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जिंदगी में प्यार की कमी बढ़ा सकती है कैंसर का जोखिम, अध्ययन का खुलासा

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कैंसर का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है, ये दुनियाभर में मौत के सबसे बड़े कारणों में से भी एक है। कैंसर को कभी उम्र के आखिरी पड़ाव वाली बीमारी माना जाता था, हालांकि पिछले कुछ दशकों में ये चुपचाप सभी उम्र के लोगों को अपना शिकार बनाती जा रही है।अध्ययनों में पाया गया है कि जिस तरह से लोगों की लाइफस्टाइल खराब होती जा रही है, उसने कैंसर का खतरा और भी बढ़ा दिया है। तनाव, प्रोसेस्ड फूड, नींद की कमी और स्क्रीन टाइम को भी इस बीमारी को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार पाया गया है।मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि लाइफस्टाइल-खानपान की समस्याओं ने हमारे शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा को कमजोर कर दिया है। नतीजतन अब कैंसर के मामले ज्यादा रिपोर्ट किए जा रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हालिया अध्ययनों में विशेषज्ञों की टीम ने अलर्ट किया है कि गैर-शादीशुदा लोगों में कैंसर का खतरा ज्यादा हो सकता है।10 करोड़ से अधिक लोगों पर किए गए अध्ययन में पता चला है कि शादीशुदा लोगों की तुलना में अविवाहितों में कैंसर होने का खतरा 85% तक ज्यादा हो सकता है। अब सवाल ये है कि वैवाहिक स्थिति और कैंसर जैसी बीमारियों का आपस में क्या संबंध हो सकता है? आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं।

अविवाहितों में कैंसर का खतरा अधिक 

कैंसर शरीर की कोशिकाओं में अनियंत्रित वृद्धि होने की बीमारी है। जब ये कोशिकाएं शरीर के सामान्य नियंत्रण से बाहर जाकर तेजी से बढ़ने लगती हैं तो इससे कैंसर का खतरा हो सकता है। क्या शादीशुदा न होना भी कैंसर के खतरे को बढ़ा देता है? 

  • इस बारे में किए गए एक व्यापक अध्ययन से पता चला है कि जिन महिलाओं ने कभी शादी नहीं की है, उनमें कैंसर का खतरा 85 प्रतिशत तक ज्यादा हो सकता है।
  • पुरुषों में भी खतरा कम नहीं है। विशेषज्ञों ने यह भी पाया कि जो पुरुष जीवन भर अविवाहित रहते हैं, उनमें कैंसर होने की आशंका लगभग 70 प्रतिशत ज्यादा होती है।
  • फेफड़े, आंत और एसोफैगल कैंसर जैसे कई प्रकार के कैंसर में इस तरह का जोखिम सामने आया है।

अध्ययन में क्या पता चला?

'कैंसर रिसर्च कम्युनिकेशंस' जर्नल में प्रकाशित इस रिपोर्ट में 100 मिलियन (10 करोड़) से ज्यादा लोगों के डेटा का अध्ययन किया गया। इसमें पता चला कि आपकी वैवाहिक स्थिति और कैंसर के खतरे के बीच एक मजबूत और अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाना वाला संबंध हो सकता है।विशेषज्ञों ने पाया कि लंबे समय से माना जाता रहा है कि शादी के बाद व्यक्ति का भावनात्मक, आर्थिक और व्यावहारिक सपोर्ट बढ़ जाता है। ऐसे लोगों में किसी बीमारी के जल्दी पता चलने और इससे जल्दी ठीक होने का संभावना भी अधिक होती है।

