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हरित खाद से मिट्टी होगी अधिक उपजाऊ, किसानों को किया जा रहा जागरूक

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रायपुर : किसानों को टिकाऊ एवं प्राकृतिक खेती की ओर प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, सरगुजा द्वारा हरित खाद (ग्रीन मैन्योरिंग) के उपयोग के संबंध में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल एवं निदेशक विस्तार डॉ. एस.एस. टुटेजा के निर्देश तथा कृषि विज्ञान केंद्र, सरगुजा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. संदीप शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में किसानों को हरित खाद के वैज्ञानिक लाभों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि ढैंचा, सनई एवं मूंग जैसी दलहनी फसलों को 40 से 45 दिन की अवस्था में खेत में पलटकर हरित खाद के रूप में उपयोग किया जाता है। ये फसलें राइजोबियम जीवाणुओं की सहायता से वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर लगभग 50 से 55 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर भूमि में उपलब्ध कराती हैं, जिससे मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है और रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम होती है।

वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. संदीप शर्मा ने बताया कि हरित खाद के उपयोग से मिट्टी की संरचना मजबूत होती है, जल धारण क्षमता बढ़ती है तथा लाभकारी सूक्ष्मजीवों की सक्रियता में वृद्धि होती है। इससे फसल उत्पादन में सुधार होने के साथ भूमि की दीर्घकालीन उत्पादकता भी बनी रहती है। उन्होंने इसे कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली पर्यावरण अनुकूल खेती की प्रभावी तकनीक बताया।

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से खरीफ फसलों की बुवाई से पहले हरित खाद का उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि इससे खेती की लागत कम होगी, मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर बनेगा और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता भी घटेगी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया तथा उन्हें प्राकृतिक एवं टिकाऊ खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र, सरगुजा के वैज्ञानिक पांडु राम पैकरा, डॉ. एस.पी. गुप्ता, डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, डॉ. विवेक कुमार सांडिल्य, लीलाधर साहू, विरेंद्र कुमार सहित अन्य अधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

पशुधन विकास विभाग की योजना से बदली सदाशिव कुरगुड़ की जिंदगी

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रायपुर :  शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। बीजापुर जिले के भोपालपटनम विकासखंड के ग्राम उल्लूर निवासी सदाशिव कुरगुड़ इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। उन्होंने पशुधन विकास विभाग की किसान क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ लेकर मुर्गी पालन व्यवसाय शुरू किया और आज अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर चुके हैं।

पशुधन विकास विभाग की योजना से बदली सदाशिव कुरगुड़ की जिंदगी

योजना से मिला स्वरोजगार का अवसर
सदाशिव कुरगुड़ कृषि कार्य के साथ अतिरिक्त आय का स्रोत विकसित करना चाहते थे, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी उनके सामने बड़ी चुनौती थी। इसी दौरान उन्हें पशुधन विकास विभाग की किसान क्रेडिट कार्ड योजना की जानकारी मिली। विभाग के मार्गदर्शन से उन्हें बैंक के माध्यम से 30 हजार रुपये का ऋण प्राप्त हुआ।
इस राशि से उन्होंने मुर्गी पालन के लिए चूजे खरीदे और उनके पालन-पोषण के लिए आवश्यक आहार एवं अन्य व्यवस्थाएं कीं।

तकनीकी मार्गदर्शन से मिली सफलता
पशुधन विकास विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन, नियमित देखभाल और बेहतर प्रबंधन के कारण उनका मुर्गी पालन व्यवसाय लगातार आगे बढ़ता गया। आज वे इस व्यवसाय से प्रतिवर्ष लगभग एक लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं, जिसमें करीब 80 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त होता है।
इस अतिरिक्त आय से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है और वे आत्मनिर्भर जीवन की ओर आगे बढ़ रहे हैं।

अब बड़ा पोल्ट्री फार्म स्थापित करने का सपना
सदाशिव कुरगुड़ बताते हैं कि पशुधन विकास विभाग की योजना ने उन्हें आत्मविश्वास और रोजगार दोनों दिए हैं। अब उनका लक्ष्य भविष्य में एक आधुनिक व्यावसायिक पोल्ट्री फार्म स्थापित कर रोजगार का दायरा बढ़ाना है।
उन्होंने पशुधन विकास विभाग और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि अधिक से अधिक ग्रामीण और युवा इन योजनाओं का लाभ लें, तो वे भी स्वरोजगार अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत बना सकते हैं।

ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बना रही हैं विभागीय योजनाएं
पशुधन विकास विभाग की विभिन्न योजनाएं जिले में किसानों और ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने, उनकी आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी साबित हो रही हैं। सदाशिव कुरगुड़ की सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर कोई भी किसान अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

विविधता में एकता का आधार भारत के विभिन्न राज्यों के लोग : राज्यपाल पटेल

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भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि भारत की विविधता में एकता का आधार भारत के विभिन्न राज्यों के लोग हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दूध में शक्कर घुल जाती है, उसी तरह से मध्यप्रदेश में बंगाल के मूल निवासी घुल मिल गये हैं। हमारी अनेकता में एकता की आत्मीयता और साम्यता को राज्य स्थापना दिवस के आयोजन साकार करते है। आयोजन के मंच पर हमारी वेशभूषा, गीत, नृत्य में समाई हमारी सांस्कृतिक विविधता में एकता की झलक मिलती है। पश्चिम बंगाल की प्रस्तुतियों में उन्हें गुजरात के गरबा नृत्य और वेशभूषा में असम राज्य की झलक दिखाई दी।

राज्यपाल पटेल आज लोकभवन में आयोजित पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस के प्रसंग में आयोजित समारोह में सम्मिलित भोपालवासी बंगाली मूल के लोगों को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डा. नवनीत मोहन कोठारी भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में भोपाल के विभिन्न कालीबाड़ियों के सदस्य उपस्थित थे।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का राष्ट्र प्रथम की भावना को सुदृढ़, राष्ट्रीय एकात्मकता को नई शक्ति प्रदाय करने और राज्यों के मध्य परस्पर सांस्कृतिक संवाद, आपसी समझ और भावनात्मक जुड़ाव को बढ़ावा देने के प्रयास अद्भुत है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री ने गत वर्ष लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा स्थल पर एक नवम्बर से 15 नवम्बर तक भारत पर्व का ऐतिहासिक आयोजन कराया था। पर्व में सभी राज्यों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, सांस्कृतिक दलों और बच्चों की सहभागिता से एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना को मंच प्रदान किया गया था। कार्यक्रम में 300 बच्चों ने कार्यक्रम में सहभागिता की थी। उन्होंने कहा कि भारत की गौरवशाली विरासत को समृद्ध बनाने में बंगाल राज्य का योगदान अतुलनीय है। प्रधानमंत्री मोदी स्वामी विवेकानन्द की जयंती पर विगत वर्षों से देश की युवाओं की आकांक्षाओं के अनुसार विकसित भारत निर्माण के लिए युवाओं के साथ संवाद करते हैं। लोक भवन के  आयोजन में 7 से 60 साल के कलाकारों की सहभागिता और महिलाओं की बहुलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए बदलते भारत की झलक और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बताया।

कार्यक्रम में सपना गुहा ने स्वागत उद्बोधन में बंगाल की समृद्ध परम्पराओं, सांस्कृतिक विरासत के साथ ग्रामीण जन जीवन की सरलता और सांस्कृतिक छटा की रुपरेखा प्रस्तुत की सांस्कृतिक आयोजन की सूत्रधार महुआ चटर्जी ने “हमारा बंगाल रे” की थीम पर बंगाल के लोकगीत, नृत्य और जन जीवन को बाउल, झूमर, धमाइल, भटयाली लोक संगीत की प्रस्तुति के द्वारा सभागार में पश्चिम बंगाल के जन जीवन को जीवंत कर दिया।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर.एन. रवि का स्थापना दिवस का वीडियो संदेश प्रसारित किया गया। पश्चिम बंगाल के सांस्कृतिक वैभव और आधुनिक विकास पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। अंत में मध्यप्रदेश के विकास और वैभव से परिचित कराने वाली लघु फिल्म का प्रसारण किया गया।

राज्यपाल का कार्यक्रम में बंगाली समाज के सचिव सर्वसलिल चटर्जी, निलॉय घोष ने अभिनन्दन किया। आभार प्रदर्शन डा. एन. बनर्जी ने किया। संचालन सहायक सत्कार अधिकारी सुसृष्टि श्रीवास्तव ने किया।

