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15 फरवरी को महाशिवरात्रि का व्रत, 300 साल बाद शुभ संयोग! जानें चार प्रहर का पूजा मुहूर्त और निशिथ काल का समय

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फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हर वर्ष महाशिवरात्रि का व्रत किया जाता है और इस बार यह शुभ तिथि 15 फरवरी दिन रविवार को है. महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक बहुत बड़ा और खास पर्व है, जिसे शिव भक्त हर साल बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव पहली बार निराकार स्वरूप से साकार रूप में प्रकट हुए थे और इसी दिन भगवान शिव का माता पार्वती से विवाह हुआ था अर्थात शिव और शक्ति का मिलन इसी रात हुआ था. इस बार महाशिवरात्रि पर 300 साल बाद 8 योग का शुभ संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व बढ़ गया है. आइए जानते हैं महाशिवरात्रि पूजा का महत्व, पूजा मुहूर्त और शिव-पार्वती पूजन विधि…

महाशिवरात्रि का महत्व
पुराणों के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात को भगवान शिव ने तांडव नृत्य किया था, जो सृष्टि, संरक्षण और विनाश का प्रतीक है. इस रात को शिव भक्त पूरी रात जागरण करते हैं और शिव के भजन-कीर्तन में लीन रहते हैं. महाशिवरात्रि का पर्व ना केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसे आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम भी माना जाता है. इस दिन ध्यान और साधना करने से व्यक्ति को मन की शांति और आध्यात्मिक बल मिलता है. इस दिन विशेष तौर पर शिव पूजन, रात्रि जागरण, मंत्र जप, व्रत और चार प्रहर की पूजा करने का बड़ा महत्व है. कहा जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन की गई भक्ति और उपासना से भक्तों को जीवन में सुख, समृद्धि और सभी प्रकार के लाभ मिलते हैं.

300 साल बाद ऐसा संयोग
काशी के ज्योतिषियों का दावा है कि करीब 300 साल बाद महाशिवरात्रि पर 8 योग का शुभ योग बन रहा है. 15 फरवरी को सूर्य, बुध और शुक्र का त्रिग्रही योग बन रहा है. इसके अलावा इस दिन श्रवण नक्षत्र भी है जो भगवान शिव को अतिप्रिय माना जाता है. इसके अलावा व्यतिपात, वरियान, ध्रुव और राज योग का भी महासंयोग है. जो इस दिन को और भी खास बनाता है.

महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी 2026
द्रिक पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी 2026 को शाम 5 बजकर 4 मिनट से शुरू होगी और 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी. इसका मतलब यह है कि मुख्य रूप से महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी, लेकिन तिथि रात और अगले दिन तक चलने के कारण पूजा का समय भी ज्यादा रहेगा. पारण का समय 16 फरवरी की सुबह 6 बजकर 33 मिनट से दोपहर 3 बजकर 10 मिनट तक रहेगा.

चार प्रहर की पूजा का मुहूर्त
महाशिवरात्रि पर चार पहर का पूजा मुहूर्त बेहद खास माना जाता है. पहला प्रहर 15 फरवरी की शाम 6 बजकर 11 मिनट से रात 9 बजकर 23 मिनट तक रहेगा. दूसरा प्रहर 15 फरवरी की रात 9 बजकर 23 मिनट से 16 फरवरी की रात 12 बजकर 35 मिनट तक होगा. तीसरा प्रहर 16 फरवरी की रात 12 बजकर 35 मिनट से सुबह 3 बजकर 47 मिनट तक रहेगा और चौथा प्रहर 16 फरवरी को सुबह 3 बजकर 47 मिनट से 6 बजकर 59 मिनट तक रहेगा. वहीं, निशिथ काल का पूजा समय 16 फरवरी की रात 12 बजकर 9 मिनट से लेकर 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगा, जिसे सबसे शुभ माना जाता है.

