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मोदी कैबिनेट विस्तार में अरुण गोविल को मिल सकती है जगह? सियासी गलियारों में चर्चाएं

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नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार जल्द ही बड़े पैमाने पर अपने केंद्रीय मंत्रिपरिषद में फेरबदल करने जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर अटकलें हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को ही अपनी कैबिनेट में महत्वपूर्ण बदलाव कर सकते हैं। मोदी 3.0 कार्यकाल की शुरुआत के बाद होने वाला यह पहला प्रशासनिक और राजनीतिक पुनर्गठन होगा। इस संभावित फेरबदल में तीन चेहरे सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहे हैं, जिनमें भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास, श्रीकांत शिंदे और मेरठ से भाजपा सांसद अरुण गोविल शामिल हैं। अरुण गोविल को देश का जनमानस आज भी प्रसिद्ध धारावाहिक रामायण में निभाए गए 'श्रीराम' के किरदार के रूप में बेहद सम्मान से देखता है।

क्या अरुण गोविल की एंट्री से डैमेज कंट्रोल की है तैयारी

सांसद अरुण गोविल को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की सुगबुगाहट ऐसे समय पर तेज हुई है, जब उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा बेहद गर्माया हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है कि क्या सरकार गोविल को मंत्री बनाकर इस धार्मिक-राजनैतिक विवाद के असर को कम करने यानी 'डैमेज कंट्रोल' का प्रयास कर रही है। हालांकि, इसके पीछे एक दूसरा रणनीतिक पहलू भी बेहद अहम माना जा रहा है। दरअसल, अगले वर्ष की शुरुआत में ही उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में भाजपा उत्तर प्रदेश से मंत्रियों का कोटा बढ़ाकर हिंदी भाषी राज्यों में अरुण गोविल की निष्कलंक और 'श्रीराम' वाली छवि का राजनीतिक लाभ उठाने तथा उन्हें एक फायर ब्रांड प्रचारक के रूप में पेश करने की योजना पर काम कर रही है।

कैबिनेट में नए संभावित चेहरे और कुछ की विदाई की अटकलें

चर्चाओं के बाजार में यह बात भी तेजी से तैर रही है कि प्रधानमंत्री के वर्तमान प्रधान सचिव और पूर्व आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास को मोदी कैबिनेट में लाकर वित्त मंत्रालय जैसी बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इसके अलावा, शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पाले में लाने की कूटनीति के तहत श्रीकांत शिंदे को भी कैबिनेट मंत्री का पद दिया जा सकता है। वहीं, हिमाचल प्रदेश के कद्दावर नेता अनुराग ठाकुर की एक बार फिर केंद्रीय कैबिनेट में वापसी के कयास लगाए जा रहे हैं, जबकि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भी मोदी मंत्रिमंडल में सीधी एंट्री हो सकती है। इन नए बदलावों के साथ ही यह भी माना जा रहा है कि धर्मेंद्र प्रधान, हरदीप सिंह पुरी, रवनीत सिंह बिट्टू समेत करीब आधा दर्जन मौजूदा राज्यमंत्रियों को सरकार से बाहर का रास्ता देखना पड़ सकता है।

राम मंदिर विवाद की जांच और कोर्ट में आरोपियों की पेशी

राम मंदिर में दान के पैसों और आभूषणों की कथित हेराफेरी के मामले में पुलिस प्रशासन ने गिरफ्तार किए गए सभी 8 आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश कर दिया है। जांच एजेंसी ने अदालत को सूचित किया है कि प्रारंभिक जांच के दौरान सभी अभियुक्तों के खिलाफ चोरी के पुख्ता और अकाट्य साक्ष्य हाथ लगे हैं। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, मुख्य सीसीटीवी फुटेज में आरोपी काउंटर और दान पेटी से नकद राशि व आभूषण चुराते हुए साफ तौर पर दिखाई दे रहे हैं। पुलिस की ज्यूडिशियल रिमांड नोट में चंदे की हेराफेरी, टिन्नू नामक मुख्य आरोपी की प्रशासनिक शिथिलता, वाउचर बनाने में अनुकल्प मिश्रा और उसके बहनोई लव कुश मिश्रा द्वारा की गई अनियमितताओं का स्पष्ट उल्लेख है। जांच अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि टिन्नू, अनुकल्प, अविनाश, करुणेश, मनीष, लवकुश और रमा शंकर मिश्र जैसे आरोपियों की निशानदेही पर अब तक लगभग 79.84 लाख रुपये की नकद रिकवरी की जा चुकी है, जबकि 8वें आरोपी सुभाष श्रीवास्तव को इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।

PM मोदी की तस्वीर को रोज लड्डू चढ़ाती है अथिया की बेटी? सुनील शेट्टी ने बताई वजह

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बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सुनील शेट्टी इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर अपनी हाल ही में रिलीज हुई धमाकेदार कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ की कामयाबी को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। इस बड़े बजट की फिल्म ने सिनेमाघरों में दस्तक दे दी है और पहले ही दिन से यह शानदार कलेक्शन दर्ज कर रही है। फिल्म की सफलता के बीच, अभिनेता ने अपनी नन्हीं नातिन एवारा (अभिनेत्री अथिया शेट्टी और भारतीय क्रिकेटर केएल राहुल की बेटी) को लेकर एक बेहद दिलचस्प और दिल छू लेने वाला वाकया साझा किया है। सुनील शेट्टी ने खुलासा किया कि उनकी छोटी सी नातिन हर रोज सुबह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर के सामने जाकर उन्हें आदरपूर्वक लड्डू का भोग लगाती है।