भारतीय हॉकी टीम में मध्यप्रदेश का बढ़ता प्रतिनिधित्व एक उपलब्धि : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय हॉकी टीम में मध्यप्रदेश का बढ़ता प्रतिनिधित्व एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आने वाले समय में मध्यप्रदेश के खिलाड़ी अन्य अंतर्राष्ट्रीय मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन करेंगे। मध्यप्रदेश सरकार खिलाड़ियों को पूरा प्रोत्साहन देगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने निवास पर भेंट के लिए आये अंडर-18 पुरुष और महिला हॉकी एशिया कप-2026 में पदक विजेता खिलाड़ियों को बधाई दी। टूर्नामेंट का आयोजन जापान के काकामिगाहारा शहर में 29 मई से 06 जून 2026 तक किया गया था। पदक विजेता पुरूष और महिला खिलाड़ियों को श्रेष्ठ प्रदर्शन पर मध्यप्रदेश सरकार ने प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार सभी खेलों और खिलाड़ियों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश के भोपाल, जबलपुर, नर्मदापुरम, सिवनी और बड़वानी के खिलाड़ियों में से कुछ खिलाड़ी बहुत साधारण परिवार से हैं। अपनी प्रतिभा के दम पर इन खिलाड़ियों ने 6 स्वर्ण और 4 कांस्य पदक प्राप्त किए हैं। निश्चित ही यह महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आने वाले एशियाई खेलों में इन खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश जो कभी हॉकी में कई ओलम्पियन दे चुका हैं, कुछ वर्ष इस खेल में पीछे रहा, लेकिन अब हरियाणा जैसे राज्यों के समान अग्रणी हो रहा हैं।

खेल मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि जापान में हुए टूर्नामेंट के लिए समीर दाद जैसे कोच खिलाड़ियों को दक्ष बनाने में लगे थे। अंडर-18 की श्रेणी में 6 पुरुष खिलाड़ियों ने 6 स्वर्ण पदक और 4 महिला खिलाड़ियों ने 4 कांस्य पदक जीते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पदक विजेता खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया और उनके साथ समूह छायाचित्र भी खिंचवाया। इस अवसर पर आयुक्त खेल एवं युवक कल्याण संजीव कुमार सिंह और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

टूर्नामेंट से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

                 अंडर-18 बालिका/महिला हॉकी एशिया कप में पुरूष वर्ग में एशिया के 9 देश (भारत, कोरिया, जापान, चीनी- ताइपे, कजाकिस्तान, मलेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश, चीन) एवं महिला वर्ग में एशिया के 8 देश (भारत, कोरिया, मलेशिया, सिंगापुर, चीन, जापान, चीनी ताइपे, बांग्लादेश) ने भाग लिया।

                 प्रतियोगिता में भारत की 18 सदस्यीय बालक / बालिका हॉकी टीम ने भाग लिया।

                 भारतीय बालक हॉकी टीम में म.प्र. राज्य पुरूष हॉकी अकादमी, भोपाल के 06 बालक खिलाड़ी सदस्य रहे तथा स्वर्ण पदक अर्जित किया।

                 भारतीय बालिका हॉकी टीम में म.प्र. राज्य महिला हॉकी अकादमी, ग्वालियर की 04 बालिका खिलाड़ी सदस्य रही तथा कांस्य पदक अर्जित किया।

                 म.प्र. राज्य महिला हॉकी अकादमी की खिलाड़ी सुनौसीन नाज ने प्रतियोगिता में 12 गोल कर टूर्नामेन्ट की 'टॉप स्कोरर' बनने का गौरव प्राप्त किया।

                 म.प्र. राज्य पुरूष हॉकी अकादमी के खिलाड़ी आयुष रजक ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 'बेस्ट गोलकीपर अवार्ड' प्राप्त किया ।

                 मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ग बालक के हॉकी स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ियों को 3 लाख प्रति खिलाड़ी एवं बालिका वर्ग के हॉकी कांस्य पदक विजेता खिलाड़ियों को एक लाख प्रति खिलाड़ी प्रोत्साहन राशि प्रदान करने का निर्णय लिया है।

इन खिलाड़ियों ने किया प्रतिनिधित्व

पुरुष खिलाड़ी :-

आयुष रजक, पिता स्व. अनिल रजक, जिला जबलपुर, स्वर्ण पदक। अंश बहुत्रा, पिता नीरज बहुत्रा, जिला नर्मदापुरम, स्वर्ण पदक। करन गौतम, पिता मनोज गौतम, जिला उमरिया, स्वर्ण पदक। अवि माणिपुरी पिता जितेन्द्र माणिपुरी, जिला भोपाल, स्वर्ण पदक। सिद्धार्थ बेन, पिता लेखराम बेन, जिला जबलपुर, स्वर्ण पदक। गाजी खान, पिता महबूब खान, जिला नर्मदापुरम, स्वर्ण पदक।