  • इस निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए टीम ने 2015 से 2022 के बीच पता चले 40 लाख से ज्यादा कैंसर के मामलों का विश्लेषण किया। 
  • इसमें 30 साल और उससे ज्यादा उम्र के वयस्कों पर खास ध्यान दिया गया, जिनमें कैंसर का पता चला था। अध्ययन में समलैंगिक विवाहित जोड़ों को भी शामिल किया गया।
  • अध्ययन में शामिल हर पांच में से एक व्यक्ति ऐसा था जिसने कभी शादी नहीं की थी।
  • विशेषज्ञों ने पाया कि जिन पुरुषों की कभी शादी नहीं हुई थी, उनमें शादीशुदा या फिर तलाकशुदा पुरुषों के मुकाबले कैंसर होने की आशंका काफी ज्यादा थी। महिलाओं में खतरा और भी ज्यादा पाया गया।

किस प्रकार के कैंसर का जोखिम अधिक

अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि कुछ तरह के कैंसर के मामले में सबसे कॉमन थे।
 
जिन पुरुषों की कभी शादी नहीं हुई थी, उनमें इसोफेगल कैंसर होने का खतरा लगभग ढाई गुना ज्यादा पाया गया।
जिन महिलाओं की कभी शादी नहीं हुई थी, उनमें शादीशुदा महिलाओं के मुकाबले सर्वाइकल कैंसर होने की दर लगभग तीन गुना ज्यादा थी।
सर्वाइकल कैंसर ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) इन्फेक्शन से होता हैं। यह एक आम वायरस है जो यौन संबंधों से फैलता है। अविवाहितों में इसका जोखिम अधिक देखा गया।

मियामी मिलर स्कूल ऑफ मेडिसिन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और इस अध्ययन के सह-लेखक प्रोफेसर फ्रैंक पेनेडो कहते हैं, इन नतीजों का यह मतलब नहीं है कि शादी अपको कैंसर से बचाती है। बल्कि वैवाहिक स्थिति आपकी जिम्मेदारियों और स्वास्थ्य को लेकर परवाह को बढ़ावा देती है।जो लोग धूम्रपान-शराब नहीं करते आमतौर पर उनके रिश्ते के स्थिर होने की संभावना ज्यादा होती है। ये सभी स्थितियां आपको गंभीर बीमारियों से बचाने वाली भी मानी जाती हैं। कुल मिलाकर, यह निष्कर्ष निकाला गया है कि भले ही शादी कोई 'जादुई कवच' न हो, लेकिन यह कैंसर के अंतर्निहित जोखिम को कम करने वाली जरूर हो सकती है।

इस लिंक को समझना जरूरी

विशेषज्ञों ने कहा, कैंसर से मौत का एक बड़ा कारण इसका समय पर पता न चल पाना है। वैवाहिक स्थिति में आप अपने पार्टनर की सेहत पर भी ध्यान देते रहते हैं। ऐसे में किसी भी समस्या में वह जल्दी डॉक्टर के पास जाते हैं और बीमारी के सही निदान की संभावना भी बढ़ जाती है। कैंसर का शुरुआती स्तर पर पता चल जाए तो इसके इलाज और जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।अविवाहित लोगों में कैंसर का पता अक्सर देर से चल पाता है। इसका कारण सामाजिक और भावनात्मक समर्थन की कमी हो सकता है। शादीशुदा लोगों को अक्सर परिवार का सहयोग मिलता है, जिससे वे समय पर जांच और इलाज करवा लेते हैं।इस अध्ययन में उन लोगों को भी शामिल नहीं किया गया जो लंबे समय से किसी रिश्ते में हैं, लेकिन शादीशुदा नहीं हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि भविष्य के शोध में इस पहलू पर भी गौर किया जाना चाहिए। 

40 के बाद महिलाओं की सेहत का कैसे रखें ख्याल

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Women Health: अगर आपकी उम्र 40 से 50 साल के बीच है तो यह समय शरीर में कई बड़े बदलावों का होता है, जिन्हें समझना बेहद जरूरी है। इस उम्र में महिलाओं के शरीर में हार्मोनल बदलाव तेजी से होने लगते हैं, जिसका सबसे बड़ा चरण मेनोपॉज होता है। 

मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है, जिससे शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के बदलाव महसूस हो सकते हैं। ये एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन सही जानकारी और लाइफस्टाइल अपनाकर इसे आसानी से मैनेज किया जा सकता है।इस लेख में हम आपको बताएंगे कि मेनोपॉज के दौरान शरीर में क्या बदलाव होते हैं, किन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है और कैसे आप अपनी सेहत का बेहतर ध्यान रख सकती हैं।
 
मेनोपॉज के दौरान शरीर में होने वाले मुख्य बदलाव

मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में कई बदलाव आते हैं, जैसे:

  •  हार्मोनल असंतुलन के कारण शरीर में उतार-चढ़ाव
  •  मासिक धर्म का धीरे-धीरे बंद होना
  •  मूड स्विंग, गुस्सा और चिड़चिड़ापन
  • नींद की गुणवत्ता खराब होना
  •  हड्डियों का कमजोर होना 
  •  वजन बढ़ने की समस्या

मेनोपॉज का दिमाग पर क्या प्रभाव पड़ता है?

इस समय सिर्फ शरीर ही नहीं, मानसिक स्थिति पर भी असर पड़ता है:

  • चिंता और तनाव बढ़ सकता है
  • आत्मविश्वास में कमी महसूस हो सकती है
  • कुछ महिलाओं में डिप्रेशन जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं

सेहत का ध्यान कैसे रखें

मेनोपॉज के प्रभाव को कम करने के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव जरूरी है:

  • कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर भोजन लें
  •  रोजाना हल्की एक्सरसाइज और वॉक करें
  • योग और मेडिटेशन को दिनचर्या में शामिल करें
  • 7–8 घंटे की पर्याप्त नींद लें
  •  जंक फूड और ज्यादा चीनी से बचें
  •  शरीर को हाइड्रेट रखें

कब डॉक्टर से संपर्क करें

  • बहुत ज्यादा या असामान्य ब्लीडिंग
  •  लगातार डिप्रेशन या चिंता
  •  नींद बिल्कुल न आना
  • हड्डियों में तेज या लगातार दर्द
  • रोजमर्रा के कामों में परेशानी होना

विश्व होम्योपैथी दिवस 2026: जानें क्यों मनाया जाता है यह दिन

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World Homoeopathy Day 2026: होम्योपैथी दवाओं पर वर्षों से लोग भरोसा जताते आ रहे हैं। प्राकृतिक और सुरक्षित उपचार के रूप में इसे विश्वभर में अपनाया जाता रहा है। आज भी यह करोड़ों लोगों की पहली पसंद बनी हुई है। इसी के चलते प्रतिवर्ष अप्रैल के महीने में विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया जाता है।

ये दिन होम्योपैथी चिकित्सा प्रणाली की उपलब्धियों, महत्व और भविष्य की दिशा को समझने का अवसर भी है। इस दिन होम्योपैथिक चिकित्सक, संस्थान और विद्यार्थी मिलकर जागरूकता अभियान चलाते हैं। लोग इसके जरिए जान पाते हैं कि किस तरह होम्योपैथी आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों में भी लाभकारी सिद्ध हो सकती है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि होम्योपैथी दिवस क्यों मनाया जाता है और उसका इतिहास क्या है। 
 
सबसे पहले जान लें कि होम्योपैथी क्या है?

होम्योपैथी एक वैकल्पिक चिकित्सा प्रणाली है, जिसे जर्मन चिकित्सक डॉ. सैमुअल हैनीमैन ने विकसित किया। इसमें प्राकृतिक तत्वों से तैयार दवाओं का उपयोग किया जाता है। इसका मुख्य सिद्धांत है कि “जैसा रोग, वैसा उपचार” – यानी रोग का इलाज उसी तत्व से किया जाता है जो स्वस्थ व्यक्ति में उस रोग के लक्षण उत्पन्न कर सकता है।

विश्व होम्योपैथी का इतिहास

डॉ. सैमुअल हैनीमैन का जन्म 10 अप्रैल 1755 को जर्मनी में हुआ था। उन्होंने होम्योपैथी को विकसित कर दुनिया भर में इसे लोकप्रिय बनाया। विश्व होम्योपैथी दिवस उनके योगदान और चिकित्सा क्षेत्र में उनके नवाचार को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है।

कब मनाया जाता है विश्व होम्योपैथी दिवस?

