झारखंड में Jharkhand Liquor Scam से जुड़ी जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। एसीबी की शुरुआती जांच में 38 करोड़ रुपये के घोटाले का केस दर्ज किया गया था, जो मैनपावर सप्लाई कंपनियों द्वारा फर्जी बैंक गारंटी के माध्यम से ठेका लेकर राजस्व जमा नहीं करने से संबंधित था। लेकिन आगे की जांच में यह मामला और गंभीर होता गया। प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिये शराब बिक्री के अनुपात में कम राजस्व जमा करने, प्रिंट रेट से अधिक कीमत पर शराब बेचने और अन्य अनियमितताओं के कारण 70 करोड़ रुपये का अतिरिक्त नुकसान सामने आया।
अब महुआ प्लेन ब्रांड की घटिया देशी शराब की आपूर्ति और उससे जुड़ी प्रक्रियात्मक गड़बड़ियों के बाद कुल नुकसान बढ़कर 136 करोड़ रुपये हो गया है। एसीबी ने छत्तीसगढ़ के शराब कारोबारी नवीन केडिया को इस मामले में अप्राथमिकी अभियुक्त भी बनाया है।
जांच में सामने आया कि नवीन केडिया की कंपनी को शराब आपूर्ति का काम आधिकारिक टेंडर जारी होने से पहले ही दे दिया गया था। नियमों के अनुसार, JSBCL के साथ एग्रीमेंट किए बिना किसी कंपनी को शराब आपूर्ति का अधिकार नहीं दिया जा सकता, लेकिन इस मामले में पूरी प्रक्रिया को नजरअंदाज कर आदेश जारी कर दिए गए। इसी दौरान कई चरणों में कागजी प्रक्रियाओं की अनदेखी भी की गई, जिससे सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन साबित होता है।
मंगलवार को एसीबी ने पूर्व उत्पाद आयुक्त और वर्तमान वाणिज्य कर आयुक्त अमीत कुमार से दूसरी बार पूछताछ की। शुक्रवार को भी उनसे सवाल किए गए थे। अधिकारियों का कहना है कि उनके दिए गए जवाबों की तुलना दस्तावेजों से की जा रही है। कुछ बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी न मिलने से उन्हें फिर बुलाया गया है।
अमीत कुमार ने कहा कि यह घोटाला उनके कार्यकाल के बाद का है, इसलिए पूरी प्रक्रिया की जानकारी उनके पास उपलब्ध नहीं है। यह पूरा मामला Jharkhand Liquor Scam को और गंभीर बना देता है, और एसीबी अब कई नए पहलुओं पर जांच आगे बढ़ा रही है।