महिला खिलाड़ी:-

सुनौसीन नाज, पिता अहफाज खान, जिला सिवनी, कांस्य पदक। सुमहक परिहार, पिता महरवान सिंह परिहार, कांस्य पदक। सुस्नेहा दावड़े पिता राजेश दावड़े , जिला बड़वानी, कांस्य पदक। सुनम्मी गीताश्री, पिता नम्मी ताताराव, तिम्मापुरम, विशाखपट्टनम (आन्ध्रप्रदेश), कांस्य पदक।

बुजुर्गों को बड़ी राहत! दस्तावेजों की त्रुटियां 30 दिन में सुधारने का नया नियम

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फरीदाबाद। सरकारी पहचान पत्रों और पेंशन आईडी में नाम की स्पेलिंग अलग होने या किसी भी तरह की त्रुटि के कारण दफ्तरों के चक्कर काट रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। बुजुर्गों और अन्य लाभार्थियों की इस परेशानी को खत्म करने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) कार्यालय को एक नया मॉड्यूल सौंप दिया गया है। आज सुबह 10 बजे तक मिले अपडेट के अनुसार, इस नए सिस्टम के जरिए नाम से जुड़ी सभी गलतियों को एक महीने से भी कम समय में सुधार दिया जाएगा। इसके लिए नागरिकों को अपने जरूरी दस्तावेज सेक्टर-15ए स्थित जिला समाज कल्याण कार्यालय में जमा कराने होंगे।

शहर के करीब 1.88 लाख लाभार्थियों को मिलेगा सीधा फायदा

इस नई व्यवस्था से फरीदाबाद के उन हजारों लोगों को सीधा फायदा पहुंचेगा जो लंबे समय से पहचान पत्रों में सुधार के लिए परेशान थे। वर्तमान में शहरभर में बुजुर्ग, विधवा, कैंसर पीड़ित, निराश्रित और लाडली सामाजिक सुरक्षा भत्ता जैसी विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत सम्मान भत्ता (पेंशन) प्राप्त करने वाले लाभार्थियों की कुल संख्या लगभग 1,88,698 है।

दस्तावेजों में गड़बड़ी के कारण रुकी थी 1600 लोगों की पेंशन

सरकारी नियमों के मुताबिक पेंशन की राशि हर महीने सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है। लेकिन बीते दिसंबर महीने में पहचान पत्रों और पेंशन आईडी के बीच डेटा मैच न होने, बैंक का आईएफएससी (IFSC) कोड बदलने, उम्र की विसंगति और आय सीमा बढ़ने जैसे तकनीकी कारणों की वजह से करीब 1,600 लाभार्थियों की पेंशन रोक दी गई थी।

अधिकारियों का दावा— समय पर होगा समाधान

विभागीय अधिकारियों का दावा है कि इस नए मॉड्यूल के सक्रिय होने के बाद डेटा मिसमैच की समस्या को बेहद तेजी से दूर किया जा सकेगा। जिन भी पात्र लोगों की पेंशन दस्तावेज़ों की कमियों के कारण रुकी हुई है, उनके रिकॉर्ड का मिलान कर जल्द ही पेंशन का दोबारा सुचारू भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। प्रभावित लोग जिला समाज कल्याण कार्यालय पहुंचकर अपनी त्रुटियों को सुधारने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

राहुल गांधी के नेता प्रतिपक्ष बनने के दो साल पूरे, कांग्रेस ने जारी किया खास संदेश

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नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने देश की संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) के तौर पर अपने कार्यकाल के दो वर्ष सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक मील के पत्थर पर उन्होंने माइक्रोब्लॉगिंग साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत और महत्वपूर्ण संदेश साझा किया। राहुल गांधी ने देश की जनता को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि उनका एकमात्र और मुख्य विजन हर एक भारतीय नागरिक की बुनियादी समस्याओं और उनकी आवाज को देश के शीर्ष शासकों तक पहुंचाना है। उन्होंने देशवासियों को यह दृढ़ भरोसा भी दिलाया कि नीट (NEET) परीक्षा विवाद से प्रभावित युवाओं, देश के संविधान की हिफाजत और लोकतांत्रिक निर्वाचन प्रणाली में पूरी पारदर्शिता लाने जैसे अहम मुद्दों पर उनका लोकतांत्रिक संघर्ष भविष्य में भी निरंतर जारी रहेगा।

