- मेष राशि :- तनाव, उदर रोग, मित्र लाभ, राजभय, दाम्पत्य जीवन संतोषपूर्ण रहेगा।
- वृष राशि :- शत्रुभय, सुख-मंगल, कार्य विशेष मामले-मुकदमे में प्राय: जीत अवश्य ही होगी।
- मिथुन राशि :- कुसंग हानि, रोगभय, यात्रा, उद्योग-व्यापार की स्थिति लाभ-हानि की रहेगी।
- कर्क राशि :- पराक्रम, कार्यसिद्धी, व्यापार लाभ, खेती व गृहकार्य में व्यवस्था अवश्य ही बनेगी।
- सिंह राशि :- आशानुकूल सफलता का हर्ष, स्थिति में सुधार अवश्य ही होगा, रुके कार्य बनेंगे।
- कन्या राशि :- धन का व्यर्थ व्यय, कार्यों में हस्तक्षेप करने से दूसरों से तनाव अवश्य बनेगा।
- तुला राशि :- कार्यगति अनुकूल, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, मित्रों से सहयोग अवश्य मिलेगा।
- वृश्चिक राशि :– सामाजिक कार्य में प्रतिष्ठा-प्रभुत्व वृद्धि एवं कार्य कुशलता से संतोष होगा।
- धनु राशि :- योजना फलीभूत, कार्य कुशलता से हर्ष होगा, मित्रों से सहयोग अवश्य ही मिलेगा।
- मकर राशि :- अधिकारियों के संपर्क से बचें, तनाव-क्लेश व अशांति, बेचैनी अवश्य ही बनेगी।
- कुंभ राशि :- उद्विघ्नता, असमंजस का वातावरण मन को क्लेशयुक्त रखेगा, ध्यान दें।
- मीन राशि :- बिगड़े हुये कार्य बनें, कार्य योजनायें फलीभूत होंगी, सफलता के साधन अवश्य ही बनेंगे।
राशिफल 27 जून 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
जैविक सब्जी के उत्पादन और एप्पल की खेती से बनाई नई पहचान
रायपुर : नगर पंचायत मल्हार के प्रगतिशील किसान जदुनंदन वर्मा ने जैविक खेती और नवाचार के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई है। वे एक एकड़ में जैविक सब्जियों की खेती कर सालाना लगभग दो लाख रुपये की आमदनी अर्जित कर रहे हैं। वहीं आधा एकड़ में जैविक एप्पल की खेती कर उन्होंने क्षेत्र के किसानों के लिए एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया है। पिछले लगभग दस वर्षों से वे पूरी तरह जैविक पद्धति से खेती कर रहे हैं। उनकी सफलता अन्य किसानों को भी जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।
जदुनंदन वर्मा बताते हैं कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसी सोच के साथ उन्होंने जैविक खेती को अपनाया। वे गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत तथा अन्य जैविक संसाधनों का उपयोग कर खेती करते हैं। इससे उत्पादन लागत में कमी आई है, फसलों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और मिट्टी की उर्वरता भी लगातार बढ़ी है।
जैविक एप्पल की खेती बनी आकर्षण का केंद्र
जदुनंदन वर्मा ने लगभग साढ़े तीन वर्ष पहले आधा एकड़ भूमि में जैविक एप्पल के पौधे लगाए थे। पिछले दो वर्षों से उन्हें एप्पल का उत्पादन मिल रहा है। उनके खेत में तैयार होने वाले जैविक एप्पल की मांग इतनी बढ़ गई है कि ग्राहक स्वयं उनके खेत पहुंचकर फल खरीदकर ले जाते हैं। इससे उन्हें बेहतर मूल्य मिलने के साथ जैविक उत्पादों के प्रति लोगों का विश्वास भी बढ़ा है।
जदुनंदन को कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जैविक खाद निर्माण, जैविक कीट एवं रोग प्रबंधन तथा उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी मिली, जिसका लाभ उनकी खेती में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। साथ ही उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ भी नियमित रूप से मिल रहा है, जिससे खेती की लागत कम करने में सहायता मिलती है।
जदुनंदन वर्मा का मानना है कि जैविक खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा का भी प्रभावी माध्यम है। उनकी सफलता यह साबित करती है कि नवाचार, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का समुचित लाभ लेकर खेती को लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।
ब्लॉक वेस्ट जनरेटरों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 की दी गई जानकारी
रायपुर : छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय, कोरबा द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन और विभिन्न हितधारकों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 25 जून को नगर पालिक निगम कोरबा के पंडित जवाहरलाल नेहरू सभागार में कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में ब्लॉक वेस्ट जनरेटर्स, औद्योगिक इकाइयों, स्वास्थ्य संस्थानों, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों, होटल संचालकों, नगरीय एवं ग्रामीण निकायों के प्रतिनिधियों तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।
कोरबा में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने आयोजित की जागरूकता कार्यशाला
