Home Blog Page 7

22 साल की शादी के बाद भी पति से नाराज हैं फराह खान, बताई चौंकाने वाली वजह

0

बॉलीवुड की दिग्गज निर्देशिका और कोरियोग्राफर फराह खान इन दिनों अपने काम के साथ-साथ अपनी निजी जिंदगी और पारिवारिक रिश्तों को लेकर लगातार चर्चा में बनी हुई हैं। हाल ही में एक टॉक शो में बतौर मुख्य मेहमान शामिल हुईं फराह खान ने अपने लंबे फिल्मी सफर और व्यक्तिगत जीवन से जुड़े कई दिलचस्प और अनछुए पहलुओं को साझा किया। इस बातचीत के दौरान उन्होंने अपने पति शिरीष कुंदर और अपने अनूठे वैवाहिक रिश्ते पर बेबाकी से बात की और बताया कि समय के साथ एक पति-पत्नी के बीच प्यार और प्राथमिकताएं किस तरह बदल जाती हैं।

विवाह के बाद घटने लगता है आकर्षण, अब दूसरी खूबियों की है अहमियत

रिश्तों के बदलते ताने-बाने पर अपने विचार साझा करते हुए फराह खान ने कहा कि विवाह के बंधन में बंधने के बाद शुरुआती दौर का रोमांस अक्सर धीमा पड़ जाता है। उन्होंने अपने अनुभव से बताया, "जब आप किसी को डेट कर रहे होते हैं, तो उस इंसान को पाने की चाहत बेहद शिद्दत से होती है। लेकिन एक बार जब वह साथी आपको जीवनसाथी के रूप में मिल जाता है, तो समय के साथ जीवन में उसकी अहमियत के पैमाने बदल जाते हैं। आज के दौर में मैं शिरीष की अहमियत को सिर्फ रोमांस से नहीं, बल्कि जीवन की दूसरी जरूरी चीजों में देखती हूं। मैं उन्हें एक बेहद जिम्मेदार पिता और एक ऐसे समर्पित इंसान के रूप में देखती हूं जो पर्दे के पीछे रहकर पूरे परिवार की खुशियों और जरूरतों का ख्याल रखता है। सच कहूं तो मैं उनके बिना रहने की कल्पना भी नहीं कर सकती, शिरीष के बिना हमारा घर पूरी तरह बिखर जाएगा।"

फराह ने पति की तारीफ करते हुए आगे कहा, "वह बच्चों के लिए एक आदर्श पिता साबित हुए हैं। अक्सर फिल्म इंडस्ट्री और बाहर के लोग मुझसे अचरज से पूछते हैं कि मेरे तीनों बच्चों को इतनी कम उम्र में दुनिया की इतनी प्रतिष्ठित और टॉप यूनिवर्सिटीज में दाखिला (एडमिशन) कैसे मिल गया? तब मैं उन सभी को गर्व से बताती हूं कि इसके पीछे कोई जादुई छड़ी नहीं, बल्कि उनके पिता की सालों की मेहनत है। शिरीष ही बच्चों के मुख्य मार्गदर्शक और काउंसलर थे, जो हर बच्चे की पढ़ाई और करियर को बहुत बारीकी से समय देते हैं।"

शिरीष को पसंद है एकांत, एआई (AI) तकनीक सीखकर खुद को कर रहे हैं अपडेट

बातचीत के दौरान फराह खान ने शिरीष कुंदर के स्वभाव का एक और दिलचस्प पहलू उजागर करते हुए बताया कि उनके पति को लाइमलाइट से दूर अकेले समय बिताना (एकांत) बेहद पसंद है। फराह के अनुसार, "शिरीष स्वभाव से थोड़े अंतर्मुखी हैं और वे अपने स्पेस में रहना पसंद करते हैं। इन दिनों वे अपनी नई फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखने के साथ-साथ आधुनिक एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तकनीक की बारीकियां भी सीख रहे हैं। उन्हें अकेले समय बिताना अच्छा लगता है और यह बात मुझे शादी से पहले से ही पता थी। असल में, उनकी यही शांत और गंभीर खूबी मुझे सबसे ज्यादा पसंद आई थी।"

इसके बाद फराह ने हंसते हुए एक मजेदार पारिवारिक वाकया भी साझा किया। उन्होंने बताया, "मेरे बेटे और शिरीष का कद-काठी और लंबाई अब बिल्कुल एक जैसी हो चुकी है। कभी-कभी देर रात में अगर कोई बेडरूम में आता है, तो मैं अंधेरे में पहचान ही नहीं पाती कि वो शिरीष हैं या मेरा बेटा। जब तक वह पास आकर मुझे गले नहीं लगा लेता, तब तक मुझे पता नहीं चलता कि यह मेरा बेटा है।"

बॉलीवुड करियर से कहीं ज्यादा यूट्यूब से हो रही है फराह खान की बंपर कमाई

अगर बात फराह खान के मौजूदा करियर फ्रंट की करें, तो उन्होंने इन दिनों खुद को एक बेहद सफल कंटेंट क्रिएटर के रूप में स्थापित कर लिया है। वे अपना एक डिजिटल वीडियो चैनल चलाती हैं, जहां वे कुकिंग, रेसिपी और मजेदार फूड व्लॉग्स साझा करती हैं। इस प्लेटफॉर्म पर वे अक्सर सिनेमा जगत के अपने नामचीन दोस्तों को दावत पर बुलाती हैं, उनके लिए अपने खास रसोइए 'दिलीप' (जो अब खुद एक इंटरनेट सेलिब्रिटी बन चुके हैं) से लजीज डिशेज बनवाती हैं और खाना खाते हुए पुरानी यादों को ताजा करती हैं। फराह का हाजिरजवाब और मजाकिया अंदाज दर्शकों को बेहद पसंद आ रहा है।

