जयपुर।केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि माहेश्वरी समाज कभी जॉब सीकर नहीं रहा, बल्कि सदियों से जॉब क्रिएटर रहा है। यह समाज आगे भी इसी तरह देश की सेवा करता रहे, यही कामना है। शाह ने कहा कि माहेश्वरी समाज के हाथ में तलवार भी उतनी ही शोभा देती है, जितनी तराजू। समाज के योगदान को यदि सूचीबद्ध किया जाए तो भामाशाहों की सूची के कई पन्ने भर जाएंगे।शनिवार को जोधपुर के पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में आयोजित माहेश्वरी ग्लोबल कन्वेंशन को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि समाजों के ऐसे महाकुंभ भारत को मजबूत करते हैं, भारत को तोड़ते नहीं हैं। खुद उन्होंने भी समाजों के आयोजनों को लेकर कई बार टीका-टिप्पणी झेली है, लेकिन उनका मानना है कि संगठित समाज देश की सबसे बड़ी ताकत होते हैं।अमित शाह ने कहा कि देश के सांस्कृतिक पुनर्जागरण में माहेश्वरी समाज का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि राम मंदिर पर पुस्तक लिख रहा एक युवक उनसे मिला था। बातचीत के दौरान युवक ने बताया कि आजादी के बाद राम मंदिर के लिए सबसे पहले अपने प्राणों की आहुति देने वाले दोनों भाई माहेश्वरी समाज से थे। यह समाज केवल व्यापार और उद्योग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्र के सांस्कृतिक और वैचारिक आंदोलनों में भी अग्रणी भूमिका निभाता रहा है।गृह मंत्री ने कहा कि मुगलों के साथ युद्ध के समय राजा-महाराजाओं के खजाने भरने का काम माहेश्वरी समाज ने किया। अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी के आंदोलनों का खर्च भी इसी समाज के सेठों ने उठाया। आजादी के बाद जब देश ने उद्योग और व्यापार के क्षेत्र में कदम बढ़ाए, तब भी माहेश्वरी समाज ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।अमित शाह ने कहा कि गुजरात में एक कहावत है—“जहां न पहुंचे रेलगाड़ी, वहां पहुंच जाए मारवाड़ी।” यह कहावत माहेश्वरी और मारवाड़ी समाज की उद्यमशीलता और दूरदर्शिता को दर्शाती है। चाहे उत्पादन का क्षेत्र हो या टेक्नोलॉजी को अपनाने की बात, माहेश्वरी समाज ने हमेशा प्रगतिशील समाज का परिचय दिया है।उन्होंने कहा कि देश को हर क्षेत्र में विश्व में प्रथम स्थान पर लाने के लिए तीन बातें बेहद जरूरी हैं। पहली—जो उत्पादन करते हैं, उसके साथ-साथ उन वस्तुओं का भी निर्माण करें, जो अभी भारत में नहीं बनती हैं। दूसरी—स्वदेशी। जितना संभव हो, उतना स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करें और यह संकल्प लें कि अपने देश में बनी चीजों का ही व्यापार करेंगे। तीसरी—स्वदेशी के साथ स्वभाषा का भी अधिक से अधिक उपयोग करें।अमित शाह ने कहा कि यदि हर समाज अपने गरीब भाई-बहनों की जिम्मेदारी खुद उठा ले, तो भारत से गरीबी अपने आप समाप्त हो सकती है। यदि हर समाज आत्मनिर्भर बन जाए, तो पूरा भारत आत्मनिर्भर बन जाएगा। समाज संकुचित मानसिकता का प्रतीक नहीं है, बल्कि संगठन की शक्ति देश के लिए उपयोगी होती है। माहेश्वरी समाज ने सेवा और समर्पण के संकल्प को समय-समय पर चरितार्थ किया है।कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी माहेश्वरी समाज की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि जैसे भगवान शिव ने सृष्टि के कल्याण के लिए विष पी लिया, वैसे ही माहेश्वरी समाज ने भी त्याग और सेवा की परंपरा निभाई है। नई पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह पूर्वजों के संस्कारों को आगे बढ़ाए। देश में सम्मान त्याग, सेवा और समर्पण से मिलता है।गौरतलब है कि माहेश्वरी ग्लोबल कन्वेंशन में भारत सहित 27 देशों से करीब 40 हजार माहेश्वरी समाजबंधु हिस्सा ले रहे हैं। पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान के 250 बीघा क्षेत्र में अस्थायी शहर बसाया गया है। यहां 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम पर 12 डोम बनाए गए हैं और 750 स्टॉल्स वाला विशाल ग्लोबल एक्सपो भी लगाया गया है।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार देर रात जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे थे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। तीन दिवसीय इस महाकुंभ में देश-विदेश से आए माहेश्वरी समाजबंधु न केवल समाज की उपलब्धियों पर मंथन कर रहे हैं, बल्कि भविष्य के भारत के निर्माण में अपनी भूमिका भी तय कर रहे हैं।