कार्यशाला में प्रतिभागियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रमुख प्रावधानों, ब्लॉक वेस्ट जनरेटर्स की जिम्मेदारियों, स्रोत स्तर पर अपशिष्ट पृथक्करण, अपशिष्टों के वैज्ञानिक प्रबंधन एवं सुरक्षित निपटान की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही अनिवार्य पंजीयन, आवश्यक अभिलेखों के संधारण तथा अनुपालन संबंधी प्रावधानों से भी अवगत कराया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आयुक्त नगर पालिक निगम कोरबा आशुतोष पाण्डेय ने कहा कि स्वच्छ एवं स्वस्थ शहर के निर्माण में प्रत्येक संस्था और नागरिक की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने सभी ब्लॉक वेस्ट जनरेटर्स से अपने परिसरों में अपशिष्टों का पृथक्करण सुनिश्चित करने, जैविक अपशिष्टों का स्थानीय स्तर पर वैज्ञानिक प्रबंधन करने तथा नियमों के अनुरूप पंजीयन एवं अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने का आह्वान किया।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत कोरबा दिनेश कुमार नाग ने ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ठोस अपशिष्टों के वैज्ञानिक प्रबंधन से सतत विकास के लक्ष्य प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने सभी ग्राम पंचायतों, संस्थाओं एवं ब्लॉक वेस्ट जनरेटर्स से नियमों के अनुरूप अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने तथा स्वच्छता गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की।
क्षेत्रीय अधिकारी, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, कोरबा प्रशान्त सोनकर ने कहा कि ब्लॉक वेस्ट जनरेटर्स द्वारा उत्पन्न अपशिष्टों का वैज्ञानिक एवं पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप प्रबंधन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने निर्धारित समयसीमा में पंजीयन कराने, आवश्यक अभिलेखों का संधारण करने तथा अपशिष्टों के सुरक्षित संग्रहण एवं निपटान की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नियमों के उल्लंघन की स्थिति में पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति सहित अन्य वैधानिक कार्रवाई भी की जा सकती है।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया तथा नियमों के व्यवहारिक अनुपालन से संबंधित सुझाव भी साझा किए गए। सभी प्रतिभागियों ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 का प्रभावी पालन करते हुए पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय सहयोग देने का संकल्प लिया।
नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन 28 जून को
भोपाल : भारत सरकार द्वारा लागू नवीन आपराधिक कानूनों —भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita – BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita – BNSS), एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (Bharatiya Sakshya Adhiniyam – BSA) के प्रभावी क्रियान्वयन एवं आपराधिक न्याय प्रणाली के विभिन्न स्तंभों (पुलिस, न्यायपालिका, अभियोजन, कारागार एवं फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला) के मध्य डिजिटल समन्वय को सुदृढ़ करने हेतु Interoperable Criminal Justice System (ICJS) के अंतर्गत एक राज्य स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन रविवार, 28 जून को प्रात: 9.30 बजे से कुशाभाऊ ठाकरे सभागार (मिंटो हॉल), भोपाल में किया जा रहा है।
इस कार्यशाला में सभी जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तथा विभिन्न जिलों के माननीय न्यायाधीश, मेडीकल आफिसर्स, अभियोजन, कारागार तथा फोरेंसिक साइंस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सहभागिता करेंगे। इस कार्यशाला का उद्देश्य नवीन आपराधिक कानूनों की डिजिटल रूप से प्रभावी क्रियान्वयन रणनीतियों पर विमर्श करना एवं सभी स्तंभों के बीच समन्वय स्थापित करना है।
जनता के द्वार, डिजिटल सरकार’: छत्तीसगढ़ में सुशासन का नया चेहरा बना ‘सेवा सेतु’
रायपुर : आधुनिक युग में जब तकनीक आम आदमी के जीवन को सुगम बनाने का माध्यम बन जाए, तो वह सुशासन की सबसे बड़ी सफलता कहलाती है। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी डिजिटल पहल ‘सेवा सेतु पोर्टल’ आज कुछ ऐसा ही कमाल कर रही है। यह पोर्टल प्रदेश के आम नागरिकों के लिए एक भरोसेमंद साथी बनकर उभरा है, जिसने सरकारी दफ्तरों की जटिल प्रक्रियाओं को घर बैठे एक क्लिक पर समेट दिया है।
इस डिजिटल क्रांति की एक जीवंत मिसाल बनी हैं धमतरी जिले के कुरूद तहसील के ग्राम करेली की रहने वाली कु. लोमेश्वरी साहू। लोमेश्वरी की कहानी इस बात का प्रमाण है कि कैसे ‘सेवा सेतु’ ने आमजन के समय, श्रम और धन की बचत कर उनके जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लाया है।