विश्व होम्योपैथी दिवस प्रति वर्ष 10 अप्रैल को मनाया जाता है। ये दिन होम्योपैथी के जनक डॉ. हैनीमैन की जन्मतिथि के अवसर पर मनाया जाता है। इस साल विश्व होम्योपैथी दिवस 2026 की मुख्य थीम "Harmony Through Homeopathy – Healing Beyond Borders" यानी कि होम्योपैथी के माध्यम से सामंजस्य – सीमाओं से परे उपचार है।  

क्यों मनाया जाता है विश्व होम्योपैथी दिवस?

इस दिन का उद्देश्य होम्योपैथी के लाभों और महत्व के प्रति जागरूकता फैलाना है। इसके माध्यम से लोग इस चिकित्सा प्रणाली के सुरक्षित और प्रभावशाली पहलुओं को समझ पाते हैं। यह दिवस होम्योपैथिक समुदाय को एक साथ लाकर चिकित्सा के आधुनिकीकरण और विस्तार की दिशा में प्रेरित करता है।

हर्ष फायरिंग मामले में दूल्हा गिरफ्तार, पुलिस ने कट्टा भी किया बरामद

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Bhopal News: इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा हैं वारल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे एक दूल्हा अपनी ही शादी में हर्ष फायरिंग कर रहा है. ये घटना 8 अप्रैल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की है. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के परवलिया थाना क्षेत्र में शादी की खुशियां उस समय कानूनी पचड़े में बदल गईं, जब दूल्हे और उसके रिश्तेदारों ने सरेआम हर्ष फायरिंग कर दी.

मिस्बा खान की बारात में हंगामा

दरअसल भोपाल के परवलिया स्थित DD फॉर्म हाउस में मिस्बा खान नामक युवक की बारात पहुंची थी. बारत के स्वागत के दौरान दूल्हा मिस्बा खान और उसके परिजन अत्याधिक उत्साहित हो गए और हर्ष फायरिंग कर दी. पुलिस जांच के मुताबिक सबसे पहले दूल्हे के चाचा ससुर असलम खान ने अपने अवैध कट्टे से हवाई फायर किया इसके बाद वहीं कट्टा दूल्हे को पकड़ा दिया.

दूल्हें ने आसमान में दाग दी दनादन गोलियां

इसके बाद दूल्हे ने नाचते हुए बारात में दनादन आसमान में गोलिया दाग दी. हालांकि इस घटना कोई हताहत नहीं हुआ लेकिन वहां मौजूद लोगों ने इस पूरे वाकये का वीडियो बना लिया और सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया. वीडियो में दूल्हा डांस करते और नोटों की बारिश के बीच फायरिंग करते साफ नजर आ रहा था.

हर्ष फायरिंग अपराध है

वायरल हो रहे वीडियो पर भोपाल पुलिस ने तुरंत संज्ञान लिया. साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की मदद से आरोपियों की पहचान की गई. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दूल्हे मिस्बा खान और उसके चाचा ससुर असलम खान को गिरफ्तार कर लिया है. असलम के पास से वारदात में इस्तेमाल अवैध हथियार भी बरामद कर लिया गया है. पुलिस ने स्पष्ट किया कि हर्ष फायरिंग एक गंभीर अपराध है जो जानलेवा साबित हो सकता है.