एक हालिया इंटरव्यू में फराह ने वित्तीय सफलता का एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि पिछले एक साल के भीतर उन्होंने इस डिजिटल माध्यम और बड़े ब्रांड्स के विज्ञापनों के जरिए इतनी मोटी कमाई की है, जितनी उन्होंने अपने पूरे बॉलीवुड करियर के दौरान फिल्में डायरेक्ट या कोरियोग्राफ करके भी नहीं की थी। इस तरह कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में कदम रखकर फराह खान की वित्तीय स्थिति को एक नया आसमान मिला है। वर्तमान में उनके इस डिजिटल चैनल पर 2.7 मिलियन (27 लाख) से भी अधिक चाहने वाले जुड़ चुके हैं।

श्रीलंका को कच्चातीवू सौंपने के मुद्दे पर BJP का कांग्रेस पर तीखा हमला

0

नई दिल्ली। वर्ष 1974 में कच्चातीवू द्वीप को श्रीलंका को सौंपे जाने के ऐतिहासिक निर्णय को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक बार फिर कांग्रेस पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को भाजपा ने कांग्रेस की तीखी आलोचना करते हुए इस समझौते को उसके तत्कालीन शासनकाल का एक और काला अध्याय करार दिया। सत्तारूढ़ दल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इस द्वीप पर से अपना हक छोड़कर देश के राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता के साथ बड़ा समझौता किया था। गौरतलब है कि भारत और श्रीलंका के बीच पाक जलडमरूमध्य में स्थित कच्चातीवू एक निर्जन द्वीप है, जिस पर भारत सरकार ने 1974 में एक द्विपक्षीय समझौते के तहत श्रीलंका के अधिकार को मान्यता दे दी थी।

ऐतिहासिक समझौतों पर प्रहार और मछुआरों की बदहाली का मुद्दा

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने इस विषय पर देश का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि आपातकाल की बरसी के तुरंत बाद कांग्रेस के इतिहास की एक और बड़ी कूटनीतिक चूक सामने आती है। उन्होंने रेखांकित किया कि 26 जून 1974 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने तमिलनाडु के तट के निकट स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कच्चातीवू द्वीप को श्रीलंका के हवाले कर दिया था, जिसके चलते आज तक तमिलनाडु के स्थानीय मछुआरों को समुद्र में निरंतर कई तरह की प्रताड़नाओं और गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। त्रिवेदी ने द्वीप पर स्थित ऐतिहासिक सेंट एंथनी चर्च का विशेष उल्लेख करते हुए दावा किया कि आज भारतीय नाविकों को अपनी नौकाओं पर तिरंगा झंडा लगाने के बावजूद उस क्षेत्र में जाने की अनुमति नहीं मिलती है, जो कांग्रेस की कमजोर विदेश नीति का नतीजा है।

देश की सीमाओं और भूभागों को गंवाने का लंबा इतिहास

भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस की पुरानी नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश की सीमाओं और राष्ट्रीय हितों के साथ समझौता करने का विपक्ष का इतिहास बेहद पुराना रहा है। उन्होंने सिलसिलेवार ढंग से आरोप लगाया कि इस कूटनीतिक आत्मसमर्पण की शुरुआत वर्ष 1947 में देश के विभाजन और मुस्लिम लीग के समक्ष घुटने टेकने के साथ हुई थी। इसके बाद वर्ष 1948 में कश्मीर का एक बड़ा हिस्सा (पीओके) पाकिस्तान के नियंत्रण में चला गया और फिर 1962 के युद्ध के दौरान अक्साई चिन का इलाका चीन को सौंप दिया गया। उन्होंने देश की ऐतिहासिक धरोहरों का जिक्र करते हुए कहा कि मानसरोवर सहित असम का क्षेत्र भी लगभग खोने की कगार पर पहुंच गया था और इसी कड़ी के तहत 26 जून को कच्चातीवू का हस्तांतरण हुआ, जो 28 जून को पूरी तरह श्रीलंका के नियंत्रण में चला गया।

केरल की आबकारी नीति पर वार और बढ़ते नशे पर चिंता

कच्चातीवू विवाद के साथ-साथ भाजपा ने केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) गठबंधन के हालिया राजनीतिक फैसलों को भी आड़े हाथों लिया है। भाजपा ने राज्य में कम अल्कोहल वाली मदिरा पर उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) को 251% से भारी कटौती कर 121% करने के निर्णय पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। पार्टी का आरोप है कि इस रियायत से राज्य के युवाओं में शराब पीने की प्रवृत्ति बढ़ेगी और चुनिंदा शराब कारोबारियों को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए राज्य के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। त्रिवेदी ने विपक्ष के ही वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला के पुराने बयानों का हवाला देते हुए कहा कि जब राज्य में नशीले पदार्थों की समस्या पहले से ही पंजाब जैसी गंभीर चुनौती बन चुकी है, ऐसे में शराब को बढ़ावा देना बेहद चिंताजनक है और इस मामले में यूडीएफ व एलडीएफ दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

RCA चुनाव पर बड़ी अपडेट, राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के इलेक्शन की तस्वीर हुई साफ

0

जयपुर:राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के बहुप्रतीक्षित चुनावों को एक बार फिर अगले 3 महीनों के लिए टाल दिया गया है। इस फैसले के साथ ही वर्तमान में काम कर रही एडहॉक (तदर्थ) कमेटी का कार्यकाल आगामी तीन महीनों के लिए बरकरार रहेगा। सहकारिता विभाग के रजिस्ट्रार डॉ. समित शर्मा ने राजस्थान क्रीड़ा अधिनियम, 2005 की धारा 24 (1) (क) के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। हालांकि, इस आदेश में चुनाव कराने को लेकर एक सख्त समय-सीमा भी तय की गई है।

क्यों टले चुनाव? पूर्व कार्यकारिणी की गड़बड़ियां और जिला संघों के विवाद बड़ी वजह

चुनावों में लगातार हो रही देरी के पीछे कई गंभीर और तकनीकी कारण सामने आए हैं। सहकारिता विभाग के अनुसार:

  • वित्तीय और प्रशासनिक जांच: आरसीए की पूर्ववर्ती (पुरानी) कार्यकारिणी के समय हुई वित्तीय और प्रशासनिक स्तर की गड़बड़ियों की गहन जांच अभी चल रही है।

  • जिला संघों का विवाद: राजस्थान के कई जिला स्तरीय खेल संघों (डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन्स) के भीतर आपसी विवाद चल रहे हैं, जिनकी जांच प्रक्रियाधीन है। विभाग का मानना है कि इन विवादों के सुलझने के बाद ही आरसीए के चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और नियमों के दायरे में कराए जा सकते हैं।

मार्च 2024 से लगातार बढ़ रहा है कार्यकाल, अब मिला अल्टीमेटम

गौरतलब है कि पहली बार मार्च 2024 में आरसीए के निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने की जिम्मेदारी के साथ इस 3 महीने की एडहॉक कमेटी का गठन किया गया था। लेकिन तय समय में चुनाव न हो पाने के कारण लगातार 3-3 महीनों के लिए समिति की अवधि बढ़ाई जाती रही है। हालांकि, इस ताजा आदेश में रजिस्ट्रार ने एडहॉक कमेटी को साफ चेतावनी दी है कि वे अगले तीन महीनों के भीतर हर हाल में चुनाव प्रक्रिया को अनिवार्य रूप से पूरा करें।

खेल सत्र और टूर्नामेंट्स का भी दिया गया तर्क

कमेटी ने चुनाव टलने के पीछे चल रहे घरेलू क्रिकेट सीजन का भी हवाला दिया है। समिति की ओर से दलील दी गई कि वर्तमान खेल सत्र (क्रिकेट सीजन) के दौरान राजस्थान के खिलाड़ियों के भविष्य और उनके प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए लगातार कई क्रिकेट टूर्नामेंट्स का आयोजन कराया जा रहा है। पूरी प्रशासनिक मशीनरी के इन आयोजनों में व्यस्त होने के कारण सीमित समय के भीतर चुनाव कराना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था।

तीस्ता प्रोजेक्ट पर ड्रैगन की नजर, बांग्लादेश में चीन की सक्रियता से बदलेगा क्षेत्रीय समीकरण?

0

बीजिंग । बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की बीजिंग यात्रा के संपन्न होने के बाद तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन परियोजना को लेकर चीन का एक बड़ा और रणनीतिक बयान सामने आया है। चीनी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बांग्लादेश के साथ उसका द्विपक्षीय सहयोग किसी भी तीसरे देश को लक्षित करके नहीं किया जा रहा है और न ही इस पर किसी बाहरी पक्ष का कोई दखल होना चाहिए। बीजिंग का यह रुख ऐसे समय में आया है जब भारत इस परियोजना में चीनी निवेश और उसकी भौतिक उपस्थिति को लेकर अपनी सुरक्षा संबंधी चिंताएं लगातार जता रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने आधिकारिक तौर पर कहा कि उनका देश तीस्ता नदी के पुनरुद्धार और प्रबंधन से जुड़ी इस जनकल्याणकारी योजना को वित्तीय व तकनीकी सहयोग देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

तीस्ता परियोजना का स्वरूप और चीन की बढ़ती दिलचस्पी

तीस्ता नदी भारत के सिक्किम राज्य से उद्गमित होकर पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश में प्रवेश करती है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 414 किलोमीटर है। इस नदी का प्रवाह क्षेत्र बांग्लादेश के उत्तरी जिलों की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माना जाता है। ढाका प्रशासन लंबे समय से इस क्षेत्र में आने वाली विनाशकारी बाढ़, नदी के कटाव और सूखे की समस्या से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर ड्रेजिंग, जल संचयन और मजबूत तटबंधों के निर्माण की योजना पर काम कर रहा है। चीन ने इस 'तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रिस्टोरेशन प्रोजेक्ट' को अपने महत्वाकांक्षी 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (बीआरआई) से जोड़ते हुए इसमें भारी निवेश करने की इच्छा प्रकट की है, जिसे बांग्लादेश अपने आर्थिक विकास के लिए बेहद जरूरी मानता है।

भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर की संवेदनशीलता और सुरक्षा सरोकार

इस विकास परियोजना के भौगोलिक मानचित्र को देखने पर भारत की रणनीतिक चिंताएं पूरी तरह स्पष्ट हो जाती हैं। प्रस्तावित परियोजना का कार्यक्षेत्र भारत के सबसे संवेदनशील भूभाग 'सिलीगुड़ी कॉरिडोर' के अत्यंत निकट है, जिसे सामरिक भाषा में 'चिकेन नेक' कहा जाता है। यह मात्र 20-22 किलोमीटर चौड़ा एक संकरा जमीनी मार्ग है, जो भारत के सभी आठ पूर्वोत्तर राज्यों को देश के मुख्य हिस्से से जोड़ता है। सैन्य दृष्टि से यह क्षेत्र देश का सबसे नाजुक रक्षा बिंदु है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि गलवान, डोकलाम और अरुणाचल प्रदेश सीमा पर चीन के आक्रामक रवैये को देखते हुए, यदि चीनी कंपनियां इस इलाके के पास दीर्घकालिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल होती हैं, तो इससे भारतीय सीमाओं की सुरक्षा, निगरानी और सामरिक संतुलन के लिए एक बड़ा खतरा उत्पन्न हो सकता है।

