसार हुसैनी ब्राह्मण भारत में दिल्ली, पंजाब, हिमाचल, जम्मू, पुणे जैसे क्षेत्रों में और पाकिस्तान व अफगानिस्तान क्षेत्र में भी बताए जाते हैं.

शनि प्रदोष पर कल लग रहा है बड़ा दिशाशूल! जानें किस दिशा में जाने से बचें और क्या है 40 मिनट का शुभ मुहूर्त

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27 जून 2026 दिन शनिवार को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है और इस तिथि को प्रदोष तिथि का व्रत किया जाता है. चूंकि यह शुभ तिथि शनिवार के दिन पड़ रही है इसलिए इस तिथि को शनि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाएगा. भगवान शिव को समर्पित इस व्रत के करने से ना केवल शुभ कार्यों को फल मिलता है बल्कि शनिदोष से भी राहत मिलती है. जिन लोगों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या कोई अन्य शनि दोष होता है, उनके लिए यह व्रत विशेष लाभकारी माना गया है, इससे शनि के अशुभ प्रभावों से राहत मिलती है. शनि प्रदोष व्रत का दिन कब शुभ रहेगा तो कब अशुभ, आइए जानते हैं…

कल शनि प्रदोष तिथि का व्रत
27 जून 2026 दिन शनिवार को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है, जो रात 12:43 बजे तक रहेगी. इसके बाद चतुर्दशी शुरू हो जाएगी. सुबह 10:29 से 12:17 बजे तक अमृत काल रहेगा और सुबह 4:11 से 4:59 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा. इस दिन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस दिन शनि प्रदोष व्रत पड़ रहा है. यह दिन भगवान शिव और शनिदेव दोनों की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत उत्तम माना जाता है.
अनुराधा नक्षत्र में होंगे चंद्रदेव
इस दिन सुबह 5:47 बजे सूर्योदय और शाम 7:12 बजे सूर्यास्त होगा. वहीं, शाम 5:17 बजे चन्द्रोदय और रात 3:58 बजे चन्द्रास्त होगा. पंचांग के अनुसार 27 जून 2026 को सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में स्थित रहेगा, जिसके स्वामी राहु हैं. चंद्रमा अनुराधा नक्षत्र में स्थित रहेगा और इस दिन चंद्रमा की राशि धनु होगी. वहीं, 27 जून 2026 (शनिवार) को हर्षण योग नहीं, बल्कि साध्य योग प्रभावी रहेगा. वैदिक पंचांग के अनुसार 27 जून 2026 को कोई वज्र योग नहीं है.
यह समय शुभ कार्य के लिए उत्तम
कल यानी शनिवार के दिन कोई भी महत्वपूर्ण कार्य अभिजित मुहूर्त में दोपहर 12:16 से 12:56 बजे तक करने से काफी शुभ रहेगा. यानी लगभग 40 मिनट का समय ही दिन के मध्य का सबसे शुभ और शक्तिशाली समय माना जाता है, जिसमें किसी भी नए कार्य की शुरुआत, पूजा-पाठ या महत्वपूर्ण निर्णय लेना अत्यंत फलदायी होता है.
इस दिन शुभ कार्य करने से बचें.
वहीं, राहुकाल सुबह 09:21 बजे से सुबह 11:02 बजे तक रहेगा, गुलिक काल 06:00 से 07:41 बजे तक और यमघण्टकाल दोपहर 02:23 से 04:04 तक रहेगा. पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इन समयों में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए क्योंकि इनको अशुभ समय माना जाता है. वहीं, इस दिन सूर्य मिथुन राशि में और चंद्रमा वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे.
इस दिशा में यात्रा करने से बचें
27 जून दिन शनिवार को पूर्व दिशा और उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा में दिशाशूल रहेगा. ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए, अगर आप इस दिशा में यात्रा करते हैं तो आपको धन व शारीरिक समेत कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. अगर यात्रा करना आवश्यक भी है तो कुछ अचूक ज्योतिषीय उपायों का पालन करना चाहिए. इसके लिए आप यात्रा करने से पहले भगवान शिव का ध्यान करें और पांच कदम उल्टे चलें, इसके बाद यात्रा पर निकलें. हालांकि शनिवार को इस दिशा में यात्रा ना करना ही सबसे उत्तम है.

 

नहाते समय पेशाब आना शुभ या सामान्य? किस ग्रह से है इसका संबंध? क्या मिल रहा है कोई बड़ा इशरा?

