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जनाजे में दिखे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी, तस्वीरों ने पाकिस्तान पर उठाए नए सवाल

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इस्लामाबाद। पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज तेज गेंदबाज शोएब अख्तर के बड़े भाई शाहिद अख्तर के अंतिम संस्कार (जनाजे) को लेकर एक नया अंतरराष्ट्रीय विवाद छिड़ गया है। डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे कुछ वीडियो तथा तस्वीरों के आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि इस शवयात्रा में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से ताल्लुक रखने वाले कुछ खूंखार चेहरे शामिल हुए थे। इन तस्वीरों के सार्वजनिक पटल पर आने के बाद पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित आतंकियों की खुलेआम आवाजाही और उन्हें वहां के रसूखदारों द्वारा मिलने वाले परोक्ष व अपरोक्ष संरक्षण को लेकर पूरी दुनिया में एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।

इस्लामाबाद के कब्रिस्तान में अंतिम विदाई और विवादित चेहरे

विदित हो कि शोएब अख्तर के भाई शाहिद अख्तर का बीते 24 जून को आकस्मिक देहावसान हो गया था, जिसके उपरांत इस्लामाबाद के एच-8 (H-8) स्थित प्रमुख कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस अंतिम विदाई कार्यक्रम में खेल जगत, स्थानीय राजनीति और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी कई नामचीन हस्तियों ने शिरकत की थी। इसी दौरान इंटरनेट पर वायरल हुए फुटेज में लश्कर-ए-तैयबा के उप प्रमुख सैफुल्लाह कसूरी और पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) से जुड़े कुछ शीर्ष नेताओं की संदिग्ध मौजूदगी की बात कही जा रही है। यद्यपि किसी भी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय संस्था ने अभी तक इन वायरल कड़ियों की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है, परंतु भारतीय सुरक्षा एजेंसियां सैफुल्लाह कसूरी को 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले का मुख्य सूत्रधार मानती हैं, जिसमें 25 निर्दोष पर्यटकों की जान चली गई थी।

पीएमएमएल नेताओं की उपस्थिति और पाकिस्तान का दोहरा रवैया

इंटरनेट पर प्रसारित साक्ष्यों में यह भी रेखांकित किया गया है कि जनाजे में पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) के इस्लामाबाद विंग के सदर इनाम-उर-रहमान कम्बोह सहित कई अन्य विवादित चेहरे भी अग्रिम पंक्ति में खड़े थे। गौरतलब है कि वैश्विक रक्षा विश्लेषक पीएमएमएल को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) द्वारा घोषित अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी हाफिज सईद के पुराने नेटवर्क और लश्कर-ए-तैयबा का ही एक नया मुखौटा व राजनीतिक मंच मानते हैं। इस शवयात्रा में ऐसे तत्वों की खुलेआम मौजूदगी ने भारत और अन्य पश्चिमी देशों के उन पुराने आरोपों को पुनर्जीवित कर दिया है, जिसमें कहा जाता रहा है कि पाकिस्तान अपनी धरती पर पल रहे आतंकी बुनियादी ढांचे को नष्ट करने के बजाय उन्हें मुख्यधारा में संरक्षण प्रदान कर रहा है।

क्रिकेटर परिवार और पाक प्रशासन की रहस्यमयी खामोशी

इस पूरे गंभीर और संवेदनशील विवाद के वैश्विक मीडिया की सुर्खियों में आने के बाद भी अभी तक पूर्व क्रिकेटर शोएब अख्तर, उनके पारिवारिक सदस्यों अथवा उनके विधिक सलाहकारों की तरफ से किसी भी प्रकार की आधिकारिक सफाई या खंडन सामने नहीं आया है। दूसरी ओर, हमेशा की तरह इस बार भी पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय और वहां की सरकार ने इन तस्वीरों व वीडियो पर पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है और उनकी ओर से कोई भी प्रतिक्रियात्मक वक्तव्य जारी नहीं किया गया है। फिलहाल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह विषय अत्यंत तीखी बहसों और भू-राजनीतिक टिप्पणियों के केंद्र में बना हुआ है और लोग इस पर लगातार अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

बोकारो के गोमिया में सनसनी, शराब के नशे में बेटे ने ली पिता की जान

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बोकारो (गोमिया):झारखंड के बोकारो जिले से रिश्तों को कलंकित कर देने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। गोमिया प्रखंड के तिलैया पंचायत स्थित कारीपानी गांव (लुगू पहाड़ की तलहटी) में शुक्रवार देर रात एक कलयुगी बेटे ने मामूली विवाद के बाद कुल्हाड़ी (टांगी) से हमला कर अपने ही पिता की बेरहमी से हत्या कर दी। इस खौफनाक वारदात के बाद से पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।