दक्षिण एशिया में बीजिंग का बढ़ता दखल और कूटनीतिक चुनौती

पिछले एक दशक में चीन पद्मा ब्रिज रेल लिंक और पायरा व मोंगला बंदरगाहों जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के जरिए बांग्लादेश का सबसे बड़ा आर्थिक साझेदार बनकर उभरा है। दूसरी ओर, भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी के जल बंटवारे का ऐतिहासिक समझौता पश्चिम बंगाल सरकार की तकनीकी आपत्तियों के कारण लंबे समय से लंबित पड़ा हुआ है। कूटनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इसी राजनीतिक शून्यता का लाभ उठाकर चीन भारत के इस सबसे संवेदनशील हिस्से के करीब अपनी रणनीतिक पहुंच मजबूत करना चाहता है। नई दिल्ली के लिए यह एक बड़ी भू-राजनीतिक चुनौती है, क्योंकि यदि भारत सीमा-पार नदी परियोजनाओं पर बांग्लादेश के साथ त्वरित गति से आगे नहीं बढ़ता, तो ढाका का झुकाव बीजिंग की ओर और अधिक बढ़ सकता है, जिससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन प्रभावित होगा।

आयरलैंड के खिलाफ हार पर अभिषेक शर्मा का बयान, बोले- बल्लेबाजी नहीं थी हार की वजह

0

भारतीय क्रिकेट टीम के उभरते हुए सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने आयरलैंड के खिलाफ शुरुआती टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में टीम इंडिया की करारी हार का मुख्य कारण वहां की चुनौतीपूर्ण पिच और विदेशी परिस्थितियों से समय रहते सामंजस्य न बिठा पाना बताया है। युवा बल्लेबाज ने बेबाकी से स्वीकार किया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के बेहद व्यस्त शेड्यूल के बीच, अभ्यास के सीमित मौकों में भी खुद को स्थानीय हालातों के अनुसार तेजी से ढालना ही एक विश्वस्तरीय और मजबूत टीम की असली पहचान होती है। दो मैचों की इस संक्षिप्त टी20 सीरीज का दूसरा और अंतिम निर्णायक मुकाबला रविवार को इसी मैदान पर खेला जाएगा, जहां भारतीय टीम सीरीज बराबर करने के इरादे से उतरेगी।

क्रिकेट के इतिहास में पहली बार आयरलैंड ने भारत को चटाई धूल

इस पहले टी20 मुकाबले में मेजबान आयरलैंड ने खेल के हर मोर्चे पर अद्वितीय प्रदर्शन करते हुए टी20 विश्व चैंपियन भारतीय टीम के खिलाफ एक ऐतिहासिक और यादगार जीत दर्ज की। आयरिश टीम ने भारतीय धुरंधरों को 34 रनों के बड़े अंतर से शिकस्त दी। क्रिकेट के इतिहास में यह पहला मौका है जब आयरलैंड ने किसी भी फॉर्मेट में भारतीय सीनियर पुरुष टीम को पराजित करने का कारनामा किया है। मध्यक्रम के बल्लेबाज श्रेयस अय्यर इस सीरीज में पहली बार भारतीय टीम की कप्तानी संभाल रहे थे, लेकिन बतौर कप्तान उनके करियर का यह पहला आगाज बेहद निराशाजनक और कड़वा साबित हुआ।

भारतीय बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखरी, अभिषेक का अर्धशतक भी गया बेकार

इस मुकाबले में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी आयरलैंड की टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में शानदार बल्लेबाजी का मुजाहिरा करते हुए बोर्ड पर 182 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया था। रनों का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और पूरी टीम 18.5 ओवरों में महज 148 रन बनाकर ही पवेलियन लौट गई।

इस शर्मनाक हार के साथ ही भारतीय टीम सीरीज में 0-1 से पिछड़ गई है। पूरे मैच में भारत का शीर्ष और मध्यक्रम ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। हालांकि, सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने एक छोर संभाले रखा और शानदार अर्धशतकीय पारी खेली, लेकिन अपनी हाफ सेंचुरी को वह मैच जिताऊ पारी में तब्दील नहीं कर सके और उनके आउट होते ही भारत की बची हुई उम्मीदें भी समाप्त हो गईं।

हालातों से समझौता करना ही चैंपियन टीम का काम: अभिषेक शर्मा

मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी बात रखते हुए अभिषेक शर्मा ने कहा, "एक पेशेवर टीम के रूप में यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि हम विदेशी पिचों और मौसम के साथ कितनी जल्दी तालमेल बिठाते हैं। जब आप लगातार द्विपक्षीय सीरीज खेल रहे होते हैं, तो पूरे ग्रुप को आगे बढ़कर विपरीत परिस्थितियों के अनुकूल खुद को तैयार करना होता है, चाहे वह नेट प्रैक्टिस का समय हो या मुख्य मैच का। मुझे लगता है कि अगर आपको दुनिया में अपना दबदबा कायम रखना है, तो बहुत तेजी से बदलावों को स्वीकार करना होगा। इस मैच में भी हमारी रणनीति यही थी, लेकिन दुर्भाग्य से हम मैदान पर उसे अमलीजामा नहीं पहना सके।"

FCRA संशोधन पर केरल BJP अध्यक्ष का जवाब, बोले- कांग्रेस ने बनाया राजनीतिक मुद्दा

0

तिरुवनंतपुरम। केरल में विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) में हुए विधायी संशोधनों को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर का एक बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एफसीआरए नियमों में किए गए हालिया बदलावों का उद्देश्य किसी भी विशिष्ट धार्मिक समुदाय को निशाना बनाना कतई नहीं है। चंद्रशेखर ने रेखांकित किया कि इन संशोधनों का एकमात्र ध्येय यह सुनिश्चित करना है कि विदेशों से आने वाले धन का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) जैसी अवांछित और अवैध गतिविधियों के लिए न किया जा सके। उन्होंने विपक्ष पर सीधा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने आम चुनावों के दौरान इस संवेदनशील विषय का अनुचित राजनीतिकरण किया, जिसके दुष्परिणामस्वरूप भाजपा को ईसाई समुदाय के मिलने वाले पारंपरिक जनसमर्थन में आंशिक नुकसान उठाना पड़ा।