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क्या आपने कभी गौर किया है कि जैसे ही आप नहाने के लिए बाथरूम में जाते हैं और पानी शरीर को छूता है, अचानक पेशाब का दबाव बढ़ने लगता है? यह अनुभव इतना आम है कि लगभग हर व्यक्ति ने इसे कभी न कभी महसूस किया होगा, लेकिन क्या यह सिर्फ शरीर की एक सामान्य प्रतिक्रिया है या इसके पीछे कोई गहरा आध्यात्मिक और ज्योतिषीय रहस्य छिपा है? ज्योतिष शास्त्र में शरीर की हर क्रिया का संबंध पंचतत्व, ग्रहों और ऊर्जा के प्रवाह से जोड़ा जाता है.

खासकर जल तत्व को भावनाओं, शुद्धि और ऊर्जा के संतुलन का प्रतीक माना गया है. ऐसे में जब पानी हमारे शरीर को स्पर्श करता है, तो सिर्फ त्वचा ही नहीं, बल्कि मन, चेतना और शरीर के भीतर मौजूद जल तत्व भी सक्रिय हो उठता है. आइए जानते हैं कि नहाते समय पेशाब आने की इच्छा को ज्योतिष किस नजरिए से देखता है.
जल तत्व और शरीर का गहरा संबंध
वैदिक ज्योतिष के अनुसार हमारा शरीर पांच तत्वों-जल, अग्नि, वायु, पृथ्वी और आकाश-से बना है. इनमें जल तत्व भावनाओं, संवेदनशीलता और शरीर के तरल पदार्थों का प्रतिनिधित्व करता है. पेशाब, रक्त, पसीना और शरीर के अन्य तरल पदार्थ जल तत्व से जुड़े माने जाते हैं. जब बाहरी रूप से पानी शरीर को छूता है, तो भीतर मौजूद जल तत्व भी प्रतिक्रिया देता है. इसे ऊर्जा का प्राकृतिक सामंजस्य माना जाता है. ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि यही वजह है कि नहाने के दौरान कई लोगों को तुरंत पेशाब आने की इच्छा महसूस होती है.

चंद्रमा और मन का संबंध
चंद्रमा का प्रभाव क्यों माना जाता है खास?
वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं और जल तत्व का कारक ग्रह माना गया है. जिस तरह चंद्रमा समुद्र में ज्वार-भाटा पैदा करता है, उसी तरह यह हमारे शरीर में मौजूद जल तत्व को भी प्रभावित करता है. जब व्यक्ति स्नान करता है, तो पानी का स्पर्श मन को शांत करता है. मन शांत होते ही शरीर तनावमुक्त होने लगता है और कई बार यह राहत पेशाब के रूप में महसूस होती है. अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा मजबूत हो, तो वह पानी से जल्दी जुड़ाव महसूस कर सकता है. ऐसे लोगों को बारिश, नदी, झील या स्नान से विशेष सुकून मिलता है.
स्नान: सिर्फ सफाई नहीं, ऊर्जा शुद्धि का माध्यम
क्यों कहा जाता है कि स्नान से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है?
सनातन परंपराओं में स्नान को केवल शरीर की सफाई नहीं, बल्कि ऊर्जा शुद्धि का माध्यम माना गया है. सुबह स्नान करने की सलाह इसलिए दी जाती है क्योंकि पानी मानसिक थकान, तनाव और भारीपन को कम करने में मदद करता है. जब शरीर आराम की अवस्था में पहुंचता है, तो वह जमा हुए दबाव को छोड़ना शुरू करता है. यही कारण है कि कुछ लोगों को नहाते समय गहरी सांसें आती हैं, कुछ को नींद महसूस होती है और कई लोगों को पेशाब की इच्छा होने लगती है. इसे शरीर और मन के बीच सामंजस्य की प्रक्रिया के रूप में देखा जाता है.