शराब की लत पर पिता ने लगाई थी डांट, गुस्से में खोया आपा

मृतक की पहचान 63 वर्षीय जयलाल करमाली के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, उनका 30 वर्षीय बेटा अर्जुन करमाली अपने ननिहाल में एक कार्यक्रम से देर रात घर लौटा था। वह शराब के नशे में पूरी तरह धुत था। बेटे की इस हरकत से परेशान पिता जयलाल ने उसे डांटते हुए कहा कि उसकी शराब की लत के कारण घर में रोज क्लेश होता है और इसी मारपीट से तंग आकर उसकी पत्नी भी मायके चली गई है। पिता की यही नसीहत अर्जुन को नागवार गुजरी। बहस इतनी बढ़ी कि अर्जुन ने तैश में आकर घर में रखी टांगी से पिता के सिर पर जोरदार वार कर दिया। चोट इतनी गंभीर थी कि जयलाल ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

ग्रामीणों ने दिखाई बहादुरी, हत्यारे बेटे को बांधकर पुलिस को सौंपा

वारदात को अंजाम देकर भागने की कोशिश कर रहे आरोपी अर्जुन करमाली को ग्रामीणों ने मुस्तैदी दिखाते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। गांव वालों ने उसे रस्सी से घर में ही बांधकर रखा और तुरंत स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी। खबर मिलते ही जगेश्वर बिहार थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और हत्या में इस्तेमाल की गई टांगी को भी जब्त कर लिया है। थाना प्रभारी प्रकाश यादव ने बताया कि पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

नशे की लत पर मुखिया ने जताई गहरी चिंता

शनिवार सुबह घटना की जानकारी मिलते ही तिलैया पंचायत की मुखिया चिंता देवी भी पीड़ित परिवार के घर पहुंचीं। उन्होंने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे समाज को शर्मसार करने वाली वारदात बताया। मुखिया ने कहा कि युवाओं में बढ़ती नशे की लत आज के समय में हंसते-खेलते परिवारों और पूरे समाज को तबाह कर रही है, जो बेहद चिंताजनक है।

दो दिन से घर से बाहर नहीं निकले थे दंपती, दरवाजा खुलते ही सामने आई दर्दनाक सच्चाई

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भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक बेहद दुखद और सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है, जहां सुदामा नगर स्थित एक रिहायशी मकान से बुजुर्ग पति-पत्नी के शव संदिग्ध अवस्था में बरामद किए गए हैं। इस दोहरे शव मिलने की घटना से समूचे क्षेत्र में दहशत और सन्नाटा पसर गया है। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की विस्तृत वैधानिक जांच शुरू कर दी है। पुलिस आसपास के निवासियों, करीबियों और रिश्तेदारों से गहन पूछताछ कर जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है।

शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त थे दोनों बुजुर्ग

यह दर्दनाक वाकया राजधानी के ऐशबाग थाना इलाके का है, जहां हेमंत बारीक (64 वर्ष) अपनी पत्नी शकुंतला बारीक (62 वर्ष) के साथ सुदामा नगर में निवास करते थे। हेमंत बारीक भारतीय रेलवे से सेवानिवृत्त कर्मचारी थे, जबकि उनकी पत्नी शकुंतला कस्तूरबा अस्पताल में नर्स के पद से रिटायर हुई थीं। इस वृद्ध दंपती ने अपने मकान का एक हिस्सा छात्रों को किराए पर दे रखा था और दूसरे हिस्से में दोनों अकेले रहते थे, क्योंकि उनका इकलौता बेटा अपने परिवार के साथ सुदूर विदेश में रहता है। पुलिस प्रशासन अब विदेश में रह रहे उनके बेटे से संपर्क साधने की कोशिशों में जुटा है।

कमरे से दुर्गंध आने पर खुला खौफनाक राज

मकान के दूसरे हिस्से में रहने वाले किराएदार छात्रों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने पिछले दो दिनों से मकान मालिक बुजुर्ग दंपती को घर से बाहर आते-जाते नहीं देखा था। शुक्रवार की शाम को जब उस बंद हिस्से से अचानक अत्यधिक तेज बदबू आने लगी, तो छात्रों ने अनहोनी की आशंका के चलते तुरंत ऐशबाग थाना पुलिस को इसकी सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने जब घर का मुख्य दरवाजा तोड़ा, तो अंदर का दृश्य देखकर सभी के होश उड़ गए। दोनों बुजुर्गों के शव कमरे के भीतर क्षत-विक्षत होकर सड़ने लगे थे, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि मौत दो-तीन दिन पहले ही हो चुकी थी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिसिया तफ्तीश पर टिकी निगाहें

फॉरेंसिक विशेषज्ञों और पुलिस ने घटना स्थल से आवश्यक साक्ष्य एकत्र करने के बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए मर्चुरी भिजवा दिया है ताकि मौत के वास्तविक कारणों और समय का सटीक पता लगाया जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह आत्महत्या का मामला है या फिर इसके पीछे कोई बड़ी आपराधिक साजिश है। फिलहाल पुलिस हर संभावित कूट और एंगल्स को ध्यान में रखकर मामले की तह तक जाने के लिए करीबियों से लगातार पूछताछ कर रही है।

भ्रष्टाचार के पैसे की रिकवरी पर सवाल, ग्रामीण बोले- पूरे मामले की हो निष्पक्ष जांच