जनता की आवाज को देश के सबसे बड़े लोकतांत्रिक गलियारे तक पहुंचाया: राहुल गांधी

अपने दो वर्षों के संसदीय सफर और अनुभवों को याद करते हुए कांग्रेस नेता ने अपनी पोस्ट में लिखा कि विपक्ष के नेता के रूप में उनका बीता हुआ हर एक पल आम जनता की सामूहिक ताकत और उनकी समस्याओं को संसद और केंद्र सरकार के पटल पर रखने के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए लिखा, "आज मुझे देश की लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की संवैधानिक जिम्मेदारी संभाले हुए पूरे दो वर्ष का समय बीत चुका है। इस समयावधि का एक-एक दिन सिर्फ इसी प्रयास में गुजरा है कि किस प्रकार हिंदुस्तान के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति की आवाज को भी देश की सत्ता के सर्वोच्च गलियारों में पूरी मजबूती और गूंज के साथ सुनाया जा सके।"

युवाओं के हक, चुनावी विसंगतियों और संविधान की रक्षा के लिए हमेशा रहूंगा साथ

अपने अब तक के सेवाकाल का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने जनहित से जुड़े कई बड़े विषयों को सदन के भीतर और बाहर पुरजोर तरीके से उठाया है। चाहे वह नीट परीक्षा में धांधली की शिकायतें लेकर सड़कों पर उतरे लाखों परीक्षार्थियों के भविष्य की लड़ाई हो, चुनावी प्रक्रियाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज बुलंद करना हो या फिर देश के बुनियादी कानून यानी संविधान की मूल भावना को सुरक्षित रखने का बड़ा सवाल हो, वे हर मोर्चे पर नागरिक अधिकारों के साथ खड़े रहे हैं। उन्होंने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा, "मैं अतीत में भी आपकी हक की लड़ाई का हिस्सा था, वर्तमान में भी आपके हक के लिए मुस्तैद हूं और आने वाले समय में भी हर जन-आंदोलन में आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहूंगा। सड़क से लेकर संसद के फर्श तक, देश की जनता का अटूट विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी और मार्गदर्शक रहा है। मंजिल अभी दूर है, लेकिन मेरा संकल्प अटल है।"

एक दशक के लंबे इंतजार के बाद देश को मिला था प्रतिपक्ष का नेता

उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी ने जून 2024 में देश की संसद में नेता प्रतिपक्ष का औपचारिक पदभार ग्रहण किया था। देश के संसदीय इतिहास में यह पद करीब दस साल (एक दशक) तक रिक्त रहा था, क्योंकि 16वीं और 17वीं लोकसभा के कार्यकाल के दौरान देश के किसी भी विपक्षी राजनीतिक दल के पास इसके लिए जरूरी न्यूनतम सदस्य संख्या उपलब्ध नहीं थी। संसदीय नियमावली और परंपराओं के अनुसार, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का आधिकारिक दर्जा हासिल करने के लिए किसी भी मुख्य विपक्षी दल के पास सदन की कुल 543 सीटों में से कम से कम 10 प्रतिशत यानी न्यूनतम 55 सीटें होना अनिवार्य है।

2024 के आम चुनावों में प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अकेले 99 संसदीय सीटों पर विजय पताका फहराई और इस अनिवार्य तकनीकी आंकड़े को आसानी से पार कर लिया, जिसके बाद सर्वसम्मति से राहुल गांधी इस पद पर आसीन हुए। साल 2004 में संसदीय राजनीति के सफर की शुरुआत करने के बाद यह राहुल गांधी के राजनीतिक जीवन का पहला बड़ा संवैधानिक और आधिकारिक दायित्व है। इसके साथ ही, वे नेहरू-गांधी परिवार के ऐसे तीसरे राजनेता बन गए हैं जिन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष जैसे गरिमामयी पद का निर्वहन किया है। उनसे पहले उनकी माता सोनिया गांधी और उनके पिता पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी भी विपक्ष के नेता के रूप में देश को अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