महाशिवरात्रि पूजा विधि
महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करना और उसके ऊपर केसर मिलाकर जल अर्पित करना विशेष लाभदायक माना गया है. शिवजी को बेलपत्र, भांग, धतूरा, फल, मिठाई आदि अर्पित करना चाहिए. इसके बाद मंत्रों का जप जैसे ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘ॐ नमो भगवते रुद्राय’ करना भी इस दिन का विशेष महत्व है. घी के दीपक से भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें. साथ ही शिव पुराण का पाठ और रात्रि जागरण करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है. भक्त इस दिन रातभर दीप जलाकर रखें और चंदन का तिलक करें.

 

स्नान से लेकर घर की पूजा तक, हर जगह गंगाजल क्यों है जरूरी? जानें इसे रखने का सही दिन, सही विधि और सही दिशा

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भारत में अगर किसी नदी को मां कहा गया है, तो वह सिर्फ पानी की धारा नहीं, आस्था की बहती हुई पहचान है. गंगा बचपन में घर के मंदिर में रखी छोटी-सी बोतल से लेकर अंतिम संस्कार तक, गंगाजल हर मोड़ पर हमारे साथ रहता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर गंगाजल को इतना पवित्र क्यों माना जाता है? क्यों कहा जाता है कि इसका एक छींटा भी माहौल बदल देता है? सिर्फ धार्मिक वजहें ही नहीं, बल्कि परंपराएं, अनुभव और कुछ व्यावहारिक कारण भी इसके पीछे हैं. गंगा में स्नान करने से लेकर उसके जल को घर लाने और रखने तक, शास्त्रों में कई नियम बताए गए हैं, जिन्हें आज भी लोग मानते हैं. आइए जानते हैं गंगाजल की महत्ता और उससे जुड़े जरूरी नियम, आसान और साफ शब्दों में.

सनातन परंपरा में गंगाजल का महत्व
हिंदू धर्म में गंगा को ‘पतितपावनी’ कहा गया है. मान्यता है कि गंगा का उद्गम भगवान विष्णु के चरणों से हुआ और शिव की जटाओं से निकलकर वह धरती पर आईं. इसी वजह से गंगाजल को चरणामृत के समान पवित्र माना जाता है. कहा जाता है कि गंगा दर्शन मात्र से मन हल्का होता है. कई लोग बताते हैं कि गंगा तट पर बैठते ही एक अलग तरह की शांति महसूस होती है, जो शायद शब्दों में नहीं समा पाती.

विष्णु का चरणामृत क्यों कहलाता है गंगाजल
धार्मिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु के अंगूठे से निकला जल गंगा बना. यही कारण है कि गंगाजल को अमृत समान माना गया है. मान्यता है कि इसके सेवन या स्पर्श से जीवन के दोष कम होते हैं और व्यक्ति को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता. राजा भगीरथ द्वारा गंगा को पृथ्वी पर लाने की कथा भी यही बताती है कि गंगाजल सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पीढ़ियों के उद्धार का माध्यम माना गया

गंगाजल कब भरना माना जाता है शुभ
शुभ तिथियां और दिन
वैसे तो गंगाजल किसी भी दिन लिया जा सकता है, लेकिन कुछ तिथियां इसे और ज्यादा पुण्यकारी मानती हैं. जैसे- अमावस्या, पूर्णिमा, एकादशी, संक्रांति, गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा.
सोमवार, महाशिवरात्रि और कुंभ जैसे पर्वों पर गंगाजल भरना विशेष फलदायी माना जाता है.
ब्रह्म मुहूर्त का महत्व
परंपरा कहती है कि सुबह ब्रह्म मुहूर्त में गंगाजल भरना सबसे अच्छा होता है. इस समय वातावरण शांत होता है और जल में आध्यात्मिक ऊर्जा अधिक मानी जाती है.

