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T20 World Cup में भारत के साथ मैच खेलने को तैयार पाकिस्तान, ICC के सामने रखी 3 शर्त, नहीं मानेगा इंडिया!

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आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबले पर संकट के काले बादल छाए हुए हैं. इस मेगा ईवेंट में पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ खेलने से इनकार कर दिया था. हालांकि कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अब पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड भारत के साथ मैच खेलने को तैयार हो गया है और इसके लिए उसने आईसीसी के सामने तीन डिमांड रखी है.

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने क्या रखी शर्त?

सामने आ रही रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चीफ मोहसिन नकवी ने बीते दिन रविवार को आईसीसी के साथ मीटिंग की है, जिसमें उन्होंने भारत के खिलाफ मैच खेलने पर सहमति जताई है. हालांकि, इसके लिए उन्होंने आईसीसी के सामने तीन शर्त रखी है.रिपोर्ट्स के मुताबिक, नकवी ने अपनी पहली शर्त में वर्ल्ड बॉडी से ज्यादा रेवेन्यू शेयर करने की मांग की है.दूसरी शर्त के तौर पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चीफ ने भारत और पाकिस्तान के बीच बाईलेटरल सीरीज फिर से शुरू करने की मांग रखी है. बता दें, भारत और पाकिस्तान अभी सिर्फ आईसीसी और एशिया कप जैसे टूर्नामेंट्स में एक दूसरे के खिलाफ खेलते हैं. दोनों देशों के बीच बढ़ते विवाद को देखते हुए बाईलेटरल सीरीज बंद कर दी गई थी, जिसे पाकिस्तान ने फिर से शुरू करने की मांग कर दी है. दोनों देशों के बीच 2012 में आखिरी बाईलेटरल सीरीज खेली गई थी. ऐसे में भारत शायद ही पाकिस्तान की यह शर्ते माने.
इसके अलावा पीसीबी ने अपनी तीसरी शर्त में कहा है कि टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय खिलाड़ी पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ मिलाएं.

एशिया कप में नहीं मिलाया हाथ

आपको बता दें, भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव और आतंकी हमलों का प्रभाव क्रिकेट के मैदान में भी देखने को मिला. पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था और भारतीय खिलाड़ियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए एशिया कप 2025 के दौरान पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया था. इसके अलावा भारतीय टीम ने जीती हुई ट्रॉफी भी मोहसिन नकवी के हाथों से नहीं ली थी.

केंद्र सरकार ने 11 साल बाद बढ़ाई सरकारी वकीलों की फीस, मंत्रालय जारी कर चुका है अधिसूचना   

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अदालतों में सरकार की ओर से पैरवी करने वाले वकीलों को बड़ी राहत देते हुए उनकी फीस में बढ़ोतरी कर दी है। लगभग 11 साल बाद यह संशोधन किया गया है। केंद्रीय कानून मंत्रालय ने 5 फरवरी को इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी है, जिसके तहत विभिन्न श्रेणियों के सरकारी वकीलों को अब पहले की तुलना में काफी अधिक पारिश्रमिक मिलेगा। 
अधिसूचना के अनुसार, नियमित अपील और अंतिम सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश होने वाले ‘ए’ श्रेणी के वकीलों को अब प्रति मामले में प्रति दिन 21,600 रुपये का भुगतान किया जाएगा। वहीं ‘बी’ और ‘सी’ श्रेणी के वकीलों को 14,400 रुपये प्रति दिन मिलेंगे। इससे पहले ‘ए’ श्रेणी के वकीलों को 13,500 रुपये और ‘बी’ व ‘सी’ श्रेणी के वकीलों को 9,000 रुपये प्रति दिन फीस मिलती थी। सरकारी वकीलों की फीस में यह संशोधन अक्टूबर 2015 के बाद पहली बार किया गया है। कानून मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह बढ़ोतरी केवल नियमित अपील और अंतिम सुनवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य प्रकार के मामलों, विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों के साथ बैठकों (कॉन्फ्रेंस) और सलाह-मशविरा करने की फीस में भी संशोधन किया गया है। इसके अलावा, दिल्ली और राज्यों की राजधानियों में पेश होने वाले वकीलों की फीस में भी बढ़ोतरी की गई है। 
कानून मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है, कि महंगाई, कानूनी पेशे से जुड़े बढ़ते खर्च और योग्य पेशेवरों को बनाए रखने की जरूरत को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। अधिकारी के अनुसार, लंबे समय से सरकारी वकीलों की ओर से फीस बढ़ाने की मांग की जा रही थी, जिसे अब पूरा किया गया है। 
पूर्व केंद्रीय विधि सचिव और वर्तमान में विधि आयोग की सदस्य सचिव अंजू राठी राणा ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट करते हुए कहा, कि केंद्र सरकार के वकीलों के लिए फीस संशोधन की अधिसूचना अब लागू हो गई है। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान इस संबंध में निर्णय लिया गया था और यह एक दशक से अधिक समय से लंबित मामला था। उन्होंने कहा कि अदालतों में केंद्र सरकार का प्रभावी प्रतिनिधित्व करने के लिए योग्य और प्रतिभाशाली वकीलों को बनाए रखना जरूरी है, और यह फीस वृद्धि उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस फैसले से देशभर में सरकारी वकीलों में संतोष और उत्साह का माहौल है। 