एयरपोर्ट पर आया ने कराई थी पीएम से पहचान, नन्हीं एवारा पर दिखा जादुई असर

एक विशेष साक्षात्कार के दौरान अपने पारिवारिक पलों को याद करते हुए सुनील शेट्टी ने बताया कि उनकी नातिन की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति यह मासूम दीवानगी कैसे शुरू हुई। उन्होंने बताया कि एक बार हवाई अड्डे (एयरपोर्ट) पर एवारा की देखभाल करने वाली आया (नैनी) ने उसे पीएम मोदी की एक झलक दिखाई थी और उनके बारे में बताया था, जिसके बाद से ही वह उनके व्यक्तित्व से बेहद प्रभावित नजर आती है।

सुनील शेट्टी ने देश के नेतृत्व पर बात करते हुए कहा, "मैंने हमेशा इस बात को गर्व से स्वीकार किया है कि मैं प्रधानमंत्री जी की कार्यशैली का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं। मैं यहां किसी राजनीतिक दल या विचारधारा की बात नहीं कर रहा, बल्कि एक सच्चे वैश्विक नेता की बात कर रहा हूं। अगर कोई लीडर मुझे आगे बढ़ने और देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा देता है, तो वह निश्चित रूप से नरेंद्र मोदी जी हैं। जितना अटूट प्रेम मुझे अपनी मातृभूमि से है, उतना ही सम्मान मैं अपने देश के नेता के लिए भी रखता हूं। उनके व्यक्तित्व में वाकई कुछ बहुत ही विशिष्ट और जादुई बात है।"

बिना किसी के सिखाए साईं बाबा की पुस्तक में मोदी जी को ढूंढती है 15 महीने की बच्ची

सुनील शेट्टी ने अपनी नातिन की दैनिक दिनचर्या का जिक्र करते हुए आगे कहा, "मेरी नातिन अभी महज 15 महीने की है। अब उसका रोज़ का यह नियम बन चुका है कि वह सुबह उठकर भगवान साईं बाबा की एक धार्मिक पुस्तक खोलती है, जिसके एक पन्ने पर प्रधानमंत्री मोदी जी का भी चित्र छपा हुआ है। वह उस पेज को पलटती है और बड़ी मासूमियत से कहती है- 'मोदी जी'। इसके बाद वह घर के मंदिर में रखी भगवान गणेश की मूर्ति के पास जाती है, वहां चढ़ाए गए प्रसाद से लड्डू उठाती है और लाकर तस्वीर में दिख रहे पीएम मोदी को खिलाने का अभिनय करती है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उसे ऐसा करने के लिए न तो मैंने कभी कहा और न ही उसके माता-पिता (अथिया और राहुल) ने कोई सीख दी। यह पूरी तरह से उसका अपना लगाव है।"

मार्च 2025 में हुआ था जन्म, 'भगवान का तोहफा' है एवारा

उल्लेखनीय है कि बॉलीवुड अभिनेत्री अथिया शेट्टी और स्टार क्रिकेटर केएल राहुल के घर 24 मार्च 2025 को इस नन्हीं परी का जन्म हुआ था। इस स्टार कपल ने बाद में केएल राहुल के जन्मदिन के खास मौके पर अपनी लाडली के नाम का आधिकारिक ऐलान करते हुए पूरी दुनिया को बताया था कि उन्होंने अपनी बेटी का नाम 'एवारा' (Evaarah) रखा है, जिसका अर्थ होता है— ‘ईश्वर का अनमोल उपहार’ या ‘भगवान का तोहफा’। जन्म के बाद से ही स्टार माता-पिता ने अपनी बेटी को मीडिया की चकाचौंध और सोशल मीडिया की नजरों से काफी दूर रखा है। हालांकि वे समय-समय पर उसकी धुंधली तस्वीरें या झलकियां साझा करते रहते हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक अपनी बेटी का चेहरा सार्वजनिक रूप से रिवील नहीं किया है।

बॉक्स ऑफिस पर 'वेलकम टू द जंगल' की मजबूत पकड़, 30 से अधिक सितारे शामिल

दूसरी ओर, बॉक्स ऑफिस पर सुनील शेट्टी की नई फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' लगातार अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। फिल्म को समीक्षकों और आम दर्शकों की ओर से मिली-जुली लेकिन काफी मनोरंजक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। मशहूर निर्देशक अहमद खान के निर्देशन में तैयार हुई इस मल्टीस्टारर कॉमिक ड्रामा फिल्म में सुनील शेट्टी के अलावा सुपरस्टार अक्षय कुमार, राजपाल यादव, परेश रावल, अरशद वारसी, रवीना टंडन, दिशा पाटनी और जैकलीन फर्नांडिस सहित सिनेमा जगत के लगभग 30 से भी ज्यादा नामचीन कलाकार मुख्य भूमिकाओं में अपनी अदाकारी का जलवा बिखेर रहे हैं।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम चरण में, ट्रंप के दौरे की चर्चा तेज

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वॉशिंगटन / नई दिल्ली:भारत और अमेरिका के रणनीतिक और कूटनीतिक रिश्तों को लेकर एक बहुत बड़ा और सकारात्मक अपडेट सामने आया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ संकेत दिए हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले साल (2027) की शुरुआत में भारत का दौरा कर सकते हैं। इसके साथ ही, पिछले काफी समय से अटकी पड़ी दोनों देशों की द्विपक्षीय व्यापार संधि (ट्रेड डील) भी अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है।

पीएम मोदी और ट्रंप की ट्यूनिंग बेमिसाल, दौरे की तैयारियां शुरू

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों की तारीफ करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका बेहद करीबी और मजबूत साझीदार हैं। ट्रंप के संभावित भारत दौरे की पुष्टि करते हुए उन्होंने कहा, "हमारी टीम इसी एजेंडे पर काम कर रही है कि राष्ट्रपति ट्रंप अगले साल की शुरुआत में भारत का दौरा करें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच के आपसी संबंध इस समय अपने सर्वश्रेष्ठ दौर में हैं, जो वैश्विक कूटनीति के लिए एक बेहद मजबूत संदेश है।"