घर में गंगाजल कहां और कैसे रखें
गंगाजल को घर की उत्तर दिशा में किसी साफ और पवित्र स्थान पर रखना शुभ माना जाता है. आमतौर पर लोग इसे पूजा घर में रखते हैं. पात्र की बात करें तो पीतल, तांबा या कांसे का बर्तन सबसे उपयुक्त माना गया है. प्लास्टिक की बोतल में लंबे समय तक गंगाजल रखना सही नहीं माना जाता, अगर मजबूरी में प्लास्टिक में लाया गया हो, तो घर पहुंचते ही धातु के पात्र में डाल देना चाहिए.
गंगाजल से जुड़ी आम लेकिन जरूरी सावधानियां
न करें ये गलतियां
गंगाजल लाने से पहले घर और गंगा तट पर स्नान करना जरूरी माना गया है. बिना स्नान या अशुद्ध अवस्था में गंगाजल भरने से परहेज करना चाहिए. गंगाजल को कभी भी अंधेरी, गंदी या अपवित्र जगह पर न रखें. इसे छूते समय भी साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि मान्यता है कि श्रद्धा और नियम दोनों साथ चलते हैं.

आज के समय में गंगाजल का स्थान
आज भले ही जीवन तेज हो गया हो, लेकिन गंगाजल की अहमियत कम नहीं हुई. शादी-ब्याह, गृह प्रवेश या पूजा-पाठ-हर जगह इसकी मौजूदगी बताती है कि आस्था आज भी हमारी दिनचर्या का हिस्सा है. यह सिर्फ विश्वास नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चला आ रहा अनुभव है.

रावण के मामा का गांव, जहां पर हुआ था सुबाहुं का अंत, विकास की उपेक्षा का है शिकार

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बलिया: आइए आज हम आपको पौराणिक और ऐतिहासिक गांव की तरफ ले चलते हैं, जी हां कैमरा जैसे ही गांव की सीमा में प्रवेश करता है, सबसे पहले दूर तक फैली हरियाली, लहलहाते खेत, शांत वातावरण और मिट्टी की सौंधी खुशबू पर नजर पड़ती है, जो सब कुछ मन को सुकून दे रहा था. यही वो गांव था, जहां पौराणिक इतिहास और वर्तमान एक-दूसरे से टकराते नजर आ रहे थे. यह गांव राम और रावण के कहानी को मानो जीवंत कर रहा था और कुछ बोल रहा था.

रामायण काल से जोड़कर देखा जाता है यह गांव
आपको बताते चलें कि यह जनपद बलिया के चितबड़ागांव थाना क्षेत्र अंतर्गत सुजायत गांव हैं, जिसे रामायण काल से जोड़कर देखा जाता है. स्थानीय बुजुर्गों (गामा और मुखराम) ने कहा कि, मान्यताओं के अनुसार, यहीं पर रावण का मामा सुबाहूं, जो त्रिजटा और सुंद का पुत्र था, रहा करता था. कैमरा आगे बढ़ता है और एक प्राचीन टीले पर ठहरता है. यह टीला न केवल मिट्टी का ढेर है, बल्कि हजारों साल पुराने इतिहास का गवाह भी है.

कहते हैं कि, सुबहूं के नाम पर ही इस गांव का नाम सुजायत पड़ा है. पुरातात्विक दृष्टिकोण से भी यह स्थान महत्वपूर्ण माना जाता है. प्रख्यात इतिहासकार डॉ. शिवकुमार सिंह कौशिकेय के मुताबिक, पुरातत्व विभाग द्वारा यहां खुदाई कराई गई थी, जिसमें कई प्राचीन अवशेष मिले थे, जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक प्रामाणिकता की ओर संकेत करते हैं. यही पर भगवान राम में सुबाहु का वध किया था. बलिया में भगवान राम, लक्ष्मण और विश्वामित्र आए थे, जिसको लेकर बलिया में एक पुरानी कहावत बड़ी फेमस है, जो इस प्रकार है भोर भरवली भए उजियारा, बक्सर जाए ताड़का मारा.