गर्भवती महिला की इलाज के दौरान मौत, झोलाछाप डॉक्टर पर गंभीर आरोप

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ग्वालियर। मध्‍य प्रदेश के शिवपुरी से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आ रहा है. जिले के खनियाधाना थाना क्षेत्र के ग्राम अचरौनी में एक झोलाछाप ने गर्भवती महिला को गलत इंजेक्शन लगा दिया. इंजेक्शन के बाद महिला की क्लीनिक पर ही मौत हो गई. महिला को सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र खनियाधाना रेफर किया गया, जहां उसे डॉक्‍टरों ने मृत घोषित कर दिया. पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

इंजेक्शन के बाद बेहोश हुई महिला

जानकारी के अनुसार, अचारौनी की रहने वाली 21 वर्षीय गुनगुन पत्नी तेज सिंह चार महीने की गर्भवती थी. महिला की दो दिन पहले बुखार आया था, जिसके चलते परिजनों ने उसे इलाज के लिए अचरौनी में स्थित एक झोलाछाप अपूर्व मजूमदार के पास दिखा दिया. झोलाछाप ने महिला को एक हाथ में और एक कमर में इंजेक्शन लगा दिया. इंजेक्शन के लगाने के साथ ही महिला के शरीर में काफी जलन होने लगी. इसके बाद क्लीनिक पर ही वह बेहोश होकर जमीन पर गिर गईग्वालियर।

बयानों के आधार होगी एफआईआर

मामले में महिला को उसके परिजनों ने इलाज के लिए खनियाधाना सामुदायिक स्‍वास्‍थय केंद्र लेकर पहुंचे. वहां डॉक्‍टारों ने महिला का चेकआप किया और उसे मृत घोषित कर दिया. पुलिस ने मृत महिला का पोस्‍टमार्टम करवाया और मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दीग्वालियर।

इस पूरे मामले में खनियाधाना थाना प्रभारी ने बताया कि मर्ग कायम करने के बाद जांच के दौरान मृतिका के परिजनों के बयान दर्ज किए जाएंगे. इन सभी बयानों के आधार पर एफआईआर दर्ज की जाएगी।

लोक निर्माण विभाग में बड़ा घोटाला, बिना काम करोड़ों का भुगतान

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भोपाल। लोक निर्माण विभाग (PWD) में एक बड़ा घोटाला सामने आया है. नर्मदापुरम संभाग में एक ठेकेदार कंपनी द्वारा बिना काम किए करोड़ों रुपए का भुगतान लेने का मामला उजागर हुआ है. अधीक्षण यंत्री की जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी सामने आने के बाद कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश की गई, लेकिन मुख्य अभियंता स्तर पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

तय मानकों के अनुसार नहीं हुआ काम

बालाघाट की यूएस इंफ्रा प्रोजेक्ट कंपनी को नर्मदापुरम में करीब 14.24 करोड़ के पांच सड़क निर्माण कार्य दिए गए थे. आरोप है कि कंपनी ने एक भी काम तय मानकों के अनुसार पूरा नहीं किया, लेकिन इसके बावजूद करीब 80% यानी लगभग 10 करोड़ का भुगतान उठा लिया. मौजूदा अधीक्षण यंत्री योगेंद्र कुमार ने शिकायत मिलने पर पांचों कार्यों की जांच कराई. जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आईं. रिपोर्ट में कहा गया कि कंपनी ने पूर्व इंजीनियरों से मिलीभगत कर बिना काम के ही बिल लगाकर भुगतान ले लिया अधीक्षण यंत्री ने मुख्य अभियंता संजय मस्के को पत्र लिखकर कंपनी को तत्काल ब्लैकलिस्ट करने और भुगतान की राशि की वसूली या कार्य दोबारा कराने की अनुशंसा की।

कार्रवाई के बजाय मामला ठंडे बस्ते में

गंभीर आरोपों के बावजूद मुख्य अभियंता स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. जैसे ही यह मामला सामने आया, उच्च स्तर पर शिकायतें पहुंचीं और विभाग में हड़कंप मच गया।

इन कामों में हुआ भुगतान

  • मालखेड़ी-रायपुर रोड: ₹3.71 करोड़ का ठेका, ₹2.01 करोड़ भुगतान
  • इटारसी-नर्मदापुरम रेसल रोड: ₹1.61 करोड़ का ठेका, ₹51 लाख भुगतान
  • गुराडिया-मिलरिया रोड: ₹2.28 करोड़ का ठेका, ₹1.54 करोड़ भुगतान
  • अन्हाई-जमुनिया रोड: ₹4.16 करोड़ का ठेका, ₹3.51 करोड़ भुगतान
  • अन्य कार्यों में भी भुगतान, जबकि मौके पर काम अधूरा पाया गया

