बांसवाड़ा। प्रसिद्ध कवि दुष्यंत कुमार की एक लाइन है- कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों। बांसवाड़ा के अभिषेक डिंडोर ने इसी लाइन को सच कर दिखाया है। तिरपाल की छत, कच्ची दीवारें और मिट्टी का फर्श- इन कठिन हालातों के बावजूद अभिषेक ने दसवीं बोर्ड की परीक्षा में 97.17 प्रतिशत अंक हासिल किए। अब उसका लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में जाने का है।
माता-पिता हैं हेल्पर
अभिषेक के माता-पिता साधारण काम करते हैं। उनके पिता भरत डिंडोर सुथारी के कारीगर के साथ हेल्पर का काम करते हैं और मां मंजुला एक मार्ट में सामग्री उतार-चढ़ाव का काम संभालती हैं। इसी मेहनत से परिवार चलता है, जबकि उनका पक्का मकान अभी निर्माणाधीन है।
शुरूआत से मेधावी था अभिषेक
अभिषेक अपने गांव मोरड़ी बस्ती, परतापुर नगरपालिका क्षेत्र के राजकीय महात्मा गांधी विद्यालय में पढ़ता है। मंगलवार को राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने दसवीं के परिणाम जारी किए, जिसमें अभिषेक ने अपने परिवार और विद्यालय का नाम रोशन किया। उसकी सफलता पर स्कूल के शिक्षक और स्टाफ उसके घर पहुंचे और बधाई दी। विद्यालय के पूर्व प्रधान उमेश खांट और वर्तमान प्रधान निकुंज शाह बताते हैं कि अभिषेक ने 2020 में कक्षा 6 में प्रवेश लिया और तब से लगातार मेधावी रहा है। विषम पारिवारिक परिस्थितियों के बावजूद उसने कभी अपनी आर्थिक कमजोरियों को दिखाकर कोई फायदा उठाने की कोशिश नहीं की। विद्यालय के शिक्षक सचिन शर्मा बताते हैं कि अभिषेक की बड़ी बहन ने कोटा से बीएसटीसी की पढ़ाई पूरी की, और पिता ने बहन के साथ पूरा सहयोग किया। इस बीच अभिषेक ने घर की जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभाया। उसकी यह कहानी साबित करती है कि कठिन हालात मेहनत और इरादों के सामने कभी बाधा नहीं बन सकते।