विकास की उपेक्षा है यह गांव
गांव से कुछ दूरी पर, जहां कभी सुबहूं का भाई मारीच रहा करता था. उसी के नाम पर बसा गांव मरिचि, आज लगभग इतिहास के पन्नों में ही सिमट कर रह गया है. उसका भौतिक अस्तित्व अब मुश्किल से दिखाई देता है. वापस सुजायत में लौटते ही दृश्य बदल जाता है. ओवरफ्लो होती नालियां, टूटी सड़कें, झुग्गी-झोपड़ियां और बुनियादी सुविधाओं की कमी कही न कही आधुनिक भारत की एक कड़वी सच्चाई को भी उजागर करता है. इतना समृद्ध इतिहास रखने वाला यह गांव आज विकास से कोसों दूर खड़ा है.
इतिहास बनकर रह गया है यह गांव
यह डॉक्यूमेंट्री न केवल एक गांव की कहानी है, बल्कि उस विरासत की आवाज़ है, जिसे समय के साथ भुलाया जा रहा है. सवाल वहीं पुराना है कि, क्या इतिहास केवल किताबों में सिमट कर रह जाएगा या कभी उसे उसका हक भी मिलेगा? हालांकि, यही गांव अपने आप में ऐतिहासिक है. यहां के लोगों का कहना है कि, यह पौराणिक टीला अब जंगल झाड़ में तब्दील हो रहा है, इसको बचाने की जरूरत

राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (09 फ़रवरी 2026)

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  • मेष राशि :- साधन संपन्नता के योग फलप्रद हों, धार्मिक योजना अवश्य सफल होगी, ध्यान रखेंगे।
  • वृष राशि :- अपने किये पर पछताना पड़ेगा, मानसिक बेचैनी, क्लेश तथा अशांति बनेगी।
  • मिथुन राशि :- सफलता के साधन जुटायें, व्यवसायिक क्षमता में वृद्धि होगी, समस्या सुलझेगी।
  • कर्क राशि :- अनेक कार्य में सफलता मिलेगी, स्त्री से सुख, इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे।
  • सिंह राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास होवेगा, भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी, कार्य गति उत्तम हो।
  • कन्या राशि :- धन प्राप्त हो, आशानुकूल सफलता में वृद्धि होवे, बिगड़े कार्य योजना बनेंगे।
  • तुला राशि :- आशानुकूल सफलता का हर्ष, बिगड़े कार्य अवश्य ही बनेंगे, कार्य योजना सफल हो।
  • वृश्चिक राशि :- दैनिक समृद्धि के साधन बनेंगे, अधिकारियों से कार्य योजना से लाभ हो।
  • धनु राशि :- कार्य योजना पूर्ण हो, बड़े लोगों से मेल मिलाप होगा, कार्य अवरोध से बचें।
  • मकर राशि :- कार्य कुशलता से संतोष, स्थिति में सुधार तथा चिंता अवश्य कम होगी।
  • कुंभ राशि :- आर्थिक योजना पूर्ण अवश्य ही होगी, शरीर कष्ट, मानसिक बेचैनी बढ़ेगी।
  • मीन राशि :- दैनिक कार्य में बाधा, चिन्ता, उद्विघ्नता से बचें, धन का व्यय होगा।

नवोत्थान और विकसित भारत–2047 के विजन का सशक्त दस्तावेज है केन्द्रीय बजट : मनोहर लाल

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रायपुर :  केंद्रीय ऊर्जा, आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने केन्द्रीय बजट को नवोत्थान और समावेशी विकास का वाहक बताते हुए कहा कि यह बजट विकसित भारत–2047 के दीर्घकालिक विजन को साकार करने वाला एक सशक्त दस्तावेज है। वे राजधानी रायपुर में एक दिवसीय प्रवास के दौरान आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे।

नवोत्थान और विकसित भारत–2047 के विजन का सशक्त दस्तावेज है केन्द्रीय बजट : मनोहर लाल

केन्द्रीय मंत्री लाल ने कहा कि इस बजट में अगले 25 वर्षों के लिए देश के आर्थिक, सामाजिक एवं बुनियादी ढांचे के विकास की स्पष्ट दिशा निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि यह बजट पहली बार कर्तव्य भवन में तैयार किया गया है, जो शासन व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। बजट में 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट को भी सम्मिलित किया गया है, जिससे आगामी वर्षों में राज्यों के विकास को नई गति मिलेगी।

नवोत्थान और विकसित भारत–2047 के विजन का सशक्त दस्तावेज है केन्द्रीय बजट : मनोहर लाल