चक्कर काटने के दौर से ‘क्लिक’ के सफर तक
अपने बीते अनुभवों को साझा करते हुए लोमेश्वरी साहू बताती हैं कि पहले किसी भी शासकीय प्रमाण पत्र को बनवाना एक थका देने वाली प्रक्रिया थी। उन्हें और उनके जैसे कई ग्रामीणों को तहसील कार्यालय के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे।
पहले आवेदन करने के लिए बस का किराया लगाकर शहर जाओ, फिर दफ्तरों के चक्कर काटो। कई बार जरूरी दस्तावेजों की पूरी जानकारी न होने के कारण काम अटक जाता था। इससे समय तो बर्बाद होता ही था, साथ ही जेब पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था।
घर बैठे मिला जाति प्रमाण पत्र, एसडीएम ने सौंपा
लोमेश्वरी के लिए ‘सेवा सेतु’ पोर्टल एक वरदान साबित हुआ। जब उन्हें अपने जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता हुई, तो उन्होंने किसी कार्यालय के चक्कर काटने के बजाय घर बैठे ही सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया। बेहद सरल प्रक्रिया का पालन करते हुए उन्होंने जरूरी दस्तावेज अपलोड किए और अपने मोबाइल से ही आवेदन की स्थिति (Status) को ट्रैक करती रहीं। नतीजा यह हुआ कि बिना किसी भाग-दौड़ के, निर्धारित समय-सीमा के भीतर उनका जाति प्रमाण पत्र बनकर तैयार हो गया। कुरूद के एसडीएम ने उन्हें यह प्रमाण पत्र सौंपा। लोमेश्वरी कहती हैं कि इस पारदर्शी व्यवस्था ने उन्हें दफ्तरों की कतारों और आवागमन के खर्च, दोनों से हमेशा के लिए मुक्ति दिला दी।
डिजिटल तकनीक से सुदृढ़ हुआ 'जन-विश्वास'
सेवा सेतु पोर्टल ने पारंपरिक शासकीय प्रक्रियाओं को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। इसके जरिए अब नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने से मुक्ति मिल गई है, जिससे उनके समय और श्रम की भारी बचत हो रही है। घर बैठे आवेदन की सुविधा मिलने से न केवल आवागमन का खर्च बंद हुआ है, बल्कि बिचौलियों पर निर्भरता खत्म होने से आम जनता को बड़ी आर्थिक राहत भी मिली है। इस पूरी व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत इसकी शत-प्रतिशत पारदर्शिता है, जिसके तहत आवेदक अपने मोबाइल या कंप्यूटर से स्वयं आवेदन की स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं। इसके अलावा, यह पोर्टल समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित करता है, जिससे सभी आवश्यक प्रमाण पत्र और शासकीय लाभ तय समय-सीमा के भीतर सीधे नागरिकों तक पहुँच रहे हैं।
लोमेश्वरी साहू का मानना है कि इस ऑनलाइन व्यवस्था ने शासकीय सेवाओं को न केवल सुलभ बनाया है, बल्कि पूरी प्रक्रिया में गजब की पारदर्शिता ला दी है। अब नागरिकों को अपने काम के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, जिससे शासन और प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।
सुशासन की दिशा में एक मील का पत्थर
धमतरी जिले की यह सफलता की कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि डिजिटल तकनीक के सही इस्तेमाल से शासकीय सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को कितना बेहतर किया जा सकता है। आज ‘सेवा सेतु’ पोर्टल त्वरित, पारदर्शी और विश्वसनीय सेवाएं प्रदान कर “जनता के द्वार, डिजिटल सरकार” की परिकल्पना को धरातल पर सच कर रहा है। छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजिटल सशक्तिकरण के क्षेत्र में यह पहल वाकई एक मील का पत्थर साबित हो रही है।
मनरेगा और जल निधि का महासंगम: छत्तीसगढ़ के धमतरी में ‘आजीविका डबरी’ से बदल रही ग्रामीण इकॉनमी की तस्वीर
रायपुर : छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में आर्थिक स्वावलंबन और जल संरक्षण को लेकर एक बेहद अनूठा और सफल प्रयोग सामने आ रहा है। धमतरी जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और 'जल निधि परियोजना' के बेहतरीन तालमेल ने पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने वाले ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय के नए द्वार खोल दिए हैं। मनरेगा के तहत खोदे गए तालाबों (डबरी) को महज जल संचय तक सीमित न रखकर, उन्हें वैज्ञानिक मत्स्य पालन से जोड़ा गया है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आजीविका में क्रांतिकारी बदलाव आ रहा है।
इसी जमीनी हकीकत और इसकी भविष्य की संभावनाओं को परखने के लिए कलेक्टर ने नगरी विकासखंड के सुदूर ग्राम बोथापारा और चनागांव का सघन दौरा किया। उन्होंने सीधे खेतों की मेढ़ पर पहुंचकर महिला मत्स्य पालकों और प्रगतिशील किसानों से संवाद किया और इस आजीविका मॉडल को ग्रामीण समृद्धि की एक नई और स्थायी दिशा बताया।
क्या है 'आजीविका डबरी' का पूरा बिजनेस मॉडल?
अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान कलेक्टर को बताया कि प्रत्येक आजीविका डबरी का एक मानक आकार तय किया गया है। ग्रामीण इस मॉडल को अपनाकर बेहद कम लागत में अपनी आय दोगुनी कर रहे हैं। लगभग 33 हजार रुपये की लागत से वैज्ञानिक देखरेख में लगभग 6 महीने में 20*20*3 मीटर की आजीविका डबरी का निर्माण किया जा सकेगा।
लागत की तुलना में लगभग दोगुनी आय की शत-प्रतिशत संभावना
कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) का सहारा
इस मॉडल को व्यावसायिक रूप से मजबूत बनाने के लिए प्रशासन ने 'एबिस कंपनी' के साथ हाथ मिलाया है। सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत कंपनी इन ग्रामीण मत्स्य पालकों को मछली दाना (फीड) की खरीदी पर 25 प्रतिशत की विशेष छूट दे रही है। इससे किसानों की उत्पादन लागत काफी घट गई है और उनका शुद्ध लाभांश बढ़ गया है।
महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनीं सावित्री दर्रो
नगरी विकासखंड के ग्राम बोथापारा की महिला मत्स्य पालक श्रीमती सावित्री दर्रो के खेत पहुंचकर कलेक्टर ने खुद डबरी का मुआयना किया। सावित्री ने बताया कि उनके पास करीब 7 एकड़ कृषि भूमि है, जहां वे बरसों से पारंपरिक रूप से सिर्फ धान की खेती करती आ रही थीं। लेकिन अब उन्होंने अपने खेत में दो आजीविका डबरियां तैयार की हैं, जिनमें कतला, रोहू और मृगल प्रजाति की मछलियों का पालन हो रहा है।
इस कहानी में नया मोड़ तब आया जब अधिकारियों ने बताया कि सावित्री के बेटे ओमप्रकाश को आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों की एडवांस ट्रेनिंग के लिए अगले महीने पुरी (ओडिशा) भेजा जा रहा है। वहां से ट्रेनिंग लेकर लौटने के बाद वह न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे इलाके के युवाओं को उन्नत और आधुनिक मत्स्य पालन की बारीकियां सिखाएगा।
नारायण सिंह का इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल
इसके बाद कलेक्टर चनागांव के प्रगतिशील किसान श्री नारायण सिंह नेताम के खेत पहुंचे। श्री नेताम ने अपनी 5 एकड़ कृषि भूमि में से दो आजीविका डबरियां विकसित की हैं। खास बात यह है कि वे डबरी के पानी से सिर्फ मछली पालन नहीं कर रहे, बल्कि उसके चारों तरफ आम की बागवानी (हॉर्टिकल्चर) भी अपना चुके हैं। डबरी के पोषक तत्वों से भरपूर पानी की वजह से बागवानी की फसल भी बंपर हो रही है, जिससे उन्हें सालभर एक फिक्स और मोटी आमदनी मिल रही है।कलेक्टर ने खुद मौके पर जाकर डबरी के पानी की गुणवत्ता (Water Quality) की जांच भी कराई।
16 से बढ़कर 50 गांवों तक पहुंचेगा यह सफर
कलेक्टर ने जिले के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि मनरेगा के तहत बनने वाली हर एक सरकारी और निजी परिसंपत्ति का शत-प्रतिशत उत्पादक उपयोग होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनरेगा का उद्देश्य सिर्फ गड्ढे खुदवाना या अस्थाई रोजगार देना नहीं है, बल्कि ग्रामीण परिवारों के हाथ में एक ऐसा साधन सौंपना है जिससे वे जीवनभर कमाई कर सकें। मनरेगा, जल संरक्षण और वैज्ञानिक मत्स्य पालन का यह त्रिवेणी संगम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएगा, गांवों में कुपोषण दूर कर पोषण सुरक्षा लाएगा और छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती देगा।
वर्तमान में धमतरी जिले के 16 गांवों में यह आजीविका मॉडल सफलतापूर्वक जमीन पर उतर चुका है। इसकी अपार सफलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने अब अगले चरण में 50 गांवों की 50 आजीविका डबरियों में इस मत्स्य पालन विस्तार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण और सतत कृषि विकास (Sustainable Agriculture) को गति देने की दिशा में यह प्रयोग एक नजीर बन चुका है।
पुलिस सैलरी पैकेज योजना कठिन समय में पुलिस परिवारों का सशक्त सहारा
भोपाल : मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अपने अधिकारियों एवं कर्मचारियों के कल्याण हेतु संचालित योजनाएं कठिन परिस्थितियों में पुलिस परिवारों के लिए सशक्त सहारा बनकर सामने आ रही हैं। इसी क्रम में मंडला में दिवंगत पुलिसकर्मी के परिजन को भारतीय स्टेट बैंक की पुलिस सैलरी पैकेज योजना के अंतर्गत एक करोड़ रुपए की बीमा सहायता राशि प्रदान की गई है।