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रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिला पंचायत में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और सरकारी धन की हेराफेरी रोकने के लिए बनी वैधानिक धाराओं के क्रियान्वयन पर ही गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पंचायत राज अधिनियम की धारा 40/92 के तहत दर्ज करोड़ों रुपये के वसूली प्रकरणों में कथित रूप से सांठगांठ कर फाइलों को बंद कर दिया गया, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि संबंधित निर्माण कार्य आज भी अधूरे पड़े हैं। जानकारी के अनुसार, हनुमना जनपद की बेलहा और मऊगंज जनपद की मटियरा ग्राम पंचायत सहित कई अन्य क्षेत्रों में वित्तीय गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद जांच बैठाई गई थी, जिसमें अनियमितताएं पाए जाने पर तत्कालीन सरपंचों और सचिवों के खिलाफ लाखों रुपये की वसूली की अनुशंसा कर मामले जिला पंचायत भेजे गए थे।

जांच रिपोर्ट के बाद फाइलों को बंद करने का खेल

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि जिला पंचायत स्तर पर मामला पहुंचने के बाद पूरी विधिक कार्रवाई की दिशा ही बदल दी गई। जिन विकास कार्यों को पहले अधूरा मानकर उनके आधार पर शासकीय राशि की वसूली तय की गई थी, बाद में उन्हीं कार्यों की कागजी पूर्णता रिपोर्ट (कम्प्लीशन सर्टिफिकेट) प्रस्तुत कर दी गई। इसके बाद अधिरोपित की गई मूल वसूली राशि में भारी कटौती की गई और जिम्मेदार व्यक्तियों से नाममात्र की राशि जमा करवाकर पूरे प्रकरण को आनन-फानन में नस्तीबद्ध यानी बंद कर दिया गया। इस प्रशासनिक प्रक्रिया ने पूरी जांच और पारदर्शिता पर उंगलियां उठा दी हैं।

बेलहा और मटियरा पंचायतों में लाखों की कटौती के आरोप

उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, ग्राम पंचायत बेलहा में तत्कालीन सरपंच मंटू कोल और सचिव रामधनी मिश्रा पर करीब 22.84 लाख रुपये की वसूली निकाली गई थी, जिसे बाद में कथित रूप से घटाकर मात्र 6 से 7 लाख रुपये कर दिया गया और मामला रफा-दफा कर दिया गया। इसी तरह मटियरा ग्राम पंचायत में भी लगभग 65 लाख रुपये की भारी-भरकम वसूली अधिरोपित थी, लेकिन वहां भी धरातल पर काम पूरा हुए बिना महज 10 लाख रुपये का सरकारी खजाने में भुगतान कराकर केस फाइल बंद कर दी गई। यदि इन दोनों मामलों की उच्च स्तरीय पड़ताल होती है, तो केवल इन दो पंचायतों में ही एक करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व की क्षति का बड़ा खुलासा हो सकता है।

भौतिक सत्यापन और फाइलों की उच्च स्तरीय जांच की मांग

इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि जब निर्माण कार्य वास्तव में अपूर्ण थे, तो तकनीकी अधिकारियों ने किस आधार पर उनके पूरे होने की रिपोर्ट स्वीकार की और क्या मौके पर जाकर कोई भौतिक सत्यापन किया गया था। इस कथित प्रशासनिक शिथिलता के खिलाफ ग्रामीणों और समाजसेवियों ने मोर्चा खोलते हुए मांग की है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान धारा 40/92 के तहत बंद किए गए सभी मामलों की किसी स्वतंत्र एजेंसी से उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। वर्तमान में क्षेत्र के नागरिकों की नजरें राज्य सरकार और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो जैसी जांच एजेंसियों के रुख पर टिकी हैं कि क्या भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने वाले इस तंत्र पर कोई दंडात्मक कार्रवाई होती है या नहीं।

10 साल की उम्र से जुर्म की दुनिया में था महताब, एनकाउंटर के बाद सामने आए चौंकाने वाले खुलासे

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शामली: उत्तर प्रदेश के पश्चिमी छोर पर स्थित शामली जिले में पुलिस प्रशासन को अपराध नियंत्रण की दिशा में एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। आदर्श मंडी और कांधला थाना पुलिस की संयुक्त टीम के साथ हुई एक भीषण मुठभेड़ में कुख्यात मुकीम काला गिरोह का बेहद शातिर और 50 हजार रुपये का इनामी हिस्ट्रीशीटर बदमाश महताब उर्फ बेचैन मारा गया है। यह मुठभेड़ उस वक्त हुई जब आरोपी अपने एक अन्य साथी के साथ मिलकर दो सगे किसान भाइयों से असलहे के बल पर लूटपाट कर भाग रहा था। इस क्रास फायरिंग के दौरान अदम्य साहस का परिचय देने वाले आदर्श मंडी थाने के उपनिरीक्षक (दरोगा) दीपचंद भी हाथ में गोली लगने से गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं।