चुनावी राजनीति, दुष्प्रचार और पारदर्शी नियमों पर सफाई

राजीव चंद्रशेखर ने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान कहा कि कांग्रेस पार्टी ने चुनावों के समय एफसीआरए संशोधनों को लेकर समाज में एक बड़ा भ्रमजाल बुना और इसे एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेशी चंदा प्राप्त करने वाली संस्थाओं में केवल ईसाई संगठन ही शामिल नहीं हैं, बल्कि देश के सभी धर्मों से जुड़ी संस्थान इस कानून के दायरे में आते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नए विधिक प्रावधानों में ऐसी कोई भी बात शामिल नहीं है जिसका दुरुपयोग किसी विशेष समुदाय या समूह को प्रताड़ित करने के लिए किया जा सके। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय पहले ही यह साफ कर चुका है कि इन संशोधनों का मुख्य मकसद विदेशी फंडिंग के इस्तेमाल में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही लाना है।

ईसाई संगठनों की चिंताएं और आपातकाल की वर्षगांठ का संदेश

केरल के विभिन्न ईसाई संगठनों द्वारा नए नियमों से चर्च और उनकी परोपकारी संस्थाओं के दैनिक कामकाज पर असर पड़ने की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि यदि किसी संगठन को कानून के क्रियान्वयन को लेकर कोई वास्तविक आशंका है, तो उसके लिए सरकार के द्वार हमेशा खुले हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो वे स्वयं संबंधित धार्मिक संस्थाओं और गृह मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के बीच सकारात्मक मध्यस्थता करने के लिए सहर्ष तैयार हैं। इसके अलावा, देश में आपातकाल लागू होने की 51वीं वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि इसे महज अतीत का एक पन्ना नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि यह काले दिन हमें हमारे महान लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की सजग रक्षा करने की निरंतर याद दिलाता हैं।

केरल की राजनीति में तुष्टिकरण और राज्य सरकार की नीतियों का विरोध

अपने वक्तव्य के अंतिम चरण में राजीव चंद्रशेखर ने कांग्रेस और केरल की सत्ताधारी सरकार पर तीखे राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वह राजनीतिक लाभ के लिए जमात-ए-इस्लामी जैसी कट्टरपंथी संगठनों को केरल की मुख्यधारा की राजनीति में स्थापित करने का खतरनाक खेल खेल रही है। इसके साथ ही उन्होंने सूबे के वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी उंगली उठाई और दावा किया कि इसके कारण राज्य के आम नागरिकों के संपत्ति के अधिकार गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार की आबकारी नीति की भी कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि युवाओं के लिए शराब को सस्ता और आसानी से सुलभ बनाकर वर्तमान राज्य प्रशासन नई पीढ़ी के जीवन और स्वास्थ्य के मौलिक अधिकार को लगातार कमजोर करने का काम कर रहा है।

मोदी कैबिनेट विस्तार में अरुण गोविल को मिल सकती है जगह? सियासी गलियारों में चर्चाएं

0

नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार जल्द ही बड़े पैमाने पर अपने केंद्रीय मंत्रिपरिषद में फेरबदल करने जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर अटकलें हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को ही अपनी कैबिनेट में महत्वपूर्ण बदलाव कर सकते हैं। मोदी 3.0 कार्यकाल की शुरुआत के बाद होने वाला यह पहला प्रशासनिक और राजनीतिक पुनर्गठन होगा। इस संभावित फेरबदल में तीन चेहरे सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहे हैं, जिनमें भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास, श्रीकांत शिंदे और मेरठ से भाजपा सांसद अरुण गोविल शामिल हैं। अरुण गोविल को देश का जनमानस आज भी प्रसिद्ध धारावाहिक रामायण में निभाए गए 'श्रीराम' के किरदार के रूप में बेहद सम्मान से देखता है।

क्या अरुण गोविल की एंट्री से डैमेज कंट्रोल की है तैयारी

सांसद अरुण गोविल को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की सुगबुगाहट ऐसे समय पर तेज हुई है, जब उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा बेहद गर्माया हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है कि क्या सरकार गोविल को मंत्री बनाकर इस धार्मिक-राजनैतिक विवाद के असर को कम करने यानी 'डैमेज कंट्रोल' का प्रयास कर रही है। हालांकि, इसके पीछे एक दूसरा रणनीतिक पहलू भी बेहद अहम माना जा रहा है। दरअसल, अगले वर्ष की शुरुआत में ही उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में भाजपा उत्तर प्रदेश से मंत्रियों का कोटा बढ़ाकर हिंदी भाषी राज्यों में अरुण गोविल की निष्कलंक और 'श्रीराम' वाली छवि का राजनीतिक लाभ उठाने तथा उन्हें एक फायर ब्रांड प्रचारक के रूप में पेश करने की योजना पर काम कर रही है।

कैबिनेट में नए संभावित चेहरे और कुछ की विदाई की अटकलें

चर्चाओं के बाजार में यह बात भी तेजी से तैर रही है कि प्रधानमंत्री के वर्तमान प्रधान सचिव और पूर्व आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास को मोदी कैबिनेट में लाकर वित्त मंत्रालय जैसी बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इसके अलावा, शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पाले में लाने की कूटनीति के तहत श्रीकांत शिंदे को भी कैबिनेट मंत्री का पद दिया जा सकता है। वहीं, हिमाचल प्रदेश के कद्दावर नेता अनुराग ठाकुर की एक बार फिर केंद्रीय कैबिनेट में वापसी के कयास लगाए जा रहे हैं, जबकि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भी मोदी मंत्रिमंडल में सीधी एंट्री हो सकती है। इन नए बदलावों के साथ ही यह भी माना जा रहा है कि धर्मेंद्र प्रधान, हरदीप सिंह पुरी, रवनीत सिंह बिट्टू समेत करीब आधा दर्जन मौजूदा राज्यमंत्रियों को सरकार से बाहर का रास्ता देखना पड़ सकता है।