35वीं वाहिनी मंडला में पदस्थ स्वर्गीय कार्यवाहक प्रधान आरक्षक मुकेश बंसकार का सर्पदंश के कारण निधन हो जाने पर उनका वेतन खाता भारतीय स्टेट बैंक शाखा मंडला में पुलिस सैलरी पैकेज योजना से संबद्ध होने के कारण उनके नामांकित उत्तराधिकारी उनकी पत्नी रजनी बंसकार को दुर्घटनावश मृत्यु बीमा के रूप में 1 करोड़ रुपए की सहायता राशि प्रदान की गई। सेनानी 35वीं वाहिनी मंडला राजेश रघुवंशी द्वारा परिजनों को उक्त राशि का चेक सौंपा गया।
मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा सभी पुलिस कर्मियों को पुलिस वेतन पैकेज खाता के जरिए अनेक वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें एक करोड़ रुपये का आकस्मिक मृत्यु बीमा, होम लोन पर विशेष ब्याज दरें, मुफ्त डेबिट कार्ड और बीमा परिवार के लिए अतिरिक्त आर्थिक सुरक्षा कवच शामिल हैं।
सशक्त लोकतंत्र ही हमारी पहचान, हम लोकतंत्र सेनानियों का ऋण कभी नहीं चुका पाएंगे: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राष्ट्र हित से बढ़कर कुछ भी नहीं है। राष्ट्र हित में ही सबका हित निहित है। सशक्त लोकतंत्र ही भारत राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत है, जिसने देश को वैश्विक पटल पर एक विशिष्ट और सम्मानजनक पहचान दिलाई है। लोकतंत्र सेनानियों ने देश में लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की रक्षा के लिए अपना खून-पसीना बहाया, अमानवीय अत्याचार सहे और अनेक लोगों ने अपने प्राणों की आहुति तक दे दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा हम सभी भारतवासी इन लोकतंत्र सेनानियों का ऋण कभी नहीं चुका पाएंगे। आज देश की एकता, विविधता, अखंडता और अक्षुण्णता इन्हीं साहसी, समर्पित एवं राष्ट्रनिष्ठ कर्मवीरों की ही देन है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को लोकतंत्र सेनानी स्मृति दिवस के अवसर पर रवीन्द्र भवन में आयोजित लोकतंत्र सेनानियों के प्रादेशिक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए कठिन से कठिन यातनाएं सहने वाले वीर लोकतंत्र सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि उनका त्याग आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का अमूल्य स्रोत है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जावरा, जिला रतलाम निवासी 96 वर्षीय लोकतंत्र सेनानी लक्ष्मी नारायण पाटीदार और 95 वर्षीय लोकतंत्र सेनानी शांतिलाल संघवी सहित आपातकाल के दौरान प्रमुख भूमिका में रहे पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता का शील्ड प्रदान कर अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रादेशिक सम्मेलन में आए सभी लोकतंत्र सेनानियों पर पुष्प-वर्षा कर उनका स्वागत-सम्मान किया। सम्मेलन का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं वंदे मातरम् गायन के साथ हुआ। सम्मेलन में देश में आपातकाल पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आपातकाल पर केंद्रित चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
लोकतंत्र सेनानियों के हित में की घोषणाएं
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान में घोषणा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना में लोकतंत्र सेनानियों के लिए स्पेशल ट्रेन की व्यवस्था कर उन्हें तीर्थ दर्शन कराया जायेगा। इनके लिए शासकीय रेस्ट हाउस में 2 दिन तक रूकने की व्यवस्था भी की जाएगी। दिवंगत लोकतंत्र सेनानियों के नाम पर शिलालेख लिखवाये जायेंगे एवं उनके गांव, कस्बे, नगर या निवास क्षेत्र के समीप मौजूद सार्वजनिक भवनों, पार्क एवं रोड आदि का नाम भी इनके नाम पर रखा जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा की कि लोकतंत्र सेनानियों के इलाज का सारा खर्चा अब सरकार उठाएगी। किसी लोकतंत्र सेनानी के बीमार पड़ने पर उन्हें उत्कृष्ट और बड़े स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने के लिए पीएमएयर एंबुलेंस की नि:शुल्क सेवाएं भी प्रदान की जाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी लोकतंत्र सेनानियों को ताम्रपत्र दिया जाएगा। लोकतंत्र सेनानियों द्वारा अपने निवास के पते पर बदलाव होने पर उन्हें दी जा रही सम्मान निधि से संबंधित बैंक या शाखा बदलने की सुविधा भी दी जाएगी। किसी भी शासकीय कार्यालय में लोकतंत्र सेनानियों के पहुंचने पर संबंधित अधिकारी पूरे सम्मान और प्राथमिकता के साथ इनकी बात सुनेंगे