मुजफ्फरनगर हाईवे पर आधी रात को किसान भाइयों से हुई थी लूट

पुलिस अधीक्षक (एसपी) एनपी सिंह द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वारदात 26 जून की देर रात करीब तीन बजे की है। बाबरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम हाथी करौदा के निवासी नरेंद्र अपने सगे भाई नरेशपाल के साथ मोटरसाइकिल से आदर्श मंडी क्षेत्र के ग्राम जलाल स्थित अपने खेतों में सिंचाई (पानी लगाने) के लिए जा रहे थे। जैसे ही दोनों भाई मुजफ्फरनगर हाईवे पर जलालपुर कट के पास पहुंचे, तभी घात लगाकर बैठे दो अज्ञात बाइक सवार अपराधियों ने उन्हें रोक लिया।

बदमाशों ने किसानों की कनपटी पर तमंचा सटाकर जान से मारने की धमकी दी और उनसे बाइक की चाबी, मोबाइल फोन और जेब में रखे करीब 200 रुपये नकद लूट लिए। जब किसानों ने इसका विरोध करने का प्रयास किया, तो बदमाश दहशत फैलाने के लिए हवा में गोलियां बरसाते हुए वहां से रफूचक्कर हो गए। पीड़ितों ने बिना वक्त गंवाए तुरंत इस डकैती की सूचना आदर्श मंडी पुलिस को दी, जिसके बाद समूचे जिले में नाकेबंदी कर सघन चेकिंग अभियान शुरू किया गया।

12 किलोमीटर दूर खंदरावली पुलिया के पास घिरे बदमाश, दरोगा को लगी गोली

लूट की वारदात के ठीक एक घंटे बाद, घटना स्थल से लगभग 12 किलोमीटर दूर कांधला थाना क्षेत्र में खंदरावली पुलिया के पास नलकूप के निकट पुलिस की घेराबंदी देखकर बदमाशों ने खुद को फंसता पाया। पुलिस को देखते ही अपराधियों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। बदमाशों की ओर से करीब 12 से अधिक राउंड गोलियां चलाई गईं, जिसमें से एक गोली सीधे दरोगा दीपचंद के हाथ को चीरती हुई निकल गई।

पुलिस टीम ने भी आत्मरक्षार्थ जवाबी कार्रवाई करते हुए मोर्चा संभाला और पलटवार किया। दोनों ओर से हुई इस भीषण गोलीबारी में कैराना के मोहल्ला आलकला का रहने वाला हिस्ट्रीशीटर महताब गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा, जबकि उसका दूसरा साथी अंधेरे और खेतों की आड़ का फायदा उठाकर मौके से भागने में सफल रहा। पुलिस ने तत्काल दोनों घायलों को इलाज के लिए जिला चिकित्सालय भिजवाया, जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद बदमाश महताब को मृत घोषित कर दिया, वहीं घायल दरोगा का उपचार जारी है।

मौके से अत्याधुनिक हथियार और कारतूसों का जखीरा बरामद

एनकाउंटर के बाद फॉरेंसिक और पुलिस टीम ने जब घटना स्थल की बारीकी से पड़ताल की, तो मारे गए अपराधी के पास से भारी मात्रा में अवैध हथियार और लूटी गई सामग्री बरामद हुई। पुलिस ने मौके से:

  • एक 9 एमएम (9mm) की आधुनिक पिस्टल और एक स्वचालित कार्बाइन।

  • 13 जिंदा कारतूस और 8 खाली खोखे।

  • किसानों से लूटा गया मोबाइल फोन, नकदी और उनकी मोटरसाइकिल की चाबी।

  • वारदात में इस्तेमाल की गई बिना नंबर की एक संदिग्ध बाइक बरामद की है।

सिर्फ 10 साल की उम्र में की थी पहली हत्या, तीन राज्यों में था आतंक का पर्याय

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मुठभेड़ में ढेर हुआ महताब उर्फ बेचैन बचपन से ही बेहद क्रूर और शातिर दिमाग का अपराधी था। उसने अपराध की दुनिया में अपना पहला कदम महज 10 साल की उम्र में रखा था, जब उसने वर्ष 2000 में कैराना के मोहल्ला शेखबद्दा निवासी रहीसुद्दीन पहलवान के 12 वर्षीय मासूम बेटे आरिफ को घर से बुलाकर उसकी बेरहमी से गला घोंटकर हत्या कर दी थी। इस खौफनाक वारदात का मुकदमा आज भी जुवेनाइल (बाल) कोर्ट में लंबित था।

समय के साथ महताब जेब कतरी और नकबजनी से आगे बढ़ते हुए कुख्यात मुकीम काला गैंग का मुख्य शूटर बन गया। उस पर शामली, सहारनपुर और हरियाणा के पानीपत में हत्या, डकैती, रंगदारी, लूट और जानलेवा हमले के करीब 47 संगीन आपराधिक मामले दर्ज थे। वह कैराना थाने का घोषित हिस्ट्रीशीटर (एचएस नंबर 349 ए) था। हाल ही में वह थानाभवन शुगर मिल के सहायक प्रबंधक अरविंद कुमार से लूटपाट करने और हरियाणा पुलिस की एक महिला आरक्षी ज्योति मलिक से सोने के आभूषण लूटने के मामले में वांछित चल रहा था। इसी के चलते डीआईजी रेंज की ओर से उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था। 2017 के बाद से वह अपनी पहचान छिपाकर सहारनपुर में ठिकाना बदले हुए था।