मुख्य अभियंता पर पहले भी लगे आरोप

इस मामले में पेंच इसलिए भी फंसा है क्योंकि मुख्य अभियंता संजय मस्के पर पहले भी कंपनी से मिलीभगत के आरोप लग चुके हैं. छिंदवाड़ा के विकास गुप्ता ने जनवरी 2025 में शपथ पत्र देकर आरोप लगाया था कि यूएस इंफ्रा प्रोजेक्ट को 2024-25 में करीब ₹16 करोड़ से अधिक के ठेके मिलीभगत से दिलाए गए. उन्होंने लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू से जांच की मांग करते हुए अपनी जान को खतरा भी बताया था।

बंगाल चुनाव 2026: बीजेपी का घोषणापत्र जारी, 7वें वेतन आयोग लागू कर 3 हजार रुपये तक मासिक लाभ का वादा

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Bengal elections 2024:पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर शुक्रवार को बीजेपी ने अपना घोषणापत्र जारी कर दिया है। इस पत्र का नाम भरोसा पत्र दिया है। कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पार्टी का संकल्प पत्र जारी किया है। जिसमें महिलाओं के लिए हर महीने 3 हजार रुपये देने का वादा किया है। साथ ही प्रदेश में 45 दिन में 7वें वेतन आयोग को लागू करने की भी बात कही है।

बंगाल को निराशा से बाहर निकालने वाला संकल्प पत्र
इस मौके पर अमित शाह ने कहा कि यह संकल्प पत्र बंगाल को निराशा से बाहर निकालने का रास्ता दिखाएगा। उन्होंने दावा किया कि यह दस्तावेज कानून का राज स्थापित करने, रोजगार बढ़ाने और 'सोनार बंगला' के निर्माण का भरोसा देता है। उन्होंने कहा, "यह संकल्प पत्र बंगाल के विकास का रोडमैप है, जो हर वर्ग के लोगों को नई दिशा देगा।"अमित शाह ने राज्य की सत्ताधारी टीएमसी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता पहले वामपंथी सरकार से परेशान होकर ममता बनर्जी को सत्ता में लाई थी। फिर उन्हें दूसरी और तीसरी बार भी मौका दिया गया लेकिन सरकार जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी।

TMC के शासन में 'सिंडिकेट राज, गुंडाराज और घुसपैठ' बढ़ी
उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी के शासन में 'सिंडिकेट राज, गुंडाराज और घुसपैठ' जैसी समस्याएं बढ़ी हैं। अमित शाह ने कहा कि आज वही जनता, जिसने कभी ममता बनर्जी का समर्थन किया था, अब खुद को असुरक्षित और निराश महसूस कर रही है और बदलाव चाहती है।

संकल्प पत्र को लेकर अमित शाह ने कहा कि यह किसानों को कृषि संकट से उबारने, बेरोजगार युवाओं को अवसर देने और महिलाओं को सुरक्षित माहौल प्रदान करने की दिशा में काम करेगा। साथ ही यह बंगाल की सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने वाले हर नागरिक को नई उम्मीद और भरोसा देगा।

पीएम के विजन के अनुरूप तैयार किया गया
उन्होंने कहा कि यह घोषणापत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' विजन के अनुरूप तैयार किया गया है और बंगाल के लिए विकास का स्पष्ट रोडमैप पेश करता है।गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि घुसपैठ के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' लागू होगी। मैं लोगों को भरोसा दिलाता हूं कि हम घुसपैठियों की पहचान करेंगे, उन्हें सूची से हटाएंगे और देश से बाहर भेज देंगे। सभी सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता मिलेगा और सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन दिया जाएगा। भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में कुर्माली और राजबोंगशी भाषाओं को शामिल किया जाएगा। चावल, आलू और आम की खेती के लिए सहायता दी जाएगी। पीएम मत्स्य संपदा योजना के तहत सभी मछुआरों का पंजीकरण किया जाएगा और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए पश्चिम बंगाल को एक अग्रणी औद्योगिक और मछली-निर्यात केंद्र बनाया जाएग।