व्हाइट हाउस में वापसी के बाद ट्रंप की पहली भारत यात्रा

अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक रहा, तो दूसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति की कमान संभालने के बाद डोनाल्ड ट्रंप का यह पहला भारत दौरा होगा। इससे पहले ट्रंप ने फरवरी 2020 में भारत की यात्रा की थी। हाल ही में फ्रांस के एवियन में हुए जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच एक बेहद अहम द्विपक्षीय बैठक हुई थी, जो पिछले 16 महीनों में दोनों दिग्गजों के बीच पहली आमने-सामने की मुलाकात थी।

आखिरी दौर में ट्रेड डील, लेकिन इन शर्तों पर फंसा है पेंच

दोनों देशों के बीच व्यापारिक समझौते को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है, लेकिन भारतीय नीति निर्माता और वार्ताकार कुछ प्रमुख बिंदुओं पर अमेरिका से पूरी तरह आर-पार की स्पष्टता चाहते हैं:

  • धारा 301 टैरिफ: भारत ने अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301 के तहत लगने वाले शुल्कों (टैरिफ) पर स्पष्ट रुख मांगा है। भारत का कहना है कि समझौता फाइनल होने से पहले भारतीय बाजार को अन्य वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बढ़त मिलनी चाहिए।

  • अमेरिकी ट्रेजरी का रुख: अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने साफ किया है कि ये टैरिफ धारा 301 के तहत पुराने स्तरों पर ही वापस लौट जाएंगे।

रूस से तेल और भारी टैरिफ: हालिया महीनों के तनाव की वजह

पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में जो उतार-चढ़ाव आया था, उसे पूरी तरह सुलझाने के लिए ही विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस समय क्वाड (Quad) बैठक के सिलसिले में भारत आए हुए हैं:

  • ट्रंप का कड़ा फैसला: राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में भारतीय आयातों पर कुल 50% का भारी-भरकम टैरिफ ठोक दिया था। इसमें 25% पारस्परिक टैरिफ और भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण लगाया गया 25% का अतिरिक्त जुर्माना शामिल था, जो 27 अगस्त 2025 से प्रभावी हुआ था।

  • सुप्रीम कोर्ट से राहत: हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पारस्परिक टैरिफ के फैसले को खारिज कर दिया, जिसके बाद फिलहाल भारतीय निर्यात पर केवल 10% का बेसलाइन टैरिफ लग रहा है।

'ऑपरेशन सिंदूर' और मध्यस्थता के दावे पर मतभेद बरकरार

व्यापार के अलावा भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर को लेकर भी दोनों देशों के बयानों में थोड़ा विरोधाभास है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कई मौकों पर यह दावा किया है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान उन्होंने ही दोनों देशों के बीच दखल देकर युद्धविराम कराया था।

भारत का दोटूक स्टैंड:

नई दिल्ली ने ट्रंप के इस दावे को हमेशा की तरह पूरी तरह खारिज किया है। भारत का रुख साफ और अडिग है कि यह सीजफायर बिना किसी तीसरे देश या बाहरी मध्यस्थता के, पूरी तरह भारत और पाकिस्तान के मिलिट्री ऑपरेशंस के महानिदेशकों (DGMO) के बीच हुई सीधी बातचीत का नतीजा था।

जबलपुर के भंवरताल उद्यान में गंदे पानी से उठी दुर्गंध, लोगों ने जताई नाराजगी

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जबलपुर: संस्कारधानी की पहचान और शहर के मुख्य आकर्षणों में शुमार भंवरताल उद्यान इन दिनों प्रशासनिक उदासीनता और घोर अव्यवस्था का शिकार होकर रह गया है। पार्क के भीतर फैली भीषण गंदगी और बदइंतजामी के चलते यहां आने वाले स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उद्यान की खूबसूरती बढ़ाने के लिए लाखों रुपये की भारी-भरकम लागत से स्थापित किए गए हाई-टेक म्यूजिकल फव्वारे (Musical Fountain) तकनीकी खराबी के कारण लंबे समय से पूरी तरह बंद पड़े हैं। देखरेख के अभाव में इन फव्वारों के भीतर जमा पानी अब पूरी तरह सड़ चुका है, जिससे उठने वाली भयंकर बदबू के कारण लोगों का उद्यान परिसर में चंद मिनट भी ठहरना दूषित हवा के कारण दूभर हो गया है। हाल ही में जमीनी स्तर पर की गई पड़ताल में यह कड़वी हकीकत सामने आई है कि नियमित सफाई न होने के कारण फाउंटेन के पानी में मोटी काई जम चुकी है, जिससे पूरे पार्क का स्वरूप और सौंदर्य नष्ट हो रहा है।

नियमित रूप से सुबह की सैर पर आने वाले जागरूक नागरिक दीपेश कुमार ने अपना रोष व्यक्त करते हुए कहा कि अब भंवरताल उद्यान में आना किसी चुनौती से कम नहीं है, क्योंकि सड़े हुए पानी की दुर्गंध सिरदर्द पैदा कर देती है। इस गंभीर नागरिक समस्या पर अपना पक्ष रखते हुए उद्यान विभाग के जिम्मेदार अधिकारी मनीष तड़से ने सफाई दी है कि पार्क की स्वच्छता को लेकर मैदानी कर्मचारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि पानी की निकासी के लिए पंप भी स्थापित कर दिया गया है और तकनीकी खराबी को जल्द से जल्द दूर कर व्यवस्था बहाल कर दी जाएगी।