कड़े सुरक्षा घेरे में पैतृक कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक

मुठभेड़ में मारे जाने के बाद महताब के शव का डॉक्टरों के पैनल द्वारा पोस्टमार्टम कराया गया। शाम के वक्त कागजी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद पुलिस ने शव उसके परिजनों को सौंप दिया। देर शाम भारी सुरक्षा बंदोबस्त और पुलिस बल की मौजूदगी के बीच महताब के शव को कैराना की टीचर्स कॉलोनी स्थित उसके पैतृक कब्रिस्तान ले जाया गया, जहां धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार उसे सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। एसपी एनपी सिंह ने बताया कि मौके से फरार हुए दूसरे डकैत की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की स्वाट (SWAT) और सर्विलांस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं, और उसके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

सड़क और पुल के अभाव में दर्दनाक हालात, खटिया पर नदी पार करते समय महिला ने दिया बच्चे को जन्म

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छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के अमरवाड़ा विकासखंड से सरकारी विकास के दावों की जमीनी हकीकत बयां करती एक बेहद विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है। बुनियादी सुविधाओं की घोर कमी के चलते एक गर्भवती महिला को उफनती हुई नदी के तेज बहाव के बीच चारपाई (खटिया) पर लेटकर सफर तय करना पड़ा। कनेक्टिविटी और खराब रास्तों की वजह से समय पर आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा भी गांव तक नहीं पहुंच पाई, जिसके परिणामस्वरूप तड़पती महिला का रास्ते में ही प्रसव हो गया। इस गंभीर वाकये ने क्षेत्र की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और सड़क संपर्क के अभाव को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।

दशकों पुराना दर्द और उफनती नदी की मजबूरी

यह पूरा मामला क्षेत्र के लोहड़ी मोहल्ला (ग्राम हथोड़ा) का है, जहां लगभग 20 परिवारों का बसेरा है। इन ग्रामीणों को मुख्य सड़क मार्ग तक पहुंचने के लिए अनिवार्य रूप से एक स्थानीय नदी को पार करना पड़ता है। पिछले कई दशकों से यहां के निवासी शासन-प्रशासन से एक अदद पुल के निर्माण की गुहार लगा रहे हैं, परंतु विभागीय उदासीनता के चलते आज तक उनकी इस बुनियादी मांग को पूरा नहीं किया गया। वर्षा ऋतु के आते ही जब नदी का जलस्तर खतरे के निशान के पास पहुंच जाता है, तब इन ग्रामीणों की परेशानियां और जान का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

जांबाज युवाओं का हौसला और रास्ते में ही प्रसव

बीते बुधवार को मोहल्ले में रहने वाली एक गर्भवती महिला को अचानक तीव्र प्रसव पीड़ा शुरू हुई, जिसके बाद आशा कार्यकर्ता ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत 108 एम्बुलेंस को फोन किया। हालांकि, दुर्गम इलाका और खराब नेटवर्क कनेक्टिविटी होने के कारण एम्बुलेंस समय पर वहां नहीं पहुंच सकी। महिला की लगातार बिगड़ती नाजुक स्थिति को देख गांव के कुछ साहसी युवकों ने हिम्मत दिखाई और महिला को खटिया पर लिटाकर उफनती नदी पार कराने का साहसिक निर्णय लिया। जान की परवाह न करते हुए युवाओं ने पानी के तेज थपेड़ों के बीच चारपाई को संभाला, लेकिन इसी जद्दोजहद के दौरान रास्ते में ही महिला की डिलीवरी हो गई, जिसके बाद जच्चा-बच्चा को मोटरसाइकिल के जरिए जैसे-तैसे अस्पताल पहुंचाया गया।

जच्चा-बच्चा की कुशलक्षेम और ग्रामीणों का भारी आक्रोश

अमरवाड़ा के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. के. ठाकुर के अनुसार, घोघरा गांव के कंवारी मोहल्ले की रहने वाली सविता विश्वकर्मा को प्रसव के बाद चिकित्सालय लाया गया था, जहां प्राथमिक उपचार के बाद वर्तमान में मां और नवजात शिशु दोनों पूरी तरह सुरक्षित एवं स्वस्थ हैं। हालांकि, प्रशासनिक दस्तावेजों और स्थानीय लोगों के दावों में गांव के नाम को लेकर थोड़ा तकनीकी विरोधाभास है, लेकिन इस दर्दनाक जमीनी हकीकत को झुठलाया नहीं जा सकता। इस घटना के सार्वजनिक होने के बाद से ही पूरे अंचल के ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी और आक्रोश व्याप्त है। लोगों ने जनप्रतिनिधियों पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए मांग की है कि कागजी विकास से इतर यहां अविलंब पुल और पक्की सड़क का निर्माण शुरू कराया जाए ताकि भविष्य में किसी को ऐसे जानलेवा हालातों से न गुजरना पड़े।

