वाराणसी में 75 दिन में 1200 टीबी मरीज मिले, स्वास्थ्य विभाग सतर्क

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वाराणसी।बदलती जीवनशैली का असर रोग प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ रहा है। इसका असर अब फेफड़ों पर दिखने लगा है। पिछले 75 दिन में ही जिले में 1200 ऐसे लोग मिले हैं, जिनके फेफड़े खराब हो गए हैं। चिंता की बात यह है कि इसमें करीब 500 से ज्यादा लोगों की उम्र 20 से 45 साल है। इसमें 300 से ज्यादा महिलाएं हैं। इस साल जनवरी से 15 मार्च तक 3500 टीबी के नए मरीजों की जांच के दौरान ये आंकड़े सामने आए हैं। टीबी के इन नए मरीजों में 1200 के फेफड़े खराब मिले हैं। ये फेफड़े की टीबी से ग्रसित हैं। जिस तरह से मौसम बदल रहा है, दिन में गर्मी तो रात में सिहरन का अहसास हो रहा है। इसका असर है कि लोग तेजी से सर्दी, बुखार, खांसी, सीने में जकड़न की समस्या से ग्रसित हो रहे हैं। इसके अलावा घर से बाहर निकलने पर धूल और धुआं भी झेलना पड़ रहा है। इन सबका सीधा असर फेफड़े पर पड़ रहा है। 

डॉक्टरों के अनुसार पहले से प्रदूषण, मौसमी बीमारी से ग्रसित होने के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी मरीजों की पहचान के लिए अभियान चलाया गया। इसमें ही ये चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। 
ढाई महीने में 3500 नए मरीजों की पहचान हुई है। इसमें जांच के बाद 1200 लोगों में फेफड़े की टीबी की पुष्टि हुई है। हर साल 24 मार्च को विश्व क्षय रोग दिवस मनाया जाता है। इसमें टीबी होने के कारण, बचाव, इलाज के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता है। फेफड़े की टीबी सहित इस बीमारी के शरीर के अन्य भागों पर पड़ने वाले प्रभाव और उपचार की जानकारी दी जाती है।

डायबिटीज और स्ट्रॉयड का ज्यादा सेवन करने से कम होती है रोग प्रतिरोधक क्षमता

आईएमएस बीएचयू के टीबी एंड चेस्ट डिपार्टमेंट के पूर्व अध्यक्ष प्रो. जीएन श्रीवास्तव का कहना है कि पहले से डायबिटीज और स्ट्रॉयड का अधिक सेवन करने वाले, शरीर में कैल्शियम की कमी वाले लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। ऐसे लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। ऐसा इसलिए कि पहले से ही कई तरह की बीमारियों की वजह से रोग प्रतिरोधक क्षमता कम रहती है। इस वजह से फेफड़े पर इसका असर ज्यादा होता है। महिलाओं को अपने खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

बीएचयू समेत सरकारी अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों पर निशुल्क जांच की सुविधा

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. पीयूष राय का कहना है कि एक जनवरी से 15 मार्च तक 3500 टीबी के नए मरीजों की पहचान हुई है। इसमें नियमानुसार जांच कराई गई तो करीब 1200 लोगों में फेफड़े की टीबी की पुष्टि हुई है। धूल व धुएं के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी इसकी मुख्य वजह रही। अगर सांस लेने में तकलीफ हो रही हो या खांसी लंबे समय से आ रही है तो बीएचयू अस्पताल, मंडलीय, जिला अस्पताल सहित अन्य सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर निशुल्क जांच कराई जा सकती है। यही नहीं टीबी की पुष्टि होने पर निशुल्क उपचार भी कराया जाता है।
 
ये भी जानें

  • वर्तमान में कुल टीबी के मरीज : 6500
  • एक जनवरी से 15 मार्च तक नए मरीज : 3500