मेंटेनेंस के अभाव में कबाड़ में तब्दील हो रही सरकारी संपत्ति

एक दौर में भंवरताल उद्यान की शान कहे जाने वाले रंग-बिरंगे म्यूजिकल फव्वारे आज विभागीय लापरवाही का जीता-जागता सबूत बन चुके हैं। लंबे समय से बंद पड़े होने के कारण इन फाउंटेन के भीतर ठहरा हुआ पानी अब केवल गंदगी ही नहीं, बल्कि जानलेवा संक्रामक बीमारियों और लार्वा का मुख्य केंद्र बन गया है। हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि जो लोग सुकून के पल बिताने यहां आते हैं, उन्हें नाक पर रुमाल रखकर गुजरना पड़ रहा है।

समय पर उचित मेंटेनेंस और टेक्निकल ऑडिट न किए जाने की वजह से जनता के टैक्स के पैसों से खरीदी गई लाखों रुपये की कीमती मशीनें जंग खाकर धीरे-धीरे नष्ट हो रही हैं। क्षेत्रीय जनता का साफ कहना है कि यदि नगर निगम प्रशासन ने इस दिशा में तुरंत कोई ठोस और सुधारात्मक कदम नहीं उठाया, तो आने वाले कुछ ही दिनों में शहर का यह प्रमुख पर्यटन स्थल पूरी तरह से खंडहर और अनुपयोगी साबित होने लगेगा। हालांकि अधिकारी हर बार की तरह सिर्फ कागजी आश्वासन दे रहे हैं, परंतु धरातल पर सुधार की स्थिति शून्य बनी हुई है।

अधिकारियों की अनदेखी से संकट में शहर की विरासत, मॉर्निंग वॉकर्स में भारी आक्रोश

भंवरताल उद्यान सिर्फ एक आम पार्क नहीं, बल्कि जबलपुर शहर की एक ऐतिहासिक धरोहर है, लेकिन वर्तमान समय में यह जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर एक बड़ा दाग बन गया है। फव्वारों के कुंड में महीनों से जमा स्थिर पानी न केवल हवा को प्रदूषित कर रहा है, बल्कि भीषण गर्मी और उमस के इस मौसम में मच्छरों को पनपने के लिए सबसे सुरक्षित नर्सरी प्रदान कर रहा है। इससे आस-पास के रिहायशी इलाकों में डेंगू और मलेरिया जैसी घातक बीमारियों के फैलने की आशंका काफी प्रबल हो गई है।

प्रशासन द्वारा सफाई को लेकर किए जा रहे तमाम बड़े-बड़े वादे और दावे केवल फाइलों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं, क्योंकि उद्यान के हर हिस्से में कचरे और उपेक्षा के ढेर दिखाई दे रहे हैं। इस दुर्दशा को देखकर प्रतिदिन मॉर्निंग वॉक पर आने वाले शहर के वरिष्ठ नागरिकों में नगर निगम के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि प्रशासन ने इतनी महत्वपूर्ण और संवेदनशील जगह को पूरी तरह से भगवान भरोसे छोड़ दिया है। नागरिकों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि सिर्फ एक पंप लगा देने की खानापूर्ति से इस समस्या का स्थाई समाधान नहीं होने वाला, इसके लिए एक मजबूत कार्ययोजना, नियमित वैज्ञानिक सफाई और जवाबदेही तय करने की तत्काल आवश्यकता है।

जनाजे में दिखे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी, तस्वीरों ने पाकिस्तान पर उठाए नए सवाल

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इस्लामाबाद। पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज तेज गेंदबाज शोएब अख्तर के बड़े भाई शाहिद अख्तर के अंतिम संस्कार (जनाजे) को लेकर एक नया अंतरराष्ट्रीय विवाद छिड़ गया है। डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे कुछ वीडियो तथा तस्वीरों के आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि इस शवयात्रा में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से ताल्लुक रखने वाले कुछ खूंखार चेहरे शामिल हुए थे। इन तस्वीरों के सार्वजनिक पटल पर आने के बाद पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित आतंकियों की खुलेआम आवाजाही और उन्हें वहां के रसूखदारों द्वारा मिलने वाले परोक्ष व अपरोक्ष संरक्षण को लेकर पूरी दुनिया में एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।

इस्लामाबाद के कब्रिस्तान में अंतिम विदाई और विवादित चेहरे

विदित हो कि शोएब अख्तर के भाई शाहिद अख्तर का बीते 24 जून को आकस्मिक देहावसान हो गया था, जिसके उपरांत इस्लामाबाद के एच-8 (H-8) स्थित प्रमुख कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस अंतिम विदाई कार्यक्रम में खेल जगत, स्थानीय राजनीति और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी कई नामचीन हस्तियों ने शिरकत की थी। इसी दौरान इंटरनेट पर वायरल हुए फुटेज में लश्कर-ए-तैयबा के उप प्रमुख सैफुल्लाह कसूरी और पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) से जुड़े कुछ शीर्ष नेताओं की संदिग्ध मौजूदगी की बात कही जा रही है। यद्यपि किसी भी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय संस्था ने अभी तक इन वायरल कड़ियों की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है, परंतु भारतीय सुरक्षा एजेंसियां सैफुल्लाह कसूरी को 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले का मुख्य सूत्रधार मानती हैं, जिसमें 25 निर्दोष पर्यटकों की जान चली गई थी।