IND vs PAK T20 WC: बहिष्कार की हवा निकली! पाकिस्तान की नई चाल, भारत से खेलने के लिए अब शर्तों की ढाल लेकर आया

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भारत-पाकिस्तान मुकाबले पर छाया सस्पेंस अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। जिस मैच को लेकर बहिष्कार की बात सामने आई थी, उसी पर अब यू-टर्न की खबरें आ रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) भारत के खिलाफ खेलने को तैयार है, लेकिन उसने आईसीसी के सामने तीन अहम शर्तें रख दी हैं।लाहौर में रविवार, 8 फरवरी को पीसीबी और आईसीसी के बीच हाई-लेवल बैठक हुई। यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब ग्रुप स्टेज में दोनों टीमों की भिड़ंत में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। आईसीसी चाहता है कि दुनिया के सबसे हाई-वोल्टेज और कमाई वाले मुकाबले पर किसी तरह का खतरा न रहे।

क्या हैं पाकिस्तान की तीन मांगें?
क्रिकबज की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर पाकिस्तान को अपना बहिष्कार वापस लेना है तो उसे कुछ गारंटी चाहिए। पीसीबी ने कथित तौर पर ये तीन शर्तें रखी हैं:
आईसीसी रेवेन्यू में बड़ा हिस्सा
भारत के साथ द्विपक्षीय क्रिकेट की बहाली
हैंडशेक प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करना

इन मांगों ने साफ कर दिया है कि मामला सिर्फ एक मैच का नहीं, बल्कि लंबे समय के रिश्तों और आर्थिक हिस्सेदारी का भी है। हालांकि, पाकिस्तान की इन मांगों का कोई मतलब नहीं बनता, क्योंकि भारत लंबे समय से पाकिस्तान से द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेलता। जहां तक आईसीसी रेवेन्यू में बड़े हिस्से की बात है तो यह तभी संभव है जब आप आईसीसी को उतना रेवेन्यू जनरेट करके दें। भारत क्रिकेट का बड़ा मार्केट है। पाकिस्तान क्रिकेट के बिग थ्री में भी नहीं आता है।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पाकिस्तान सरकार ने सार्वजनिक रूप से एलान किया कि टीम भारत के खिलाफ नहीं खेलेगी, भले ही मैच न्यूट्रल वेन्यू पर क्यों न हो। सरकार ने इसके पीछे स्पष्ट वजह नहीं बताई।क्रिकेट जगत में यह माना गया कि पाकिस्तान का रुख बांग्लादेश के समर्थन में है, जिसने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए अपने मैच भारत से बाहर कराने की मांग की थी, जिसे आईसीसी ने खारिज कर दिया।

बातचीत की कोशिशें तेज

तनाव बढ़ने के बाद आईसीसी ने तुरंत पहल की। लाहौर में हुई बैठक में पीसीबी चेयरमैन मोहसिन नकवी, आईसीसी डिप्टी चेयरमैन इमरान ख्वाजा और बीसीबी अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम बुलबुल मौजूद रहे। आईसीसी के सीईओ संजोग गुप्ता वर्चुअली जुड़े। क्रिकबज के मुताबिक, बांग्लादेश भी आईसीसी से मुआवजे की मांग कर सकता है, और इस समझौते को आगे बढ़ाने में पाकिस्तान की भूमिका अहम हो सकती है।

फैसला किस दिशा में?