महिलाओं को तीन हजार रुपए
उन्होंने कहा कि भाजपा हर महिला को 3,000 रुपए देगी। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की जाएगी और बेरोजगार युवाओं को 3,000 रुपए दिए जाएंगे। 'आयुष्मान भारत योजना' के साथ-साथ केंद्र सरकार की सभी योजनाओं को लागू किया जाएगा। मुफ्त एचपीवी टीकाकरण, ब्रैस्ट कैंसर की जांच (स्क्रीनिंग), उत्तरी बंगाल में एम्स, आईआईटी और आईआईएम की स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही एक 'वंदे मातरम संग्रहालय' की स्थापना की जाएगी और धार्मिक रीतिरिवाजों के पालन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने वाला कानून बनाएगा।

AI की मदद से परीक्षा में चीटिंग, DAVV में 50 मामले सामने आए

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इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) की सेमेस्टर और वार्षिक परीक्षाओं के दौरान नकल करने के मामले सामने आई हैं. हैरानी की बात ये है कि अब छात्र वो पुराने तरीके से नकल नहीं करते बल्कि अब विद्यार्थी काफी हाईटेक हो गए हैं. वे परीक्षा में नकल करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद लेने लगे हैं. जहां चैट जीपीटी और जेमिनी से प्रश्न पूछकर विद्यार्थी उत्तरपुस्तिका में जवाब लिख रहे हैं।

विद्यार्थियों के पास से मोबाइल जब्त

ये मामला तब पकड़ में आया जब डिएवीवी के उड़नदस्ते ने परीक्षा केंद्रों पर जाकर विद्यार्थियों की चेकिंग की. इस चैकिंग के दौरान विद्यार्थियों के पास से मोबाइल जब्त किए गए. उड़नदस्तों ने जांच में पाया कि इन छात्रों ने एआई एप्लीकेशन की मदद से प्रश्नों के उत्तर खोजे हैं. विश्वविद्यालय के मुताबिक अलग-अलग पाठ्यक्रम की परीक्षा में विद्यार्थियों के पास मोबाइल मिले हैं. अब इस मामले को जांच समिति को सौप दिया गया है।

70 हजार छात्र-छात्राएं सम्मिलित

दिसंबर से लेकर मार्च के बीच स्नातक-स्नातकोत्तर व व्यावसायिक सेमेस्टर और वार्षिक परीक्षाएं करवाई गईं थी. लगभग 40 से ज्यादा परीक्षाओं में 70 हजार छात्र-छात्राएं सम्मिलित हुए हैं. इस अवधि में पचास नकल प्रकरण बने हैं, जिसमें सात छात्र अपने साथ परीक्षा कक्ष में मोबाइल रखे हुए थे. नकल प्रकरणों में सबसे ज्यादा उन विद्यार्थियों की संख्या है, जो अपने एडमिट कार्ड के पीछे जवाब लिखकर लाए थे। ये छात्र-छात्राएं परीक्षा शुरू होने से पहले केंद्र पर हुई चेकिंग में पकड़े गए हैं।

नकल के मामलों में गिरावट

एक ओर जहां नकल के नए तरीके छात्र इजात कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ कुल प्रकरणों की संख्या में पिछले सालों के मुकाबले गिरावट देखी गई है. आंकड़ों के अनुसार, साल 2022 से 2024 के बीच हर साल औसतन 600 नकल प्रकरण बनते थे. विश्वविद्यालय की सख्ती और सीसीटीवी निगरानी के चलते साल 2025-26 में यह संख्या घटकर 250 से 300 के बीच रह गई है।

