वाराणसी|यूपी के वाराणसी में मणिकर्णिका घाट के सुंदरीकरण के क्रम में कुछ मूर्तियों के प्रभावित होने को संज्ञान लेते हुए श्रीकाशी विद्वत परिषद् की ऑनलाइन बैठक शुक्रवार को हुई। इसमें जिला प्रशासन के अफसर भी जुड़े। उन्होंने बताया कि घाट के जीर्णोद्धार कार्य के क्रम में घाट किनारे एक मढ़ी की दीवारों पर अहिल्याबाई की मूर्ति तथा बगल में एक अन्य मूर्ति एवं शिवलिंग था। काम के दौरान मढ़ी का अंश खंडित हुआ जिससे दीवार पर लगी कुछ मूर्तियां प्रभावित हुई हैं।यह भी बताया कि उन सभी भित्तियों में लगीं तथा अन्य प्रभावित मूर्तियों को पुनः स्थापित तथा संरक्षित किया जाएगा। कुछ तथाकथित लोगों ने इस बारे में भ्रम पैदा किया है। बैठक के बाद परिषद की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि हम स्थानीय प्रशासन से अपेक्षा करते हैं कि भविष्य में धार्मिक स्थलों के विकास एवं सुंदरीकरण के समय मूल स्वरूप को संरक्षित करने पर विशेष ध्यान दें
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शास्त्रीय दृष्टि से निरीक्षण के लिए काशी के मान्य विद्वानों से परामर्श लेते हुए योजनाओं का क्रियान्वयन हो। बैठक की अध्यक्षता पद्मभूषण आचार्य वशिष्ठ त्रिपाठी ने की। बैठक में प्रो.रामचंद्र पांडेय, प्रो.रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो.सदाशिव कुमार द्विवेदी, प्रो.विनय कुमार पांडेय, प्रो.दिनेश कुमार गर्ग, प्रो.रमाकांत पांडेय, डॉ.दिव्यचेतन ब्रह्मचारी उपस्थित रहे। संचालन प्रो.आरएन द्विवेदी ने किया।
प्राचीन मंदिर या मूर्ति को नुकसान नहीं
वहीं, मणिकर्णिका घाट मामले में शुक्रवार को विधायक डॉ.नीलकंठ तिवारी तथा महापौर अशोक कुमार तिवारी ने घाट का निरीक्षण किया। विधायक डॉ.तिवारी ने कहा कि विपक्ष फर्जी वीडियो के माध्यम से सनातन धर्म की आस्था पर चोट करने की कोशिश कर रहा है। सच्चाई यह कि एक भी प्राचीन मंदिर या मूर्ति को क्षति नहीं पहुंची है।उन्होंने कहा कि जो प्राचीन कलाकृतियां ड्रिलिंग के कंपन से संवेदनशील स्थिति में थीं, उन्हें संस्कृति विभाग ने सावधानी से सुरक्षित कर लिया है। कार्य पूर्ण होने पर ससम्मान पुनः स्थापित किया जाएगा। महापौर अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी और अयोध्या में सनातन धर्म के गौरव को पुनर्स्थापित किया है। विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है इसलिए झूठ और तकनीक का सहारा लेकर आस्था पर चोट कर रहे हैं। जिस कुम्भा महादेव मंदिर पर दुष्प्रचार किया जा रहा है वह अपने स्थान पर विराजमान हैं। मंदिर में नंदी और भगवान गणेश की प्रतिमाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं और वहां नियमित पूजा हो रही है। इसी प्रकार रानी अहिल्याबाई की मूर्ति भी संरक्षित है।