क्या हर व्यक्ति के साथ ऐसा होता है?
ज्योतिष के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में जल तत्व प्रधान होता है, वे इस अनुभव को ज्यादा महसूस कर सकते हैं. खासकर कर्क, वृश्चिक और मीन राशि के लोगों में यह प्रवृत्ति अधिक देखी जा सकती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दूसरी राशियों के लोग ऐसा महसूस नहीं करते. यह अनुभव व्यक्ति की मानसिक स्थिति, दिनभर के तनाव और शरीर की संवेदनशीलता पर भी निर्भर करता है. गर्मी के मौसम में ठंडे पानी से नहाते समय या लंबे समय तक पेशाब रोकने के बाद यह एहसास और ज्यादा बढ़ सकता है.
कब बन सकता है चिंता का कारण?
ज्योतिषीय मान्यताएं अपनी जगह हैं, लेकिन शरीर के संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए,
अगर आपको हर बार बहुत ज्यादा पेशाब लगती है, पेशाब के दौरान जलन होती है, बार-बार बाथरूम जाना पड़ता है या दर्द महसूस होता है, तो यह किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. ज्योतिष और आध्यात्मिक मान्यताएं जीवन को समझने का एक नजरिया देती हैं, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए चिकित्सकीय जांच सबसे महत्वपूर्ण है.

नहाते समय पेशाब आने की इच्छा को केवल एक साधारण आदत मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं होगा. ज्योतिष इसे शरीर के जल तत्व, चंद्रमा के प्रभाव और ऊर्जा शुद्धि की प्रक्रिया से जोड़कर देखता है. पानी सिर्फ शरीर को साफ नहीं करता, बल्कि मन को भी हल्का करता है. शायद यही वजह है कि स्नान के दौरान हमारा शरीर खुद को सहज महसूस करता है और भीतर जमा दबाव को छोड़ने लगता है.

चंद्र दोष से होता है डिप्रेशन, तनाव और चिंता, ज्येष्ठ पूर्णिमा पर करें ये 5 उपाय, संकटों से मिलेगी मुक्ति

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ज्येष्ठ पूर्णिमा 29 जून को है. इस दिन चंद्रमा की पूजा करते हैं, जिससे मनोबल मजबूत होता है, मन एकाग्र, शांत होगा, जीवन में सुख और शांति आती है. लेकिन कुंडली में जब चंद्रमा का दोष होता है, उस पर भी राहु और केतु का अशुभ प्रभाव होता है, तो व्यक्ति डिप्रेशन, तनाव और चिंता से परेशान होता है. ऐसे में आप पूर्णिमा के दिन ज्योतिष उपायों को करके लाभ प्राप्त कर सकते हैं.
ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 मुहूर्त

ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा तिथि की शुरुआत: 29 जून, 3 बजकर 6 एएम पर
ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा तिथि की समाप्ति: 30 जून, 5 बजकर 26 एएम पर
चंद्रोदय: शाम 07 बजकर 16 मिनट पर
चंद्रास्त: 30 जून, प्रात: 05:15 ए एम पर

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर चंद्र दोष के 5 उपाय

    चंद्रमा के दोष को दूर करने के लिए ज्येष्ठ पूर्णिमा का व्रत रखें. इस दिन सोमवार है, जो चंद्रमा का दिन है. इसमें आप रात के समय चंद्रमा की पूजा करें और कच्चे दूध में सफेद फूल, अक्षत् डालकर अर्घ्य दें. वहीं दिन में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें. इससे जल्द लाभ होगा.
    ज्येष्ठ पूर्णिमा को सुबह में स्नान करें. उसके बाद चंद्रमा से जुड़ी वस्तुओं जैसे दूध, शक्कर, सफेद फूल, सफेद वस्त्र, खीर, चांदी, मोती, मिश्री आदि का दान करें. इससे भी कुंडली का चंद्र दोष दूर होता है.
    ज्योतिष में चंद्रमा का संबंध मां से होता है. यदि चंद्र दोष है तो आप अपनी मां की सेवा करें. उनकी आज्ञा और आशीर्वाद से काम करें. जरूरी मामलों में उनसे सुझाव लें. उनकी कृपा और प्रेम से आपका जीवन सुखमय होगा. आपका चंद्रमा मजबूत होगा, तो मा​नसिक समस्याएं भी दूर होंगी.
    पूर्णिमा और सोमवार के दिन पूजा के बाद चंद्रमा के मंत्र ॐ सोमाय नमः या फिर ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नम का जाप करें. इस मंत्र का जाप स्फटिक की माला से करें. स्फटिक की माला नहीं है तो रूद्राक्ष की माला का उपयोग कर सकते हैं. इस मंत्र जाप से भी चंद्र दोष मिटता है.
    चंद्र दोष को दूर करने के लिए शिव चालीसा, रुद्राष्टक या चंद्र स्तोत्र का पाठ करें. इसके अलावा शुभ मुहूर्त में चांदी की अंगूठी में मोती धारण किया जा सकता है

 

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