अब सबकी नजर इस बात पर है कि आईसीसी इन शर्तों पर क्या रुख अपनाता है। अगर कोई रास्ता निकलता है तो क्रिकेट फैंस को राहत मिलेगी, क्योंकि भारत-पाकिस्तान मैच सिर्फ खेल नहीं, बल्कि वैश्विक इवेंट है।

गुना में कैदियों की जमकर पिटाई! डिप्टी जेलर पर पेड़ से बांधकर डंडे से पीटने का आरोप

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गुना: मध्य प्रदेश के गुना स्थित चाचौड़ा उप जेल में कैदियों के साथ बर्बरता का मामला सामने आया है. चाचौड़ा का एक वीडियो आजकल सोशल मीडिया पर जमकर सर्कुलेट हो रहा है. आरोप है कि वीडियो में डिप्टी जेलर उम्मेद सिंह मोहाने कथित तौर पर कैदियों को पेड़ से बांधकर पीटते नजर आ रहे हैं. बताया जा रहा है कि यह वीडियो लगभग 6 महीना पुराना है, लेकिन हाल ही में सामने आने के बाद मामला गंभीर हो गया.

 

चाचौड़ा में कैदियों की जमकर पिटाई

 

आरोप है कि चाचौड़ा उप जेल में कैदियों से पैसों की मांग और सुविधाओं के नाम पर उनके परिजनों से अवैध वसूली की जाती है. अब मारपीट का कथित वीडियो सामने आने के बाद इन आरोपों को और बल मिला गया है. इस संबंध में गुना जेलर अतुल सिन्हा ने कहा, "मैं अभी उत्तराखंड एक शादी में आया हूं. जेल का एक पुराना वीडियो सर्कुलेट होने की खबर मिली है. डिप्टी जेलर अभी छुट्टी पर हैं. आने के बाद मामले की जांच की जाएगी."

 

वरिष्ठ अधिकारी को सूचना और जांच की मांग

इस मामले में राधौगढ़ एसडीएम रवि मालवीय ने कहा कि "3 दिन पहले कुछ पत्रकार बंधुओं ने अवगत कराया था कि चाचौड़ा जेल में सब जेलर द्वारा कुछ कैदियों के साथ मारपीट की गई है. जिसके संबंध में उन्होंने एक वीडियो भी दिखाया. मैंने वरिष्ठ कार्यालय को सूचित भी किया है और जांच की मांग की है. जिससे पता चल सके कि क्या विषय है और किस बात पर कैदियों से मारपीट की थी. वीडियो में डिप्टी जेलर 3 से 4 लोगों को लाइन से खड़ा करके पीटते दिखाई दे रहे हैं."

एसडीएम रवि मालवीय ने आगे बताया कि "इस संबंध में वरिष्ठ स्तर पर हमने लिख दिया है. अब वरिष्ठ अधिकारी जैसा भी हमें पुट अप करेंगे उस हिसाब से हम जांच करेंगे. डिप्टी जेलर पूर्व से छुट्टियां स्वीकृत करवा ली थीं तो वह अभी छुट्टी में गए हुए हैं. जैसे ही वो आते हैं या फिर जैसे ही वरिष्ठ अधिकारियों से संकेत मिलते हैं उस आधार पर फिर जांच की जाएगी. जब हमने सब जेलर से बात की तो बताया था कि ये 6 माह पुराना वीडियो है. हालांकि पत्रकारों द्वारा इस वीडियो को 3 माह पुराना बताया गया है फिलहाल ये जांच का विषय है."