तथा इनके सुझाव भी माने जाएंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिस प्रकार आजादी की लड़ाई में स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की बाजी लगाकर मातृभूमि की रक्षा की थी, उसी प्रकार आपातकाल के उस काले दौर में लोकतंत्र सेनानियों ने अनेक कष्ट सहकर मातृभूमि के मूल "लोकतंत्र" की रक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यदि लोकतंत्र सेनानी अपने लक्ष्य से अडिग, अटूट और दृढ़ संकल्पी न होते, तो भारत इतना मजबूत लोकतंत्र न होता। लोकतंत्र सेनानियों के अथक संघर्ष से ही हमारा लोकतंत्र सुरक्षित भी है और समृद्ध भी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आपातकाल के दौर में लोकतंत्र सेनानियों के त्याग और समर्पण से ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जैसे सामान्य परिवार से आने वाले व्यक्ति को प्रधानमंत्री पद मिलता है। हमारे आपके जैसे सामान्य परिवार के कई लोगों को भी राज्यों में जनसेवा का अवसर मिल रहा है। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। हमें अपने देश में लोकतंत्र की मिसाल बनाए रखना है। लोकतंत्र में जनता का शासन, जनता के द्वारा, जनता के लिए होना चाहिए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आपातकाल के समय किसी को भी जेल में डाल दिया जाता था। एक प्रकार से देशभर में भय का वातावरण था। उन्होंने बताया कि उनके पिता भी 19 महीने तक जेल में रहे। तब लोकतंत्र सेनानियों पर जेलों में अनेकों अत्याचार किए गए। तत्कालीन सत्ताधीश चाहते थे कि जो लोग उनकी पार्टी में शामिल हो जाएंगे, उन्हें जेल से रिहा कर दिया जाएगा। आपातकाल लगाने वाले सत्ताधीशों ने एक ही परिवार को आगे बढ़ाने के लिए लोकतंत्र को कुचला था।
भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 7.8 है, जो अमेरिका और चीन से अधिक
पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि मध्यप्रदेश में आज लोकतंत्र सेनानियों को 30 हजार रुपए आर्थिक सहायता राशि दी जा रही है। प्रदेश सरकार ने मीसाबंदियों के त्याग को समझा और दिल से उनका सम्मान समारोह कराने की शुरुआत की है। अब बंगाल के लोकतंत्र सेनानी और स्वतंत्रता सेनानियों को भी सम्मान मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोकतंत्र सेनानियों को प्रमाण-पत्र जारी कर कई प्रकार की सुविधाएं दी हैं। देशभर के लोकतंत्र सेनानियों को स्वतंत्रता सेनानियों के बराबर दर्जा मिले और उन्हें मिलने वाली 30 हजार की राशि को आयकर मुक्त कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था वृद्धि के मामले में भारत तेज गति से आगे बढ़ रहा है। भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 7.8 प्रतिशत है, जो अमेरिका और चीन से भी अधिक है। सोलंकी ने कहा कि 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव में अनैतिकता को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की संसद सदस्यता रद्द कर दी थी। उन्होंने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन इस्तीफा नहीं दिया। उन्होंने 25 जून 1975 की रात लोकतंत्र की हत्या कर देश में आपातकाल की घोषणा कर दी थी। हजारों स्वयं सेवकों को जेलों में डाल दिया गया। आज लोकतंत्र सेनानियों के त्याग और समर्पण के कारण ही सामान्य परिवार से आने वाले डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री के पद पर आसीन हैं।
भारत की दूसरी आजादी के आंदोलन की तरह था आपातकाल का संघर्ष
लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद कैलाश सोनी ने कहा कि आज आपातकाल के 51 वर्ष पूर्ण हो गये हैं। लोकतंत्र सेनानी जब मिलते हैं तो ऊर्जा का संचार होता है। एक राष्ट्रीय राजनैतिक शख्सियत ने अपनी जिद के लिए लोकतंत्र को खत्म कर उनके फैसले के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले नागरिकों को जेलों में डाला। तत्कालीन समय में 25 जून की रात हुए काले कारनामों को देशवासियों को स्मरण कराने के लिए 'संविधान हत्या दिवस' या 'काला दिवस' मनाने की शुरुआत की गई। आपातकाल के दौर में अभिव्यक्ति की आजादी छीन ली गई। मीडिया हाउसों पर ताले लगा दिए गए। करीब 25 से 30 बड़े पत्रकारों और संपादकों को जेलों में डाल दिया गया। लोकतंत्र को पुन: स्थापित करने के लिए देश में लंबा संघर्ष चला। आपातकाल का संघर्ष एक प्रकार से देश की दूसरी आजादी का आंदोलन था। सभी लोकतंत्र सेनानी लोकशाही के संवाहक हैं, संविधान के संरक्षक हैं। सोनी ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण देश में लोकतंत्र की मिसाल थे। कांग्रेस सरकारों ने लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान समारोहों पर पाबंदियां लगाईं। लोकतांत्रिक संस्थाओं पर उनकी कोई आस्था नहीं थी। आज भारत दुनिया में खुली हवा में सांस ले पा रहा है और दुनिया के 4 सबसे शक्तिशाली देशों में शामिल हो रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के कुशल नेतृत्व में हमारा देश परमाणु शक्ति संपन्न बना। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन जैसी अनेक योजनाएं पहले की तरह संचालित हैं।
विकसित भारत के साथ विकसित मध्यप्रदेश का भी सपना होगा साकार
वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. महेंद्र सिंह ने कहा कि आपातकाल के 51 वर्ष पूरे हुए हैं। ब्रिटिश शासन के दौर में देशवासियों ने आजादी के लिए संघर्ष किया। स्वतंत्र भारत में भी इस प्रकार से लोकतंत्र की हत्या की जाएगी, किसी ने सोचा नहीं था। लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने गुजरात की धरती से आपातकाल के खिलाफ बड़े आंदोलन का ऐलान कर दिया था। फिर बिहार के गांधी मैदान से नारा दिया कि 'सिंहासन खाली करो कि जनता आती है'। तत्कालीन सत्ताधीश इससे बुरी तरह घबरा गये। आपातकाल के समय लोकतंत्र सेनानियों पर जेलों में अनेक अत्याचार किये गये। लोकतंत्र सेनानियों के त्याग के बल पर ही आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम विकसित भारत @ 2047 का सपना देख पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत आर्थिक शक्ति के रूप में बहुत जल्द तीसरे स्थान पर पहुंचेगा और विश्व गुरु बनेगा। विकसित भारत के साथ विकसित मध्यप्रदेश का भी सपना साकार होगा।
लोकतंत्र सेनानी का बेटा प्रदेश का मुख्यमंत्री है, यह हमारा सौभाग्य है
लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश अध्यक्ष तपन भौमिक ने कहा कि लोकतंत्र सेनानी प्रादेशिक सम्मेलन में आज 1975 से 1977 तक आपातकाल के दौरान जेल में रहे लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान हो रहा है। प्रदेश में बीते 10 साल से लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान की सुखद परंपरा चली आ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के पिता स्वयं लोकतंत्र सेनानी रहे। उन्होंने सेनानियों की पीड़ा को करीब से देखा है। यह हम सबका सौभाग्य है कि आज एक लोकतंत्र सेनानी का बेटा मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री है।
कार्यक्रम में उप-मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, विधायक रामेश्वर शर्मा, विधायक भगवान दास सबनानी, पूर्व मंत्री एवं मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया, लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय संरक्षक मेघराज जैन, लोकतंत्र सेनानी अशोक पांडे, लोकतंत्र सेनानी माखन सिंह चौहान, समाजसेवी राहुल कोठारी, रवीन्द्र यति, शिक्षाविद् सुधीर अग्रवाल सहित अनेक जन प्रतिनिधि, प्रदेश भर से आए लोकतंत्र सेनानी एवं आमजन उपस्थित थे। लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष संतोष कुमार शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन लोकतंत्र सेनानी सुरेन्द्र द्विवेदी ने किया।
हरित खाद से मिट्टी होगी अधिक उपजाऊ, किसानों को किया जा रहा जागरूक
रायपुर : किसानों को टिकाऊ एवं प्राकृतिक खेती की ओर प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, सरगुजा द्वारा हरित खाद (ग्रीन मैन्योरिंग) के उपयोग के संबंध में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल एवं निदेशक विस्तार डॉ. एस.एस. टुटेजा के निर्देश तथा कृषि विज्ञान केंद्र, सरगुजा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. संदीप शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में किसानों को हरित खाद के वैज्ञानिक लाभों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि ढैंचा, सनई एवं मूंग जैसी दलहनी फसलों को 40 से 45 दिन की अवस्था में खेत में पलटकर हरित खाद के रूप में उपयोग किया जाता है। ये फसलें राइजोबियम जीवाणुओं की सहायता से वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर लगभग 50 से 55 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर भूमि में उपलब्ध कराती हैं, जिससे मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है और रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम होती है।
वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. संदीप शर्मा ने बताया कि हरित खाद के उपयोग से मिट्टी की संरचना मजबूत होती है, जल धारण क्षमता बढ़ती है तथा लाभकारी सूक्ष्मजीवों की सक्रियता में वृद्धि होती है। इससे फसल उत्पादन में सुधार होने के साथ भूमि की दीर्घकालीन उत्पादकता भी बनी रहती है। उन्होंने इसे कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली पर्यावरण अनुकूल खेती की प्रभावी तकनीक बताया।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से खरीफ फसलों की बुवाई से पहले हरित खाद का उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि इससे खेती की लागत कम होगी, मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर बनेगा और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता भी घटेगी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया तथा उन्हें प्राकृतिक एवं टिकाऊ खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र, सरगुजा के वैज्ञानिक पांडु राम पैकरा, डॉ. एस.पी. गुप्ता, डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, डॉ. विवेक कुमार सांडिल्य, लीलाधर साहू, विरेंद्र कुमार सहित अन्य अधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
पशुधन विकास विभाग की योजना से बदली सदाशिव कुरगुड़ की जिंदगी
रायपुर : शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। बीजापुर जिले के भोपालपटनम विकासखंड के ग्राम उल्लूर निवासी सदाशिव कुरगुड़ इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। उन्होंने पशुधन विकास विभाग की किसान क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ लेकर मुर्गी पालन व्यवसाय शुरू किया और आज अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर चुके हैं।
पशुधन विकास विभाग की योजना से बदली सदाशिव कुरगुड़ की जिंदगी
योजना से मिला स्वरोजगार का अवसर
सदाशिव कुरगुड़ कृषि कार्य के साथ अतिरिक्त आय का स्रोत विकसित करना चाहते थे, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी उनके सामने बड़ी चुनौती थी। इसी दौरान उन्हें पशुधन विकास विभाग की किसान क्रेडिट कार्ड योजना की जानकारी मिली। विभाग के मार्गदर्शन से उन्हें बैंक के माध्यम से 30 हजार रुपये का ऋण प्राप्त हुआ।
इस राशि से उन्होंने मुर्गी पालन के लिए चूजे खरीदे और उनके पालन-पोषण के लिए आवश्यक आहार एवं अन्य व्यवस्थाएं कीं।
तकनीकी मार्गदर्शन से मिली सफलता
पशुधन विकास विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन, नियमित देखभाल और बेहतर प्रबंधन के कारण उनका मुर्गी पालन व्यवसाय लगातार आगे बढ़ता गया। आज वे इस व्यवसाय से प्रतिवर्ष लगभग एक लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं, जिसमें करीब 80 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त होता है।
इस अतिरिक्त आय से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है और वे आत्मनिर्भर जीवन की ओर आगे बढ़ रहे हैं।
अब बड़ा पोल्ट्री फार्म स्थापित करने का सपना
सदाशिव कुरगुड़ बताते हैं कि पशुधन विकास विभाग की योजना ने उन्हें आत्मविश्वास और रोजगार दोनों दिए हैं। अब उनका लक्ष्य भविष्य में एक आधुनिक व्यावसायिक पोल्ट्री फार्म स्थापित कर रोजगार का दायरा बढ़ाना है।
उन्होंने पशुधन विकास विभाग और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि अधिक से अधिक ग्रामीण और युवा इन योजनाओं का लाभ लें, तो वे भी स्वरोजगार अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत बना सकते हैं।
ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बना रही हैं विभागीय योजनाएं
पशुधन विकास विभाग की विभिन्न योजनाएं जिले में किसानों और ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने, उनकी आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी साबित हो रही हैं। सदाशिव कुरगुड़ की सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर कोई भी किसान अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।