पीएमएमएल नेताओं की उपस्थिति और पाकिस्तान का दोहरा रवैया

इंटरनेट पर प्रसारित साक्ष्यों में यह भी रेखांकित किया गया है कि जनाजे में पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) के इस्लामाबाद विंग के सदर इनाम-उर-रहमान कम्बोह सहित कई अन्य विवादित चेहरे भी अग्रिम पंक्ति में खड़े थे। गौरतलब है कि वैश्विक रक्षा विश्लेषक पीएमएमएल को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) द्वारा घोषित अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी हाफिज सईद के पुराने नेटवर्क और लश्कर-ए-तैयबा का ही एक नया मुखौटा व राजनीतिक मंच मानते हैं। इस शवयात्रा में ऐसे तत्वों की खुलेआम मौजूदगी ने भारत और अन्य पश्चिमी देशों के उन पुराने आरोपों को पुनर्जीवित कर दिया है, जिसमें कहा जाता रहा है कि पाकिस्तान अपनी धरती पर पल रहे आतंकी बुनियादी ढांचे को नष्ट करने के बजाय उन्हें मुख्यधारा में संरक्षण प्रदान कर रहा है।

क्रिकेटर परिवार और पाक प्रशासन की रहस्यमयी खामोशी

इस पूरे गंभीर और संवेदनशील विवाद के वैश्विक मीडिया की सुर्खियों में आने के बाद भी अभी तक पूर्व क्रिकेटर शोएब अख्तर, उनके पारिवारिक सदस्यों अथवा उनके विधिक सलाहकारों की तरफ से किसी भी प्रकार की आधिकारिक सफाई या खंडन सामने नहीं आया है। दूसरी ओर, हमेशा की तरह इस बार भी पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय और वहां की सरकार ने इन तस्वीरों व वीडियो पर पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है और उनकी ओर से कोई भी प्रतिक्रियात्मक वक्तव्य जारी नहीं किया गया है। फिलहाल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह विषय अत्यंत तीखी बहसों और भू-राजनीतिक टिप्पणियों के केंद्र में बना हुआ है और लोग इस पर लगातार अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

बोकारो के गोमिया में सनसनी, शराब के नशे में बेटे ने ली पिता की जान

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बोकारो (गोमिया):झारखंड के बोकारो जिले से रिश्तों को कलंकित कर देने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। गोमिया प्रखंड के तिलैया पंचायत स्थित कारीपानी गांव (लुगू पहाड़ की तलहटी) में शुक्रवार देर रात एक कलयुगी बेटे ने मामूली विवाद के बाद कुल्हाड़ी (टांगी) से हमला कर अपने ही पिता की बेरहमी से हत्या कर दी। इस खौफनाक वारदात के बाद से पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।

शराब की लत पर पिता ने लगाई थी डांट, गुस्से में खोया आपा

मृतक की पहचान 63 वर्षीय जयलाल करमाली के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, उनका 30 वर्षीय बेटा अर्जुन करमाली अपने ननिहाल में एक कार्यक्रम से देर रात घर लौटा था। वह शराब के नशे में पूरी तरह धुत था। बेटे की इस हरकत से परेशान पिता जयलाल ने उसे डांटते हुए कहा कि उसकी शराब की लत के कारण घर में रोज क्लेश होता है और इसी मारपीट से तंग आकर उसकी पत्नी भी मायके चली गई है। पिता की यही नसीहत अर्जुन को नागवार गुजरी। बहस इतनी बढ़ी कि अर्जुन ने तैश में आकर घर में रखी टांगी से पिता के सिर पर जोरदार वार कर दिया। चोट इतनी गंभीर थी कि जयलाल ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

ग्रामीणों ने दिखाई बहादुरी, हत्यारे बेटे को बांधकर पुलिस को सौंपा

वारदात को अंजाम देकर भागने की कोशिश कर रहे आरोपी अर्जुन करमाली को ग्रामीणों ने मुस्तैदी दिखाते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। गांव वालों ने उसे रस्सी से घर में ही बांधकर रखा और तुरंत स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी। खबर मिलते ही जगेश्वर बिहार थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और हत्या में इस्तेमाल की गई टांगी को भी जब्त कर लिया है। थाना प्रभारी प्रकाश यादव ने बताया कि पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

नशे की लत पर मुखिया ने जताई गहरी चिंता

शनिवार सुबह घटना की जानकारी मिलते ही तिलैया पंचायत की मुखिया चिंता देवी भी पीड़ित परिवार के घर पहुंचीं। उन्होंने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे समाज को शर्मसार करने वाली वारदात बताया। मुखिया ने कहा कि युवाओं में बढ़ती नशे की लत आज के समय में हंसते-खेलते परिवारों और पूरे समाज को तबाह कर रही है, जो बेहद चिंताजनक है।

दो दिन से घर से बाहर नहीं निकले थे दंपती, दरवाजा खुलते ही सामने आई दर्दनाक सच्चाई

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भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक बेहद दुखद और सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है, जहां सुदामा नगर स्थित एक रिहायशी मकान से बुजुर्ग पति-पत्नी के शव संदिग्ध अवस्था में बरामद किए गए हैं। इस दोहरे शव मिलने की घटना से समूचे क्षेत्र में दहशत और सन्नाटा पसर गया है। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की विस्तृत वैधानिक जांच शुरू कर दी है। पुलिस आसपास के निवासियों, करीबियों और रिश्तेदारों से गहन पूछताछ कर जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है।

शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त थे दोनों बुजुर्ग

यह दर्दनाक वाकया राजधानी के ऐशबाग थाना इलाके का है, जहां हेमंत बारीक (64 वर्ष) अपनी पत्नी शकुंतला बारीक (62 वर्ष) के साथ सुदामा नगर में निवास करते थे। हेमंत बारीक भारतीय रेलवे से सेवानिवृत्त कर्मचारी थे, जबकि उनकी पत्नी शकुंतला कस्तूरबा अस्पताल में नर्स के पद से रिटायर हुई थीं। इस वृद्ध दंपती ने अपने मकान का एक हिस्सा छात्रों को किराए पर दे रखा था और दूसरे हिस्से में दोनों अकेले रहते थे, क्योंकि उनका इकलौता बेटा अपने परिवार के साथ सुदूर विदेश में रहता है। पुलिस प्रशासन अब विदेश में रह रहे उनके बेटे से संपर्क साधने की कोशिशों में जुटा है।