 

 

    अमेरिका से नहीं डरा ईरान कहा- हम किसी भी देश के दबाव में आने वाले नहीं

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    तेहरान। ओमान में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच हुई हालिया बातचीत ने वैश्विक कूटनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। हालांकि इस मुलाकात को एक अच्छी शुरुआत माना जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि दोनों देशों के बीच मतभेदों की खाई कम होने के बजाय और गहरी होती दिख रही है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। तेहरान ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह केवल परमाणु मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और मिसाइल कार्यक्रम या क्षेत्रीय गुटों के समर्थन जैसे विषयों को बातचीत की मेज से पूरी तरह बाहर रखता है।
    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कड़े लहजे में कहा कि यूरेनियम संवर्धन ईरान का अविभाज्य अधिकार है और यह प्रक्रिया किसी भी कीमत पर नहीं रुकेगी। उन्होंने अमेरिका को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरानी धरती पर किसी भी तरह का हमला हुआ, तो मध्य पूर्व में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकाने ईरान की मिसाइलों के निशाने पर होंगे। अराघची ने ओमान वार्ता को सकारात्मक बताते हुए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से शिष्टाचार भेंट की बात तो स्वीकार की, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि भरोसे की बहाली के लिए अभी एक बहुत लंबा रास्ता तय करना बाकी है। ईरान का मानना है कि समाधान केवल सम्मानजनक बातचीत से ही निकल सकता है, प्रतिबंधों या धमकियों से नहीं। दूसरी ओर, अमेरिका ने इस मामले में डबल गेम की नीति अपनाई है। एक तरफ जहां बातचीत को सफल बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया कार्यकारी आदेश जारी कर ईरान पर आर्थिक शिकंजा और कस दिया है। इस आदेश के तहत ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर भारी टैरिफ और ईरान के तेल निर्यात में शामिल दर्जनों जहाजों व कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाए गए हैं। ट्रंप प्रशासन की ताकत के दम पर शांति की नीति के तहत अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने हाल ही में अरब सागर में तैनात विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन का दौरा कर अपनी सैन्य तैयारियों का प्रदर्शन भी किया। इस कूटनीतिक रस्साकशी के बीच इजरायल की चिंताएं चरम पर हैं। इजरायल चाहता है कि अमेरिका केवल परमाणु कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल नेटवर्क और हिजबुल्लाह व हमास जैसे गुटों को मिलने वाली मदद पर भी कड़ा रुख अपनाए। ईरान द्वारा इन मुद्दों पर बात करने से इनकार करने के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी निर्धारित वाशिंगटन यात्रा को समय से पहले करने का निर्णय लिया है। नेतन्याहू अगले हफ्ते राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात करेंगे, जहां उनके साथ इजरायली वायु सेना के भावी प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल ओमर टिशलर भी होंगे। यह संकेत देता है कि इजरायल अब ईरान के खिलाफ किसी बड़े सैन्य विकल्प या अत्यंत कठोर प्रतिबंधों के लिए अमेरिका पर दबाव बना सकता है। फिलहाल, तेहरान की सड़कों पर आम लोगों के बीच इस बातचीत को लेकर बहुत अधिक उत्साह नहीं है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि जब तक दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े रहेंगे, तब तक किसी ठोस नतीजे पर पहुँचना नामुमकिन है। एक तरफ परमाणु संवर्धन की जिद और दूसरी तरफ प्रतिबंधों का पहाड़—इन दोनों के बीच मध्य पूर्व का भविष्य एक बार फिर अनिश्चितता और युद्ध के बादलों के बीच घिरा नजर आ रहा है।

    औवेसी का मोदी सरकार पर तंज—पेट्रोलियम मंत्री ट्रंप हैं या हरदीप सिंह पुरी?

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    अमेरिका ने फिर दी रुस से तेल खरीदी पर धमकी 