मनोहर लाल ने विश्वास जताया कि बजट प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन से बिजली, आवास, शहरी विकास एवं अधोसंरचना क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह संवेदनशील और प्रतिबद्ध है।

प्रेस वार्ता में केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू, प्रदेश के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, सांसद संतोष पाण्डेय एवं बृजमोहन अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

फिजूलखर्ची को छोड़कर बाबा गुरु घासीदास के बताये सादगी विवाह को गर्व के साथ अपनाने की जरूरत : केबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब

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रायपुर :  कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, अनुसूचित जाति विकास विभाग मंत्री गुरु खुशवंत साहेब का रविवार को सारंगढ़ प्रवास रहा, जहाँ केबिनेट मंत्री प्रदेश स्तरीय सतनामी समाज युवक युवती परिचय सम्मेलन में शामिल हुए। गुरु खुशवंत साहेब ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा निरंतर सतनामी समाज के लिए किए जा रहे सबका साथ सबका विकास के कार्यों, प्रदेश में गुरु घासीदास बाबा के मेला आयोजन के लिए स्वीकृत राशि का अपने संबोधन में जिक्र किया।

मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास जी के सादा जीवन, उच्च विचार के जो संदेश दिए गए हैं जो संस्कृति और संस्कार बताए गए हैं, उसके सादगी विवाह की परम्परा को हमें गर्व के साथ अपनाने की जरूरत है। केबिनेट मंत्री ने कहा कि, जिस प्रकार आज हम दिखावे की ओर आगे बढ़ रहे हैं। दिखावे की शादी में धन का खर्च बहुत ज्यादा है। लड़का ढूंढना है या लड़की ढूंढना है तो हम सब लोगों को कितना परेशानी होती है। आज लोग विवाह को सम्मान और इज्जत के रूप में देखते हैं और मन मुताबिक शादी करते हैं भले ही कर्ज लेना पड़े। दिखावे से थोड़ा उठके हमें सादा विवाह की राह बहुत पहले गुरु घासीदास ने दी है। इसमें किसी प्रकार का खर्च नही है। समाज में एक दूसरे के प्रति प्रेम की भावना स्थापित करें।

राज्य सरकार द्वारा गुरु घासीदास बाबा के मेला आयोजन के लिए राशि स्वीकृत

मंत्री ने कहा कि गिरौदपुरी हो, भंडारपूरी हो, लालपुर धाम हो, चाहे हर जगह के लिए करोड़ों रुपए पैसा स्वीकृत है। किसी प्रकार के कोई कमी नहीं है सिर्फ धार्मिक स्थल की उन्नति और विकास है। सारंगढ़ में प्रतिवर्ष बाबा गुरु घासीदास जी की जयंती मनाई जा रही है। छत्तीसगढ़ सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने इसके लिए राशि स्वीकृत की है जो आजतक चल रही है। आज मात्र 2 साल के अंदर में मुख्यमंत्री जी ने हमारा हमेशा लगातार सहयोग किया है। शिक्षा के स्तर में भी सीजीपीएससी में एसडीएम, डिप्टी कलेक्टर बनते हैं, उसकी फ्री कोचिंग की व्यवस्था राज्य सरकार ने की है। पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू किए हैं। हमारे छत्तीसगढ़ सरकार में सबका साथ, सबका विकास के मूलमंत्र से सर्व समाज के उन्नति और विकास के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कार्य कर रहे हैं।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष संजय भूषण पांडे,  सदस्य लता लक्षमे, सांसद प्रतिनिधि संतोष सोनवानी,  पूर्व विधायक सनम जांगड़े केराबाई मनहर, निर्मल सिन्हा, ज्योति पटेल, सुभाष जालान, अजय गोपाल, वेदराम जांगडे, हरिनाथ खूंटे, शिव कुमारी चौहान बी डी भारद्वाज, आयोजक अजय कोसले सहित बड़ी संख्या में युवक युवती, पालक, सतनामी विकास परिषद के सदस्य और पत्रकारगण उपस्थित थे।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से 28.19 करोड़ रुपए की सड़क परियोजना को मिली स्वीकृति