जबलपुर की दो खास फसलों को GI टैग, अब देश-दुनिया में बनेगी अलग पहचान

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जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के कृषि इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। क्षेत्र के दो सबसे प्रसिद्ध कृषि उत्पादों— 'मटर' और 'सिंघाड़े' को आधिकारिक तौर पर भौगोलिक संकेतक यानी GI (Geographical Indication) टैग प्रदान कर दिया गया है। चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री में आज, 26 जून को सुबह 10 बजे तक के अपडेट के अनुसार यह महत्वपूर्ण रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कर ली गई। इस दोहरी सफलता के साथ ही जबलपुर देश का पहला ऐसा क्षेत्र बन गया है, जिसके दो अलग-अलग कृषि उत्पादों को एक साथ यह अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।

अब दुनिया में गूंजेगा 'जबलपुर ब्रांड' का नाम

GI टैग मिलने का सीधा मतलब यह है कि अब जबलपुर के मटर और सिंघाड़े को दुनिया भर के बाजारों में अपनी एक अलग और विशिष्ट ब्रांड वैल्यू मिलेगी। यह टैग किसी उत्पाद की उसकी मूल जन्मस्थली और गुणवत्ता की गारंटी होता है। अब जबलपुर की पहचान के नाम पर बिकने वाले इन दोनों उत्पादों को कोई अन्य राज्य या शहर अपने नाम से नहीं बेच सकेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और खेती को भारी बढ़ावा मिलेगा।

नर्मदा के अमृत जल और उपजाऊ मिट्टी की देन

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जबलपुर के मटर और सिंघाड़े का स्वाद, आकार और उनकी पौष्टिकता देश के अन्य हिस्सों से बेहद अलग और उन्नत है। इसकी सबसे बड़ी वजह जीवनदायिनी नर्मदा नदी का स्वच्छ पानी और यहाँ की बेहद उपजाऊ काली मिट्टी है। यह प्राकृतिक माहौल ही इन फसलों को अनूठा बनाता है। विशेषज्ञ लंबे समय से इन्हें विशेष दर्जा दिलाने की मांग कर रहे थे, जिस पर अब वैश्विक मुहर लग चुकी है।

नकली ब्रांडिंग पर लगेगी रोक, मिलेगा कानूनी कवच

यह जीआई टैग न सिर्फ उत्पादों को पहचान देगा बल्कि स्थानीय किसानों को एक मजबूत कानूनी सुरक्षा भी प्रदान करेगा। अब कोई भी बाहरी व्यापारी या बिचौलिया आम मटर या सिंघाड़े को “जबलपुर मटर” या “जबलपुर सिंघाड़ा” बताकर धोखा नहीं दे पाएगा। ऐसा करने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान होगा, जिससे असली और हकदार किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिल सकेगा।

किसानों के लिए खुलेंगे मुनाफे और एक्सपोर्ट के नए रास्ते

इस ऐतिहासिक फैसले के बाद जबलपुर के किसानों की आर्थिक स्थिति में बड़ा उछाल आने की उम्मीद है। ब्रांडिंग मजबूत होने से न केवल देश के बड़े महानगरों में इसकी डिमांड बढ़ेगी, बल्कि अब विदेशों में एक्सपोर्ट (निर्यात) के रास्ते भी साफ हो गए हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में यह निर्णय जबलपुर को देश के एक बड़े 'एग्रीकल्चर ब्रांड हब' के रूप में स्थापित करेगा, जिससे कृषि आधारित उद्योगों की बाढ़ आ जाएगी।

चलती AC स्लीपर बस में लगी भीषण आग, यात्रियों ने कूदकर बचाई अपनी जान

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मेरठ। दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे पर शुक्रवार सुबह एक बड़ा और खौफनाक हादसा हो गया। जयपुर से हरिद्वार जा रही राजस्थान रोडवेज की एक डबल डेकर एसी बस धूं-धूं कर जल उठी। आग इतनी विकराल थी कि कुछ ही मिनटों में पूरी बस कंकाल में तब्दील हो गई और उसका काला धुआं करीब दो किलोमीटर दूर से साफ नजर आ रहा था। राहत की बात यह रही कि बस में सवार सभी 26 यात्री बाल-बाल बच गए, जिन्होंने खिड़कियों और आपातकालीन रास्तों से कूदकर अपनी जान बचाई। हालांकि, अफरा-तफरी के कारण यात्रियों का लाखों रुपये का कीमती सामान जलकर खाक हो गया।