राम मंदिर विवाद की जांच और कोर्ट में आरोपियों की पेशी

राम मंदिर में दान के पैसों और आभूषणों की कथित हेराफेरी के मामले में पुलिस प्रशासन ने गिरफ्तार किए गए सभी 8 आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश कर दिया है। जांच एजेंसी ने अदालत को सूचित किया है कि प्रारंभिक जांच के दौरान सभी अभियुक्तों के खिलाफ चोरी के पुख्ता और अकाट्य साक्ष्य हाथ लगे हैं। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, मुख्य सीसीटीवी फुटेज में आरोपी काउंटर और दान पेटी से नकद राशि व आभूषण चुराते हुए साफ तौर पर दिखाई दे रहे हैं। पुलिस की ज्यूडिशियल रिमांड नोट में चंदे की हेराफेरी, टिन्नू नामक मुख्य आरोपी की प्रशासनिक शिथिलता, वाउचर बनाने में अनुकल्प मिश्रा और उसके बहनोई लव कुश मिश्रा द्वारा की गई अनियमितताओं का स्पष्ट उल्लेख है। जांच अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि टिन्नू, अनुकल्प, अविनाश, करुणेश, मनीष, लवकुश और रमा शंकर मिश्र जैसे आरोपियों की निशानदेही पर अब तक लगभग 79.84 लाख रुपये की नकद रिकवरी की जा चुकी है, जबकि 8वें आरोपी सुभाष श्रीवास्तव को इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।

PM मोदी की तस्वीर को रोज लड्डू चढ़ाती है अथिया की बेटी? सुनील शेट्टी ने बताई वजह

0

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सुनील शेट्टी इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर अपनी हाल ही में रिलीज हुई धमाकेदार कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ की कामयाबी को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। इस बड़े बजट की फिल्म ने सिनेमाघरों में दस्तक दे दी है और पहले ही दिन से यह शानदार कलेक्शन दर्ज कर रही है। फिल्म की सफलता के बीच, अभिनेता ने अपनी नन्हीं नातिन एवारा (अभिनेत्री अथिया शेट्टी और भारतीय क्रिकेटर केएल राहुल की बेटी) को लेकर एक बेहद दिलचस्प और दिल छू लेने वाला वाकया साझा किया है। सुनील शेट्टी ने खुलासा किया कि उनकी छोटी सी नातिन हर रोज सुबह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर के सामने जाकर उन्हें आदरपूर्वक लड्डू का भोग लगाती है।

एयरपोर्ट पर आया ने कराई थी पीएम से पहचान, नन्हीं एवारा पर दिखा जादुई असर

एक विशेष साक्षात्कार के दौरान अपने पारिवारिक पलों को याद करते हुए सुनील शेट्टी ने बताया कि उनकी नातिन की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति यह मासूम दीवानगी कैसे शुरू हुई। उन्होंने बताया कि एक बार हवाई अड्डे (एयरपोर्ट) पर एवारा की देखभाल करने वाली आया (नैनी) ने उसे पीएम मोदी की एक झलक दिखाई थी और उनके बारे में बताया था, जिसके बाद से ही वह उनके व्यक्तित्व से बेहद प्रभावित नजर आती है।

सुनील शेट्टी ने देश के नेतृत्व पर बात करते हुए कहा, "मैंने हमेशा इस बात को गर्व से स्वीकार किया है कि मैं प्रधानमंत्री जी की कार्यशैली का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं। मैं यहां किसी राजनीतिक दल या विचारधारा की बात नहीं कर रहा, बल्कि एक सच्चे वैश्विक नेता की बात कर रहा हूं। अगर कोई लीडर मुझे आगे बढ़ने और देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा देता है, तो वह निश्चित रूप से नरेंद्र मोदी जी हैं। जितना अटूट प्रेम मुझे अपनी मातृभूमि से है, उतना ही सम्मान मैं अपने देश के नेता के लिए भी रखता हूं। उनके व्यक्तित्व में वाकई कुछ बहुत ही विशिष्ट और जादुई बात है।"

बिना किसी के सिखाए साईं बाबा की पुस्तक में मोदी जी को ढूंढती है 15 महीने की बच्ची

सुनील शेट्टी ने अपनी नातिन की दैनिक दिनचर्या का जिक्र करते हुए आगे कहा, "मेरी नातिन अभी महज 15 महीने की है। अब उसका रोज़ का यह नियम बन चुका है कि वह सुबह उठकर भगवान साईं बाबा की एक धार्मिक पुस्तक खोलती है, जिसके एक पन्ने पर प्रधानमंत्री मोदी जी का भी चित्र छपा हुआ है। वह उस पेज को पलटती है और बड़ी मासूमियत से कहती है- 'मोदी जी'। इसके बाद वह घर के मंदिर में रखी भगवान गणेश की मूर्ति के पास जाती है, वहां चढ़ाए गए प्रसाद से लड्डू उठाती है और लाकर तस्वीर में दिख रहे पीएम मोदी को खिलाने का अभिनय करती है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उसे ऐसा करने के लिए न तो मैंने कभी कहा और न ही उसके माता-पिता (अथिया और राहुल) ने कोई सीख दी। यह पूरी तरह से उसका अपना लगाव है।"