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रायपुर :  महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के सतत प्रयासों से भटगांव विधानसभा क्षेत्र को सड़क विकास की एक बड़ी सौगात मिली है। राज्य शासन द्वारा बीरपुर 12 मील हनुमान मंदिर (सिलफिली) से कालीघाट महावीरपुर (अंबिकापुर) तक राष्ट्रीय राजमार्ग–43 के डामरी मजबूतीकरण कार्य के लिए 28.19 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में क्षेत्र की आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। इस महत्वपूर्ण परियोजना के माध्यम से लंबे समय से जर्जर सड़क की समस्या का समाधान होगा तथा आमजन को सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक आवागमन की सुविधा मिलेगी।

इस सड़क विकास कार्य से भटगांव विधानसभा सहित आसपास के क्षेत्रों में व्यापार, परिवहन और स्थानीय रोजगार के अवसरों को नई गति मिलेगी। साथ ही अंबिकापुर जैसे प्रमुख शहरी केंद्र से संपर्क और अधिक मजबूत होगा, जिससे क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि सुशासन सरकार की प्राथमिकता जनसुविधाओं का विस्तार और संतुलित विकास है। भटगांव विधानसभा के विकास के लिए सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में निरंतर प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।

खेल मड़ई बना स्वास्थ्य और सौहार्द का मंच – मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े

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रायपुर :  महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि अच्छे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए खेल अत्यंत आवश्यक हैं। पत्रकारों की व्यस्त दिनचर्या के बावजूद खेलों के प्रति उनका उत्साह सराहनीय है। उन्होंने रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित खेल मड़ई को प्रेरणादायक पहल बताते हुए सभी आयोजकों और प्रतिभागी टीमों को शुभकामनाएं दीं।

रायपुर प्रेस क्लब द्वारा स्वर्गीय कुलदीप निगम की स्मृति में खेल मड़ई के अंतर्गत नेताजी सुभाष स्टेडियम, रायपुर में इंटर प्रेस क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। प्रतियोगिता में पत्रकार जगत की विभिन्न टीमों के बीच उत्साहपूर्ण और रोमांचक मुकाबले खेले जा रहे हैं। आयोजन का उद्देश्य पत्रकारों को उनकी व्यस्त दिनचर्या से कुछ समय निकालकर खेलों से जोड़ना, आपसी सौहार्द को बढ़ावा देना और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने मैदान में पहुंचकर प्रतियोगिता में भाग ले रहे पत्रकार खिलाड़ियों से मुलाकात की और उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने खिलाड़ियों की खेल भावना की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन आपसी सहयोग, टीम भावना और सकारात्मक ऊर्जा को मजबूत करते हैं।
इस अवसर पर रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी, महासचिव गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष दिनेश यदु, सहसचिव निवेदिता साहू एवं भूपेश जांगड़े, खेल आयोजन समिति के संयोजक विजय मिश्रा सहित बड़ी संख्या में पत्रकारगण उपस्थित रहे।

शासन के सहयोग से आत्मनिर्भरता की राह पर दिव्यांग राजेश कुमार पटेल

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रायपुर :  दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और राज्य शासन के सहयोग से जीवन की कठिनाइयों को अवसर में बदला जा सकता है।इस सच्चाई को चरितार्थ कर दिखाया है बिलासपुर जिले के मस्तूरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम चिरहुला निवासी दिव्यांग राजेश कुमार पटेल ने। दोनों पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और व्यावसायिक प्रशिक्षण के सहारे आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार को स्थायित्व और सम्मानपूर्ण जीवन प्रदान किया है।

राजेश कुमार पटेल ने बिलासपुर स्थित शासकीय आश्रयदत्त कर्मशाला, तिफरा से सत्र 2023–24 में इलेक्ट्रिकल व्यवसाय का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण ने न केवल उन्हें तकनीकी दक्षता प्रदान की, बल्कि आत्मविश्वास भी दिया, जिससे वे अपनी क्षमताओं को पहचानकर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सके।

