125 गांव में जुगाड़ का मोबाइल टावर, सिग्नल के लिए पहाड़ पर चढ़ती महिलाएं

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 बिलासपुर|छत्तीसगढ़ के कोरिया और एमसीबी जिले के 125 गांवों में मोबाइल नेटवर्क नहीं होने के कारण यहां की लोगों की जिंदगी, सामाजिक आर्थिक और डिजिटल दुनिया के मामले में बेहद पीछे चली गई है. यहां कई लड़कों की शादी भी नहीं हो रही है क्योंकि लोग रिश्ते लेकर जब गांव में पहुंचते हैं तब पता चलता है कि मोबाइल नेटवर्क नहीं है. फिर उसके बाद मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से यही शादी में बाधा बन रहा है तो दूसरी तरफ जिन महिलाओं की शादी हो चुकी है वे भी परेशान हैं, कोई अपने मायके में बात करने के लिए पहाड़ और जंगल में नेटवर्क सर्च कर रही है तो कोई पेड़ के नीचे नेटवर्क की तलाश करते दिखती हैं और यहां पर लोगों ने खुद ही जुगाड़ वाला मोबाइल टावर जगह जगह पर लगा लिया है. विस्तार न्यूज संवाददाता दिलीप जायसवाल ने आधा दर्जन गांवों में पहुंचकर लोगों की इस परेशानी को करीब से देखा है.

125 गांव में जुगाड़ का मोबाइल टावर

कोरिया जिले के सोनहत इलाके में आने वाले मेंड्राकला गांव में विस्तार न्यूज़ की टीम पहुंची, स्थानीय लोगों ने बताया कि एक महुआ का पेड़ है. महुआ पेड़ में चारों तरफ मोबाइल को रखने के लिए खांचा बनाया गया है, जहां पर मोबाइल को रख देते हैं और कुछ देर बाद वहां पर मोबाइल में नेटवर्क आता है और फिर लोग उस खांचा में रखे मोबाइल को बिना उठाए स्पीकर ऑन कर अपने लोगों से बातचीत करते हैं.

मायके बात करने के लिए पहाड़ पर चढ़ रही महिलाएं

हम यहां से कुछ दूर निकले ही थे कि तभी कुछ महिलाएं हमें दिखाई दी जो जंगल किनारे नेटवर्क सर्च कर रही थी, पता चला कि महिलाएं अपनी मायके में बात करने के लिए यहां नेटवर्क खोज रही हैं. महिलाओं ने बताया कि जब जंगल किनारे नेटवर्क नहीं मिलता है तब पहाड़ पर चढ़ना पड़ता है. हमें एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी मिल गई. उन्होंने बताया कि जब नेटवर्क जंगल में नहीं मिलता है तब जंगल के भीतर पहाड़ में चढ़कर बात करना पड़ता है.विस्तार न्यूज़ टीम मेंड्राकला गांव से निकलकर सीधे गुरु घासीदास नेशनल पार्क का सफर करते हुए रामगढ़ इलाके में पहुंच गए, यहां के दर्जनों गांव में नेटवर्क नहीं है. यहां पहुंचे तो पता चला कि रामगढ़ में मोबाइल के टावर 2 साल पहले लगे हैं, लेकिन टावर से नेटवर्क नहीं आ रहा है.

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लोगों के बिजनेस पर भी पड़ रहा असर

मोबाइल में नेटवर्क नहीं होने से परेशान लोगों के दर्द को समझने के लिए लगातार हम आगे बढ़ रहे थे तभी पता चला कि यहां रामगढ़ के तुर्रापानी नामक एक बस्ती है. यहां लोग बात करने के लिए स्कूल के पास जाते हैं जहां पर लोगों ने जुगाड़ के सिस्टम से एक मोबाइल का टावर लगाया हुआ है. रामगढ़, यहां पर कई दुकानें हैं लोगों का कारोबार भी बढ़ रहा है लेकिन मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से लोगों के बिजनेस पर इसका सीधा असर पड़ रहा है लोग ऑनलाइन लेनदेन नहीं कर पा रहे हैं तो दूसरी तरफ यहां के युवाओं की शादी भी प्रभावित हो रही है.इसी दौरान हमें रामगढ़ में उमेश गुप्ता मिले, जिन्होंने पॉस मशीन के माध्यम से ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम शुरू किया हुआ है, वह मोबाइल का सिम बेचने का भी बिजनेस शुरू कर रहे हैं क्योंकि कुछ महीना पहले गांव में बीएसएनल का नेटवर्क के लिए टावर लगा है लेकिन वह भी ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है इसकी वजह से इनका बिजनेस भी आगे नहीं बढ़ पा रहा है और पॉस मशीन सिर्फ डब्बा भर बनकर रह गया है.इसी दौरान हमें पता चला कि इस गांव में भी महिलाएं अपनी मायके में बात करने के लिए घर से बाहर निकलती हैं और एक निश्चित जगह पर जाती है जहां पर लोगों ने जुगाड़ का टावर लगाया हुआ है, यहां पर पार्वती नामक एक महिला अपने मायके में बात करने के लिए कई बार कॉल करती है लेकिन उसके बावजूद उधर से कोई कॉल रिसीव नहीं होता है और फिर निराश होकर वापस अपने घर लौट जाती है क्योंकि अब घर लौट के बाद उसके मोबाइल में नेटवर्क नहीं रहेगा. जबकि उसकी मां की तबीयत खराब है और वह हाल-चाल जानने के लिए लगातार कॉल कर रही थी.जंगल किनारे ही एक और जगह जुगाड़ का टावर लगाया गया है, यहां पर एक झाड़ी पर लोग अपने मोबाइल को कुछ देर फंसा कर रखते हैं तब नेटवर्क आता है. यहां भी एक व्यक्ति हमारे साथ पहुंचे और उन्होंने बताया कि किस तरह से वह नेटवर्क सर्च करने के लिए घर छोड़कर घर से करीब 2 किलोमीटर दूर आते हैं तब बात हो पाती है लेकिन रात के समय अगर कहीं बात करना या एंबुलेंस बुलाना जरूरी हो गया तब फिर परेशानी बढ़ जाती है.

नेटवर्क की सुविधा बढ़ाने के लिए लगाए जा रहे नए टावर – सरकार

दूसरी तरफ इस पूरे मामले को लेकर छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री और क्षेत्रीय विधायक श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के द्वारा छत्तीसगढ़ के ऐसे इलाकों में मोबाइल नेटवर्क की सुविधा बढ़ाने के लिए नए टावर लगाए जाने की तैयारी चल रही है. आने वाले कुछ सालों के भीतर मोबाइल नेटवर्क की समस्या पूरी तरीके से खत्म हो जाएगी.