गाजा पर भारत के रुख को लेकर सोनिया गांधी का आर्टिकल, BJP ने साधा तीखा निशाना

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नई दिल्ली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने गाजा पट्टी में जारी मानवीय संकट पर केंद्र की मोदी सरकार के रुख को लेकर तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने एक लेख के माध्यम से आरोप लगाया कि भारत सरकार फिलिस्तीन के न्यायसंगत अधिकारों के समर्थन की अपनी दशकों पुरानी ऐतिहासिक और पारंपरिक नीति को दरकिनार कर रही है और वर्तमान में इजरायल के साथ द्विपक्षीय संबंधों को अनुचित प्राथमिकता दी जा रही है। सोनिया गांधी के अनुसार, गाजा संकट के प्रति भारत का यह बदला हुआ नजरिया देश की दीर्घकालिक विदेश नीति की प्रासंगिकता और दिशा पर गंभीर सवालिया निशान लगाता है।

गाजा में मानवीय त्रासदी और वैश्विक चुप्पी पर चिंता

सोनिया गांधी ने वैश्विक संस्थाओं की रिपोर्टों का हवाला देते हुए लिखा कि गाजा में जारी सैन्य संघर्ष ने अभूतपूर्व तबाही मचाई है, जिसकी सबसे बड़ी कीमत वहां के निर्दोष और आम नागरिकों को चुकानी पड़ रही है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के जरिए रेखांकित किया कि इस युद्ध में अब तक 20 हजार से अधिक मासूम बच्चों की असमय मौत हो चुकी है, जबकि 44 हजार से ज्यादा बच्चे गंभीर रूप से घायल और अपाहिज हुए हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की विफलता पर भी गहरा क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि इतने बड़े पैमाने पर मिल रहे साक्ष्यों और अंतरराष्ट्रीय कानूनी अपीलों के बावजूद वैश्विक शक्तियां इस भीषण रक्तपात को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई हैं।

नीतिगत बदलाव से भारत की वैश्विक छवि को नुकसान का दावा

कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार की भूमिका पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि नई दिल्ली ने गाजा के लोगों की इस असीम पीड़ा और मानवाधिकारों के हनन पर रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है। उन्होंने याद दिलाया कि भारत हमेशा से ही फिलिस्तीनी नागरिकों के अधिकारों का एक मजबूत और मुखर पैरोकार रहा है, ऐसे में अपनी इस स्थापित कूटनीतिक नीति से पीछे हटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि और साख को गहरी ठेस पहुंचा सकता है। सोनिया गांधी के मुताबिक, इस संवेदनशील विषय पर सरकार की निरंतर खामोशी नैतिक और रणनीतिक, दोनों ही दृष्टिकोण से तर्कसंगत नहीं है और उन्होंने केंद्र से फिलिस्तीन के समर्थन में अपनी आवाज पुनः बुलंद करने का आग्रह किया।

भारतीय जनता पार्टी का पलटवार और वोट बैंक की राजनीति का आरोप

सोनिया गांधी के इन गंभीर आरोपों पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बेहद आक्रामक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी देश की संवेदनशील विदेश नीति को भी हमेशा अपनी संकीर्ण वोट बैंक की राजनीति के चश्मे से देखती आई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने गाजा और फिलिस्तीन के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंचों और संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में युद्ध विराम के प्रस्तावों पर मतदान के दौरान अपना रुख पूरी तरह साफ किया है और युद्धग्रस्त क्षेत्र में लगातार मानवीय एवं चिकित्सा सहायता सामग्री भी भेजी है। भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए ही लंबे समय तक इजरायल के साथ देश के रणनीतिक संबंधों को विकसित नहीं होने दिया और उनकी यह चिंता केवल चुनिंदा वैश्विक मुद्दों पर ही दिखाई देती है।

BSP में आकाश आनंद की भूमिका पर सवाल, आखिर क्यों नहीं मिली कोई बड़ी जिम्मेदारी?

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लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर अपनी सांगठनिक और चुनावी रणनीतियों को धार देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में विभिन्न विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों के चयन और स्क्रीनिंग की प्रक्रिया भी युद्ध स्तर पर चल रही है। हालांकि, इस पूरे चुनावी घटनाक्रम के बीच पार्टी के भीतर एक बड़ा सस्पेंस भी गहरा गया है। बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद की चुनावी और संगठनात्मक निर्णयों में किसी भी तरह की सक्रिय भूमिका दिखाई न देने से कैडर और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। खुद बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा भी अब तक आकाश आनंद की भावी भूमिका को लेकर पार्टी स्तर पर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है, जिससे असमंजस और बढ़ गया है।