बाइक सवार की सतर्कता से टला बड़ा हादसा

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जयपुर के सूर्य नगर निवासी ड्राइवर राजेंद्र कुमार और कंडक्टर रामकुमार हुड्डा गुरुवार रात करीब 10 बजे बस लेकर जयपुर से रवाना हुए थे। शुक्रवार सुबह करीब 7:15 बजे जब बस मेरठ और मुजफ्फरनगर बॉर्डर के पास दादरी फ्लाईओवर से उतर रही थी, तभी उसके पिछले हिस्से में लगे एसी (AC) के वायरिंग सिस्टम में शॉर्ट सर्किट हो गया। बस से लपटें उठती देख पीछे से आ रहे एक बाइक सवार ने मुस्तैदी दिखाई। उसने तुरंत ओवरटेक कर चिल्लाते हुए ड्राइवर को आग की जानकारी दी।

चीख-पुकार के बीच शीशे खोलकर कूदे लोग

आग की भनक लगते ही ड्राइवर ने सूझबूझ दिखाते हुए बस को तुरंत हाईवे के किनारे रोक दिया। बस के केबिन में धुआं भरता देख यात्रियों में हड़कंप मच गया और चीख-पुकार शुरू हो गई। मुख्य दरवाजा छोटा होने के कारण जब बाहर निकलने में दिक्कत हुई, तो युवाओं और पुरुष यात्रियों ने बस की खिड़कियां और शीशे खोलकर बाहर छलांग लगानी शुरू कर दी। महज 2 से 3 मिनट के भीतर महिलाएं और बुजुर्गों समेत सभी 26 यात्रियों को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया।

सामान निकालने की कोशिश में फटा एसी का पाइप

सभी सवारियों के सुरक्षित बाहर आने के बाद ड्राइवर और कंडक्टर ने हिम्मत दिखाकर बस की डिग्गी खोली ताकि लोगों के बैग निकाले जा सकें। उन्होंने अभी 2-3 बैग ही बाहर खींचे थे कि अचानक एसी का गैस पाइप फट गया। धमाके के साथ आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे चालक और परिचालक को पीछे हटना पड़ा। इसके चलते डिग्गी में रखे बाकी सभी सूटकेस, कीमती सामान और कपड़े जलकर राख हो गए।

दमकल की 4 गाड़ियों ने 2 घंटे में बुझाई आग

हादसे के चलते दिल्ली-देहरादून हाईवे पर वाहनों के पहिये थम गए। मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) सुरेंद्र सिंह ने बताया कि सुबह करीब 7:30 बजे सूचना मिलते ही मेरठ, सरधना और मुजफ्फरनगर से दमकल की 4 गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। हालांकि, 20 मिनट में बस पूरी तरह जल चुकी थी, लेकिन उसके ढांचे में सुलग रही आग को पूरी तरह शांत करने में फायर ब्रिगेड की टीम को करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

यात्रियों को दूसरी बस से भेजा गया हरिद्वार

हादसे के बाद मेरठ पुलिस और उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग के अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने डरे-सहमे यात्रियों को ढांढस बंधाया और उनके लिए नाश्ते व पानी की व्यवस्था की। इसके बाद मानवीय मदद करते हुए सभी 26 यात्रियों को दूसरी सुरक्षित बस में बैठाकर उनके गंतव्य हरिद्वार के लिए रवाना किया गया।

टीएमसी से भाजपा तक का सफर, अब त्रिवेदी को मिला अहम राजनयिक पद

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नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस के पूर्व बड़े नेता और बाद में भाजपा में शामिल हुए दिनेश त्रिवेदी ने गुरुवार को बांग्लादेश में भारत के नए हाई कमिश्नर (उच्चायुक्त) के रूप में अपना कार्यभार संभाल लिया है। पद संभालते ही उन्होंने बांग्लादेश के नागरिकों के लिए एक बड़ा एलान किया है। उन्होंने घोषणा की है कि लंबे समय से बंद पड़े सामान्य यात्रा वीजा (टूरिस्ट वीजा) को फिर से शुरू किया जा रहा है। दिनेश त्रिवेदी ने यह जानकारी ढाका में भारतीय वीजा केंद्र के दौरे के दौरान दी, जिससे अब बांग्लादेशी नागरिकों के लिए भारत आने का रास्ता साफ हो गया है।

