Jharkhand Liquor Scam की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई लगातार नए और चौंकाने वाले खुलासे कर रही है। अब इस घोटाले की कड़ियां छत्तीसगढ़ से निकलकर झारखंड तक जुड़ती दिखाई दे रही हैं। ईडी की जांच में सामने आया है कि झारखंड में शराब बिक्री के लिए वही मॉडल अपनाया गया, जिसे पहले छत्तीसगढ़ में लागू किया गया था। जांच एजेंसी का दावा है कि यह मॉडल पूरी तरह से कमीशन वसूली और घोटाले के उद्देश्य से सुनियोजित तरीके से तैयार किया गया था।
ईडी के अनुसार, छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के मास्टरमाइंड अनवर ढेबर के कहने पर ही झारखंड में यह नीति लागू की गई। गवाहों के बयान इस बात की पुष्टि करते हैं कि छत्तीसगढ़ में घोटाले के बाद इसी शराब मॉडल को अन्य राज्यों में लागू करने की रणनीति बनाई गई थी। इस पूरे नेटवर्क के पीछे निजी शराब सिंडिकेट के संचालन की साजिश बताई जा रही है, जिसका नेतृत्व अनवर ढेबर कर रहा था।
जांच के दौरान ईडी ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े कई ऐसे तथ्य उजागर किए हैं, जिनका सीधा संबंध झारखंड से भी जुड़ता है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर ईडी ने झारखंड सरकार से कुछ अहम बिंदुओं पर जानकारी भी मांगी है। एजेंसी ने अदालत में दाखिल अभियोजन में स्पष्ट किया है कि अनवर ढेबर निजी शराब सिंडिकेट का प्रमुख था और उसी के निर्देश पर छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड में अरुणपति त्रिपाठी को प्रबंध निदेशक बनाया गया था। ईडी का मानना है कि यह नियुक्ति भी घोटाले की साजिश का हिस्सा थी।
अब तक ईडी इस मामले में 59 लोगों के खिलाफ अदालत में अभियोजन दायर कर चुकी है। वहीं, झारखंड में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की जांच में भी अरुणपति त्रिपाठी की भूमिका सामने आ चुकी है। एसीबी की टीम रायपुर जेल में बंद अनवर ढेबर से पूछताछ कर चुकी है, जिससे जांच की दिशा और स्पष्ट हुई है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में Jharkhand Liquor Scam से जुड़े और भी बड़े नाम उजागर हो सकते हैं।