मार्च 2025 में हुआ था जन्म, 'भगवान का तोहफा' है एवारा

उल्लेखनीय है कि बॉलीवुड अभिनेत्री अथिया शेट्टी और स्टार क्रिकेटर केएल राहुल के घर 24 मार्च 2025 को इस नन्हीं परी का जन्म हुआ था। इस स्टार कपल ने बाद में केएल राहुल के जन्मदिन के खास मौके पर अपनी लाडली के नाम का आधिकारिक ऐलान करते हुए पूरी दुनिया को बताया था कि उन्होंने अपनी बेटी का नाम 'एवारा' (Evaarah) रखा है, जिसका अर्थ होता है— ‘ईश्वर का अनमोल उपहार’ या ‘भगवान का तोहफा’। जन्म के बाद से ही स्टार माता-पिता ने अपनी बेटी को मीडिया की चकाचौंध और सोशल मीडिया की नजरों से काफी दूर रखा है। हालांकि वे समय-समय पर उसकी धुंधली तस्वीरें या झलकियां साझा करते रहते हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक अपनी बेटी का चेहरा सार्वजनिक रूप से रिवील नहीं किया है।

बॉक्स ऑफिस पर 'वेलकम टू द जंगल' की मजबूत पकड़, 30 से अधिक सितारे शामिल

दूसरी ओर, बॉक्स ऑफिस पर सुनील शेट्टी की नई फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' लगातार अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। फिल्म को समीक्षकों और आम दर्शकों की ओर से मिली-जुली लेकिन काफी मनोरंजक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। मशहूर निर्देशक अहमद खान के निर्देशन में तैयार हुई इस मल्टीस्टारर कॉमिक ड्रामा फिल्म में सुनील शेट्टी के अलावा सुपरस्टार अक्षय कुमार, राजपाल यादव, परेश रावल, अरशद वारसी, रवीना टंडन, दिशा पाटनी और जैकलीन फर्नांडिस सहित सिनेमा जगत के लगभग 30 से भी ज्यादा नामचीन कलाकार मुख्य भूमिकाओं में अपनी अदाकारी का जलवा बिखेर रहे हैं।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम चरण में, ट्रंप के दौरे की चर्चा तेज

0

वॉशिंगटन / नई दिल्ली:भारत और अमेरिका के रणनीतिक और कूटनीतिक रिश्तों को लेकर एक बहुत बड़ा और सकारात्मक अपडेट सामने आया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ संकेत दिए हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले साल (2027) की शुरुआत में भारत का दौरा कर सकते हैं। इसके साथ ही, पिछले काफी समय से अटकी पड़ी दोनों देशों की द्विपक्षीय व्यापार संधि (ट्रेड डील) भी अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है।

पीएम मोदी और ट्रंप की ट्यूनिंग बेमिसाल, दौरे की तैयारियां शुरू

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों की तारीफ करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका बेहद करीबी और मजबूत साझीदार हैं। ट्रंप के संभावित भारत दौरे की पुष्टि करते हुए उन्होंने कहा, "हमारी टीम इसी एजेंडे पर काम कर रही है कि राष्ट्रपति ट्रंप अगले साल की शुरुआत में भारत का दौरा करें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच के आपसी संबंध इस समय अपने सर्वश्रेष्ठ दौर में हैं, जो वैश्विक कूटनीति के लिए एक बेहद मजबूत संदेश है।"

व्हाइट हाउस में वापसी के बाद ट्रंप की पहली भारत यात्रा

अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक रहा, तो दूसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति की कमान संभालने के बाद डोनाल्ड ट्रंप का यह पहला भारत दौरा होगा। इससे पहले ट्रंप ने फरवरी 2020 में भारत की यात्रा की थी। हाल ही में फ्रांस के एवियन में हुए जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच एक बेहद अहम द्विपक्षीय बैठक हुई थी, जो पिछले 16 महीनों में दोनों दिग्गजों के बीच पहली आमने-सामने की मुलाकात थी।

आखिरी दौर में ट्रेड डील, लेकिन इन शर्तों पर फंसा है पेंच

दोनों देशों के बीच व्यापारिक समझौते को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है, लेकिन भारतीय नीति निर्माता और वार्ताकार कुछ प्रमुख बिंदुओं पर अमेरिका से पूरी तरह आर-पार की स्पष्टता चाहते हैं:

  • धारा 301 टैरिफ: भारत ने अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301 के तहत लगने वाले शुल्कों (टैरिफ) पर स्पष्ट रुख मांगा है। भारत का कहना है कि समझौता फाइनल होने से पहले भारतीय बाजार को अन्य वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बढ़त मिलनी चाहिए।

  • अमेरिकी ट्रेजरी का रुख: अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने साफ किया है कि ये टैरिफ धारा 301 के तहत पुराने स्तरों पर ही वापस लौट जाएंगे।

रूस से तेल और भारी टैरिफ: हालिया महीनों के तनाव की वजह

पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में जो उतार-चढ़ाव आया था, उसे पूरी तरह सुलझाने के लिए ही विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस समय क्वाड (Quad) बैठक के सिलसिले में भारत आए हुए हैं:

  • ट्रंप का कड़ा फैसला: राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में भारतीय आयातों पर कुल 50% का भारी-भरकम टैरिफ ठोक दिया था। इसमें 25% पारस्परिक टैरिफ और भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण लगाया गया 25% का अतिरिक्त जुर्माना शामिल था, जो 27 अगस्त 2025 से प्रभावी हुआ था।

  • सुप्रीम कोर्ट से राहत: हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पारस्परिक टैरिफ के फैसले को खारिज कर दिया, जिसके बाद फिलहाल भारतीय निर्यात पर केवल 10% का बेसलाइन टैरिफ लग रहा है।

'ऑपरेशन सिंदूर' और मध्यस्थता के दावे पर मतभेद बरकरार

व्यापार के अलावा भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर को लेकर भी दोनों देशों के बयानों में थोड़ा विरोधाभास है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कई मौकों पर यह दावा किया है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान उन्होंने ही दोनों देशों के बीच दखल देकर युद्धविराम कराया था।

भारत का दोटूक स्टैंड:

नई दिल्ली ने ट्रंप के इस दावे को हमेशा की तरह पूरी तरह खारिज किया है। भारत का रुख साफ और अडिग है कि यह सीजफायर बिना किसी तीसरे देश या बाहरी मध्यस्थता के, पूरी तरह भारत और पाकिस्तान के मिलिट्री ऑपरेशंस के महानिदेशकों (DGMO) के बीच हुई सीधी बातचीत का नतीजा था।