पहली बार किसी राजनेता को मिली यह जिम्मेदारी

76 वर्षीय दिनेश त्रिवेदी को इस साल 27 अप्रैल को बांग्लादेश में भारत का हाई कमिश्नर नियुक्त किया गया था। वह इस महत्वपूर्ण राजनयिक पद को संभालने वाले पहले राजनेता बन गए हैं (आमतौर पर यह पद आईएफएस अधिकारियों को मिलता है)। उनके इस पद के महत्व को देखते हुए गृह मंत्रालय ने उन्हें केंद्रीय मंत्री का दर्जा भी दिया है। गुरुवार को त्रिवेदी ने बंगभवन प्रेसिडेंशियल पैलेस में बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन को अपने आधिकारिक दस्तावेज (क्रेडेंशियल्स) सौंपे, जिसके बाद उन्हें 'गार्ड ऑफ ऑनर' भी दिया गया। दिनेश त्रिवेदी ने इस पद पर प्रणय कुमार वर्मा की जगह ली है।

दो साल बाद शुरू हो रही है वीजा सेवा

लगभग दो साल पहले बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के अंतरिम शासन के दौरान सुरक्षा बिगड़ने और भारत के साथ रिश्तों में आई तल्खी के कारण यात्रा वीजा पर रोक लगा दी गई थी। दिनेश त्रिवेदी की इस नई घोषणा से अब बांग्लादेशी नागरिक पर्यटन, इलाज, सरकारी काम, बिजनेस या किसी तीसरे देश जाने के लिए भारत का वीजा ले सकेंगे। वीजा आवेदन की प्रक्रिया 28 जून से शुरू हो जाएगी और ये वीजा ढाका, राजशाही, चटगांव, सिलहट और खुलना के केंद्रों से जारी किए जाएंगे। इसके साथ ही आपातकालीन मेडिकल वीजा पहले की तरह ही मिलते रहेंगे।

रिश्तों में आएगी नई मजबूती

भारत और बांग्लादेश के बीच हमेशा से गहरे सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध रहे हैं। जानकारों का मानना है कि दिनेश त्रिवेदी की यह पहल दोनों देशों के रिश्तों को सुधारने और आम जनता के बीच संपर्क बढ़ाने में बेहद मददगार साबित होगी। यात्रा वीजा दोबारा शुरू होने से व्यापार, पर्यटन और आपसी संबंधों को एक बार फिर नई गति मिलेगी।

टीम इंडिया की प्लेइंग-11 से बाहर रहे वैभव सूर्यवंशी, रिकॉर्ड बनाने का सपना टला

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नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के उभरते हुए सितारे वैभव सूर्यवंशी को आयरलैंड के खिलाफ खेले जा रहे पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में डेब्यू (पदार्पण) करने का मौका नहीं मिला है। मैच से पहले क्रिकेट गलियारों में उनके खेलने को लेकर काफी चर्चाएं थीं और माना जा रहा था कि उन्हें अंतिम एकादश (प्लेइंग-11) में शामिल किया जा सकता है, लेकिन टीम प्रबंधन ने फिलहाल उन्हें मौका देने के लिए थोड़ा और इंतजार कराने का फैसला किया है।

टूटने से बचा सबसे युवा खिलाड़ी बनने का रिकॉर्ड

अगर वैभव सूर्यवंशी को इस मुकाबले में मैदान पर उतरने का मौका मिलता, तो वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में सबसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले खिलाड़ी बन जाते। हालांकि, टीम कॉम्बिनेशन को देखते हुए उन्हें अभी बेंच पर ही बैठना होगा।

श्रेयस अय्यर के नेतृत्व में नई शुरुआत

इस मैच से भारतीय टीम के स्टार बल्लेबाज श्रेयस अय्यर के करियर का एक नया अध्याय भी शुरू हो रहा है। श्रेयस अय्यर पहली बार टी20 क्रिकेट में टीम इंडिया की कप्तानी संभाल रहे हैं। बतौर कप्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह उनका पहला मुकाबला है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

अभिषेक और संजू संभालेंगे ओपनिंग की जिम्मेदारी

वैभव के न खेलने की स्थिति में टीम इंडिया के लिए पारी की शुरुआत करने का जिम्मा दो विस्फोटक बल्लेबाजों पर रहेगा। इस मुकाबले में अभिषेक शर्मा और विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन भारतीय पारी का आगाज करते हुए नजर आएंगे। फैंस को उम्मीद है कि यह जोड़ी टीम को एक आक्रामक और मजबूत शुरुआत दिलाएगी।

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