कमरे से दुर्गंध आने पर खुला खौफनाक राज

मकान के दूसरे हिस्से में रहने वाले किराएदार छात्रों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने पिछले दो दिनों से मकान मालिक बुजुर्ग दंपती को घर से बाहर आते-जाते नहीं देखा था। शुक्रवार की शाम को जब उस बंद हिस्से से अचानक अत्यधिक तेज बदबू आने लगी, तो छात्रों ने अनहोनी की आशंका के चलते तुरंत ऐशबाग थाना पुलिस को इसकी सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने जब घर का मुख्य दरवाजा तोड़ा, तो अंदर का दृश्य देखकर सभी के होश उड़ गए। दोनों बुजुर्गों के शव कमरे के भीतर क्षत-विक्षत होकर सड़ने लगे थे, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि मौत दो-तीन दिन पहले ही हो चुकी थी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिसिया तफ्तीश पर टिकी निगाहें

फॉरेंसिक विशेषज्ञों और पुलिस ने घटना स्थल से आवश्यक साक्ष्य एकत्र करने के बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए मर्चुरी भिजवा दिया है ताकि मौत के वास्तविक कारणों और समय का सटीक पता लगाया जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह आत्महत्या का मामला है या फिर इसके पीछे कोई बड़ी आपराधिक साजिश है। फिलहाल पुलिस हर संभावित कूट और एंगल्स को ध्यान में रखकर मामले की तह तक जाने के लिए करीबियों से लगातार पूछताछ कर रही है।

भ्रष्टाचार के पैसे की रिकवरी पर सवाल, ग्रामीण बोले- पूरे मामले की हो निष्पक्ष जांच

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रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिला पंचायत में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और सरकारी धन की हेराफेरी रोकने के लिए बनी वैधानिक धाराओं के क्रियान्वयन पर ही गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पंचायत राज अधिनियम की धारा 40/92 के तहत दर्ज करोड़ों रुपये के वसूली प्रकरणों में कथित रूप से सांठगांठ कर फाइलों को बंद कर दिया गया, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि संबंधित निर्माण कार्य आज भी अधूरे पड़े हैं। जानकारी के अनुसार, हनुमना जनपद की बेलहा और मऊगंज जनपद की मटियरा ग्राम पंचायत सहित कई अन्य क्षेत्रों में वित्तीय गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद जांच बैठाई गई थी, जिसमें अनियमितताएं पाए जाने पर तत्कालीन सरपंचों और सचिवों के खिलाफ लाखों रुपये की वसूली की अनुशंसा कर मामले जिला पंचायत भेजे गए थे।

जांच रिपोर्ट के बाद फाइलों को बंद करने का खेल

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि जिला पंचायत स्तर पर मामला पहुंचने के बाद पूरी विधिक कार्रवाई की दिशा ही बदल दी गई। जिन विकास कार्यों को पहले अधूरा मानकर उनके आधार पर शासकीय राशि की वसूली तय की गई थी, बाद में उन्हीं कार्यों की कागजी पूर्णता रिपोर्ट (कम्प्लीशन सर्टिफिकेट) प्रस्तुत कर दी गई। इसके बाद अधिरोपित की गई मूल वसूली राशि में भारी कटौती की गई और जिम्मेदार व्यक्तियों से नाममात्र की राशि जमा करवाकर पूरे प्रकरण को आनन-फानन में नस्तीबद्ध यानी बंद कर दिया गया। इस प्रशासनिक प्रक्रिया ने पूरी जांच और पारदर्शिता पर उंगलियां उठा दी हैं।

बेलहा और मटियरा पंचायतों में लाखों की कटौती के आरोप

उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, ग्राम पंचायत बेलहा में तत्कालीन सरपंच मंटू कोल और सचिव रामधनी मिश्रा पर करीब 22.84 लाख रुपये की वसूली निकाली गई थी, जिसे बाद में कथित रूप से घटाकर मात्र 6 से 7 लाख रुपये कर दिया गया और मामला रफा-दफा कर दिया गया। इसी तरह मटियरा ग्राम पंचायत में भी लगभग 65 लाख रुपये की भारी-भरकम वसूली अधिरोपित थी, लेकिन वहां भी धरातल पर काम पूरा हुए बिना महज 10 लाख रुपये का सरकारी खजाने में भुगतान कराकर केस फाइल बंद कर दी गई। यदि इन दोनों मामलों की उच्च स्तरीय पड़ताल होती है, तो केवल इन दो पंचायतों में ही एक करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व की क्षति का बड़ा खुलासा हो सकता है।

भौतिक सत्यापन और फाइलों की उच्च स्तरीय जांच की मांग

इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि जब निर्माण कार्य वास्तव में अपूर्ण थे, तो तकनीकी अधिकारियों ने किस आधार पर उनके पूरे होने की रिपोर्ट स्वीकार की और क्या मौके पर जाकर कोई भौतिक सत्यापन किया गया था। इस कथित प्रशासनिक शिथिलता के खिलाफ ग्रामीणों और समाजसेवियों ने मोर्चा खोलते हुए मांग की है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान धारा 40/92 के तहत बंद किए गए सभी मामलों की किसी स्वतंत्र एजेंसी से उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। वर्तमान में क्षेत्र के नागरिकों की नजरें राज्य सरकार और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो जैसी जांच एजेंसियों के रुख पर टिकी हैं कि क्या भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने वाले इस तंत्र पर कोई दंडात्मक कार्रवाई होती है या नहीं।