प्रशिक्षण से पूर्व वे एक छोटी पान दुकान के माध्यम से परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे, जिससे आय सीमित थी। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद उन्होंने अपने घर से ही इलेक्ट्रिकल उपकरण मरम्मत का कार्य प्रारंभ किया। वर्तमान में वे टेबल फैन, सीलिंग फैन, कूलर, मिक्सर ग्राइंडर, हीटर, टेबल लैम्प, इन्वर्टर सहित विभिन्न घरेलू विद्युत उपकरणों की मरम्मत कर रहे हैं।इस कार्य से अब उनकी दैनिक आय 500 से 1500 रुपये तक हो रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और परिवार का जीवन स्तर भी बेहतर हुआ है। आत्मनिर्भरता की इस राह ने उन्हें समाज में नई पहचान और आत्मसम्मान दिलाया है।

अपनी सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए लाभार्थी राजेश कुमार पटेल ने राज्य शासन एवं समाज कल्याण विभाग के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित व्यावसायिक प्रशिक्षण योजनाओं ने उन्हें सम्मानजनक आजीविका का अवसर प्रदान किया और आत्मनिर्भर बनने का मार्ग प्रशस्त किया।

कृषि रथ के माध्यम से किसानों को दी जा रही ई-विकास प्रणाली की जानकारी

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भोपाल : प्रदेश में वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष“ के रूप में मनाया जा रहा है। इसी क्रम में हरदा जिले के तीनों विकासखंडों में किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग द्वारा कृषि रथ का संचालन किया जा रहा है। कृषि रथ के साथ कृषि विज्ञान केंद्र, कोलीपुरा के वैज्ञानिक, कृषि विभाग एवं संबद्ध विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा किसानों से सीधा संपर्क कर ई-विकास प्रणाली से उर्वरक क्रय करने के लिये जागरूक किया जा रहा है। साथ ही नरवाई प्रबंधन, ग्रीष्मकालीन मूंग फसल के स्थान पर उडद, मूंगफली, तिल आदि फसलों को प्रोत्साहन, प्राकृतिक व जैविक कृषि करने के लिये प्रोत्साहन, मृदा स्वास्थ कार्ड के आधार पर उर्वरको की संतुलित मात्रा का उपयोग करने और भूमि पर बोई गई फसल अनुसार सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग करने आदि का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है। विभागीय योजनाओं की जानकारी के साथ-साथ किसानों को समसामयिक सलाह भी प्रदान की जा रही है। कृषि रथों द्वारा जिले की 162 ग्राम पंचायतो में भ्रमण किया गया है। इस दौरान 5270 किसानों, 247 जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में विभागीय अधिकारी कर्मचारी तथा वैज्ञानिकों द्वारा विस्तृत जानकारी प्रदाय की गई।

किसानों को आधुनिक खेती और नरवाई प्रबंधन की दी जा रही जानकारी

कटनी जिले के किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों और उन्नत खेती की जानकारी देने के लिए कृषि विभाग द्वारा कृषि रथ के माध्‍यम से किसानों को जागरूक किया जा रहा है। इसी कड़ी में विकासखंड रीठी के गांवों में 'कृषि रथ' चलाकर किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों एवं नरवाई प्रबंधन की जानकारी दी गई। किसानों को नरवाई (फसल अवशेष) प्रबंधन के लिए आधुनिक यंत्रों जैसे सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, जीरो टिलेज सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल, स्ट्रा रीपर और रीपर कम बाइंडर की तकनीकी जानकारी दी। सुपर सीडर और हैप्पी सीडर खेत की तैयारी, नरवाई प्रबंधन और बोनी सहित तीन काम एक साथ करते हैं। इन यंत्रों के उपयोग से न केवल समय और लागत की बचत होती है, बल्कि पैदावार भी अच्छी मिलती है। नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति नष्ट होती है और वायु प्रदूषण फैलता है, जिससे बीमारियां बढ़ती हैं। नरवाई न जलाकर उसे खाद के रूप में उपयोग करना ही श्रेष्ठ है। किसानों को कस्टम हायरिंग, डीबीटी, यंत्रदूत ग्राम योजना, वर्मी कंपोस्ट, नाडेप और जीवामृत खाद बनाने की विधि की भी जानकारी दी गई।

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