    हैदराबाद । ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने अमेरिका के धमकी भरे बयान पर केंद्र की मोदी सरकार पर कड़ा हमला किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि यदि भारत रूस से तेल खरीदेगा, तब उस पर 25 प्रतिशत टैक्स लगेगा। करीमनगर में जनसभा को संबोधित कर एआईएमआईएम सांसद ओवैसी ने सीधे सवाल उठाया कि भारत का पेट्रोलियम मंत्री डोनाल्ड ट्रंप हैं या हरदीप सिंह पुरी।
    सांसद ओवैसी ने कहा कि अमेरिका में बैठे एक “गोरी चमड़ी वाले इंसान” भारत को धमकी दे रहे हैं, जबकि देश में केंद्रीय मंत्री मौजूद हैं। उन्होंने मोदी सरकार और बीजेपी पर कटाक्ष कर कहा कि यह देशभक्ति नहीं बल्कि जनता के लिए परेशानी पैदा करने वाला राष्ट्रवाद है। उन्होंने आर्थिक पहलू पर भी ध्यान दिलाया कि अगर भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा, तब इसका फायदा चीन को मिलेगा, जो सस्ता तेल खरीद लेगा।
    सांसद ओवैसी ने रूसी कंपनी ‘नयारा’ का उदाहरण देकर पूछा कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप इस पर भी टैक्स लगाएंगे। उन्होंने बीजेपी नेताओं के पाखंडी स्वरूप का उल्लेख कर कहा कि चेहरा दाढ़ी वाला, सिर पर टोपी और शरीर पर शेरवानी हो, लेकिन उनके फैसले आम जनता के लिए परेशानी खड़ी करते हैं।
    इतना ही नहीं उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के बयान को भारत की संप्रभुता पर हमला बताकर केंद्र सरकार को विदेशियों के दबाव में देश की नीतियों को प्रभावित करने वाला करार दिया। ओवैसी ने कहा कि इसतरह के केंद्रीय मंत्री हैं जो ट्रंप से डरते हैं, लेकिन रोज़ाना उनके खिलाफ गाली देते हैं। उन्होंने करीमनगर की जनता से अपील की कि वे उन नेताओं को पहचानें जो विदेशी दबाव में देश की मजबूरी पर समझौता करने को तैयार हैं। इस संबोधन में ओवैसी ने न केवल अमेरिका की धमकी को नकारा बल्कि केंद्र सरकार की नीतियों और आर्थिक फैसलों पर भी सवाल खड़े किए। उनका संदेश स्पष्ट था—देश की संप्रभुता और आम जनता के हित की रक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।

    टी20 वर्ल्ड कप 2026 में पहला मैच खेलते ही चमकी नेपाल की किस्मत, मिला सबसे बड़ा ऑफर

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    टी20 वर्ल्ड कप 2026 का रोमांच जारी है, जिसमें रविवार को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में नेपाल और इंग्लैंड के बीच एक बेहद ही रोमांचक मुकाबला खेला गया. भले ही नेपाल की टीम अपना पहला मुकाबला नहीं जीत पाई हो, लेकिन इंग्लैंड जैसी दिग्गज टीम को उसने कड़ी टक्कर देकर हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. इस रोमांचक मुकाबले में नेपाल ने अंत तक संघर्ष किया और सिर्फ चार रन से मैच गंवाया. नेपाल की इस दमदार परफॉर्मेंस के बाद टीम को एक ऐसा ऑफर मिला, जिसे उनके क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा ऑफर माना जा रहा है.

    नेपाल को मिला बड़ा ऑफर

    दरअसल, टी20 वर्ल्ड कप 2026 के अपने पहले मुकाबले में दमदार प्रदर्शन करते हुए नेपाल ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. इसी कड़ी दक्षिण अफ्रीका के पूर्व दिग्गज तेज गेंदबाज और दुनिया के नंबर-1 गेंदबाज रहे डेल स्टेन ने नेपाल के प्रदर्शन से प्रभावित होकर उन्हें कोचिंग और मेंटरशिप की इच्छा जताई है.

    क्या नेपाल को कोचिंग देगा ये गेंदबाज?

    आपको बता दें, इंग्लैंड के खिलाफ नेपाल के शानदार प्रदर्शन से प्रभावित होकर पूर्व दिग्गज गेंदबाज डेल स्टेन ने सोशल मीडिया पर नेपाल की जमकर तारीफ की है. स्टेन ने एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा है कि अगर भविष्य में टीम को उनकी जरूरत पड़े, तो वह अपनी सेवाएं देने के लिए तैयार हैं. स्टेन का यह बयान नेपाल क्रिकेट के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि वह अपने समय के सबसे खतरनाक गेंदबाजों में गिने जाते रहे हैं.

    कुछ ऐसा रहा मैच का हाल

    रविवार को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में इंग्लैंड और नेपाल के बीच बेहद ही रोमांचक मुकाबला देखने को मिला. इस हाई-वोल्टेज मुकाबले में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 20 ओवर में 7 विकेट खोकर 184 रन बनाए. 185 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी नेपाल अंत तक डटी रही लेकिन फिर उन्हें 4 विकेट से हार का सामना करना पड़ा. मैच का परिणाम आखिरी गेंद पर निकल सका.