10 साल की उम्र से जुर्म की दुनिया में था महताब, एनकाउंटर के बाद सामने आए चौंकाने वाले खुलासे

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शामली: उत्तर प्रदेश के पश्चिमी छोर पर स्थित शामली जिले में पुलिस प्रशासन को अपराध नियंत्रण की दिशा में एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। आदर्श मंडी और कांधला थाना पुलिस की संयुक्त टीम के साथ हुई एक भीषण मुठभेड़ में कुख्यात मुकीम काला गिरोह का बेहद शातिर और 50 हजार रुपये का इनामी हिस्ट्रीशीटर बदमाश महताब उर्फ बेचैन मारा गया है। यह मुठभेड़ उस वक्त हुई जब आरोपी अपने एक अन्य साथी के साथ मिलकर दो सगे किसान भाइयों से असलहे के बल पर लूटपाट कर भाग रहा था। इस क्रास फायरिंग के दौरान अदम्य साहस का परिचय देने वाले आदर्श मंडी थाने के उपनिरीक्षक (दरोगा) दीपचंद भी हाथ में गोली लगने से गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं।

मुजफ्फरनगर हाईवे पर आधी रात को किसान भाइयों से हुई थी लूट

पुलिस अधीक्षक (एसपी) एनपी सिंह द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वारदात 26 जून की देर रात करीब तीन बजे की है। बाबरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम हाथी करौदा के निवासी नरेंद्र अपने सगे भाई नरेशपाल के साथ मोटरसाइकिल से आदर्श मंडी क्षेत्र के ग्राम जलाल स्थित अपने खेतों में सिंचाई (पानी लगाने) के लिए जा रहे थे। जैसे ही दोनों भाई मुजफ्फरनगर हाईवे पर जलालपुर कट के पास पहुंचे, तभी घात लगाकर बैठे दो अज्ञात बाइक सवार अपराधियों ने उन्हें रोक लिया।

बदमाशों ने किसानों की कनपटी पर तमंचा सटाकर जान से मारने की धमकी दी और उनसे बाइक की चाबी, मोबाइल फोन और जेब में रखे करीब 200 रुपये नकद लूट लिए। जब किसानों ने इसका विरोध करने का प्रयास किया, तो बदमाश दहशत फैलाने के लिए हवा में गोलियां बरसाते हुए वहां से रफूचक्कर हो गए। पीड़ितों ने बिना वक्त गंवाए तुरंत इस डकैती की सूचना आदर्श मंडी पुलिस को दी, जिसके बाद समूचे जिले में नाकेबंदी कर सघन चेकिंग अभियान शुरू किया गया।

12 किलोमीटर दूर खंदरावली पुलिया के पास घिरे बदमाश, दरोगा को लगी गोली

लूट की वारदात के ठीक एक घंटे बाद, घटना स्थल से लगभग 12 किलोमीटर दूर कांधला थाना क्षेत्र में खंदरावली पुलिया के पास नलकूप के निकट पुलिस की घेराबंदी देखकर बदमाशों ने खुद को फंसता पाया। पुलिस को देखते ही अपराधियों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। बदमाशों की ओर से करीब 12 से अधिक राउंड गोलियां चलाई गईं, जिसमें से एक गोली सीधे दरोगा दीपचंद के हाथ को चीरती हुई निकल गई।

पुलिस टीम ने भी आत्मरक्षार्थ जवाबी कार्रवाई करते हुए मोर्चा संभाला और पलटवार किया। दोनों ओर से हुई इस भीषण गोलीबारी में कैराना के मोहल्ला आलकला का रहने वाला हिस्ट्रीशीटर महताब गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा, जबकि उसका दूसरा साथी अंधेरे और खेतों की आड़ का फायदा उठाकर मौके से भागने में सफल रहा। पुलिस ने तत्काल दोनों घायलों को इलाज के लिए जिला चिकित्सालय भिजवाया, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद बदमाश महताब को मृत घोषित कर दिया, वहीं घायल दरोगा का उपचार जारी है।

मौके से अत्याधुनिक हथियार और कारतूसों का जखीरा बरामद

एनकाउंटर के बाद फॉरेंसिक और पुलिस टीम ने जब घटना स्थल की बारीकी से पड़ताल की, तो मारे गए अपराधी के पास से भारी मात्रा में अवैध हथियार और लूटी गई सामग्री बरामद हुई। पुलिस ने मौके से:

  • एक 9 एमएम (9mm) की आधुनिक पिस्टल और एक स्वचालित कार्बाइन।

  • 13 जिंदा कारतूस और 8 खाली खोखे।

  • किसानों से लूटा गया मोबाइल फोन, नकदी और उनकी मोटरसाइकिल की चाबी।

  • वारदात में इस्तेमाल की गई बिना नंबर की एक संदिग्ध बाइक बरामद की है।

सिर्फ 10 साल की उम्र में की थी पहली हत्या, तीन राज्यों में था आतंक का पर्याय

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मुठभेड़ में ढेर हुआ महताब उर्फ बेचैन बचपन से ही बेहद क्रूर और शातिर दिमाग का अपराधी था। उसने अपराध की दुनिया में अपना पहला कदम महज 10 साल की उम्र में रखा था, जब उसने वर्ष 2000 में कैराना के मोहल्ला शेखबद्दा निवासी रहीसुद्दीन पहलवान के 12 वर्षीय मासूम बेटे आरिफ को घर से बुलाकर उसकी बेरहमी से गला घोंटकर हत्या कर दी थी। इस खौफनाक वारदात का मुकदमा आज भी जुवेनाइल (बाल) कोर्ट में लंबित था।