रेलवे स्टेशन पर गांजा तस्कर गिरफ्तार, बुजुर्ग महिला-पुरुष दबोचे गए

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जबलपुर। नशीले पदार्थों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के दौरान मदनमहल थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 1 के बाहर दबिश देकर दो आरोपियों को नशीले पदार्थ गांजा के साथ गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में एक 72 वर्षीय वृद्ध और एक 50 वर्षीय महिला शामिल है। यह दोनों स्टेशन परिसर के बाहर किसी ग्राहक को गांजे की डिलीवरी देने की फिराक में खड़े थे। सटीक सूचना के आधार पर की गई इस संयुक्त कार्यवाही में पुलिस ने इनके पास से करीब 3 किलो गांजा बरामद किया है।

​मादक पदार्थ की कीमत 1 लाख 49 हजार 650 रूपये

​पकड़े गए आरोपियों की पहचान प्यारेलाल पटेल निवासी ग्राम उड़ना सड़क पाटन और चंदा बाई बर्मन निवासी ग्राम मंजीठा भेड़ाघाट के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान प्यारेलाल के सफेद थैले से दो पैकेट और चंदा बाई के मेहरून थैले से एक पैकेट गांजा मिला। तौल करने पर कुल 2 किलो 993 ग्राम गांजा पाया गया जिसकी बाजार में कीमत 1 लाख 49 हजार 650 रूपये आंकी गई है। पूछताछ में आरोपियों ने यह माल बरगढ़ ओसिया निवासी मोनू सरदार से लाना स्वीकार किया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल, नकद 165 रूपये और अन्य सामग्री भी जप्त की है। दोनों के विरुद्ध धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस कार्यवाही में सतीश अनुरागी, कृष्णकुमार, शाहवंती, बालाराम, नरेश पासी, राजेश पाण्डे, अखिलेश पाण्डे, शिवसिंह बघेल, दीप्ति मिश्रा और कपूर सिंह की विशेष भूमिका रही।

अवैध रेत खनन में बढ़ती हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, फॉरेस्ट गार्ड हत्या मामले में 13 को सुनवाई

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Morena News: मुरैना जिले के दिमनी में बुधवार सुबह अवैध रेत उत्खनन माफिया द्वारा एक वनरक्षक (हरिकेश गुर्जर) को ट्रैक्टर-ट्राली से कुचलकर मारने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त कदम उठाया है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए गुरुवार को इस मामले की सुनवाई के लिए अगले हफ्ते की 13 अप्रैल की तारीख तय की है. इस मामले में हत्या के अगले दिन ही प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए 1.63 करोड़ रु. की 8195 ट्रॉली अवैध रेत नष्ट कर दी है.

सुप्रीम कोर्ट ने खुद लिया संज्ञान

बता दें कि जस्टिस विक्रम नाथ व जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने वनरक्षक हरिकेश गुर्जर की ड्यूटी के दौरान ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या के मामले में स्वत: संज्ञान लिया है. सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह अवैध खनन को रोकने के लिए व्यापक और कड़े निर्देश जारी करेगा. जिला प्रशासन की टीम रेत माफिया को पकड़ने के लिए लगातार दबिश दे रही है लेकिन अभी रेत माफिया फरार हैं.

बुधवार को हुई थी वारदात

दरअसल बुधवार सुबह राष्ट्रीय राजमार्ग-552 पर गश्त के दौरान जब वन कर्मियों ने रेत से लदे ट्रैक्टर को रोकने की कोशिश की, तो चालक ने 35 वर्षीय वनरक्षक हरिकेश पर वाहन चढ़ा दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई.

राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य

बता दें कि राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य, जिसे राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य भी कहा जाता है. ये कुल 5400 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. ये मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान यानी की तीन राज्यों द्वारा संरक्षित क्षेत्र हैं. इस क्षेत्र में लुप्तप्राय घड़ियाल, लाल-मुकुट वाला कछुआ और लुप्तप्राय गंगा डॉल्फिन जैसे जीव पाए जाते है. दूसरी तरफ ये जगह रेत माफियाओं के हौसले भी बुलंद हैं. गौरतलब है कि इस जगह को सबसे पहले 1978 में मध्य प्रदेश द्वारा सरंक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था.

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