    Pakistan Economic Crisis: कर्ज के बोझ तले कराह रहा पाकिस्तान, कर्जा लेकर चल रहे रोजमर्रा के खर्चे

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    पाकिस्तान पिछले कई वर्षों से गहराते आर्थिक संकट से जूझ रहा है। देश में बढ़ता बाहरी कर्ज, सुस्त आर्थिक वृद्धि और कमजोर संरचनात्मक सुधार, जो दशकों की खराब शासन व्यवस्था और बाहरी वित्तपोषण पर अत्यधिक निर्भरता का नतीजा हैं। यह देश की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव बना रहे हैं। 

    पाकिस्तान का कुल कर्ज 134 अरब डॉलर तक पहुंचा

    वन वर्ल्ड ऑउटलुक में प्राकिशत लेख के अनुसार पाकिस्तान का कुल बाहरी कर्ज 2025 के अंत तक लगभग 134 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश को 23-26 अरब डॉलर के बाहरी ऋण सेवा (मूलधन और ब्याज सहित) का सामना करना है, जिससे भुगतान संतुलन पर गंभीर दबाव है।

    सहयोगी देशों के भरोसे जीने को मजबूर है पाकिस्तान 

    हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा पाकिस्तान के 2 अरब डॉलर के कर्ज का रोलओवर किया जाना इस नाजुक वित्तीय स्थिति को दर्शाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह के अस्थायी उपाय पाकिस्तान के सहयोगी देशों UAE, सऊदी अरब और चीन पर निरंतर निर्भरता को रेखांकित करते हैं। इनके सहारे पाकिस्तान तत्काल डिफॉल्ट जोखिम टलता रहा है। हालांकि, यूएई द्वारा केवल एक महीने का विस्तार देना जोखिम धारणा में बदलाव या भू-राजनीतिक कारणों की ओर भी इशारा करता है।

    विदेशी मुद्रा भंडार में कुछ सुधार जरूर दिखा है।

    जनवरी 2026 के अंत तक कुल तरल भंडार 21.29 अरब डॉलर तक पहुंच गया, लेकिन आगामी परिपक्वताओं और आयात आवश्यकताओं के चलते यह स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है।
    अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की 7 अरब डॉलर की एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (EFF), जिसे सितंबर 2024 में मंजूरी मिली थी, स्थिरता के लिए अहम रही है।
    दिसंबर 2025 में दूसरे रिव्यू के पूरा होने के बाद किस्त जारी हुई, लेकिन आगे की प्रगति वित्तीय अनुशासन, कर आधार विस्तार और सार्वजनिक उपक्रमों (SOE) के सुधारों पर निर्भर करेगी।
    रिपोर्ट के अनुसार, इस साल द्विपक्षीय रोलओवर प्रतिबद्धताएं करीब 12 अरब डॉलर की हैं, लेकिन शर्तें अब पहले की तुलना में अधिक व्यावसायिक होती दिख रही हैं।
    आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियों के साथ रोजगार संकट भी गहराता जा रहा है
    आधिकारिक बेरोजगारी दर 2024-25 में बढ़कर करीब 6.9% हो गई, जबकि 2020-21 से 2024-25 के बीच बेरोजगारों की संख्या में 31% (लगभग 14 लाख) की वृद्धि दर्ज की गई।
    सीमित अवसरों, ठहरी हुई मजदूरी और बढ़ती महंगाई के कारण बड़ी संख्या में लोग काम की तलाश में विदेश जा रहे हैं।
    अर्थव्यवस्था की मौजूदा वृद्धि दर करीब 3% रही है, जो तेजी से बढ़ती आबादी और हर साल आवश्यक 15 लाख नई नौकरियों के लिहाज से नाकाफी मानी जा रही है।
    आईएमएफ कार्यक्रमों के तहत करों और ऊर्जा शुल्क में बढ़ोतरी, साथ ही प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़ के असर ने हालात और मुश्किल बना दिए हैं।