समय के साथ महताब जेब कतरी और नकबजनी से आगे बढ़ते हुए कुख्यात मुकीम काला गैंग का मुख्य शूटर बन गया। उस पर शामली, सहारनपुर और हरियाणा के पानीपत में हत्या, डकैती, रंगदारी, लूट और जानलेवा हमले के करीब 47 संगीन आपराधिक मामले दर्ज थे। वह कैराना थाने का घोषित हिस्ट्रीशीटर (एचएस नंबर 349 ए) था। हाल ही में वह थानाभवन शुगर मिल के सहायक प्रबंधक अरविंद कुमार से लूटपाट करने और हरियाणा पुलिस की एक महिला आरक्षी ज्योति मलिक से सोने के आभूषण लूटने के मामले में वांछित चल रहा था। इसी के चलते डीआईजी रेंज की ओर से उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था। 2017 के बाद से वह अपनी पहचान छिपाकर सहारनपुर में ठिकाना बदले हुए था।

कड़े सुरक्षा घेरे में पैतृक कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक

मुठभेड़ में मारे जाने के बाद महताब के शव का डॉक्टरों के पैनल द्वारा पोस्टमार्टम कराया गया। शाम के वक्त कागजी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद पुलिस ने शव उसके परिजनों को सौंप दिया। देर शाम भारी सुरक्षा बंदोबस्त और पुलिस बल की मौजूदगी के बीच महताब के शव को कैराना की टीचर्स कॉलोनी स्थित उसके पैतृक कब्रिस्तान ले जाया गया, जहां धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार उसे सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। एसपी एनपी सिंह ने बताया कि मौके से फरार हुए दूसरे डकैत की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की स्वाट (SWAT) और सर्विलांस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं, और उसके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

सड़क और पुल के अभाव में दर्दनाक हालात, खटिया पर नदी पार करते समय महिला ने दिया बच्चे को जन्म

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छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के अमरवाड़ा विकासखंड से सरकारी विकास के दावों की जमीनी हकीकत बयां करती एक बेहद विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है। बुनियादी सुविधाओं की घोर कमी के चलते एक गर्भवती महिला को उफनती हुई नदी के तेज बहाव के बीच चारपाई (खटिया) पर लेटकर सफर तय करना पड़ा। कनेक्टिविटी और खराब रास्तों की वजह से समय पर आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा भी गांव तक नहीं पहुंच पाई, जिसके परिणामस्वरूप तड़पती महिला का रास्ते में ही प्रसव हो गया। इस गंभीर वाकये ने क्षेत्र की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और सड़क संपर्क के अभाव को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।

दशकों पुराना दर्द और उफनती नदी की मजबूरी

यह पूरा मामला क्षेत्र के लोहड़ी मोहल्ला (ग्राम हथोड़ा) का है, जहां लगभग 20 परिवारों का बसेरा है। इन ग्रामीणों को मुख्य सड़क मार्ग तक पहुंचने के लिए अनिवार्य रूप से एक स्थानीय नदी को पार करना पड़ता है। पिछले कई दशकों से यहां के निवासी शासन-प्रशासन से एक अदद पुल के निर्माण की गुहार लगा रहे हैं, परंतु विभागीय उदासीनता के चलते आज तक उनकी इस बुनियादी मांग को पूरा नहीं किया गया। वर्षा ऋतु के आते ही जब नदी का जलस्तर खतरे के निशान के पास पहुंच जाता है, तब इन ग्रामीणों की परेशानियां और जान का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

जांबाज युवाओं का हौसला और रास्ते में ही प्रसव

बीते बुधवार को मोहल्ले में रहने वाली एक गर्भवती महिला को अचानक तीव्र प्रसव पीड़ा शुरू हुई, जिसके बाद आशा कार्यकर्ता ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत 108 एम्बुलेंस को फोन किया। हालांकि, दुर्गम इलाका और खराब नेटवर्क कनेक्टिविटी होने के कारण एम्बुलेंस समय पर वहां नहीं पहुंच सकी। महिला की लगातार बिगड़ती नाजुक स्थिति को देख गांव के कुछ साहसी युवकों ने हिम्मत दिखाई और महिला को खटिया पर लिटाकर उफनती नदी पार कराने का साहसिक निर्णय लिया। जान की परवाह न करते हुए युवाओं ने पानी के तेज थपेड़ों के बीच चारपाई को संभाला, लेकिन इसी जद्दोजहद के दौरान रास्ते में ही महिला की डिलीवरी हो गई, जिसके बाद जच्चा-बच्चा को मोटरसाइकिल के जरिए जैसे-तैसे अस्पताल पहुंचाया गया।

जच्चा-बच्चा की कुशलक्षेम और ग्रामीणों का भारी आक्रोश

अमरवाड़ा के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. के. ठाकुर के अनुसार, घोघरा गांव के कंवारी मोहल्ले की रहने वाली सविता विश्वकर्मा को प्रसव के बाद चिकित्सालय लाया गया था, जहां प्राथमिक उपचार के बाद वर्तमान में मां और नवजात शिशु दोनों पूरी तरह सुरक्षित एवं स्वस्थ हैं। हालांकि, प्रशासनिक दस्तावेजों और स्थानीय लोगों के दावों में गांव के नाम को लेकर थोड़ा तकनीकी विरोधाभास है, लेकिन इस दर्दनाक जमीनी हकीकत को झुठलाया नहीं जा सकता। इस घटना के सार्वजनिक होने के बाद से ही पूरे अंचल के ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी और आक्रोश व्याप्त है। लोगों ने जनप्रतिनिधियों पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए मांग की है कि कागजी विकास से इतर यहां अविलंब पुल और पक्की सड़क का निर्माण शुरू कराया जाए ताकि भविष्य में किसी को ऐसे जानलेवा हालातों से न गुजरना पड़े।

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