पार्टी के रणनीतिकारों और आंतरिक सूत्रों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की मौजूदा जमीनी राजनीति में आकाश आनंद की अनुपस्थिति या निष्क्रियता से बसपा को चुनावी मोर्चे पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। भले ही आकाश आनंद के पास प्रत्यक्ष रूप से चुनाव लड़ने का अनुभव न हो, लेकिन वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के मुखिया और सांसद चंद्रशेखर आजाद के बढ़ते सियासी प्रभाव का मुकाबला करने के लिए बसपा को एक मजबूत और आक्रामक युवा चेहरे की सख्त जरूरत है।

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के दौरान एक नाटकीय घटनाक्रम में जब आकाश आनंद की पार्टी पदों पर वापसी हुई थी, तब उन्हें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की प्रत्यक्ष राजनीति से दूर रखने की आंतरिक रूप से सहमति बनी थी। हिंदी पट्टी के इन दो सबसे प्रमुख राज्यों में, जहां कभी बहुजन समाज पार्टी का सबसे मजबूत कोर जनाधार रहा है, वहां आकाश को किसी बड़ी जिम्मेदारी से महरूम रखना पार्टी के भविष्य और चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है।

सोशल इंजीनियरिंग के लिए कद्दावर ब्राह्मण चेहरों की तलाश

दूसरी तरफ, साल 2007 के अपने ऐतिहासिक 'सोशल इंजीनियरिंग' (ब्राह्मण-दलित गठजोड़) के फॉर्मूले को दोबारा जीवित कर उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी का ख्वाब देख रही बसपा के सामने इस समय बड़े ब्राह्मण नेताओं का संकट खड़ा है। वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में अब तक किसी भी अन्य प्रमुख दल के बड़े या कद्दावर ब्राह्मण चेहरे ने बसपा का दामन नहीं थामा है। फिलहाल पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने वाले नए चेहरों में सबसे बड़ी संख्या मुस्लिम और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के नेताओं की ही है।

2007 की तुलना में बिखरा सतीश चंद्र मिश्रा का कुनबा, माधोगढ़ से नई शुरुआत

संसदीय इतिहास गवाह है कि वर्ष 2007 में जब मायावती ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी, तब बसपा खेमे में ब्राह्मण नेताओं की एक लंबी कतार मौजूद थी। उस दौर में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के परिवार और सगे-संबंधियों के ही करीब एक दर्जन से ज्यादा रसूखदार चेहरे सीधे बसपा से जुड़े हुए थे और संगठन में मजबूत पकड़ रखते थे। हालांकि, समय बदलने के साथ अब इस कुनबे से केवल सतीश चंद्र मिश्रा ही पार्टी में सक्रिय बचे हैं।

इस कमी को पाटने और ब्राह्मण समाज के बीच अपनी गंभीर पैठ साबित करने के लिए बहुजन समाज पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए जालौन जिले की माधोगढ़ सीट से आशीष पांडेय को अपना पहला आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इस टिकट वितरण के जरिए बसपा ने एक बार फिर ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की बड़ी कवायद शुरू की है। पार्टी आलाकमान की ओर से यह संकेत भी दिए गए हैं कि आने वाले दिनों में सामान्य सीटों पर बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के उम्मीदवारों को तरजीह दी जाएगी।

अयोध्या दौरे पर केजरीवाल के बयान से संत नाराज, राम मंदिर चढ़ावा विवाद ने पकड़ा तूल

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अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी को लेकर जारी विवाद के बीच आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले हनुमानगढ़ी में शीश नवाया और इसके बाद श्री राम जन्मभूमि मंदिर में जाकर रामलला के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया, जहां उनके साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह भी उपस्थित रहे। दर्शन के उपरांत केजरीवाल ने मंदिर के चढ़ावे में हुई कथित चोरी को लेकर प्रदेश की भाजपा सरकार और प्रशासनिक जांच की गति पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में केवल निचले स्तर के छोटे कर्मियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है, जबकि उच्च पदों पर बैठे रसूखदार और प्रभावशाली लोगों को साफ तौर पर बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

केजरीवाल के गंभीर आरोप और सरकार से निष्पक्षता की अपील

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए चढ़ावे में किसी भी प्रकार की धांधली बेहद निंदनीय है और इस विषय की निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष आग्रह किया कि वे इस मामले में पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित करें ताकि असली दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिल सके और किसी भी अपराधी को कोई राजनीतिक संरक्षण न प्राप्त हो पाए। दूसरी तरफ, साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास ने केजरीवाल के इन बयानों को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाने और स्थिति मजबूत करने के लिए ऐसे हथकंडे अपना रहे हैं, जिनकी जितनी निंदा की जाए वो कम है। महंत ने आरोप लगाया कि जिसकी सनातन धर्म और भगवान राम में वास्तविक आस्था होगी वही इसकी मर्यादा समझेगा, जबकि केजरीवाल के मन में रामलला के प्रति कोई सच्ची भक्ति या श्रद्धा नहीं है।