    180 करोड़ रुपए की हेरोइन पकड़ी

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    अमृतसर। पंजाब के 2 जिलों (अमृतसर और गुरदासपुर) में 180 करोड़ रुपए की हेरोइन पकड़ी गई है। इसके साथ ही 5.75 लाख रुपए की ड्रग मनी और 2 पिस्टल, 4 मैगजीन और 60 कारतूस भी मिले हैं। पुलिस को शक है कि यह हेरोइन पाकिस्तान से भेजी गई है।
    डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि पुलिस ने गुरदासपुर में दो आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि गिरफ्तार आरोपी भारत में अपने हैंडलरों के माध्यम से पाकिस्तान स्थित हैंडलरों के संपर्क में थे। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस घर का मालिक कौन है और इस तस्करी नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में अंतरराष्ट्रीय नशा तस्कर गिरोह की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता।

    घर में मिली 25 किलो हेरोइन
     अमृतसर में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक स्थित गांव घोगा में अमृतसर देहात पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने संयुक्त ऑपरेशन के तहत एक घर से पाकिस्तान से आई 25 किलोग्राम हेरोइन बरामद की। जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 125 करोड़ रुपय आंकी गई। इतना ही नहीं, इस ऑपरेशन के दौरान पुलिस को 2 पिस्टल, 4 मैगजीन और 60 जिंदा कारतूस भी मिले हैं। आशंका जताई जा रही है कि यह पूरा जखीरा पाकिस्तान से ड्रोन या अन्य माध्यमों के जरिए सीमा पार से भेजा गया था, जिसे आगे पंजाब और देश के अन्य हिस्सों में सप्लाई किया जाना था।

    महाकालेश्वर धाम में जैकलीन फर्नांडिस, एकता कपूर ने मांगा आशीर्वाद, नंदी हॉल में की साधना

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    उज्जैन: बाबा महाकालेश्वर धाम में रविवार को शिव नवरात्रि का तीसरा दिन था. इस दिन भगवान ने शेषनाग धारण कर भक्तों को दर्शन लाभ दिए. दर्शन के क्रम में आम दर्शनार्थियों के साथ रविवार को बड़ी संख्या में फिल्म, टीवी और वेब सीरीज की अभिनेत्रियों का भी तांता लगा रहा. भगवान के दर्शन करने प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस अपने परिजनों के साथ पहुंची, तो वहीं दूसरे ओर एकता कपूर, नीलम कोठारी, दीपशिखा नागपाल, सीमा किरण, विद्या मालवदे ने एक साथ दर्शन लाभ लिए.

     

    सभी एक्ट्रेस ने नंदी हॉल में की साधना

    रविवार को महाकाल मंदिर पहुंचे सभी अभिनेत्रियों ने मंदिर के नंदी हॉल में बैठ शिव साधना की. चांदी द्वार से माथा टेक भगवान का आशीर्वाद लिया. फिल्म अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस का मंदिर समिति और पुजारी परिवार ने स्वागत-सत्कार किया. वहीं, एकता कपूर, नीलम कोठारी, दीपशिखा नागपाल, सीमा किरण, विद्या मालवदे को बाबा महाकाल की चुनरी भेंट कर सम्मान किया गया. सभी एक्ट्रेस ने दर्शन व्यवस्था की खूब तारीफ की.

     

    मंगलनाथ मंदिर के भी दर्शन करने पहुंची एक्ट्रेस

    एकता कपूर के साथ आई अभिनेत्रियों ने श्री महाकाल दर्शन कर विश्व प्रसिद्ध मंगलनाथ मंदिर में भी भगवान के दर्शन किए. सभी ने मंगलनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया. मंगलनाथ मंदिर के पुजारी विपिन शर्मा ने कहा, "मंगलनाथ महादेव मंगल ग्रह के अधिपति हैं, जिनकी पूजा के लिए सभी अभिनेत्रियां पहुंची थीं. सभी लोगों ने विधि विधान से पूजा अर्चना कर भगवान का आशीर्वाद लिया."

     

    वेब सीरीज की सफलता का मांगा आशीर्वाद

    एकता कपूर और उसके साथ आई नीलम कोठारी, दीपशिखा नागपाल, सीमा किरण, विद्या मालवदे अभिनेत्रियों ने बताया कि जल्द ओटीटी पर रागिनी MMS 3 और लॉकअप वेब सीरीज आ रही है. उसकी सफलता के लिए भगवान से कामना की है. पूर्व में भी बाबा के आशीर्वाद से कई वेब सीरीज, टीवी सीरियल और फिल्मों को बड़ी सफलता मिलती रही है.

     

     

     

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