जबलपुर के भंवरताल उद्यान में गंदे पानी से उठी दुर्गंध, लोगों ने जताई नाराजगी

0

जबलपुर: संस्कारधानी की पहचान और शहर के मुख्य आकर्षणों में शुमार भंवरताल उद्यान इन दिनों प्रशासनिक उदासीनता और घोर अव्यवस्था का शिकार होकर रह गया है। पार्क के भीतर फैली भीषण गंदगी और बदइंतजामी के चलते यहां आने वाले स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उद्यान की खूबसूरती बढ़ाने के लिए लाखों रुपये की भारी-भरकम लागत से स्थापित किए गए हाई-टेक म्यूजिकल फव्वारे (Musical Fountain) तकनीकी खराबी के कारण लंबे समय से पूरी तरह बंद पड़े हैं। देखरेख के अभाव में इन फव्वारों के भीतर जमा पानी अब पूरी तरह सड़ चुका है, जिससे उठने वाली भयंकर बदबू के कारण लोगों का उद्यान परिसर में चंद मिनट भी ठहरना दूषित हवा के कारण दूभर हो गया है। हाल ही में जमीनी स्तर पर की गई पड़ताल में यह कड़वी हकीकत सामने आई है कि नियमित सफाई न होने के कारण फाउंटेन के पानी में मोटी काई जम चुकी है, जिससे पूरे पार्क का स्वरूप और सौंदर्य नष्ट हो रहा है।

नियमित रूप से सुबह की सैर पर आने वाले जागरूक नागरिक दीपेश कुमार ने अपना रोष व्यक्त करते हुए कहा कि अब भंवरताल उद्यान में आना किसी चुनौती से कम नहीं है, क्योंकि सड़े हुए पानी की दुर्गंध सिरदर्द पैदा कर देती है। इस गंभीर नागरिक समस्या पर अपना पक्ष रखते हुए उद्यान विभाग के जिम्मेदार अधिकारी मनीष तड़से ने सफाई दी है कि पार्क की स्वच्छता को लेकर मैदानी कर्मचारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि पानी की निकासी के लिए पंप भी स्थापित कर दिया गया है और तकनीकी खराबी को जल्द से जल्द दूर कर व्यवस्था बहाल कर दी जाएगी।

मेंटेनेंस के अभाव में कबाड़ में तब्दील हो रही सरकारी संपत्ति

एक दौर में भंवरताल उद्यान की शान कहे जाने वाले रंग-बिरंगे म्यूजिकल फव्वारे आज विभागीय लापरवाही का जीता-जागता सबूत बन चुके हैं। लंबे समय से बंद पड़े होने के कारण इन फाउंटेन के भीतर ठहरा हुआ पानी अब केवल गंदगी ही नहीं, बल्कि जानलेवा संक्रामक बीमारियों और लार्वा का मुख्य केंद्र बन गया है। हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि जो लोग सुकून के पल बिताने यहां आते हैं, उन्हें नाक पर रुमाल रखकर गुजरना पड़ रहा है।

समय पर उचित मेंटेनेंस और टेक्निकल ऑडिट न किए जाने की वजह से जनता के टैक्स के पैसों से खरीदी गई लाखों रुपये की कीमती मशीनें जंग खाकर धीरे-धीरे नष्ट हो रही हैं। क्षेत्रीय जनता का साफ कहना है कि यदि नगर निगम प्रशासन ने इस दिशा में तुरंत कोई ठोस और सुधारात्मक कदम नहीं उठाया, तो आने वाले कुछ ही दिनों में शहर का यह प्रमुख पर्यटन स्थल पूरी तरह से खंडहर और अनुपयोगी साबित होने लगेगा। हालांकि अधिकारी हर बार की तरह सिर्फ कागजी आश्वासन दे रहे हैं, परंतु धरातल पर सुधार की स्थिति शून्य बनी हुई है।

अधिकारियों की अनदेखी से संकट में शहर की विरासत, मॉर्निंग वॉकर्स में भारी आक्रोश

भंवरताल उद्यान सिर्फ एक आम पार्क नहीं, बल्कि जबलपुर शहर की एक ऐतिहासिक धरोहर है, लेकिन वर्तमान समय में यह जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर एक बड़ा दाग बन गया है। फव्वारों के कुंड में महीनों से जमा स्थिर पानी न केवल हवा को प्रदूषित कर रहा है, बल्कि भीषण गर्मी और उमस के इस मौसम में मच्छरों को पनपने के लिए सबसे सुरक्षित नर्सरी प्रदान कर रहा है। इससे आस-पास के रिहायशी इलाकों में डेंगू और मलेरिया जैसी घातक बीमारियों के फैलने की आशंका काफी प्रबल हो गई है।

प्रशासन द्वारा सफाई को लेकर किए जा रहे तमाम बड़े-बड़े वादे और दावे केवल फाइलों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं, क्योंकि उद्यान के हर हिस्से में कचरे और उपेक्षा के ढेर दिखाई दे रहे हैं। इस दुर्दशा को देखकर प्रतिदिन मॉर्निंग वॉक पर आने वाले शहर के वरिष्ठ नागरिकों में नगर निगम के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि प्रशासन ने इतनी महत्वपूर्ण और संवेदनशील जगह को पूरी तरह से भगवान भरोसे छोड़ दिया है। नागरिकों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि सिर्फ एक पंप लगा देने की खानापूर्ति से इस समस्या का स्थाई समाधान नहीं होने वाला, इसके लिए एक मजबूत कार्ययोजना, नियमित वैज्ञानिक सफाई और जवाबदेही तय करने की तत्काल आवश्यकता है।

Join Whatsapp Group
Join Our Whatsapp Group