संत समाज की तीखी प्रतिक्रिया और तीखे कटाक्ष

केजरीवाल के इस अयोध्या दौरे और उनके द्वारा लगाए गए आरोपों पर तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने भी बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी के प्रमुख रामलला के दरबार में केवल गंदी राजनीति के इरादे से आए थे। उन्होंने एक कहावत का हवाला देते हुए कहा कि नकली फूलों के पीछे कभी असलियत को छुपाया नहीं जा सकता और न ही कागजी फूलों से कभी खुशबू आ सकती है। परमहंस आचार्य ने जोर देकर कहा कि आस्था और धर्म के पवित्र केंद्रों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक स्वार्थ और लाभ के लिए करना सर्वथा अनुचित है तथा अयोध्या की पावन गरिमा और मर्यादा को अक्षुण्ण बनाए रखना हर नागरिक और नेता का परम कर्तव्य है।

चोरी के मामले की जांच और बढ़ता सियासी घमासान

इस बीच, राम मंदिर के कथित चढ़ावा चोरी प्रकरण की कमान विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों और विशेष जांच दल (एसआईटी) ने संभाल रखी है। इस मामले में अब तक कई संदिग्धों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की जा चुकी है और पुलिस साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है। इस प्रशासनिक मुस्तैदी के समानांतर ही इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक दलों के बीच शह-मात का खेल और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। जहां एक ओर सत्तारूढ़ दल और सरकार का दावा है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से आगे बढ़ रही है और किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा, वहीं दूसरी ओर समूचा विपक्ष इस जांच की प्रामाणिकता पर निरंतर सवालिया निशान लगा रहा है।

तारातला गोदाम हादसा: मृतकों की संख्या बढ़कर 16, चौथे दिन भी जारी रेस्क्यू ऑपरेशन

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक गोदाम के मलबे में तब्दील होने की भीषण दुर्घटना में मरने वालों का आंकड़ा शनिवार को बढ़कर 16 तक पहुंच गया है। हादसे में गंभीर रूप से घायल एक और व्यक्ति ने अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इस बीच विभिन्न आपदा प्रबंधन एजेंसियों के बचाव दल घटना के चौथे दिन भी मलबे के विशाल ढेर में जिंदगी की तलाश करने और फंसे हुए लोगों की स्थिति स्पष्ट करने के लिए लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं।

खोज अभियान के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग

राहत कार्य में जुटे प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, मलबे की गहराई में फंसे संभावित जीवित व्यक्तियों का पता लगाने के लिए अत्याधुनिक कैमरों की मदद ली जा रही है। इसके अतिरिक्त, तकनीकी टीमें मोबाइल फोन टावर के डेटा का विश्लेषण कर रही हैं ताकि मलबे के नीचे सक्रिय फोन रखने वाले व्यक्तियों की सटीक लोकेशन का निर्धारण किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता खोज और जीवन रक्षा अभियान को सफलतापूर्वक पूर्ण करना है, जिसके तहत ढही हुई संरचना के प्रत्येक हिस्से की बेहद बारीकी से पड़ताल की जा रही है। मलबे को पूरी तरह हटाने की भारी मशीनरी का प्रयोग तभी किया जाएगा, जब यह सुनिश्चित हो जाएगा कि अब कोई भी व्यक्ति अंदर नहीं दबा है।

अस्पताल में एक और घायल की मौत और रेस्क्यू की स्थिति

प्रशासनिक सूत्रों ने पुष्टि की है कि बसन्ती क्षेत्र के रहने वाले घायल नागरिक खालिक सरदार का अस्पताल में इलाज चल रहा था, जहां चोटों के कारण उनकी मृत्यु हो गई। इस दुखद क्षति के बाद हादसे में जान गंवाने वालों की कुल संख्या 16 हो गई है, जबकि 17 अन्य घायलों का विभिन्न चिकित्सालयों में उपचार किया जा रहा है। रेस्क्यू ऑपरेशन को अत्यधिक सतर्कता और वैज्ञानिक ढंग से अंजाम दिया जा रहा है ताकि वहां काम कर रहे बचाव कर्मियों की सुरक्षा को कोई खतरा न हो और मलबे में दबे किसी भी पीड़ित को सुरक्षित निकाला जा सके।

भारतीय रेलवे का सहयोग और दुर्घटना की उच्च स्तरीय जांच

उल्लेखनीय है कि बुधवार की दोपहर को यह निर्माणाधीन गोदाम अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गया था। मलबे में तब्दील हुई मुड़ी हुई स्टील और लोहे की भारी संरचनाओं को काटने व हटाने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) ने भारतीय रेलवे से तकनीकी सहायता मांगी थी, जिसके बाद शुक्रवार से रेलवे की विशेषज्ञ टीमें और कटर मशीनें भी इस महाअभियान का हिस्सा बन चुकी हैं। इस हादसे के संबंध में दर्ज की गई प्राथमिकी (एफआईआर) में नामजद पांच आरोपियों में से मुख्य ठेकेदार का शव भी घटनास्थल के मलबे से ही बरामद हुआ है। पुलिस प्रशासन ने गोदाम के गिरने के वास्तविक तकनीकी कारणों और निर्माण की गुणवत्ता का पता लगाने के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया है।

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